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केजरीवाल की फ्री रेवड़ियों पर बीजेपी की रेवड़ियां जिससे ‘AAP-दा’ मुक्त हुई दिल्ली; नेशनल मीडिया की हार, Man of the Match रहे प्रवेश वर्मा और स्वाति मालीवाल ; कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त

आज 27 साल के बाद बीजेपी की वापसी ने साबित कर दिया है कि दिल्ली वाले बिकाऊ हैं खरीदार चाहिए। लोहे को लोहा ही काटता है यानि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां नहीं बांटी होती अभी भी बीजेपी सत्ता से दूर रहती। इस कटु सच्चाई से कोई दिल्लीवासी इंकार नहीं कर सकता। केजरीवाल ने इतने साल सत्ता किसी काम के बूते नहीं बल्कि रेवड़ियों के दम पर किया। 
दिल्ली से केजरीवाल सत्ता जाने से आम आदमी पार्टी को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, क्योकि दिल्ली निकलने से पंजाब सरकार और दिल्ली नगर निगम भी कभी भी जा सकती है। पंजाब में सरकार जाने का कांग्रेस को फायदा हो सकता है। 

केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां बांट मोदी ने केजरीवाल के उस अहंकार को भी धराशाही कर दिया जो केजरीवाल ने पब्लिक मीटिंग में कहा था कि "केजरीवाल को हराने के लिए मोदी को दोबारा जन्म लेना पड़ेगा"। लेकिन तपस्वी मोदी ने एक तीर से दो निशाने साधे है। एक तो केजरीवाल का अहंकार दूसरा Deep State और toolkit जिसकी फंडिंग से मोदी विरोधी उछलते रहते हैं। मोदी ने केजरीवाल और इसकी पार्टी को नेस्ताबूत करने अर्थव्यवस्था की भी परवाह नहीं की।   

रही बात कांग्रेस की, इसके लगभग उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का जिम्मेदार राहुल गाँधी है। जो पार्टी के नए कार्यालय के उद्घाटन पर बीजेपी और आरएसएस से लड़ाई लड़ने की बात बोलने तक तो ठीक था, लेकिन to fight against nation कहना कांग्रेस को खा गया। कई बार लिखा जा चुका है कि कांग्रेस ने अपने आपको बचाए रखने के लिए गाँधी परिवार से दूरी बनानी होगी। कांग्रेस का जो पतन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद शुरू हुआ है आज तक जारी है। सोनिया की कसर को पूरा कर रही भाई-बहन(राहुल और प्रियंका) की जोड़ी। 

आम आदमी पार्टी के साथ मीडिया की भी हार

त्रेता युग से लेकर आज कलयुग तक इतिहास साक्षी है कि महिला के अपमान का क्रोध सत्ता को खा जाता है। आप सांसद स्वाति मालीवाल ने जिस तरह अरविन्द केजरीवाल पार्टी की नाकामियों को उछाला पंजाब सरकार से विज्ञापन मिलने की वजह से किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाया, क्योकि मीडिया को अपने राजस्व की चिंता थी जनता की समस्याओं से नहीं। स्वाति के वीडियोस सोशल मीडिया पर छाए रहे। अगर यही वीडियो बीजेपी के खिलाफ होते सारा मीडिया खूब प्रसारित कर रहा होता। इसलिए दिल्ली से केजरीवाल सरकार के जाने में स्वाति मालीवाल की अहम् भूमिका होने के कारण मालीवाल को Man of the Match कहना कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। लेकिन प्रवेश वर्मा की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिसने केजरीवाल की नाक में नकेल डाल कही का नहीं छोड़ा। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के दिलों में बसते हैं। जनता पर उनका ना सिर्फ भरोसा बरकरार है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दस वर्षों से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप- AAP) और कांग्रेस ने मतदाताओं से खूब लोकलुभावन वादे किए और रेवड़ियां बांटी। इसके बावजूद बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में मोदी लहर कायम है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर बहुमत मिला है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। इस बार के चुनाव में दिल्ली के वोटरों ने AAP पर ही झाड़ू चला दी है। AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे खराब स्थिति तो राहुल गांधी की कांग्रेस की है। कांग्रेस का तो एक तरह से सफाया ही हो गया है। सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति से लोग कांग्रेस से कटते जा रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। नतीजे देख न केवल बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता खुश हैं बल्कि वो आम जनता भी खुश है जो रोजमर्रा की समस्याओं से तंग आकर सत्ता परिवर्तन को ही एक विकल्प मान रही थी। वैसे तो इतने वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने कई फैक्टर्स पर काम किया होगा, लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें असल में किसलिए वोट दिया ये समझना जरूरी है।

दिल्ली में जब पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही हैं तो समझते हैं कि आखिर वो कौन-कौन से कारण थे जिनके चलते भाजपा पर लोगों ने विश्वास जताया।

क्या वो सिर्फ केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार से छुटकारा चाहते थे या वाकई उन्हें दिल्ली में विकास की दरकार है? क्या उनके लिए सिर्फ फ्री बिजली पानी महत्व रखता था या उनको स्वच्छ क्षेत्र, पक्की सड़कें, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चाहिए?

दिल्ली में भाजपा की जीत के सबसे बड़ा कारण इस बार महिलाओं की भागीदारी को, मिडिल क्लास को मिली राहत को, पूर्वांचलियों के प्रयास, साफ पानी के वादे को माना जा सकता है…।

महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान

इस विधानसभा चुनाव में राजधानी में पंजीकृत महिला मतदाताओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। महिलाएँ समाज का वो वर्ग हैं जो बुनियादी सुविधाएँ न मिलने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इन्हें पता होता है कि घर के नल से आता गंदा पानी, गली की टूटी सड़क, नाले में भरा पानी कैसे उनके परिवार के लिए घातक है। दिल्ली की महिलाओं को इन्हीं सबसे छुटकारा चाहिए था। उन्हें फ्री बिजली से ज्यादा साफ पानी की जरूरत थी। उन्हें मोहल्ला क्लिनिक से ज्यादा आयुष्माम योजना की जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने 10 साल पहले केजरीवाल सरकार में संभावना देखकर उन्हें मौका दिया था, मगर जब उनकी जरूरतें पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने AAP को देखा-परखा और फिर बदलाव के नाम पर अपना वोट दिया।

मोदी की गारंटी

दूसरा, आम आदमी पार्टी ने इन्हीं महिलाओं को टारगेट करते हुए 2100 रुपए देने का ऐलान किया था। लेकिन, दिल्ली की महिलाएँ AAP की फ्री वाले हथकंडे को भाँप चुकी थी। उन्हें उन 2100 रुपए से ज्यादा दिल्ली के विकास को तवज्जो दी। उधर भाजपा ने भी अपने संकल्प पत्र में महिलाओं से साफ कह दिया था कि वो न केवल दिल्ली को हर स्तर पर बेहतर बनाएँगे बल्कि जो दिल्ली सरकार इस समय जनकल्याण की योजना चला रहे हैं उन्हें भी बंद नहीं करेंगे।
महिलाओं को इस बात पर डर नहीं था कि अगर वो AAP को वोट नहीं देंगी तो उनके घरेलू बजट पर कोई असर पड़ेगा। उलटा वह संतुष्ट थीं कि भाजपा से उन्हें सम्मान के तौर पर 2500 रुपए की राशि तो मिलेगी ही। साथ ही गर्भवतियों को 25000 रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा घर के गैस सिलेंडर, बिजली की भी उन्हें चिंता नहीं करनी होगी और दिल्ली में बीजेपी के आने पर आयुष्मान योजना जैसी स्कीम भी लागू हो पाएँगी जिससे उनके परिवार को ही फायदा होगा।

