'अब्बाजान' कहने पर तमतमाए अखिलेश, योगी को दी धमकी: मुख्यमंत्री ने राम मंदिर पर ली थी जबरदस्त चुटकी

भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते प्रभाव से कल तक हिन्दुत्व और हिन्दू देवी-देवताओं को अपमानित करने वालों ने मंदिरों जाना शुरू कर दिया है। यह हिन्दुत्व के शुभ संकेत हैं। और जिस तरह कब्रों पर हिन्दुओं की उपस्थिति कम हो रही है, उसने भी  छद्दम धर्म-निरपेक्षों की नींद हराम कर है। 

अखिलेश को इतना तो स्मरण होना चाहिए कि जब निहत्ते रामभक्तों पर उनके मुख्यमंत्री पिता मुलायम सिंह ने गोलियां चलवाने के बाद से मौलाना मुलायम सिंह कहा जाता था। मुलायम सिंह को पार्टी से अलग करने पर अमर सिंह ने औरंगज़ेब अखिलेश कहा था।   

मुस्लिम वोट बैंक के लिए सियासत करने वाले अखिलेश आज तमतमा क्यों रहे हैं? जब संविधान सबको बराबरी का अधिकार देता है, तो फिर किस आधार पर हिन्दू होते हुए हिन्दुत्व को अपमानित कर रहे थे?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान से तमतमाए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शनिवार को एक कार्यक्रम में पूर्व सांसद राजपाल सैनी, काजल निषाद, तूफानी निषाद, महामंडलेश्वर सत्या नंद गिरी को पार्टी में ज्वाइनिंग कराते ही सीएम योगी पर भी सीधा निशाना साधा। भड़के अखिलेश यादव ने कहा, “मुख्यमंत्री किसी और भाषा को जानते हैं, उनके कानों तक किसानों की भाषा नहीं पहुँचती। वो तो चुनावों को दूसरी ओर ले जाना चाहते हैं। मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि भाजपा के मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर संतुलन रखना चाहिए।”

मुख्यमंत्री रहते क्यों हिन्दू लड़कियों को अपमानित किया था?(देखिए क्लिपिंग) कुर्सी की खातिर कितना नीचे गिर सकते हो, यह मुलायम सिंह और तुम्हारे राज में जाहिर हो चूका है, अब सच्चाई से मुंह नहीं छुपाना चाहिए।  
अखिलेश यादव यहीं नहीं रुके बल्कि आरोप पर आरोप जड़ते रहे। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य में भाजपा सरकार होने के बाद भी सबसे ज़्यादा परेशान किसान हैं। ऐसे कानून लाए हैं कि भविष्य में किसानों की ज़मीन पर सरकार कब्ज़ा कर लेगी।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मूल मुद्दे पर वापस आते हुए कहा, “मैं बस इतना कहना चाहता हूँ कि भाजपा के मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर संतुलन रखना चाहिए। कल मैंने उनका एक इंटरव्यू सुना। हमारा आपका मुद्दों पर झगड़ा हो सकता है। लेकिन मुख्यमंत्री अपनी भाषा पर संयम रखें अगर वो मेरे पिता जी को कुछ कहेंगे तो मैं भी उनके बारे में कुछ कह सकता हूँ। मुख्यमंत्री मेरे पिता जी के बारे में ऐसी भाषा का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं? मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर संतुलन रखना चाहिए। मेरे पिता जी के बारे में कहेंगे तो अपने पिता के बारे में भी सुनने के लिए तैयार रहें।”

अखिलेश ने आरोप लगाया कि दलित पिछड़े मुसलमान सबसे ज़्यादा जेल में हैं। सरकार अब सोशल मीडिया से डर रही है। 2014 व 2017 में सोशल मीडिया पर सबसे ज़्यादा अफवाह फैला के जनता को गुमराह कर के भाजपा ने चुनाव जीता। पंचायत चुनाव डीएम, एसपी ने जितवाया? सबने देखा। अब उनका सम्मान कर रहे हैं। भाजपा सरकार को अपने ठेकेदारों को एडजस्ट करना था इसलिए पूर्वांचल एक्सप्रेस का प्लान बदला था।

दरअसल, अगस्त 6 को CM योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच जमकर शब्दबाण चले थे। अखिलेश यादव ने खुद को बीजेपी के नेताओं से बड़ा हिंदू बताया तो सीएम योगी ने राममंदिर के बहाने उन पर निशाना साधा था।

सीएम योगी ने तंज कसते हुए कहा था, “उनके अब्बाजान (मुलायम सिंह यादव) कहते थे कि वहाँ (अयोध्या में) परिंदे को भी पर नहीं मारने देंगे, लेकिन अब वहाँ राम मंदिर का निर्माण शुरू हो गया है। अगले तीन साल में वहाँ एक बड़ा भव्य मंदिर होगा।”

योगी ने कहा, “हमने कहा था कि मंदिर वहीं बनाएँगे। हमने 1990 में भी कहा था कि जहाँ रामलला विराजमान हैं, वहीं मंदिर बनेगा। तब इन लोगों ने गोली चलवा दी थी, लेकिन अब आप देख लीजिए, मंदिर का काम शुरू हो चुका है और जल्द इसे पूरा किया जाएगा।”

अखिलेश के 400 सीटें जीतने के दावे पर योगी ने चुटकी लेते हए कहा, “मैं तो हैरान हूँ। उन्होंने 500 सीट क्यों नहीं बोला। अब जब बोलना ही है तो कुछ भी बोल दो। सपना देखने का हक सबको है।”

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