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मीलॉर्ड, क्या एक बार फिर अराजकता फैलाने की सुपारी ले ली आपने? क्या चाहते हैं हाई कोर्ट के जज? कथित किसानों को दिल्ली जाकर आग लगाने दी जाए और प्रधानमंत्री मोदी के आवास को घेरने दिया जाए; गुंडों को अधिकार दे रहे हो और सरकार को फर्ज समझा रहे हो?

मीलॉर्ड ये किसान प्रदर्शन है या दंगाइयों को छुड़वाने का प्रदर्शन?
सुभाष चन्द्र

लेखक 
पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट ने लगता है एक बार फिर देश को अराजकता की आग में झोकने की सुपारी ले ली है जो आदेश में यह कहा है कि ‘किसानों” को प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का भी कर्तव्य है।  

जिन आंदोलनों में बंदूक, लाठी और तलवारें हो, उपद्रविओं को रिहा करने की मांग हो, प्रधानमंत्री के मरने की बात हो रही हो, क्या उसे प्रदर्शन कहा जा सकता है? किसानों की आड़ में देश को अराजकता की आग में झोंका जा रहा है, जिसे मोदी-योगी विरोधी पार्टियों के पूर्ण समर्थन से देश में आग लगाने का प्रयास किया जा रहा है, क्या अदालतों को नहीं मालूम? क्या मीलॉर्ड पिछले प्रदर्शन में लाल किले पर हुए हंगामे को भूल गए हैं? इतना ही नहीं, जिस प्रकार ट्रैक्टरों को लेकर आया गया है, क्या मीलॉर्ड ने ऐसे ट्रेक्टर देखे हैं? अराजक तत्वों के हाथ की कठपुतली मत बनो मीलॉर्ड?

यही हाई कोर्ट पिछले वर्ष NH - 44 पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से हाईवे को मुक्त कराने के आदेश दे रहा था यानी उस आदेश में किसानों को बलपूर्वक उठाने की बात कर रहा था और आज कह रहा है उन्हें प्रदर्शन का अधिकार है। साथ में सरकार को प्रवचन दे रहे हैं हाई कोर्ट के जज कि नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का काम आपका(सरकार) का है।

किसान आंदोलन में शरजील इमाम, उमर खालिद का पोस्टर

किसान आंदोलन में शरजील इमाम और उमर खालिद का पोस्टर क्या कर रहा है।

हरियाणा सरकार ने अदालत में बताया कि किस तरह का उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी की हुई है कथित किसानों ने और वे शम्भू बॉर्डर पर खालिस्तान से जुडी बातें भी कर रहे हैं, किसान मोडिफाई किए गए ट्रैक्टरों के साथ हैं और हथियारों की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।  

इतने पर भी यदि हाई कोर्ट के जजों को लगता है कि कथित किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे तो ऐसे जजों की सोच पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। यह नहीं माना जा सकता कि सोशल मीडिया, टीवी और समाचार-पत्रों की रिपोर्ट हाई कोर्ट के जजों तक नहीं पहुँच रही होंगी  फिर भी आप उन्हें प्रदर्शन का अधिकार दे रहे हो।  

“रेलवे ट्रैक रोकना किस तरह जायज है, सड़के जाम करना कैसे जायज है, मोदी अबकी पंजाब आएगा तो जिंदा वापस नहीं जाने देंगे, हमें खालिस्तान दे दो, हमें पाकिस्तान से जुड़ जाने दो,  मोदी का ग्राफ बढ़ गया है, उसे नीचे लाना है किसी भी तरह से और हम विपक्ष के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं”। 

अफ़सोस की बात है कि इतना सब होने के बाद भी हाई कोर्ट के जज कह रहे थे कि किसान प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे हैं तो इसमें हरियाणा सरकार को क्या आपत्ति है; आखिर क्यों हरियाणा सरकार हाइवे पर बेरिकेडिंग कर रही है।  