मिडिल क्लास की ताकत

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जिस समय जातियों पर लोगों को बाँटकर भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रही थीं उस समय बीजेपी लगातार मिडिल क्लास वर्ग पर फोकस बनाए हुई थी। बजट वाले दिन विपक्षी दलों की बाजी तब पलटी जब ऐलान हुआ कि अब 12 लाख रुपए तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। विपक्ष ने इस बजट को बकवास तक बताया, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस एक घोषणा ने दिल्ली के मिडिल क्लास को सीधे बीजेपी के पाले में खड़ा कर दिया है।

अभी तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भाजपा के खिलाफ जिस मिडल क्लास को भड़का रही थीं, उसी मिडल क्लास को चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने टैक्स में छूट देकर बड़ा तोहफा दे दिया था।
इसके अलावा पिछले दिनों केंद्र सरकार ने जो 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की थी उससे भी मिडल क्लास काफी प्रभावित हुआ था। इस फैसले से करीबन 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलती। वहीं 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में बढौतरी होती।

पूर्वांचली भी साथ

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के एक बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए ऐसे दिखाया था कि भाजपा पूर्वांचलियों से इतनी नफरत करती है कि उन्हें गाली दे रही है। हकीकत जबकि ये थी कि पूनावाला ने वहाँ गाली नहीं दी थी। लेकिन जो खेल आप खेल रही थी उससे निपटना जरूरी था। नतीजतन जमीनी स्तर पर काम करने की कमान बीजेपी ने कई पूर्वांचलियों को सौंपी। इन्हीं पूर्वांचलियों ने दिल्ली में अपनी पूर्वांचल सम्मान मार्च जैसे इवेंट करके अपनी ताकत लगाई और नतीजे सामने हैं।

करप्शन से केजरीवाल चित

इन सब वजहों के अलावा एक सबसे बड़ा कारण दिल्ली में भाजपा की जीत का यह भी था कि दिल्ली की जनता आए दिन AAP के काल में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरों से त्रस्त हो गई थी। कभी शीश महल पर खर्च हुए 30-40 करोड़ रुपए की बात मीडिया में आ रही थी तो कभी दिल्ली शराब घोटाला के जरिए फजीहत हो रही थी। इन सारे मुद्दों ने पार्टी की छवि और नेताओं की ईमानदारी पर तमाम सवाल खड़े कर दिए थे। वहीं दिल्ली की सड़कों में हर साल भरने वाला पानी और 10 साल से यमुना के साफ करने के झूठे वादे ने भी लोगों का विश्वास AAP से उठा दिया था।
इन्हीं सब बिंदुओं का फायदा भाजपा को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जमकर हुआ और उनके दिए नारे ‘AAP-DA मुक्त’ का असर दिखा। जनता ने मोदी की गारंटियों पर भरोसा दिखाते हुए 5 फरवरी को कमल दबाया। जिसके परिणाम आज देखने को मिले। बीजेपी की इस जीत में 2M (महिला+मिडिल क्लास) 2P (पूर्वांचली+पानी) फैक्टर का बड़ा रोल दिख रहा है। दिल्ली में भाजपा 48 सीट जीत रही है जबकि आम आदमी पार्टी को केवल 22। पिछले चुनाव में इसी आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।
अवलोकन करें:-
शायद पहली बार AAP की हार के बाद दिल्ली सचिवालय सील, कोई भी फाइल-दस्तावेज-कंप्यूटर हार्डवयेर बाहर ल

 चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने पलटी हारी बाजी

हाल ही में बीजेपी ने चंडीगढ़ में मेयर पद का चुनाव जीत लिया है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव परिणाम आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इंडी गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। I.N.D.I. Alliance उम्मीदवार को हराकर बीजेपी ने हारी बाजी पलट दी है। बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला I.N.D.I. Alliance के आप-कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमलता को हराकर चंडीगढ़ की मेयर बन गई हैं। इस चुनाव में 36 वोटों में से बीजेपी को 19 वोट मिले, जबकि आप-कांग्रेस के इंडी गठबंधन को सिर्फ 17 वोट ही मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि बहुमत के बावजूद गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है। AAP और कांग्रेस के पार्षदों के क्रॉस वोटिंग के कारण गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा। हैरानी की बात यह भी है कि चंडीगढ़ में एक साथ लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही है।

दिल्ली : अरविंद केजरीवाल के लिए उत्तर प्रदेश-बिहार के वोटर फर्जी और बांग्लादेशी-रोहिंग्या जान से प्यारे ; जिन रोहिंग्यों को कोई मुस्लिम देश तक पनाह देने को तैयार नहीं विपक्ष क्यों तड़प रहा; जागो दिल्लीवालों जागो, बटोगे तो निश्चितरूप से कटोगे

                                अरविंद केजरीवाल और बांग्लादेशी (साभार: हिंदुस्तान/X-AmitMalviya)
CAA विरोध में बने शाहीन बागों का असली मकसद पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्यों का जमावड़ा था। जिसे लगभग हर विपक्षी ने बिरयानी, कोरमा और फलों का नाश्ता देकर मुसलमानों में डर बैठाया कि मोदी सरकार तुम्हे निकालने की तैयारी कर रही है और पागल मुसलमान भी इस झूठे पाखंड को सच मान बैठा। पूरी दुनिया में भारतीय विपक्ष घुसपैठियों के साथ खड़ा होता, जबकि विदेशों में ऐसे नेताओं और पार्टियों पर कानूनी कार्यवाही होती है। खैर, दिल्ली चुनाव में असलियत सामने आ गयी। दिल्ली चुनाव साबित करेगा कि जनता देश के साथ है या घुसपैठियों के साथ। अगर दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बनती है तो ये दिल्ली वालों के लिए डूब मरने की बात होगी। आसानी से किसी घुसपैठिये पर हाथ नहीं डाल पाओगे। यानि बटोगे तो निश्चितरूप से कटोगे।    

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में जारी विधानसभा चुनावों के नाम पर स्कैम का आरोप लगाया है। यूपी-बिहार के लोगों को फर्जी वोटर बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर रही है और स्थानीय चुनाव अधिकारी बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। वहीं, भाजपा ने केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में चुनाव के नाम पर स्कैम हो रहा है। बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर रही है। स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। आज चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत की है। अगर चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद संजय सिंह के साथ चुनाव आयुक्त से मिलने के लिए गए। वहाँ उन्होंने भाजपा को लेकर कई शिकायतें कीं। केजरीवाल ने कहा, “हमारे कुछ मुद्दे थे। इनमें से एक था दिल्ली विधानसभा के अंदर 15 दिसंबर से 7 जनवरी के बीच यानी 22 दिन में 5500 वोट कटने के लिए आ गए हैं।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ एक लाख मतदाता हैं और इसमें से साढ़े पाँच लाख वोट काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी अधिकारियों ने जब इन मामलों में सुनवाई की तो पता चला इन लोगों में से किसी ने वोटर लिस्ट में से अपना नाम हटाने का आवेदन नहीं दिया था। केजरीवाल का कहना है कि इन लोगों के नाम से फर्जी आवेदन दिया गया था।

केजरीवाल ने घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा, “इसका मतलब ये हुआ कि बहुत बड़े स्केल पर स्कैम चल रहा है। बहुत बड़ा फ्रॉड चल रहा है। पिछले 15 दिनों में 13000 नए वोटरों का नाम जोड़ने के लिए आवेदन आए हैं। ये लोग अचानक कहाँ से आ गए? जाहिर है ये यूपी-बिहार से ला-ला कर… यूपी और आसपास के स्टेट से ला-ला कर फर्जी वोट बनवा रहे हैं ये लोग (भाजपा)।”

