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मजहब देखकर कट्टरपंथी दिखाते हैं मानवता; मजहब देखकर मदद करने तक है जिनकी औकात, वो भारतीय सेना को ‘शराबी-बलात्कारी’ बताकर उठाते हैं सवाल

                                                          प्रतीकात्मक 
भारत में रहकर इस्लामी मुल्कों के लिए अपनी ईमानदारी दिखाना और यहाँ की सरकार व सैनिकों का अपमान करना कट्टरपंथियों के लिए कोई नई बात नहीं है। पिछले 12 सालों में ऐसे कई मामले देखे गए जब ये लोग कैमरे पर देश के खिलाफ स्पष्ट रूप से जहर उगलते कैद हुए। इस बार इन्होंने ये काम ईरान के नाम पर किया है। इन कट्टरपंथियों से कोई पूछे कि वहां महिलाएं बुर्का/हिजाब के विरोध में सड़क पर उतरने की हिम्मत करती है, क्या भारतीय कट्टरपंथी इस मुद्दे पर ईरानी महिलाओं का साथ देंगी? अगर नहीं तो इसे दोगलापन ही कहा जाएगा।     

हाल में एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। इसमें बुर्काधारी महिला सैनिकों को ‘शराबी-कबाबी’ कहती नजर आ रही है। उसका कहना है कि वो लोग जो दान कर रहे हैं वह उनके अपने ‘रहबर’ शिया मुल्क ईरान के लिए है। उनके लिए अभी भारतीय सेना या कुछ और बिलकुल जरूरी नहीं है।

यह पहला मौका नहीं है जब ऐसा बयान सामने आया हों। ईरान से जुड़े तनाव या पश्चिम एशिया की घटनाओं के दौरान कई बार ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें शिया समुदाय की भीड़ सड़कों पर उतरकर खुले तौर पर विदेशी ताकतों के समर्थन में नारे लगाती और हल्ला करते हुए दिखी।

लखनऊ में जहाँ बुर्काधारी महिला ने तो यहाँ तक कहा कि खामेनेई के लिए उनकी जान भी हाजिर है वही दिल्ली में प्रदर्शन करते हुए बुर्काधारी महिलाएँ बोलीं कि उनके लिए सबसे जरूरी ईरान ही है।

इस बीच कुछ मुल्ला-मौलाना के बयान भी गौर देने वाले थे। जैसे मौलाना साजिद रशीदी ने कैमरे पर ये कहा था कि अगर कभी ऐसा समय आया कि ईरान और भारत आमने-सामने हुए तो भारत के मुस्लिम ईरान का ही साथ देंगे।

वहीं कट्टरपंथ में सने बच्चे भी ये कहते नजर आए थे कि उन्हें भारत देश की सरकार से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन अगर मौका मिला तो वह ईरान का बदला लेकर इजरायल में घुसकर चाकूबाजी कर सकते हैं।

अभिव्यक्ति के नाम पर जहर उगलने का काम पुराना

लोकतांत्रिक भारत में यह एक बड़ी विडंबना है कि हम इन लोगों के विचारों से अवगत होते हुए भी अक्सर इनका खुलकर विरोध नहीं कर पाते। कारण वो सेकुलरिज्म का बोझ है जिसे ढोने की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदुओं को दी गई है। देश का लेफ्ट-लिबरल इसी सहिष्णुता का फायदा उठाता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कभी देश की संप्रभुता-सुरक्षा-सद्भाव को ठेस पहुँचाई जाती है, कभी इसका इस्तेमाल सेना को गाली देने के लिए किया जाता है।

व्यक्तिगत राय और लोकतंत्र की मजबूती की बात करते-करते सेकुलर हिंदुओं को ये समझ नहीं आता कि जो लोग कट्टरपंथ के कारण अपनी मातृभूमि के नहीं हो पा रहे हैं वो उनके कैसे होंगे। क्या ये सोचने वाली बात नहीं है कि आखिर क्यों ईरान को अपना रहबर और देश भर के मुस्लिमों को अपना भाई बताने वाले इस्लामी कट्टरपंथी हिंदुओं को ‘काफिर’ क्यों कहते हैं।

