जनवरी 26 को शांति प्रदर्शन के नाम पर उपद्रव का नंगा नाच होते ही किसान यूनियन में फूट पड़ने की अटकलें तेज हो गयी थी। लाल किला और आईटीओ पर हुए किसान आंदोलन के नाम पर हुए दुखत घटना को भुलाया नहीं जा सकता। दिल्ली पुलिस द्वारा बल प्रयोग न करने पर पक्ष और विपक्ष में लोगों के विचार भी सामने आज तक आ रहे हैं। लेकिन अब जब पुलिस द्वारा उन उपद्रवियों को पकड़ जेलों में डाला जा रहा है, वह भी उन सभी आंदोलनकारियों को रास नहीं आ रहा, जो कह रहे थे कि इस तरह की हरकत करने वाला किसान नहीं हो सकता, पुलिस उनको पकड़ कर सख्त कार्यवाही करे।
दरअसल आंदोलन में दरार उसी दिन से नज़र आने लगी थी, जब 'जैसे इंदिरा को ठोका, वैसे ही मोदी को भी ठोकेंगे', दूसरे दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में गिरफ्तार दंगाइयों को रिहा करने की मांग, तीसरे खालिस्तानी झंडों के आने से अंदरखाने किसान आंदोलन से दूर होने का मन बनाने लगे थे कि आंदोलन अपने मुद्दे से भटककर खालिस्तानियों के हाथ की कठपुतली बन चूका है, अब वही दरार चौड़ी होने के साथ-साथ राकेश टिकैत की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगने के साथ-साथ कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, अकाली दल और वामपंथियों पर भी किसान विरोधी होने की संभावनाएं प्रबल हो रही हैं।
दिवंगत किसान नेता महेंद्र टिकैत के सहयोगी रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह ने आजकल चल रहे ‘किसान आंदोलन’ को खरी-खरी सुनाई है। बुजुर्ग किसान नेता ने महेंद्र टिकैत के बेटे राकेश टिकैत की भी आलोचना की। चौधरी ने ‘आज तक’ पर रोहित सरदाना के शो में कहा कि महेंद्र टिकैत उनके पिता तुल्य थे और जब वो उनके साथ आंदोलन करते थे, तब राकेश टिकैत पुलिसकर्मी हुआ करते थे। उन्होंने बताया कि 1988 में जब बिजली और पानी बिल के खिलाफ किसान सड़क पर उतरे थे, वो अब तक का सबसे बड़ा किसान आंदोलन था।तत्कालीन राजीव गाँधी सरकार को किसानों की 35 सूत्री माँग के आगे झुकना पड़ा था। चौधरी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उस वक़्त की कांग्रेस सरकार ने आंदोलन की भोजन-पानी की सप्लाई-लाइन तोड़ दी थीं और ट्रैक्टर से भोजन ले कर आ रहे किसानों की हत्या करा दी गई थी। उन्होंने कहा कि तब कई घायल भी हुए थे। उन्होंने इसे याददाश्त में रखने की नसीहत देते हुए कहा कि प्रियंका गाँधी मुजफ्फरनगर जा रही हैं तो राजेंद्र नामक दिवंगत किसान के परिजनों से भी मिलें, जिसकी तब ‘पुलिस ने हत्या कर दी’ थी।
किसान आंदोलन: रिहाना और ग्रेटा को ट्वीट के लिए $ 2.5 मिलियन पेमेंट?, PFJ ने तोड़ी चुप्पीhttps://t.co/n3rLlel6Dx
— रिपब्लिक.भारत (@Republic_Bharat) February 7, 2021
राकेश टिकैत, कांग्रेस और देश को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के अध्यक्ष भानु प्रताप कुछ याद दिला रहे हैं। देशहित में सुन लें एक बार बस।
— Sushant Sinha (@SushantBSinha) February 3, 2021
(पूरा इंटरव्यू- https://t.co/rLN5wvQ7pI) pic.twitter.com/3pHs93L4jo
लोकतंत्र की दीमकों का राष्ट्रगान घोषित हुआ :
— Tribhuvan (@tribhuvun) February 7, 2021
"मिलकर बैठे हैं, महफ़िल में जुगनू सारे , ऐलान ये है कि सूरज को हटाया जाए।"
किसान आंदोलन: राकेश टिकैत के फैसले पर पंजाब के किसान नेता क्या बोले? pic.twitter.com/Vaw1A7otJi
— BBC News Hindi (@BBCHindi) February 7, 2021
महेंद्र टिकैत के सलाहकार रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह ने प्रियंका गाँधी से माफी माँगने की माँग की। उन्होंने बताया कि अब जब रोज महापंचायत हो रही है, हरियाणा का दर्द कुछ और है। उन्होंने कहा कि उनके यहाँ रिवाज है कि अगर बहू को कुछ कहना होता है तो लड़कियों के द्वारा कहवाया जाता है। उन्होंने कहा कि ये कहीं पंचायत कर लें और राजनीति कर लें लेकिन हमें ये याद रखना चाहिए कि राकेश टिकैत अपने पिता की मौजूदगी में 2 चुनाव लड़ चुके हैं। उनके अनुसार,
“दिल्ली में धरना देकर बैठ जाओ या कहीं बैठ जाओ, किसान अन्नदाता तो है लेकिन वो अन्न के साथ-साथ ऐसे जवान भी पैदा करता है, जो सीमा पर पहरे देते हैं। हम ठेकेदार नहीं पैदा करते। हमारा निवेदन राकेश टिकैत से है कि वापस आकर मिल-बैठ कर बात कर लीजिए। हर लड़ाई में युद्ध-विराम होता है। ईराक और यमन में भी हुआ था। दोबारा सोचो कि तुमने क्या खोया, क्या पाया। मैं इन कृषि कानूनों के समर्थन में हूँ। मंडी समिति वाले शिकारी कुत्ते बन गए थे। हमें इन कानूनों से अब फायदा महसूस हो रहा है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग तो हमारी पहले से हो रही है? MSP तो अनिवार्य है, लेकिन गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?”
