बिहार चुनाव : NOTA को भी टक्कर नहीं दे पाई शिवसेना

जब से आम आदमी पार्टी सियासत में आयी है, मतदाताओं को मुफ्त की रेवड़ियां बाँट सत्ता हथियाने के चक्कर दिल्लीवासियों को मुफ्तखोर बनाकर भारत में बदनाम कर दिया है। शायद यही कारण है कि दिल्ली और पंजाब से बाहर कोई इस पार्टी को ज्यादा महत्व नहीं देता। यही कारण है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में इस पार्टी के उम्मीदवारों को NOTA से भी कम मिलते हैं और अब वही स्थिति शिव सेना की हो रही है। सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी मृत्यु से उबरी कई सामाजिक बुराइयों से बचने के लिए जो हथकंडे अपनाये जा रहे हैं, लगता नहीं, कभी शिव सेना महाराष्ट्र में अपना अस्तित्व बचा पायेगी, बिहार तो बहुत दूर की बात है। शिव सेना ने महाराष्ट्र में जिस तरह की अराजकता और हिन्दू विरोधी गतिविधियां हैं, उसे बिहारवासी बिहार में दोहराना नहीं चाहते।  

बिहार चुनाव में हुई दुर्गति से शिव सेना को सीख लेनी चाहिए। वैसे भी कांग्रेस का जिस-जिसने हाथ पकड़ा है, उसे ही नुकसान उठाना पड़ा है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल सत्ता में आ सकती थी, अगर कांग्रेस को अलग रखा होता।  
‘सोनिया सेना’ के नए अवतार में जानी जा रही शिवसेना की हालत दिनोंदिन बुरी होती जा रही है। महाराष्ट्र में ऐन केन प्रकारेण सत्ता की नैया खे रही शिवसेना का बिहार विधानसभा चुनावों में भी बुरा हाल हुआ है। दरअसल, शिवसेना को बिहार में नोटा से भी कम वोट हासिल हुए हैं। शिवसेना ने बिहार में अपने 22 उम्मीदवार खड़े किए थे, जिनमें 21 को नोटा से भी कम मत प्राप्त हुए हैं। इस पर तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ ही सोशल मीडिया भी चुटकी ले रहा है। अर्पिता चटर्जी नाम की एक यूजर ने लिखा है कि शिवसेना ही नोटा को टक्कर देने वाली सबसे अच्छी पार्टी हो सकती है।

अर्पिता ने लिखा है कि शिवसेना नोटा को चुनौती देने वाली सबसे अच्छी पार्टी है। महाराष्ट्र को भी अब इसके लिए तैयार हो जाना चाहिए। क्योंकि वहां भी पीएम मोदी का सुपरवेब आ रहा है।

इस ट्वीट पर लोगों की प्रक्रियाएं भी किसी राजनीति चाल से कम नहीं :-

बिहार में कुछ सीटों पर शिवसेना की स्थिति देखें तो बेनीपुर में नोटा में डाले गए वोटों की संख्या 2145 है, जबकि शिवसेना को मिले वोटों की संख्या 469 है। राघोपुर में शिवसेना को महज 30 मिले, जिसके मुकाबले नोटा को उससे दस गुना ज्यादा 310 सीट मिले। गया में शिवसेना को 21 जबकि नोटा को 79 वोट मिले। किशनगंज विधानसभा में शिवसेना पर महज 49 लोगों ने भरोसा जताया, जबकि नोटा दबाने वाले मतदाताओं की संख्या 75 रही। मधुबनी में 21 लोगों को शिवसेना को वोट दिया, जबकि 79 मतदाताओं ने नोटा को वोट दिया।शिवसेना की हालत पर लोग खूब चुटकी ले रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि नोटा नहीं लोटा दे दिया है इनके हाथ में। एक यूजर ने लिखा है कि ‘शिवसेना नोटा से भी छोटा’ को ट्रेंड कराना चाहिए। शिवसेना के बड़बोले नेता संजय राउत पर चुटकी लेते हुए एक यूजर लिखा- वाह क्या शानदार प्रदर्शन है। इसका पूरा श्रेय संजय राउत को जाता है। अभी शिवसेना का सीएम शपथ लेगा वरना कोई पुराना केस ओपन कर देंगे। 

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