उन्होंने कहा कि किसी विधानसभा में 18.5 प्रतिशत वोट इधर-उधर कर दिए जाएँ तो ये चुनाव थोड़े है, ये तो तमाशा है… नाटक है। इसके अलावा, केजरीवाल ने नई दिल्ली से भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा पर नोट बाँटने और जॉब लगाने जैसे वोटरों को लुभाने का आरोप लगाया और इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से की।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “प्रवेश वर्मा खुलेआम नई दिल्ली क्षेत्र में जॉब कैंप लगा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। खुलेआम पैसे बाँटे जा रहे हैं। हेल्थ कैंप में खुलेआम चश्मे बाँटे जा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि 15 जनवरी को जॉब फेयर लगाए जाएँगे। ये सब कुछ चुनाव आयोग के विभिन्न नियम-कानूनों के तहत भ्रष्ट कृत्य के तहत आता है।”

उन्होंने कहा कि प्रवेश वर्मा के घर पर रेड मारकर पता लगाने और चुनाव लड़ने से रोकने का आग्रह किया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर भी आरोप लगाए और भाजपा के कथित गलत कामों को उनके द्वारा आसान बनाने का आरोप लगाया गया। उन्होंने लोकल DO और ERO को हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को भाजपा को रोकने की हिम्मत नहीं है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा यूपी-बिहार के लोगों को ‘फर्जी’ वोटर कहने पर भाजपा ने जबरदस्त पलटवार किया है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में रह रहे यूपी-बिहार के लोग अरविंद केजरीवाल के लिए फर्जी! लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये इनके रिश्तेदार? अब नहीं चाहिए आप-दा…।”

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम आकर दिल्ली में बसे। उन्हें दिल्ली सरकार बिजली-पानी जैसी मुफ्त सुविधाएँ लगातार उपलब्ध करा रही हैं, जिसको लेकर AAP सरकार की बड़े पैमाने पर आलोचना होती है। इन बांग्लादेशी-रोहिंग्याओं के पहचान का काम बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है।

मोदी से हिसाब मांग रहे हो, वो तो दे रहा है लेकिन हिम्मत करके अपने 10 साल का भी हिसाब दो; ऐसे घटिया विज्ञापनों से कुछ नहीं होगा ; आम आदमी पार्टी सिकुड़नी हो गयी शुरू

 सुभाष चन्द्र

आजकल कांग्रेस के 2 विज्ञापन मीडिया में चल रहे हैं, एक में एक ग्रहणी कहती है चीनी पत्ती महंगी है, गैस महंगी है, मेरा हिसाब दो और दूसरे में एक नौकरी चाहने वाला हिसाब मांग रहा है सरकार से। दोनों हिंदू हैं लेकिन कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में एक अलग चैप्टर लिखा है बताने के लिए कि हम मुस्लिमों के लिए कैसी “टुच्चा गिरी” (तुष्टिकरण की जगह यह शब्द उचित है) करेंगे और हिंदुओं को ख़त्म कर देंगे।

मोदी तो अपने 10 साल का हिसाब दे रहा है लेकिन कांग्रेस अपने शासन के 10 साल का हिसाब भी देने की हिम्मत करे। कुछ गौर करें कांग्रेस वाले:- 

-10 साल में 12 लाख करोड़ के घोटाले किए और आज भी बाहर आ रहे हैं जबकि मोदी के 10 साल में तुम एक घोटाला उजागर नहीं कर सके;

-60 साल में बैंकों से लोन दिया गया 18 लाख करोड़ जबकि 2006-2013 तक 7 साल में उद्योगपतियों को लुटा दिया 34 लाख करोड़ जबकि मोदी ने डूबते हुए बैंकों को संभाल लिया और NPA घटा दिए, बैंक लाभ कमा रहे हैं;

लेखक 
-तुम देश की economy को 11वें स्थान पर ले गए और उसे Fragile Economy कहा गया जबकि मोदी उसे 11 से 5वें स्थान पर ले आया;

-तुम्हारे समय में Inflation 10% रहना आम बात थी जो आज 5% के आसपास है लेकिन फिर भी लोगों को बरगलाते हो “बहुत महंगाई” है;

-ढोल पीटते हो नौकरियां नहीं हैं जबकि Unemployment Rate आज 2021 में 4.2% था, 2022 में 3.6% था और 2023 में यह 3.1% रह गया। यह 15 वर्ष या उसके ऊपर के लोगो के लिए है। तुम्हारी सरकार अगर 0% पर ले गई हो तो बताएं; 

-वैसे जो नौकरी मांग रहा है विज्ञापन में उसको चाहिए हिसाब मांगे हरियाणा की 42 साल की नीलम से जो संसद में सुरक्षा भंग करने वाले गिरोह के साथ थी जिसे 4-5 डिग्री होने के बाद भी नौकरी नहीं मिली;

-तुमने ईरान से तेल खरीदा और 43000 करोड़ रुपया बकाया छोड़ गए जो मोदी सरकार ने ब्याज समेत चुकाया;

-तुम्हारे राज के 10 साल में 4 करोड़ फर्जी गैस कनेक्शन दे दिए गए और साढ़े 3 लाख फर्जी कंपनियां बना दी गईं। मोदी ने 47 करोड़ लोगो के बैंक खाते खोल दिए और फर्जी कंपनियां, फर्जी राशन कार्ड और फर्जी गैस कनेक्शन रद्द कर दिए और 32 लाख करोड़ रुपया DBT से लोगों के खातों में दिया। गैस महंगी बताने वाली विज्ञापन में महिला को बता देना कि मोदी ने 10 करोड़ गरीब महिलाओं को फ्री गैस कनेक्शन देकर धुएं की मार से बचाया है और 12 करोड़ घरों को “नल से जल” दिया है;

-कांग्रेस राज में फर्जी नोट चलाए गए लेकिन जब नोटबंदी में बर्बाद हुए तो उसका दर्द अभी तक रह रह कर उठता है। उसका एक कारण यह भी है कि नोटबंदी से कांग्रेस का चहेता पाकिस्तान भिखारी हो गया;

-तुम्हारी सरकार के पास एक राफेल खरीदने के पैसे नहीं थे जबकि मोदी 62 राफेल खरीद चुका है, S-400 खरीद चुका है और एक अनुमान के अनुसार करीब 10 लाख करोड़ के arms एंड ammunitions खरीद कर सेना को मजबूती दे चुका है।

बहुत हिसाब है देने के लिए लेकिन फिर भी सब कुछ होने पर भी राहुल गांधी कह रहा है कि मोदी 2024 में जीता तो देश को आग लग जाएगी। 

नंगा क्या नहायेगा और क्या निचोड़ेगा

मीडिया सूत्रों के हवाले से ख़बर मिली है कि आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से मुलाकात की, और उसमें उन्होंने यह वादा भी किया है कि उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी अपना कोई उम्मीदवार नहीं लड़ाएगी। इस मुलाकात में संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी का एक-एक कार्यकर्ता कंधे से कंधा मिलाकर अन्याय अत्याचार और भ्रष्टाचार से भरी भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए अखिलेश यादव का साथ देगा।

घोटाले पकडे जाने का असर सामने आना शुरू हो गया है। यानि घोटाले के दम पर चुनावी मैदान में उछलने वाली केजरीवाल पार्टी सिकुड़नी शुरू हो चुकी है। ED, सीबीआई द्वारा जितनी तेज जाँच होगी, पार्टी अस्तित्व खो देगी। अभी सम्पन्न हुए विधान सभा चुनावों में 267 उम्मीदवार उतारने वाली पार्टी(भले ही NOTA से कम वोट मिले) लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में एक भी उम्मीदवार न उतारे, मतलब साफ है घोटाले में कमाए धन के दम पर ईमानदारी का ढोल पीटा जाता था। यही हाल रहा पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा भी ख़तम होने वाला है।

   

गौरतलब है कि 2019 लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लड़ी गई 40 से अधिक सीटों में से केवल एक सीट जीती और उसने राष्ट्रीय राजधानी में अपना उच्चतम वोट शेयर 18.10 प्रतिशत दर्ज किया। आप ने दिल्ली, चंडीगढ़, बिहार, गोवा, पंजाब, अंडमान और निकोबार, हरियाणा, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में उम्मीदवार उतारे थे। 

