जब से देश में मोदी सरकार आयी है, विरोधी काम-धंधे चौपट होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आरोपित करते हैं, लेकिन वास्तविकता को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। यानि online की जा रही शॉपिंग से खुदरा व्यापार को कितना नुकसान हो रहा है, उसका कोई विरोध नहीं करता। फिर जगह-जगह मॉल खुलने से भी खुदरा व्यापार बहुत प्रभावित हुआ है। यहाँ तक अब तो मिष्ठान आदि भी ऑनलाइन आ रहा है, फिर दुकान पर कौन जाए। और इस ऑनलाइन शॉपिंग और मॉल को प्रचलित करने में सभी पार्टियां शामिल है।
आज का समय बहुत फ़ास्ट हो गया हैं और ऐसे व्यस्त भरी जीवन में समय बहुत मायने रखता हैं। हर कोई समय बचाना चाहता हैं। लेकिन कुछ ऐसे जरुरी काम होते हैं जिसे करना बहुत जरुरी होता हैं। जैसे की खरीदारी, मतलब की घर के और अपने जरुरत के सामान खरीदना। ऐसे में लोगो को बाजार, मॉल आदि जाना पड़ता हैं। लेकिन अब ज़माना बहुत आगे निकल चूका हैं। लोग घर बैठे भी खरीदारी कर सकते हैं। जिसे हम ऑनलाइन शॉपिंग कहते हैं।
आज जिस तेजी से ऑनलाइन शॉपिंग का प्रचलन बढ़ रहा है, उससे देखते हुए चार साल में स्थिति यह होने वाली है कि अगर ऑनलाइन शॉपिंग को विश्व स्वास्थ्य संगठन, इसे एक विकार घोषित कर दे तो कोई आश्चर्य की बात न होगी। ऑनलाइन शॉपिंग की ताजा स्थिति का विश्लेषण।
घर बैठे मोबाइल की एक क्लिक से मनचाहा सामान मंगवा लेने की सुविधा, लोगों में धीरे-धीरे लत की तरफ बढ़ रही है। एक रिसर्च कंपनी गार्टनर का दावा है कि आने वाले चार सालों में यानी साल 2024 तक यह इस कदर बढ़ चुकी होगी कि मजबूरन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे लत या विकार घोषित करना पड़ेगा। यह अनुमान इसलिए भी हवा- हवाई नहीं लग रहा, क्योंकि इस समय जबकि पूरी दुनिया कोरोना के जबरदस्त संक्रमण के चलते व्यापक आर्थिक संकट से गुजर रही है, उस समय भी ऑनलाइन शॉपिंग पूरी दुनिया में फल-फूल रही है। भारत में तो ऑनलाइन शॉपिंग उन कुछ पेशों में से अकेला पेशा है, जिससे जुड़े लोग इस घनघोर आर्थिक संकट के समय भी आर्थिक परेशानियों से पूरी तरह से मुक्त हैं। क्योंकि ऑनलाइन शॉपिंग का अच्छा खासा काम तो चल ही रहा है, खूब मुनाफा भी हो रहा है।
बर्तन का व्यापारी परिवार के लिये जूते Amazon से खरीद रहा है।
जूते का व्यापारी परिवार के लिये मोबाइल Flipkart से खरीद रहा है।
मोबाइल का व्यापारी परिवार के लिए कपड़े Myntra से खरीद रहा है।
कपड़े का व्यापारी परिवार के लिये घड़ी Paytm Mall से ख़रीद रहा है।
घडी का व्यापारी घर के लिये इलेक्ट्रॉनिक सामान Snapdeal से ख़रीद रहा है।
इलेक्ट्रानिक का व्यापारी बच्चों के लिए खिलोने Croma से ख़रीद रहा है।
खिलोने का व्यापारी घर के लिये राशन Grofers से खरीद रहा है।
किराने का व्यापारी घर के लिए बर्तन Naaptol से खरीद रहा है।
और ये सब दुकानदार रोज सुबह अपनी-अपनी दुकान खोलकर अगरबत्ती जलाकर भगवान से प्रार्थना करते हैं कि आज धंधा अच्छा हो जाये।
हे भगवान! इस बार दिवाली सीज़न पर अच्छी बिक्री हो जाये।
लेकिन कहाँ से होगी बिक्री ?
खरीददार आसमान से नहीं आते हम ही एक दूसरे का सामान खरीदकर बाजार को चलाते हैं क्योंकि हर व्यक्ति कुछ न कुछ बेच रहा है और हर व्यक्ति खरीददार भी है ।
ऑनलाइन खरीदी करके आप भले ही 50-100 रु की एक बार बचत कर लें लेकिन इसके नुकसान बहुत है क्योंकि ऑनलाइन खरीदी से सारा मुनाफा बड़ी बड़ी कंपनियों को जाता है जिनमें काफी विदेशी कंपनियां भी हैं।
ये कम्पनियाँ मुठ्ठीभर कर्मचारियों के बल पर बाजार के एक बहुत बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेती हैं। ये कम्पनियां ना सिर्फ बेरोजगारी पैदा कर रही हैं बल्कि इनके द्वारा कमाये गये मुनाफे का बहुत छोटा हिस्सा ही पुनः बाजार में आता है।
तकनीक हमेशा अगर बहुत सारे फायदे लेकर आती है तो कई सारे नुकसान भी साथ लेकर चलती है। अनुमान है कि अगले पांच सालों में ही ज्यादातर लोगों के और इन ज्यादातर में करीब 50 फीसदी लोग शामिल होंगे, जो स्मार्टफोन धारक होंगे लेकिन अपनी तमाम लेन-देन की गतिविधियां बैंकों के जरिए नहीं कर रहे होंगे। इसके लिए ये क्रिप्टो करेंसी का इस्तेमाल कर रहे होंगे। तकनीकी के भविष्य का विश्लेषण करने वाले तमाम वैज्ञानिक इस बात को मानते हैं कि आने वाले अगले पांच साल के भीतर इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग डिजाइनरों की निगरानी के लिए एक स्व-विनियमन संघ की स्थापना करनी पड़ेगी, क्योंकि तमाम साइंस फिक्शन की तरह यह आशंका भी बनने लगी है कि ऐसा भी हो सकता है कि आने वाले समय में कभी एआई इतनी मजबूत हो जाए कि वह इंसानों को अपने दुश्मन की तरह चिन्हित करने लगे। लब्बोलुआब यह कि हमें अपनी जिंदगी में तमाम प्रगतिशीलता के बावजूद मानव इंटरएक्शन को बरकरार रखना होगा, नहीं तो इसके नतीजे बहुत ही भयावह हो सकते हैं।
यदि आप सोचते हैं कि मैं तो कोई दुकानदार नहीं हूं और ना ही व्यापारी , मैं तो नौकरी करता हूँ ऑनलाइन खरीदी से मुझे सिर्फ फायदा है नुकसान कोई नहीं तो आप सरासर गलत हैं क्योकि जब समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती है या देश का पैसा देश के बाहर जाता है तो देश के हर व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उसका नुकसान उठाना पड़ता है चाहे वह अमीर हो या गरीब, व्यापारी हो या नौकरी करने वाला, दुकानदार हो या किसान हर कोई प्रभावित होता है ।
अभी भी समय है अपने आपको, अपने परिवार को, बाकी दुकानदारों को ऑनलाइन और बड़े बड़े शॉपिंग मॉल से ख़रीद करने से रोकें और उन्हें समझाएं नहीं तो आगे और भी मुश्किल परिस्थिति होनी वाली है ।

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