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| अश्वनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में जनसंख्या के मुद्दे पर याचिका दायर की |
स्मरण हो, जब देश में इमरजेंसी थी, तब जनसंख्या विस्फोट को कांग्रेस के तत्कालीन नेता संजय गाँधी ने गंभीरता से लेते हुए "हम दो, हमारे दो" का नारा देकर देश को परिवार नियोजित करने के बाध्य किया, नसबंदी के अनेक कार्यक्रम हुए, लेकिन जब कांग्रेस ने अपने मुस्लिम वोटबैंक को नाराज होते देख नसबंदी केंद्रों का विरोध शुरू कर दिया, लेकिन संजय गाँधी पर इन विरोधों का असर न होते देख, उसे हिंसक बना दिया, उसके बावजूद संजय पर दंगे भी प्रभावहीन सिद्ध हुए। उन्होंने इस कार्यक्रम को व्यापी बनाने लिए हर सरकारी सुविधा के लिए नसबंदी के दो केस देने को कहा। उस दौर में आदेश लिखित नहीं मौखिक होते थे और किसी में संजय गाँधी के विरुद्ध बोलने का साहस नहीं था। आज प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध जिस प्रकार गाँधी परिवार बोलता है, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी में भी बेटे संजय के किसी मौखिक आदेश का विरोध करने का साहस नहीं था। ऐसे में वकील अश्विनी के इस कदम का विरोध करने की बजाए कांग्रेस विशेषकर राहुल और प्रियंका को इस कदम का समर्थन करना चाहिए।
वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में जनसंख्या विस्फोट को कई समस्याओं की जड़ बताया गया है। इनमें देश के प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक बोझ भी एक कारण है। उपाध्याय ने इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में ऐसी ही याचिका दायर की थी, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है।
रूस: क्षेत्रफल 5 गुना, जनसंख्या 15 करोड़
— Ashwini Upadhyay (@AshwiniUpadhyay) November 6, 2021
कनाडा: क्षेत्रफल 5गुना, जनसंख्या 4करोड़
US: क्षेत्रफल 3 गुना, जनसंख्या 33 करोड़
चीन: क्षेत्रफल 3गुना, जनसंख्या 144करोड़
ब्राजील: एरिया 2.5गुना, आबादी 22करोड़
ऑस्ट्रेलिया:एरिया 2.5गुना,आबादी 2.5Cr
जो लोग मौन हैं वे देशभक्त नहीं पाखंडी हैं
#YogiAdityanath 🇮🇳
— Avinashi Kumar (@AvinashiKumarG) November 6, 2021
कांग्रेस को अगर देश,धरती,संसाधनों और प्रकृति संपदा से प्रेम होता. रक्षा,सुरक्षा की चिंता होती तो 2006 मे ही मनमोहन सरकार ये जनसंख्या LAw लाते तो 90 करोड़ पर ही जनसंख्या रोक देते, परंतु ऐसा नही किया और आज परिणाम बेहद भयानक से भी ऊपर है pic.twitter.com/TI5jGD4yfj
इससे पहले देश में फैमिली प्लानिंग का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि फैमिली प्लानिंग परिवारों पर थोपना ठीक नहीं होगा। सरकार का यह मानना था कि ऐसा करने का विपरीत असर ये होगा कि क्षेत्र विशेष की डेमोग्राफी बदल सकती है, जो चिंता की बात होगी।
शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में केंद्र ने फैमिली प्लानिंग को लेकर अदालत को बताया था कि देश में परिवार कल्याण कार्यक्रम स्वैच्छिक प्रकृति का है। इसलिए लोग अपनी समझ से परिवार नियोजन करें और उनपर किसी तरह का कोई दबाव न हो।

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