अब जबकि आम आदमी पार्टी के मुखिया सहित तमाम शीर्ष स्तर के नेतागण तिहाड़ जेल में "कॉकटेल पार्टी" मनाने में व्यस्त हैं, तब भला कौन सा नेता होगा जो कि आम आदमी पार्टी के टिकट पर दावेदारी करने की जुर्रत कर पायेगा।

सच पूछिए तो उत्तर प्रदेश में आम आदमी पार्टी चौराहों पर खड़े होकर भी आवाज़ लगाएगी तब भी उसके टिकट नहीं बिकेंगे।

ऐसे में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह "अंगूर खट्टे हैं" वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए, यह जता रहे हैं कि उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ेगी, बल्कि इंडी गठबंधन को समर्थन देगी।

भाजपा को उखाड़ फेंकने का यह मुंगेरीलाल का हसीन सपना पूरा तो नहीं होता दिख रहा है। अलबत्ता नंगा नहायेगा क्या और निचोड़ेगा क्या? वाली कहावत जरूर चरितार्थ होती दिखाई दे रही है।

‘परिवारवादी’ राजनीति भी करने लगी आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का किया पत्ता साफ, तिहाड़ जेल से सुनीता केजरीवाल को आगे बढ़ाने में जुटे

आखिर तिहाड़ जेल जाने से पहले अरविन्द केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का नाम लेकर ED के निशाने पर ही नहीं लाये बल्कि शराब घोटाले में बराबर साझी होने के आरोप में शामिल कर अपनी पत्नी सुनीता के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया, जो यह साबित कर रहा है, कि उन्हें पार्टी में किसी पर लेशमात्र भी विश्वास नहीं। जिस मुख्य को पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों पर भरोसा नहीं, उसे तानाशाह और परिवार समर्पित पार्टी ही कहना उचित होगा। 
इंडी गठबंधन की सहयोगी आम आदमी पार्टी भी अब कांग्रेस और अपने अन्य मित्र दलों की तरह परिवारवादी राजनीति की राह पर चल निकली है। दरअसल, दिल्ली के सबसे बड़े शराब घोटाले के मामले में जेल गए सीएम अरविंद केजरीवाल ने बड़ी चालाकी से पत्नी सुनीता को आगे किया है। इसके लिए केजरीवाल ने सुनीता की राह के कांटे बनने वाले सौरभ भारद्वाज और आतिशी को अपने बयानों से उलझा दिया है। उन्होंने कहा है कि विजय नायर उनको नहीं, बल्कि आतिशी और भारद्वाज को रिपोर्ट करता था। यानि यदि केजरीवाल को सीएम पद छोड़ना पड़े तो आतिशी और सौरभ दावेदार के रूप में न उभर आएं, इसलिए कोर्ट में उनका नाम लेकर उन्हें विवादित बना दिया है। दूसरी ओर आप के विधायकों और सुनीता केजरीवाल की मुलाकातें रणनीति के तहत बढ़ गई हैं। पार्टी में नंबर दो बनने के लिए सुनीता केजरीवाल ने पहली बार विधायकों की बैठक ली, जिसमें 55 विधायक मौजूद थे।

सुनीता केजरीवाल ने बिना किसी पद के ही आप विधायकों की बैठक ले डाली
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आबकारी नीति घोटाले में ईडी की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी (आप) में नंबर-2 के पोजिशन को लेकर चल रही कयासबाजी अब और तेज हो गई है। दरअसल, केजरीवाल ने असुरक्षा की भावना के चलते पार्टी में सैकेंड लाइन ही तैयार नहीं की है। पहली कतार के नेता मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सासंद संजय सिंह, सत्येंद्र जैन आदि जेल में हैं। ऐसे में केजरीवाल के भी जेल जाने के बाद पार्टी के अंदरूनी हलकों में ये चर्चा और तेज हो गई कि यदि विपरीत हालात बने तो नया सीएम कौन होगा? ऐसे ही कयासों के बीच सीएम अरविंद की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने किसी पद पर न होने के बावजूद विधायकों की बैठक ले डाली। इससे साफ हो गया कि आम आदमी पार्टी में भी परिवारवाद का ‘प्रभाव’ दिखाई देने लगा है। ये अलग बात है सालों पहले केजरीवाल, मनीष और संजय सिंह राजनीति में परिवारवाद के खिलाफ बोलते रहे हैं, लेकिन जब केजरीवाल फंसे तो उन्हें भी लालू की तरह परिवार और पत्नी की याद आ गई है।

केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का नाम रणनीति के तहत लिया
सीएम की पत्नी सुनीता केजरीवाल ने आप विधायकों के साथ ऐसे समय बैठक की है, जब ईडी ने अरविंद केजरीवाल के हवाले से अदालत में दावा किया कि शराब घोटाले का मुख्य संदिग्ध विजय नायर आतिशी और सौरभ भारद्वाज को रिपोर्ट करता था। हालांकि, ईडी ने अदालत में करोड़ों के शराब घोटाले का किंगपिन सीएम केजरीवाल को ही बताया है। राजनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि केजरीवाल ने आतिशी और सौरभ का नाम रणनीति के तहत लिया है। क्योंकि आप नेताओं के जेल जाने के बाद ये वरिष्ठ नेता हैं और सीएम पद की दावेदारी कर सकते हैं। इस बीच सीएम आवास पर सुनीता केजरीवाल ने विधायकों की बैठक ली। इसमें आतिशी, सौरभ भारद्वाज, कैलाश गहलोत और गोपाल राय सहित करीब 55 विधायक मौजूद रहे। सूत्र बताते हैं कि विधायकों ने अरविंद केजरीवाल के जेल से सरकार चलाने, इस्तीफा देने की स्थिति में सीएम चेहरा बनाने आदि के मुद्दों पर मंथन किया।

लालू के नक्शेकदम पर चलते हुए पत्नी सुनीता का आगे बढ़ा रहे केजरीवाल
साल 1996 में लालू यादव का नाम चारा घोटाले में आया तो बिहार में सियासी भूचाल पैदा हो गया। तमाम तरह की संभावनाओं के बीच लालू यादव ने दबाव में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। अटकलें लग रही थीं कि लालू के राजनीति सफर का अंत हो गया, लेकिन तभी लालू यादव ने राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना दिया। लालू यादव की तरह दिल्ली के मुख्यमंत्री बड़े शराब घोटाले में फंसे हैं। आम आदमी पार्टी के सामने दो बड़े सवाल हैं- केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद चुनाव में पार्टी का चेहरा कौन होगा? और भ्रष्टाचार के आरोपों से पार्टी कैसे बाहर निकलेगी और इसके नुकसान की भरपाई हो सकेगी? आज हालात ये हैं कि आप पार्टी में सेकेंड लाइन में आम लोगों से जुड़ा कोई बड़ा नेता नहीं है, जिसे सामने किया जा सके। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद पार्टी इस पर विचार कर रही है कि केजरीवाल की पत्नी को पार्टी का चेहरा बनाया जाए। केजरीवाल को अगर जमानत नहीं मिलती है, तो सुनीता केजरीवाल पार्टी के लिए प्रचार कर सकती हैं।

आतिशी जैसी एक्टिविस्ट के लिए भाजपा में कोई वैकेंसी नहीं- पुरी
इस बीच दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) उन्हें, सौरभ भारद्वाज, दुर्गेश पाठक और राघव चड्ढा को गिरफ्तार करेगी। आतिशी ने मीडिया में यह भी हवा-हवाई दावा किया कि भाजपा ने एक करीबी व्यक्ति से पार्टी में शामिल होने का संदेश भेजा है। इधर, आतिशी के आरोप पर भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि आतिशी इस बारे में सबूत दें या कानूनी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि आतिशी जैसी एक्टिविस्ट के लिए भाजपा में कोई वैकेंसी नहीं है।

