SFJ के पन्नू (बाएं) ने पंजाब विधानसभा चुनाव में आप पार्टी पर खालिस्तान समर्थकों से पैसे व वोट लेने का आरोप
पंजाब विधानसभा चुनाव परिणाम में स्पष्ट बहुमत पाने वाली आम आदमी पार्टी द्वारा घोषित मुख्यमंत्री उम्मीदार भगवंत मान को प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन SFJ (सिख फॉर जस्टिस) ने पत्र जारी किया है। इस चिट्ठी में पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत में खालिस्तान की फंडिंग का योगदान बताया गया है। साथ ही आप पार्टी को अपनी विचारधारा के लोगों का वोट वहाँ भी मिलना बताया गया है जहाँ पार्टी ने प्रचार भी नहीं किया। पत्र में पंजाब की नई सरकार को खुद से मिल कर चलने की भी नसीहत दी गई है। लेटर पर 10 मार्च (गुरुवार) की तारीख पड़ी हुई है।
इस गंभीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और गुप्तचर एजेंसियों को बहुत ही सतर्कता से विचार कर कार्यवाही करने की जरुरत है।
एसएफजे के द्वारा जारी किया गया पत्रSFJ letter to Bhagwant Mann
लेटर गुरपतवंत एस पन्नू के हवाले से जारी किया गया है। इसमें लिखा गया है, “आम आदमी पार्टी को खालिस्तान समर्थकों का वोट और फंडिंग दोनों मिला है। यह फंडिंग अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रलिया, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के सिखों ने दी है। आप पार्टी को मिली इस फंडिंग और समर्थन की वजह वो फर्जी लेटर है जो 10 मार्च से पहले वायरल हुआ था। इस पत्र में SFJ द्वारा आप पार्टी को समर्थन देने की बात कही गई थी। इस पत्र में आप पार्टी को पंजाब को अलग खालिस्तान देश बनाने में आम आदमी पार्टी को उम्मीद के तौर पर बताया गया था। इसी के बाद इन्हें पंजाब के 70% उन ग्रामीण क्षेत्रों से भी वोट मिला है जहाँ इन्होने प्रचार भी नहीं किया।”
पन्नू के पत्र के मुताबिक, “खालिस्तान समर्थकों के ये वोट आप पार्टी द्वारा उसी फर्जी लेटर के धोखे से लिए गए हैं। जब मैंने इस पत्र का खंडन किया तब 18 फरवरी को एक व्यक्ति का फोन आया जो खुद को राघव चड्ढा का प्रवक्ता बता रहा था। उसने सिख फॉर जस्टिस से वायरल फर्जी पत्र को सही बताने और बाद में चुनाव जीतने पर पंजाब विधानसभा में ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ का ऑफर दिया था।
इसी पत्र में आगे भगवंत मान को चेतावनी देते हुए लिखा गया, “खालिस्तान आंदोलन को रोकने की कोशिश में गोलियाँ चलवाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री सरदार बेअंत सिंह को साल 1995 में मौत के घाट उतार दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्री बादल और कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी खालिस्तान आंदोलन को रोकने की कोशिश की तो उनके राजनैतिक कैरियर को ही खत्म कर दिया गया। भगवंत मान अपने पूर्व मुख्यमंत्रियों से कुछ सीखें। खालिस्तान सिखों के लिए एक जरूरी मुद्दा है। आप हमारी इस लड़ाई में पक्षकार मत बनिएगा। साथ ही खालिस्तान के लिए जनमत संग्रह में सहयोग भी करिए।”
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