खैर! ईरान से पहले फिलीस्तीन के लिए भी भारत के मुस्लिम ऐसा रोना रो चुके हैं। उस वक्त भी सेकुलर हिंदुओं का काम सिर्फ इनका ‘पिछलग्गू’ बने रहने का था। उन्हें न हमास आतंकियों के बारे में कोई बात करनी थी और न ही 7 अक्तूबर 2023 को क्या हुआ इसकी जानकारी थी। ये लोग उस समय भी घूम-फिराकर ये नैरेटिव आगे बढ़ाते रहे कि इजरायल बेवजह ही फिलीस्तीनियों को निशाना बना रहा है और गाजा के लिए रोना रोने वाले मुस्लिम ही इंसानियत के साथ खड़े हैं।

आपने कभी हमास-इजरायल युद्ध के दौरान में इस्लामी कट्टरपंथी जमात को हमास आतंकियों की हरकत पर बात करते नहीं सुना गया। उन्होंने न उस घटना की निंदा की थी और न ही विरोध।

मजहब देखकर दिखाते हैं मानवता

आज फिर मानवता का हवाला देकर ईरान के लिए भी वैसी सहानुभूति दिखाई जा रही है, लेकिन इन सब घटनाक्रमों के बीच विचार करने वाली बात ये है कि ईरान-फिलीस्तीन के लिए छाती पीटने वालों के मन में कभी भारत के लोगों के लिए ये दर्द नहीं उठा। तमाम मौके थे जब ये लोग मजहब से ऊपर उठकर गैर-मुस्लिमों के लिए इंसानियत दिखा सकते थे लेकिन इन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।

चाहे 2001 में गुजरात के भुज में भूकंप की घटना हो या 2015 में नेपाल में भीषण त्रासदी ऐसी घटनाओं में हमेशा देशभर से मदद पहुँचीं लेकिन क्या वो दृश्य आपको देखने को मिले जो ईरान के वक्त कश्मीर में दिखे? क्या आपने जगह-जगह से मुस्लिमों को गैर-मुस्लिमों के लिए जकात काम काम करते देखा?

नहीं, ये कट्टरपंथी जमात मजहब देखकर सबाब का काम करती है और ये भूल जाती है कि जिस सेना को ये लोग ‘शराबी-बलात्कारी’ बताते हैं वही सेना हर मुश्किल घड़ी पर सबसे आगे मदद के लिए रहती है। वो समय चाहे प्राकृतिक आपदा के कारण आया हो या फिर विश्व में अलग-अलग चल रहे युद्ध की वजह से… भारतीय सेना अपने देश के नागरिकों की रक्षा में जान की परवाह किए बिना तैनात रहती है, तभी कश्मीर में कट्टरपंथियों से लेकर केरल के वामपंथी तक सुकून से सो पाते हैं।  

Fake Narrative : सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा… के बजाए अमेरिका में राहुल गाँधी का पुराना राग, वैश्विक मंच पर देश को बदनाम करो


राहुल गांधी का अमेरिका दौरा उनके कई ऊल-जूलूल और बेसिर-पैर के बयानों के चलते विवादों में आ गया है। नेता प्रतिपक्ष होने के बावजूद राहुल गांधी को न भारत की समृद्ध विरासत की फिक्र है। ना उन्हें हमारी गौरवशाली परंपराओं पर गर्व है। बल्कि वे तो अमेरिका की धरती पर अपने देश की छवि खराब करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। शर्मनाक तथ्य यह है कि राहुल गांधी ने ऐसा पहली बार नहीं किया है, वे पहले भी विदेश में अपने बयानों से ‘सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा’ की शान में गुस्ताखी करते रहे हैं। पहले वे किसी जिम्मेदार पद पर नहीं थे, लेकिन इस बार विपक्ष के नेता की हैसियत के चलते लगा था कि अपने देश के प्रति उनका स्वाभिमान जागेगा। लेकिन वे फिर से विदेश में भारत को बदनाम करने से बाज नहीं आए। अमेरिका के दौरे पर गए कांग्रेस के सांसद राहुल गांधी ने चीन की तारीफ से लेकर, सिख समुदाय की पगड़ी, आरक्षण खत्म करने और बेरोजगारी तक को लेकर विवादित बयान दिए। यहां तक कि विपक्ष के नेता राहुल को भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर से भी मुलाकात करने में जरा भी झिझक नहीं आई। अमेरिका में अपने भाषणों के दौरान राहुल का गांधी का विजन तो इतना लचर है कि उसे सुनकर कोई भी उनकी ‘बालक-बुद्धि’ पर कन्फ्यूज होता नजर आएगा।