करोड़ों के शीशमहल से एशिया की सबसे बड़ी तिहाड़ जेल तक का सफर
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कभी सरकारी बंगले को शीशमहल बनाने में 45 करोड़ खर्च किए थे, लेकिन बीती रात उन्हें तिहाड़ जेल में गुजारनी पड़ी। कोर्ट ने 15 अप्रैल तक जेल में भेजा है। बता दें कि केजरीवाल ने सरकारी बंगले के सुंदरीकरण पर 44 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च किए थे। इस भारी-भरकम खर्च पर भी सवाल खड़े हुए थे। अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शराब घोटाले में तिहाड़ जेल पहुंच गए हैं। जेल में पहली रात बेचैनी में बीती। वह 14 गुणा 8 फीट की कोठरी में देर रात तक घूमते रहे। कुछ ही देर सोए। एशिया की सबसे बड़ी जेल में बंद भारत के पहले मौजूदा मुख्यमंत्री को बैरक नंबर दो में रखा गया है। मुख्यमंत्री को दोपहर में चाय दी गई और रात के खाने में घर का बना खाना परोसा गया। जेल की दीवारों के तनाव ने केजरीवाल का शुगर लेबल घटा दिया है।

लालू, जयललिता, सोरेन ने दिया था सीएम पर दे इस्तीफा, लेकिन केजरीवाल…
लोक प्रतिनिधि अधिनियम 1951 में इस बात का कहीं उल्लेख नहीं है कि जेल जाने पर किसी जनप्रतिनिधि, मुख्यमंत्री या मंत्री को इस्तीफा देना पड़े। विधायक या सांसद जेल जाएं तो सरकारी कामकाज में बाधा नहीं पड़ती। मंत्रियों के जेल जाने पर भी उनके विभाग दूसरे मंत्रियों को दिए जा सकते हैं, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने जेल जाने के बावजूद मंत्री पद से बर्खास्त नहीं करने पर राज्य सरकार की आलोचना की थी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ED की गिरफ्तारी से पहले अपना त्यागपत्र दे दिया था। चारा घोटाले में गिरफ्तारी से पहले लालू प्रसाद यादव ने भी इस्तीफा देकर अपनी पत्नी राबड़ी को CM बना दिया था। इसी तरह जयललिता ने भी गिरफ्तारी से पहले इस्तीफा दे दिया था। लेकिन केजरीवाल से सीएम पद का मोह छूट ही नहीं रहा है। वे इस जिद पर अड़े हैं कि वे जेल से सरकार चलाएंगे। लेकिन जेल जाने के बावजूद त्यागपत्र नहीं देने से राज्य सरकार के समक्ष संवैधानिक संकट हो सकता है।

मैं भरोसा देता हूं कि दिल्ली की सरकार जेल से नहीं चलेगी- उप राज्यपाल
जेल से सरकार चलाने के AAP के दावे पर उप राज्यपाल वीके सक्सेना ने बुधवार को यह बड़ी बात कही। उनसे जब यह पूछा कि क्या दिल्ली की सरकार जेल से चलेगी? इस सवाल पर एलजी ने कहा कि ‘ मैं लोगों को भरोसा देता हूं कि दिल्ली की सरकार जेल से नहीं चलेगी।’ कार्यक्रम के पहले दिन एलजी ने देश में हर क्षेत्र में हो रही तरक्की का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकास कर रहा है। विकास की यह यात्रा आगे बढ़ती रहेगी। भारत को अब रोका नहीं जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उप राज्यपाल ने कहा कि पीएम देश को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने पर काम कर रहे हैं। एलजी ने जन धन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में इसके तहत 50 करोड़ बैंक खाते खुले और 50 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास अपने मोबाइल फोन हैं।

जेल से सरकार चलाना आसान नहीं, राजनीति में ऐसा कोई उदाहरण भी नहीं
दरअसल, पार्टी को वन मैन शो की तरह चला रहे अरविंद केजरीवाल ने कोई सैकंड लाइनअप ही तैयार नहीं किया। मनीष सिसोदिया, संजय सिंह और सत्येंद्र जैसे कुछेक जो बड़े नेता थे, वे भी अब जेल की सलाखों के पीछे हैं। शराब घोटाले में गिरफ्तारी के बाद भी अरविंद केजरीवाल CM के पद पर हैं। पार्टी कह रही है कि वे जेल जाते हैं, तो वहीं से सरकार चलाएंगे। हालांकि पूर्व में इस तरह का कोई उदाहरण भी नहीं है, क्योंकि ये इतना आसान नहीं है। फाइलों पर साइन करने से लेकर कैबिनेट मीटिंग तक के लिए उन्हें बार-बार कोर्ट से परमिशन लेनी होगी। इसके अलावा लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में न सिर्फ दिल्ली की सरकार चलाने की चुनौती है, बल्कि पार्टी को चुनाव की तैयारी भी करनी है। इसका पहला असर 22 मार्च को ही दिख गया। दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की वजह से स्थगित करना पड़ा।

जेल से सरकार चलाना गलत, फिर तो हर कोई जेल से ऑफिस चलाने लगेगा
पॉलिटिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि ‘केजरीवाल जेल से सरकार चलाने की बात कह रहे हैं, लेकिन इससे गलत मैसेज जाएगा। फिर किसी यूनिवर्सिटी का वाइस चांसलर किसी केस में जेल चला गया, तो वो भी वहीं से ऑफिस चलाने की बात कहेगा। अपराधी भी कोर्ट से डिमांड करेंगे कि हमें भी जेल से काम करने की परमिशन दी जाए।’ दरअसल सीएम अरविंद केजरीवाल ने अबतक अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। वह ईडी की कस्टडी से ही दिल्ली की सरकार चला रहे हैं। वह अब तक अपने मंत्रियों को दो निर्देश भी जारी कर चुके हैं। ऐसे में हर किसी के मन में एक सवाल उठ रहा है। क्या दिल्ली की सरकार ऐसे ही जेल से चलती रहेगी? दिल्ली के एलजी वीके सक्सेना ने इसका साफ-साफ जवाब दे दिया कि ऐसा नहीं होगा।

केजरीवाल के जेल जाने के बाद मजबूरी में एक्टिव हुई पत्नी सुनीता
सीएम अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सुनीता केजरीवाल एक्टिव दिख रही हैं। दरअसल, यह उसकी मजबूरी भी है, क्योंकि आप के पास अब कोई बड़ा चेहरा है भी नहीं। इसलिए सुनीता केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट की थी। X पर सुनीता केजरीवाल की ये पोस्ट करीब एक साल बाद आई है। बीते एक साल में उन्होंने सिर्फ पार्टी और दूसरे नेताओं की पोस्ट को ही री-पोस्ट किया है। अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद उनकी पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा होने लगी कि सुनीता केजरीवाल पार्टी का चेहरा बन सकती हैं। केजरीवाल के जेल जाने के बाद उनकी पत्नी सुनीता दो बार कैमरे के सामने मैसेज दे चुकी हैं। वीडियो में वे उसी जगह बैठी दिख रही हैं, जहां से अरविंद केजरीवाल लोगों को मैसेज देते हैं। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह कदम सुनीता को पार्टी का चेहरा बनाने के लिए तो नहीं है?


मीलॉर्ड, क्या एक बार फिर अराजकता फैलाने की सुपारी ले ली आपने? क्या चाहते हैं हाई कोर्ट के जज? कथित किसानों को दिल्ली जाकर आग लगाने दी जाए और प्रधानमंत्री मोदी के आवास को घेरने दिया जाए; गुंडों को अधिकार दे रहे हो और सरकार को फर्ज समझा रहे हो?