ऐसी बातों के चलते भी अगर हाई कोर्ट के जज अंधे हो कर कहते रहेंगे कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है तो इसका मतलब साफ़ है कि ऐसे जजों ने देश को अराजकता की आग में झोकने की सुपारी ली हुई है। उधर CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर वकीलों को अदालत में आने में समस्या होती है तो हम “सामजस्य बैठाएंगे”। मतलब केवल वकीलों की समस्या पर ध्यान है जनता जाए भाड़ में। 

सपा नेता दे रहा गृहयुद्ध की धमकी
तजिंदर विर्क खुद को किसान बताने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन ये समाजवादी पार्टी के नेता हैं। ये शख्स भारत में गृहयुद्ध की धमकी दे रहा है।

खालिस्तान बनाने दो…हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जाएंगे
फर्जी किसान आंदोलन में शामिल एक किसान की बात सुनिए, हमको छोड़ दो, खालिस्तान बनाने दो…हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जायेंगे।

पंजाब पुलिस के जवान को ट्रैक्टर से कुचला
ये कौन से किसान हैं जो खून के प्यासे हैं? पंजाब पुलिस के जवान को ये उग्रवादी ट्रैक्टर से कुचलता हुआ, 50 मीटर तक घसीटता रहा। ये आतंकवाद है, उग्रवाद है। पंजाब आम आदमी पार्टी की सरकार है और उन्होंने फर्जी किसानों और खालिस्तानी आतंकवादियों को खुली छूट दे रखी है। पुलिस के जवानों को रौंदा जा रहा है और प्रशासन सोया हुआ है।

किसानों ने फ्लाईओवर पर सुरक्षा बोर्ड को तोड़ दिया
फर्जी किसान प्रदर्शनकारियोंने हरियाणा-पंजाब शंभू सीमा पर फ्लाईओवर पर सुरक्षा के लिए लगाए गए बोर्ड को तोड़ दिया। यह कैसा शांतिपूर्ण आंदोलन है।

बंदूक के साथ प्रदर्शन करने आए किसान
क्या किसान कभी बंदूक लेकर चलता है। ये किसान बंदूक के साथ प्रदर्शन करने आए हैं। बंदूक के साथ आए ये लोग किसान नहीं हैं। ये युद्ध पर आमादा हैं।

16 लाख की कार के साथ प्रदर्शन
किसान इतने मजबूर हैं कि उन्हें अपनी 16 लाख की कार के साथ प्रदर्शन करने सड़क पर उतरना पड़ा है। जिस गाड़ी पर ये “तथाकथित किसान” बैठे हैं उसकी कीमत 16 लाख से अधिक है! क्या कोई बता सकता है कि एक सामान्य किसान इतनी कमाई कैसे कर सकता है कि उसके पास 16 लाख से अधिक की कार हो? क्या वाकई एक सामान्य किसान सिर्फ एक राज्य तक सीमित इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहा है? और अगर वे किसान हैं और इतने अमीर हैं तो अब वे क्या चाहते हैं? संपूर्ण ऋण माफ़ किया जाए ताकि सामान्य भारतीय करदाता उसका भुगतान कर सके?

क्या चाहते हैं हाई कोर्ट के जज? कथित किसानों को दिल्ली जाकर आग लगाने दी जाए और प्रधानमंत्री मोदी के आवास को घेरने दिया जाए जैसा अमेरिका में बैठा गुरपतवंत सिंह पन्नू आदेश दे रहा है। दिल्ली को श्रीलंका बनाना चाहता है विपक्ष। 

यही किया था CJI बोबडे ने पिछले किसान आंदोलन के समय जब दिल्ली पुलिस से किसानों के 26 जनवरी के मार्च पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन बोबडे ने मना कर दिया और कहा था कि कानून व्यवस्था देखना आपका काम है और उसके बाद क्या हुआ लाल किले पर सबने देखा। आज वही सुप्रीम कोर्ट कह रहा है मुझे RTI के जवाब में कि मुझे उस विषय पर सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है और यह भी कहा है कि जो Experts की Committee बनाई थी उसकी रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई यह भी उनके रिकॉर्ड में नहीं है। कितना बड़ा फ्रॉड किया कोर्ट ने। 