राहुल गांधी के विवादित बयानों से देश की सियासत में आया उबाल
कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी अपने विदेशों दोरों में सुर्खियां बटोरने के लिए भारत की आलोचना करने से भी बाज नहीं आते। इसीलिए उन के विदेश दौरे कभी निर्विवाद नहीं होते। अमेरिका के दौरे पर गए राहुल गांधी ने इस बार फिर कुछ ऐसे बयान दिए कि उनको लेकर भारत में उनकी भारी आलोचना हो रही है। अपने एक के बाद एक विवादित बयानों और अजीबोगरीब विजन के चलते अपनी भद्द पिटवाने तक ही राहुल की कहानी खत्म नहीं होती। उन्होंने भारत की बुराई के साथ न सिर्फ चीन की तारीफ में कसीदे पढ़े, बल्कि अमेरिका की भारत विरोधी सांसद इल्हान उमर से मुलाकात भी की। चीन कितना फेयर प्लेस इस पर तर्क देने की जरूरत नहीं है। राहुल गांधी जिस जमीन (अमेरिका) पर भारत को फेयर प्लेस नहीं होने की बात कर रहे हैं, वहां आम लोगों के साथ कितना फेयर हो रहा है, ये आंकड़े साफ-साफ चुगली खाते हैं। अफ्रीकी-अमेरिकियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में ब्लैक्स पर कितना अत्याचार हो रहा है। मैपिंग पुलिस वॉयलेंस के अनुसार, 2013 से 2022 तक, अमेरिका में पुलिस के हाथों मारे गए कुल लोगों में से 25% अफ्रीकी-अमेरिकी थे, जबकि अमेरिका में इस समुदाय की आबादी केवल 13 परसेंट ही है। उधर, पाकिस्तान-खालिस्तान का समर्थन करने वाली सांसद से मिलने को लेकर भारत की सियासत में उबाल आना ही था। आइए, जानते हैं कि राहुल गांधी ने अमेरिका में कौनसे विवादित बयान दिए, जिसे लेकर इतना सियासी बवाल मचा है।

राहुल की भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर से की मुलाकात
अमेरिका में राहुल गांधी के बयान जहां विवादों को जन्म दे रहे हैं वहीं एक भारत विरोधी सांसद से मुलाकात को लेकर भी वे घिर गए हैं। अमेरिका की सांसद इल्हान उमर से मुलाकात करने के लिए राहुल की तीखी आलोचना हो रही है। कुछ तस्वीरों में राहुल गांधी कुछ अमेरिकी सांसदों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इन सांसदों में इल्हान उमर भी शामिल है। इल्हान उमर एक अमेरिकी सासंद और डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं। वे एक अफ्रीकी शरणार्थी हैं, जो कि चुनाव जीतकर अमेरिका की संसद में पहुंची हैं। वे हमेशा कश्मीर और खालिस्तान को अलग देश बनाए जाने वाली मांग का समर्थन करती रही हैं। वे अमेरिका की संसद में पहुंची उन दो मुस्लिम महिलाओं में से एक हैं, जो इजरायल का विरोध करती हैं। इल्हान सन 2022 में पीओके के दौरे पर भी गई थीं। अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक इल्हान के इस दौरे के लिए फंडिंग पाकिस्तान ने की थी। भारत विरोधी इल्हान ने सीनेट में पीएम मोदी के भाषण का बहिष्कार भी किया था।

