प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विपक्ष निंदा करते नहीं थकता, लेकिन मोदी है कि संकट की घडी में विदेशों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत वापस लेकर आने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। परन्तु कुछ नाशुक्रिया ऐसे भी होते हैं जो जिस थाली में खाते हैं, उसी में सुराख़ करने से पीछे नहीं हटते। कोलकाता के रहने वाला तमाल भट्टाचार्य जब तक अफगानिस्तान में तालिबानियों के चंगुल में था, तो उसे प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह याद आ रहे थे। जैसे ही तमाल ने बंगाल की धरती पर पैर रखा, उसे तालिबानी अच्छे लगने लगे। उनकी तारीफ में कसीदे पढ़ने लगा है। यहां तक कि उन्हें भरोसेमंद भी बता रहा है। तमाल ने दावा किया कि तालिबान ने न केवल उसके साथ क्रिकेट खेला और अच्छा व्यवहार किया, बल्कि उन्हें अच्छा खाना भी खिलाया। तमाल के इस दावे से जहां भारत में तालिबान समर्थकों की बांछे खिल गई है, वहीं उसके दोहरे रवैये पर लोगों ने सवाल उठाया है।
गृह मंत्रालय को इसकी हर गतिविधि पर गिद्ध की नज़र रखने की आवश्यकता है। लोगों में शंका व्यक्त की जा रही है कि कहीं तालिबान ने इसे अपना जासूस तो बनाकर नहीं भेजा।
Exactly... Government should keep close watch on these people especially men in the age group of 15-45 coming from Afghanistan
— Pankaj Gulati (@panky101) August 24, 2021
यह मरा क्यों नहीं
— Swarnad (@Swarnad4) August 24, 2021
तमाल के इस दोहरे व्यवहार से हैरान लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया है कि अगर तालिबान इतने अच्छे है तो उसे भारत आना ही नहीं चाहिए था। वापस क्यों आया, वहीं रह जाता। जिस तरह ये तालिबान का बचाव कर रहा है, उससे लगता है कि इसकी योजना आगे चलकर फिर से अफगानिस्तान जाने और अपनी नौकरी जारी रखने की है। लोगों ने इसके लिए उसे शुभकामनाएं भी दी है।
ट्विटर यूजर कीया घोष ने लिखा, “तस्वीर 1: काबुल में फंसा एक व्यक्ति संकट में पीएम मोदी और अमित शाह से मदद की गुहार लगाता है। पीएम से खुद को तालिबानियों के कब्जे से निकालने का अनुरोध करता है। तस्वीर 2: कोलकाता में उतरने के बाद वह तालिबानियों की प्रशंसा करता है। उसने तो यहाँ तक कह दिया है कि उन्होंने हमारे साथ फुटबॉल खेला। ऐसा कहकर उन्होंने एक सच्चा कम्युनिस्ट होने का सबूत दिया है।”
Pic 1: A person stuck in Kabul desperately sends distress calls. Urges PM to make arrangements to evacuate him.
— Keya Ghosh (@keyakahe) August 23, 2021
Pic 2: Once landed in Kolkata, he has all praises for #Talibans. Even said they played "football".
He revealed the nature of a true Communist. pic.twitter.com/WTPTVp4RL3
Even after partition congress communist and TMC still no redemption.
— Maverick Maddock (@MaddockMaverick) August 23, 2021
For safety in bengal he should say 2nd point.
— Himanshu - Bhartiya (@Himansh70457055) August 23, 2021
भारत आने की क्या जल्दी थी कुछ दिन गुजारते तालिबान के साथ क्रिकेट टीम का मेनेजर बना देते फुटबाल वहीं बना कर वह भी खेलते दोनो आनंद लेते अहसान उतार कर आना था दोनो मुल्कों के अहसान फरामोश
— RAKESH KUMAR (@RAKESHK97227348) August 24, 2021
ऐसे लोगो पर सरकार को नजर रखने की आवश्यकता है जैसे लोग आगे चलकर तालिबानी एजेंट बन सकते हैं।
— Bipin Mishra (@bipinmishra4488) August 24, 2021
नीचता की पराकाष्ठा का दूसरा नाम है तमाल भट्टाचार्य
— Pankaj Awasthi (@pankajub) August 23, 2021
कोलकाता के उत्तरी दमदम इलाके के निमटा में रहने वाले 34 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियर तमाल भट्टाचार्य काबुल के कर्दन इंटरनेशनल स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाता था। तालिबान के काबुल शहर पर कब्जा करने के बाद उसे खुद प्रिंसिपल के आवास के अंदर बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहां से एयरपोर्ट तक आने के लिए कई कोशिशें की लेकिन नाकाम रहा। आनंद बाजार पत्रिका से बात करते हुए तमाल ने कहा, ”कृपया पीएम मोदी और अमित शाह को सूचित करें, ताकि हमें जल्द से जल्द यहां से निकाला जा सके।”
He will never go back there. His next assignment is in Canada!
— Arun Murthy (@arunmurthy07) August 24, 2021
एबीपी आनंद ने बताया कि भारतीय नागरिक ने उन्हें व्हाट्सएप पर एक संदेश के माध्यम से वहां क्या हो रहा है इसके बारे में जानकारी दी थी। तमाल के माता-पिता ने दावा किया कि उसे कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने पूछताछ के बाद रिहा कर दिया था। आखिरकार, तमाल को 10 अन्य बंगाल निवासियों के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मियों ने वहां से बाहर निकाला। वह शनिवार देर रात फ्लाइट में सवार हुआ और रविवार सुबह (22 अगस्त, 2021) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचा। इसके बाद कोलकाता के लिए रवाना हो गया।

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