मीलॉर्ड ये किसान प्रदर्शन है या दंगाइयों को छुड़वाने का प्रदर्शन?
सुभाष चन्द्र

लेखक 
पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट ने लगता है एक बार फिर देश को अराजकता की आग में झोकने की सुपारी ले ली है जो आदेश में यह कहा है कि ‘किसानों” को प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का भी कर्तव्य है।  

जिन आंदोलनों में बंदूक, लाठी और तलवारें हो, उपद्रविओं को रिहा करने की मांग हो, प्रधानमंत्री के मरने की बात हो रही हो, क्या उसे प्रदर्शन कहा जा सकता है? किसानों की आड़ में देश को अराजकता की आग में झोंका जा रहा है, जिसे मोदी-योगी विरोधी पार्टियों के पूर्ण समर्थन से देश में आग लगाने का प्रयास किया जा रहा है, क्या अदालतों को नहीं मालूम? क्या मीलॉर्ड पिछले प्रदर्शन में लाल किले पर हुए हंगामे को भूल गए हैं? इतना ही नहीं, जिस प्रकार ट्रैक्टरों को लेकर आया गया है, क्या मीलॉर्ड ने ऐसे ट्रेक्टर देखे हैं? अराजक तत्वों के हाथ की कठपुतली मत बनो मीलॉर्ड?

यही हाई कोर्ट पिछले वर्ष NH - 44 पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से हाईवे को मुक्त कराने के आदेश दे रहा था यानी उस आदेश में किसानों को बलपूर्वक उठाने की बात कर रहा था और आज कह रहा है उन्हें प्रदर्शन का अधिकार है। साथ में सरकार को प्रवचन दे रहे हैं हाई कोर्ट के जज कि नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का काम आपका(सरकार) का है।

किसान आंदोलन में शरजील इमाम, उमर खालिद का पोस्टर

किसान आंदोलन में शरजील इमाम और उमर खालिद का पोस्टर क्या कर रहा है।

हरियाणा सरकार ने अदालत में बताया कि किस तरह का उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी की हुई है कथित किसानों ने और वे शम्भू बॉर्डर पर खालिस्तान से जुडी बातें भी कर रहे हैं, किसान मोडिफाई किए गए ट्रैक्टरों के साथ हैं और हथियारों की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।  

इतने पर भी यदि हाई कोर्ट के जजों को लगता है कि कथित किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे तो ऐसे जजों की सोच पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। यह नहीं माना जा सकता कि सोशल मीडिया, टीवी और समाचार-पत्रों की रिपोर्ट हाई कोर्ट के जजों तक नहीं पहुँच रही होंगी  फिर भी आप उन्हें प्रदर्शन का अधिकार दे रहे हो।  

“रेलवे ट्रैक रोकना किस तरह जायज है, सड़के जाम करना कैसे जायज है, मोदी अबकी पंजाब आएगा तो जिंदा वापस नहीं जाने देंगे, हमें खालिस्तान दे दो, हमें पाकिस्तान से जुड़ जाने दो,  मोदी का ग्राफ बढ़ गया है, उसे नीचे लाना है किसी भी तरह से और हम विपक्ष के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं”। 

अफ़सोस की बात है कि इतना सब होने के बाद भी हाई कोर्ट के जज कह रहे थे कि किसान प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे हैं तो इसमें हरियाणा सरकार को क्या आपत्ति है; आखिर क्यों हरियाणा सरकार हाइवे पर बेरिकेडिंग कर रही है।  

ऐसी बातों के चलते भी अगर हाई कोर्ट के जज अंधे हो कर कहते रहेंगे कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है तो इसका मतलब साफ़ है कि ऐसे जजों ने देश को अराजकता की आग में झोकने की सुपारी ली हुई है। उधर CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर वकीलों को अदालत में आने में समस्या होती है तो हम “सामजस्य बैठाएंगे”। मतलब केवल वकीलों की समस्या पर ध्यान है जनता जाए भाड़ में। 

सपा नेता दे रहा गृहयुद्ध की धमकी
तजिंदर विर्क खुद को किसान बताने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन ये समाजवादी पार्टी के नेता हैं। ये शख्स भारत में गृहयुद्ध की धमकी दे रहा है।

खालिस्तान बनाने दो…हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जाएंगे
फर्जी किसान आंदोलन में शामिल एक किसान की बात सुनिए, हमको छोड़ दो, खालिस्तान बनाने दो…हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जायेंगे।

पंजाब पुलिस के जवान को ट्रैक्टर से कुचला
ये कौन से किसान हैं जो खून के प्यासे हैं? पंजाब पुलिस के जवान को ये उग्रवादी ट्रैक्टर से कुचलता हुआ, 50 मीटर तक घसीटता रहा। ये आतंकवाद है, उग्रवाद है। पंजाब आम आदमी पार्टी की सरकार है और उन्होंने फर्जी किसानों और खालिस्तानी आतंकवादियों को खुली छूट दे रखी है। पुलिस के जवानों को रौंदा जा रहा है और प्रशासन सोया हुआ है।

किसानों ने फ्लाईओवर पर सुरक्षा बोर्ड को तोड़ दिया
फर्जी किसान प्रदर्शनकारियोंने हरियाणा-पंजाब शंभू सीमा पर फ्लाईओवर पर सुरक्षा के लिए लगाए गए बोर्ड को तोड़ दिया। यह कैसा शांतिपूर्ण आंदोलन है।

बंदूक के साथ प्रदर्शन करने आए किसान
क्या किसान कभी बंदूक लेकर चलता है। ये किसान बंदूक के साथ प्रदर्शन करने आए हैं। बंदूक के साथ आए ये लोग किसान नहीं हैं। ये युद्ध पर आमादा हैं।

16 लाख की कार के साथ प्रदर्शन
किसान इतने मजबूर हैं कि उन्हें अपनी 16 लाख की कार के साथ प्रदर्शन करने सड़क पर उतरना पड़ा है। जिस गाड़ी पर ये “तथाकथित किसान” बैठे हैं उसकी कीमत 16 लाख से अधिक है! क्या कोई बता सकता है कि एक सामान्य किसान इतनी कमाई कैसे कर सकता है कि उसके पास 16 लाख से अधिक की कार हो? क्या वाकई एक सामान्य किसान सिर्फ एक राज्य तक सीमित इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहा है? और अगर वे किसान हैं और इतने अमीर हैं तो अब वे क्या चाहते हैं? संपूर्ण ऋण माफ़ किया जाए ताकि सामान्य भारतीय करदाता उसका भुगतान कर सके?

क्या चाहते हैं हाई कोर्ट के जज? कथित किसानों को दिल्ली जाकर आग लगाने दी जाए और प्रधानमंत्री मोदी के आवास को घेरने दिया जाए जैसा अमेरिका में बैठा गुरपतवंत सिंह पन्नू आदेश दे रहा है। दिल्ली को श्रीलंका बनाना चाहता है विपक्ष। 

यही किया था CJI बोबडे ने पिछले किसान आंदोलन के समय जब दिल्ली पुलिस से किसानों के 26 जनवरी के मार्च पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन बोबडे ने मना कर दिया और कहा था कि कानून व्यवस्था देखना आपका काम है और उसके बाद क्या हुआ लाल किले पर सबने देखा। आज वही सुप्रीम कोर्ट कह रहा है मुझे RTI के जवाब में कि मुझे उस विषय पर सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है और यह भी कहा है कि जो Experts की Committee बनाई थी उसकी रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई यह भी उनके रिकॉर्ड में नहीं है। कितना बड़ा फ्रॉड किया कोर्ट ने। 

कथित किसानों को लेकर जितना कांग्रेस, आप या अन्य विपक्षी नेताओं को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत है उससे ज्यादा जरूरत न्यायाधीशों की हरकतों को बेनकाब करने की है।  

मोदी की लोकप्रियता कम नहीं होगी पाखंडी राहुल “कालनेमि” समझ ले और तू भी समझ ले केजरीवाल और अखिलेश यादव : ये कथित किसान तुम्हारे दलों को खेतों में ही दफ़न कर देंगे अबकी बार। 

‘न मोदी से डरना न शाह से, सिर्फ जमीन-ओ-आसमान को बनाने वाले अल्लाह से डरो’: ओवैसी ने मुस्लिमों को भड़काया

जब भी टीवी पर किसी भी परिचर्चा में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता को देखने पर उस चैनल पर हंसी आती है और आनी भी स्वाभाविक है। तेलंगाना विधान सभा में देखिए कितनी सीटें है और ओवैसी से पूछो कितने उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं, लगभग 5 या 6 प्रतिशत, यानि जिस पार्टी की अपने ही राज्य तेलंगाना में ही पकड़ नहीं, टीवी पर किसी भी परिचर्चा में इस पार्टी के प्रवक्ता को देख क्या चैनल पर हंसी नहीं आएगी। क्या चैनल वाले अपनी TRP बढ़ाने के लिए बुलाते हैं? मुसलमानो के नाम पर अपनी दुकान खोल रखी है। अपने मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हिन्दू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियां करने वाले हैदराबाद मुस्लिम क्षेत्रों से बाहर सियासत करते हैं दलितों की। अब इसको दोगलापन न कहा जाए तो क्या कहा जाए?  