कथित किसानों को लेकर जितना कांग्रेस, आप या अन्य विपक्षी नेताओं को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत है उससे ज्यादा जरूरत न्यायाधीशों की हरकतों को बेनकाब करने की है।  

मोदी की लोकप्रियता कम नहीं होगी पाखंडी राहुल “कालनेमि” समझ ले और तू भी समझ ले केजरीवाल और अखिलेश यादव : ये कथित किसान तुम्हारे दलों को खेतों में ही दफ़न कर देंगे अबकी बार। 

इंडिया टुडे ग्रुप ने गुजरात में केजरीवाल का माहौल बनाने के लिए AAP समर्थक को दी नौकरी


इंडिया टुडे ग्रुप के मीडिया प्लेटफार्म द लल्लनटॉप ने गुजरात में केजरीवाल का माहौल बनाने के लिए AAP समर्थक को नौकरी दी है। इसे पत्रकारिता की नैतिकता के लिहाज से उचित नहीं ठहराया जा सकता है। आम तौर पर यह माना जाता है मीडिया समाज को आईना दिखता है यानी समाज जिस रूप में है उसे दिखाया जाता है। अगर समाज में गड़बड़ी है तो गड़बड़ी और अच्छाई है तो अच्छाई दिखाना संवाददाताओं का कर्तव्य होता है। लेकिन जब आप किसी पार्टी से जुड़े होते हैं तो आपका निष्पक्ष रह पाना संदिग्ध हो जाता है। ऐसे में उस समाचार की विश्वसनीयता पर भी लोग संदेह करने लगते हैं।

इंडिया टुडे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को यह शोभा नहीं देता कि वह किसी पार्टी से जुड़े लोगों को नौकरी पर रख ले। इससे उनकी ही विश्वसनीयता को संदेह की नजर देखा जाएगा। नूपुर पटेल जो कल तक आम आदमी पार्टी के समर्थन में सोशल मीडिया में आवाज उठाती रही हैं अब गुजरात चुनाव से ठीक पहले वह इंडिया टुडे ग्रुप के मीडिया प्लेटफार्म द लल्लनटॉप से जुड़ गई हैं। इन दिनों वह गुजरात से ताबड़तोड़ रिपोर्टिंग भी कर रही हैं यानी एजेंडा जारी है…

इस मुद्दे पर टि्वटर यूजर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कर रहे हैं। टि्वटर यूजर अंकुर ने कहा कि गुजरात चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल को बढ़ावा देने के लिए आप कार्यकर्ता नूपुर पटेल को लल्लनटॉप में काम पर रखा गया। उन्होंने कहा कि इंडिया टुडे समूह पूरी तरह से आप का आईटी सेल बन गया है। उन्होंने इसके साथ ही नूपुर के कुछ ट्वीट भी शेयर किए हैं जिसमें वह केजरीवाल का समर्थन कर रही हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केजरीवाल के समर्थन वाले कई ट्वीट्स अब हटा दिए गए हैं।

अंकुर सिंह ने एक अन्य ट्वीट में लिखा कि नूपुर पटेल ने आम आदमी पार्टी का प्रचार वीडियो भी बनाया है। फिर पार्टी ने नूपुर को लल्लनटॉप में नौकरी दिलवाई। अब वह लल्लनटॉप में केजरीवाल का प्रमोशन करती हैं। उन्होंने नूपुर वह वीडियो भी शेयर किया जिसमें वह आप का प्रचार करती नजर आ रही है। नूपुर ने 2015 के एक ट्वीट में शेख रहमत से कहा कि पीएम मोदी के विरोध में मैंने गुजरात में बीफ खाया।