जवाब जरुर देना खालिस्तानी
— 𝒟ℐ𝒩ℰ𝒮ℋ𝒮ℰ𝒩 (@dineshs76833719) January 31, 2021
पाकिस्तान में जब गुरुद्वारा तोड़ा,बहु-बेटी को उठा ले गए, धर्म परिवर्तन कराया गया तब मर्दानगी कहां गई थी नमकहराम खालिस्तानियों?
😡
Cotton Prices in Andhra Pradesh
— Rishi Bagree 🇮🇳 (@rishibagree) February 7, 2021
MSP : Rs5,825 per quintal
Open Market - Rs 6,000 per quintal
Today farmers are free to sell cotton either to Cotton Corporation of India at MSP or they are free to sell at higher prices to private players in open market in Guntur
जो पुलिस वाला खामोश खड़ा था, उस पर तलवार क्यों लहराई ?? pic.twitter.com/yGF6ce24vo
— Sudarshan News (@SudarshanNewsTV) February 6, 2021
टिकैत का भविष्य बहुत दर्दनाक होने वाला है देख लेना टिकैत को अभी जो उकसा रहे हैं वो मतलब निकल जाने के बाद चाय से मक्खी की तरह इसे फेक देंगे फिर इसका भी वैसा ही हाल होगा जो CAA में बहकाबे में आकर तोड़फोड़ करने वालों का हुआ था, उनका घर भी बिक गया और आज जेल की रोटियां तोड़ रहे है
— Pushpendra Kulshreshtha (@ThePushpendra_) February 5, 2021
How can people be so stupid? #FarmersProtests #AgriculturalLaws pic.twitter.com/I7B0geJkXn
— Ra Ch Na (@raggedtag) February 6, 2021
"एएसआई का हाथ काटने वाले निहंग बलविंदर की खुली पोल, लोगों से हड़प लेता था जमीन"https://t.co/uQ2BMlZZr2
— Divya Kumar Soti (@DivyaSoti) February 6, 2021
वीरेंद्र सिंह ने इससे पहले भी कहा था कि राकेश टिकैत में दुर्योधन की आत्मा आ गई है और अभी श्रीकृष्ण स्वयं आ जाएँ तब भी वो कुछ नहीं सुनेंगे। 1992-2002 तक भारतीय किसान यूनियन के मुजफ्फरनगर इकाई के जिलाध्यक्ष रहे वीरेंद्र ने कहा कि इन आंदोलन को वही देश विरोधी ताकतें फंडिंग कर रही है, जो CAA विरोधी प्रदर्शनों को कर रही थी। उन्होंने इसे जिद, बालहठ और बचकाना बताते हुए कहा कि ‘बाबा टिकैत’ ज़िंदा होते तो लाल किले पर 26 जनवरी को जो हुआ, वो न होता।
उन्होंने राकेश टिकैत को 26 जनवरी की घटना के लिए आत्मसमर्पण करने की सलाह देते हुए कहा था कि उन्हें केंद्र सरकार किसान समझ रही है, लेकिन वो किसान हैं ही नहीं। उन्होंने कहा कि देश के साथ गद्दारी हो रही है। उन्होंने कहा कि बाबा टिकैत के कुर्ते में जेब नहीं थी, जबकि आजकल के किसान नेताओं के पास कई-कई जेबें हैं। उन्होंने दावा किया कि इन किसान नेताओं के पास सरकार से वार्ता के लिए कोई तर्क ही नहीं है।

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