एक तरफ जहाँ पंजाब और हरियाणा के किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं, वहीं TV9 भारतवर्ष पर प्रसारित एक रिपोर्ट मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों को सितंबर 2020 में केंद्र द्वारा पारित किए गए नए कृषि कानूनों से लाभ हुआ है।
मध्य प्रदेश के कृषि कानूनों के लाभार्थियों में से एक ने कहा कि उन्होंने अपनी कृषि उपज 2500 / – प्रति क्विंटल बेची है, जबकि फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1800 रुपए प्रति क्विंटल के करीब था। किसान ने प्रीमियम प्राप्त करने के अलावा यह भी कहा कि नए कानून ने उनके समय की बचत की है और अनाज को इकट्ठा करने के लिए व्यापार उनके खेतों में ही आ गया है जिसने परिवहन लागत को शून्य तक पहुँचा दिया है।
मध्यप्रदेश के एक अन्य किसानों की भी ऐसी ही कहानी है। जिन्होंने कहा कि पहले मंडियों में व्यापार कुछ प्रभावशाली व्यापारियों तक सीमित था, जो कृषि उपज की कीमत तय करते थे। तीन कानूनों के पारित होने के साथ किसान सीधे अपने पसंदीदा मूल्य पर व्यापारियों को अपनी उपज बेच सकते हैं।
राजस्थान और MP के किसान तो @narendramodi सरकार के नए केंद्रीय कृषि क़ानूनों का समर्थन कर रहे हैं. ज़रा उनकी राय भी तो सामने आए..ये भी तो हमारे अन्नदाता हैं..आंदोलनरत किसानों के एक पक्ष को तो आप लगातार सुन रहे हैं. अब @TV9Bharatvarsh पर दूसरा पक्ष भी सुनिएpic.twitter.com/2UVjwLb4Jo
— Samir Abbas (@TheSamirAbbas) December 5, 2020
बड़ा किसान असल मे जमींदार होता है
— सौरभ शुक्ला 🇮🇳 🇮🇳 🇮🇳 🚩🚩🚩 (@Saurabh_Shukla4) December 5, 2020
दलाली कब तक ,
— gaurav shah (@gauravjn_in) December 5, 2020
गफ़लत कब तक ,
सहूलियत ही आजादी
वाली गुलाम समझ कब तक
हकीकतं छुपा कर
आराम से बैठोगे कब तक
दिन तो क़यामत वाला भी आएगा
भूल कर वह दिन खुद को धोखा कब तक।
भारत में या शायद दुनिया में सबसे ज्यादा कीटनीशकों का इस्तेमाल #Punjab के किसान करते हैं।
— Puneet Garg (@KrPuneetGarg) December 5, 2020
असल में वो अन्न नहीं उपजाते, जहर पैदा करते हैं, वो भी सिर्फ #MSP के लिए।
जितनी पैदावार उतना पैसा, भले ही उसके लिए एक बिस्वे में 10kg यूरिया क्यों न डालनी पड़े?😠https://t.co/6GGn2tKxKn
किसान आंदोलन: कहां ‘ग़ायब’ हैं जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले तमिलनाडु के किसान https://t.co/uWuyA0mU8v
— BBC News Hindi (@BBCHindi) December 5, 2020
Ok so here it is 👇
— Sardar Lucky Singh (@lucky_s_chawla) December 5, 2020
Why the hell on earth a farmer will ask for 6th demand ??
Again.. This is not about farmers.. farmers are just being used for selfish motives. @INCIndia you orchestrated 1984 and now you r trying the same now
RT Max so that this reaches to everyone pic.twitter.com/bZcZXCHs0Y
No Comments https://t.co/Unfxx1E60K pic.twitter.com/2Y9gBLFi42
— Tajinder Pal Singh Bagga (@TajinderBagga) December 5, 2020
Changes introduced in the new farm laws are pivotal for farmers+India to pull our Agri sector out of generational poverty+mass-market inefficiencies. At Milk Mantra we have seen first hand the transformative role of corporates/startups to uplift farmers out of poverty. 3/4
— Srikumar Misra (@srikmisra) December 5, 2020
I am Babbar Sher for enemies of #Sikhi and humanity but friend of friends. Always in the service of my motherland🇮🇳 and adoptive country. #JaiHind & Long live the USA🇺🇸.
— Sukhi Chahal (@realSukhiChahal) December 5, 2020
Proud to Be a #Sikh. 🙏#usindiadosti #antiterrorism pic.twitter.com/5OkaVrmRak
आपस में तय कर के बता दो दोनों किसको मानना है. @pantlp @vikasbha pic.twitter.com/XDDcAj7uf0
— रोहित सरदाना (@sardanarohit) December 5, 2020
बयानबाज़ी जारी है। अब तीन टूक? https://t.co/2XglfWPYGm
— Mrinal Pande (@MrinalPande1) December 5, 2020
दिल्ली में सार्वजनिक छठ पूजा पर बैन है क्योंकि कोरोना फैल जाएगा, मास्क न पहनने पर फाइन है क्योंकि कोरोना फैल जाएगा लेकिन किसान आंदोलन में बिना मास्क के बैठे किसानों को खुद मास्क लगाकर मास्क की जगह केला बांटा जा रहा है। गजबे है। pic.twitter.com/bwiEezxbwX
— Sushant Sinha (@SushantBSinha) December 6, 2020
एक किसान ने कहा, “पहले मंडियों में 10 किलोग्राम अनाज केवल नमूना लेने के उद्देश्य से भेजा जाता था। अपनी उपज बेचने के लिए मंडियों में समय भी बहुत लगता है। हमें परिवहन और लोडिंग / अनलोडिंग शुल्क अलग से वहन करना पड़ता था। हमें अक्सर अपनी कृषि उपज के कभी-कभी महीनों तक राशि प्राप्त करने के लिए इंतजार करना पड़ता था। कानूनों के पारित होने के बाद व्यवसाय हमारे खेत में ही आने लगा है और हमें अपनी उपज के लिए डायरेक्ट भुगतान कर दिया जाता हैं। न केवल हमें एमएसपी पर प्रीमियम मिलता है बल्कि हमारी परिवहन लागत और समय भी बचता है।”
एमपी ही नहीं राजस्थान के किसान भी पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के प्रदर्शनकारियों द्वारा दिल्ली के आसपास हो रहे विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं हुए हैं। TV9 Bharatvarsh की रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान के एक किसान ने नए कृषि कानूनों को लाने के लिए पीएम मोदी को बहुत धन्यवाद दिया, जिन्होंने किसानों पर प्रतिबंध हटा दिया और उन्हें अपने उत्पाद को अपने ग्राहकों की पसंद और उनकी पसंदीदा दरों पर बेचने में सक्षम बनाया।
पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में किसानों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर बोलते हुए मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसानों ने कहा कि कॉन्ग्रेस के नेताओं द्वारा नए कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शनकारियों को मूर्ख बनाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा परेशान की गई आशंकाओं के विपरीत, नए कृषि कानून किसानों के हित में हैं।
चैनल को इंटरव्यू दे रहे एक किसान ने कहा, “हम कृषि बिल का विरोध नहीं कर रहे हैं क्योंकि वे हमारे कल्याण के लिए हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को उसके लाभ और किसानों के लिए नए अवसरों के बारे में पता नहीं है। विपक्षी नेताओं द्वारा केंद्र के खिलाफ आंदोलन शुरू करने के लिए उन्हें बरगलाया और उकसाया गया है।”

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