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का आलोचक जरूर हूँ, लेकिन एक बात की प्रशंसा करता हूँ कि "इस आदमी में जनता की नब्ज पकड़ने की क्षमता है", जो ओवैसी में नहीं। पिछले विधान सभा चुनावों में भी तेलंगाना में था और अभी संपन्न हुए चुनावों में भी। पिछले चुनावों में केजरीवाल ने आज़ाद उम्मीदवारों को समर्थन दिया, लेकिन इन चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े किए, भले ही सब की जमानत जब्त हो गयी, NOTA से भी कम वोट मिले।  

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से न डरने की सलाह दी है। हैदराबाद से सांसद औवेसी ने अपने एक्स हैंडल से बुधवार (17 जनवरी, 2024) को जारी 36 सेकेंड्स की वीडियो क्लिप में ये ऐलान किया है।

ओवैसी ने कहा, “हम सिर्फ ज़मीन-ओ-आसमान को बनाने वाले से डरते हैं, बाकी किसी से भी नहीं डरते हैं। मैं गुनाहगार हूँ, खताकार हूँ, सियाकार हूँ, मैं क्या हूँ, मेरे रब को मालूम है। मगर मैं सिर्फ अल्लाह से डरता हूँ।”

वो आगे कहते हैं, “और तुमको भी बोलने आया हूँ कि न मोदी से डरना, न शाह से डरना, न हुकूमत से डरना, किसी से नहीं डरना, सिर्फ अल्लाह से डरना।” बताते चलें कि इससे पहले औवेसी अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी निशाना साध चुके हैं।

उन्होंने आप संस्थापक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तंज किया था कि वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छोटे रिचार्ज है। औवेसी का ये तंज केजरीवाल सरकार के मंगलवार (16, जनवरी, 2024) को दिल्ली में सुंदरकांड का पाठ कराने के लेकर आया था।

इस कार्यक्रम को लेकर औवेसी ने दावा किया था कि ये सब केजरीवाल ने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को ध्यान में रखते हुए किया था। उन्होंने कहा, “जब मैंने ये देखा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री उनकी सरकार ये तय की है। हर मंगलवार को वो सुंदरकांड करवाएँगे, हनुमान चालीसा पढ़वाएँगे। इस पर मैंने कहा कि आप बीजेपी से कैसे अलग है। आप में बीजेपी और आरएसएस में कोई फर्क नहीं है।”

उन्होंने कहा था, “इनका पाखंड देखिए, कोई कह रहा कि मैं सरयू नदी में जाऊँगा, आप कह रहे हैं शिक्षा में ये पढ़ाया जाएगा। आप तो नरेंद्र मोदी पर चल रहे हैं। फिर आप कैसे अलग है। मैं फिर से कह रहा हूँ कि इस देश में बहुसंख्यकों के वोट को कैसे हासिल किया जाए इसका कॉम्पीटिटर हिंन्दुत्व हो रहा है।”

दरअसल केजरीवाल की अगुवाई में दिल्ली की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करवाया था। खुद सीएम केजरीवाल पत्नी सहित रोहिणी के एक मंदिर में ‘सुंदर कांड’ पाठ कार्यक्रम में शामिल हुए और भगवान राम और हनुमान से आशीर्वाद माँगा।

औवेसी आए दिन पीएम मोदी, बीजेपी और हिंदुत्व पर हमलावर रहते हैं। इससे पहले वो मथुरा ईदगाह मामले में RSS पर निशाना साध चुके हैं। ओवैसी ने अपने लोगों को संघ के डिजाइनों के लिए सचेत रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा था कि संघ कृष्णजन्मभूमि मामले पर भी आरएसएस हिंसक मुहिम शुरू करेगी।


पंजाब में एक नया भिंडरावाला दस्तक दे चुका है, केजरीवाल दिल्ली में चैन की बंसी बजा रहा है; दिल्लीवालों आंखे खोल लो

दिल्लीवालों भगवान का अहसान मानो कि दिल्ली पूर्ण राज्य न होने के कारण केंद्र के अधीन है, अन्यथा जिस फ्री के लालच में तुम लोगों ने अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को सिर पर बैठाया है, दिल्ली नगर निगम में हो रही गुंडागर्दी एक नमूना है और जलता पंजाब जीताजागता उदाहरण। अगर अभी भी दिल्लीवालों ने अपनी आंखें नहीं खोली, दिल्लीवालों से बड़ा अंधा दुनिया के किसी कोने में नहीं मिलने वाला। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि अन्य उन राज्यों को भी अपनी आंखें खोलने की जरुरत है, जो फ्री के लालच में केजरीवाल पार्टी को वोट देते हैं। पंजाब में वीभत्स घटनाएं देख इस पार्टी से दूरी बनाना ही हितकर होगा, अन्यथा तुम्हारी आने वाली पीडियां तुम्हे कोसेंगी। बीजेपी को वोट नहीं देनी मत दो, कांग्रेस को दे दो, लेकिन केजरीवाल पार्टी से दूरी बनाओ। पंजाब में तो केजरीवाल पार्टी के हाथ में पुलिस है, फिर क्यों खामोश? दिल्ली नगर निगम में हाथापाई ऐसे हो रही है, जैसे निर्वाचित सदस्य नहीं, बल्कि सड़क पर गुंडे लड़ रहे हों। यह दिल्ली नगर निगम इतिहास में पहली बार हुआ है।  

गृह मंत्रालय को दिल्ली नगर निगम में हुई हाथापाई और उड़ते पंजाब में कानून का बने मजाक की सीबीआई जाँच कर दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए। क्या पंजाब पुलिस और मुख्यमंत्री को होने वाले जमावड़े की कोई सूचना नहीं थी? यह भी शंका व्यक्त की जा रही है कि जिस तरह से हाथ काटने की दर्दनाक हरकतें हुई हैं, इसमें खालिस्तानियों की आड़ में भारत विरोधी तत्व शामिल होकर जनता से लेकर राज्य और केंद्र सरकारों में डर बैठाने की कोशिश की गयी हो?  

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की ‘फ्री-फ्री’ की डुगडुगी ने उन लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया, जिन्होंने तात्कालिक और मामूली लाभ के लिए अपना और देश का भविष्य दांव पर लगा दिया। उन्हें यह एहसास नहीं था कि उनका बहुमूल्य वोट ही उनके लिए घातक साबित होने वाला है। उन्हें इसकी कितनी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। आज पंजाब और दिल्ली की जनता अपनी नादानी की सजा भुगत रही है। केजरीवाल सरकार ने जहां दिल्ली की जनता का खजाना शराब माफिया के हवाले कर दिया, वहीं भगवंत मान की सरकार ने पूरे पंजाब को ड्रग्स माफिया और खालिस्तानियों के हवाले कर दिया है। पंजाब में खालिस्तानी तांडव कर रहे हैं। पुलिस भी उनके सामने बेबस है। पुलिस पीट रही है और खालिस्तानियों के सामने आत्मसमर्पण कर रही है। फ्री-फ्री के चक्कर में इंसान की जान भी फ्री हो गई है। खुलेआम लोगों पर हमले हो रहे हैं। वहीं केजरीवाल की हालत उस नीरो जैसी हो गई है, जो पंजाब जल रहा है और वो दिल्ली में चैन की बंसी बजा रहा है।

 

फ्री के चक्कर में जान हो गई सस्ती, केजरीवाल के धरे रह गए वादे

पंजाब में कानून-व्यवस्था कायम करने और बढ़ते नशे के कारोबार पर रोक लगाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। आम आदमी पार्टी की सरकार में पंजाब पुलिस लाचार है। जिस राज्य में पुलिस सुरक्षित नहीं है, वहां आम जनता कितनी सुरक्षित होगी सोचा जा सकता है। केजरीवाल ने लोगों के सामने वादा किया था कि हम पंजाब का माहौल खराब नहीं होने देंगे। हम पंजाब का भाईचारा खराब नहीं होने देंगे। हम पंजाब की शांति खराब नहीं होने देंगे। पंजाब के एक-एक व्यक्ति को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी हमारी है। हम अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे। लेकिन इन घटनाओं ने साबित कर दिया कि केजरीवाल अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में नाकाम रहे हैं।

केजरीवाल मेयर बनाने और मामूली बात पर ट्वीट करने में व्यस्त

दिल्ली के सीएम केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के ट्विटर हैंडल पर जलते, पिटते और मरते पंजाब के ये वीडियो गायब है। बीजेपी शासित राज्यों में होने वाली मामूली घटना पर ट्वीट करने वाली केजरीवाल एंड कंपनी मौन है। उन्हें ये घटनाएं दिखाई नहीं दे रही हैं। पंजाब को खालिस्तानियों और अपराधियों के हवाले कर केजरीवाल एंड कंपनी दिल्ली नगर निगम पर कब्जे में व्यस्त है। मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव के बाद अब स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव को लेकर हंगामा जारी है। केजरीवाल एंड कंपनी ने स्टैंडिंग कमेटियों पर कब्जे के लिए पूरा जोर लगा दिया है। अब एमसीडी दंगल बन गई। वहीं आम आदमी की समर्थक और उसके इकोसिस्टम की पत्रकार साक्षी जोशी ने रात में एक कार का टायर पंचर होने पर ट्वीट किया, तो केजरीवाल ने एलजी को जिम्मेदार बताते हुए रिट्वीट किया, जिसमें उन्होंंने लिखा-LG sahib…। केजरीवाल को एक मामूली बात पर ट्वीट करने का वक्त है, लेकिन जलते, डोलते और लूटते पंजाब के लिए ट्वीट करने का समय नहीं है। केजरीवाल ने लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।

खालिस्तानी समर्थकों के सामने पंजाब पुलिस का आत्मसमर्पण

23 फरवरी, 2023 को पंजाब के अंमृतसर में जो कुछ हुआ, उसने भिंडरावाले की याद ताजा कर दी। ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह अपने समर्थकों के साथ अजनाला पुलिस थाने के बाहर खूब तांडव किया। सोशल मीडिया में वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि हिंसक हो चुके अमृतपाल के समर्थक पूरी तरह हथियारों से लैस थे। इनके हाथ में लाठी, बंदूकें और तलवारें थीं। इन्होंने पुलिस के बैरिकेड्स भी तोड़ दिए। पुलिस वालों पर भी हमला किया, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। अमृतपाल समर्थकों की भीड़ और आक्रोश देखकर पुलिसकर्मियों ने उनके सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद भीड़ जबरन पुलिस स्टेशन के अंदर घुस गई। ये सभी किडनैपिंग केस में गिरफ्तार अपने एक साथी लवप्रीत तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। आखिरकार पुलिस ने आरोपी को रिहा कर दिया। इस घटना ने साबित कर दिया कि पंजाब में सरकार पूरी तरह पंगु हो चुकी है और खालिस्तानी सरकार चला रहे हैं।

पंजाब में तालिबानी राज, पुलिस से शिकायत करने पर काट दी अंगुलियां

सोशल मीडिया में दिल को दहला देने वाला एक और वीडियो वायरल हो रहा है, जो साबित करता है कि पंजाब में कानून का शासन खत्म हो चुका है और तालिबानियों का राज चल रहा है। लोग एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए हैं। पुलिस से शिकायत करने पर लोगों के हाथ काट दिए जा रहे हैं। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति को पुलिस से शिकायत करने की गुस्ताखी की कितनी बड़ी सजा दी जा रही है। शिकायत करने वाले की अंगुलियों को काट कर अलग कर दिया गया। जिस तरीके से अंगुलियों को काटा गया, वो काटने वाले के अंदर की क्रूरता को दर्शाता है। उसके मान में शासन-पुलिस का खौफ नहीं होना बताता है। केजरीवाल और भगंवत मान ने अपराधियों के अंदर से कानून और पुलिस का खौफ खत्म कर दिया है। इससे लोगों की जान फ्री हो गई है। जो चाहे, जब चाहे किसी की जान ले सकता है। उसे पता है कि इसकी सजा उसे नहीं मिलेगी।

 

सरेआम महिला पर हुआ हमला, पुलिस वाले भी जान बचाकर भागे 

एक ही दिन आए इन दो वीडियो ने पूरे देश को हैरान कर दिया है। वहीं तीन दिन पहले पंजाब के फिरोजपुर में चार बदमाशों ने एक पचास वर्षीय महिला पर तलवार से वार कर उसे घायल कर दिया। बाइक पर आए चार सवारों ने महिला के शरीर पर ताबड़तोड़ वार किए। यह हमला उस समय किया गया जब महिला सोमवार को कोर्ट में किसी मामले की गवाही देकर घर लौट रही थी। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि महिला बस पकड़ने के लिए बाज चैक पर इंतजार कर रही थी। उसी समय बाइक पर सवार होकर चार बदमाशों ने उस पर तलवारों से हमला कर दिया। महिला के सिर, बाजू व शरीर के अन्य हिस्से में चोटें आई हैं। घटना स्थल पर माैजूद लोगों में दशहत पैदा हो गई। वे भागते दिखे। लोगों के अनुसार घटनास्थल पर पुलिस भी मौजूद थी, लेकिन वारदात के दौरान एक बार भी पुलिसकर्मियों ने बीच बचाव नहीं किया। मौका पाकर पुलिसकर्मी वहां से खिसक गए। वारदात के बाद आसपास के लोगों ने महिला को सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां से उसे फरीदकोट स्थित मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। इस घटना ने लोगों की जान-माल की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के पुलिस और भगवंत मान सरकार के दावाें की भी पोल खाेल दी है।

 

भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में युवक पर सरेआम हमला

इससे पहले सोशल मीडिया पर पंजाब के संगरूर का एक वीडियो जमकर वायरल हुआ था। इसमें एक युवक की बेरहमी से पिटाई की गई थी। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति युवक को पकड़ा हुआ है और दो लोग जिनके हाथों में लोहे की रॉड और गंडासा है, युवक को जमीन पर गिराकर उसपर ताबड़तोड़ वार कर रहे हैं। झकझोर देने वाला यह वीडियो मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर का है। बताया जाता है कि पिटने वाले युवक का नाम सोनू कुमार है। छह लोगों ने मिलकर सोनू के हाथ और पैर को तोड़ दिया। इस मामले में मनी सिंह, कुलदीप, लवी, गोपाल, अमरीक, मलकीत के खिलाफ नमजद एफआईआर दर्ज की गई है।

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पंजाब : खौफनाक वीडियो: पंजाब में काट दी हाथ की अंगुलियाँ, CM भगवंत मान से नहीं संभल रही कानून-व्यवस