हकीकत : कांग्रेस नेता राहुल राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त
राहुल गांधी की इल्हान से मुलाकात पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी राहुल गांधी की इल्हान उमर से मुलाकात की तस्वीर साझा की। उन्होंने कहा कि, ”कांग्रेस अब खुलेआम भारत के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान से उन्हें आम आते हैं और चीन से राजीव गांधी फाउंडेशन में पैसा आता है। भारत के विरोधी जितने भी देश और विदेशी सांसद हैं, वे सब उनके मित्र हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम ने इल्हान उमर से मुलाकात करने पर कहा कि कांग्रेस नेता राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। अमेरिका जाकर ऐसी सांसद से मिल रहे हैं, जो भारत के खिलाफ बोलती रही हैं, भारत के खिलाफ अभियान चलाती रही हैं। बीजेपी नेता निशिकांत दुबे ने कहा कि इल्हान उमर कश्मीर और खालिस्तान को अलग देश बनाने का समर्थन करती हैं। राहुल इसी एजेंडे के लिए अमेरिका में समर्थन जुटा रहे हैं।

भारत में सिखों को पगड़ी-कड़ा पहनने और गुरुद्वारे जाने की इजाजत है?
राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी के एक बयान ने सिखों को कितना कत्लेआम कराया था। यह जानते हुए भी राहुल गांधी ने अमेरिका के वर्जीनिया में लोगों से बातचीत में सिखों को लेकर अजीब बयान दे डाला। उन्होंने एक सिख को टारगेट करते हुए पूछा, पगड़ीधारी भाई नाम क्या है तुम्हारा। उन्होंने कहा, ”सबसे पहले आप लोगों को यह समझना होगा कि लड़ाई किस बारे में चल रही है. यह लड़ाई राजनीति के बारे में नहीं है। लड़ाई इस बारे में है कि आपका नाम क्या है। क्या एक सिख के तौर पर उन लोगों को भारत में पगड़ी पहनने की इजाजत दी जाएगी? क्या एक सिख होने के तौर पर उन्हें भारत में कड़ा पहनने की इजाजत दी जाएगी? क्या एक सिख गुरुद्वारा जा सकेगा? हमारी लड़ाई इस बारे में है और हम सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों के लिए लड़ रहे हैं।”

पुराने जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं राहुल गांधी
राहुल गांधी के सिखों के बारे में दिए इस अनावश्यक बयान पर बवाल होना ही था। अमेरिका में नेता प्रतिपक्ष के बयान पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मैं पिछले 60 सालों से भी ज्यादा समय से पगड़ी और कड़ा पहन रहा हूं और मुझे आज तक ऐसा कोई नहीं मिला जो कहे कि उसे पगड़ी और कड़ा पहनने में कोई दिक्कत है। यह उनके (राहुल गांधी के) पिता के समय की बात है जब नरसंहार हुआ था। 84 के दंगों में हमारे 3000 भाई-बहन मारे गए थे। ऐसा नहीं है कि उन्हें इन सब बातों की जानकारी नहीं है। वे काफी समय से राजनीति में हैं। इसलिए उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि अगर वे देश के बाहर या देश के अंदर भी इस तरह का बयान देंगे तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह एक ऐसा बयान है, जो पुराने जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है और इसकी कड़ी से कड़ी निंदा की जानी चाहिए। वे बिना किसी आधार के बयान देकर देश के बाहर रहने वाले हमारे भाइयों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली में सिखों ने राहुल के बयान को लेकर प्रदर्शन भी किया।

कांग्रेस भारत में समान अवसर मिलने पर आरक्षण को खत्म करेगी
आरक्षण जैसे गंभीर विषय पर भी राहुल गांधी बचकाना बयान देने से बाज नहीं आए। वाशिंगटन डीसी में जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों से बातचीत के दौरान एक छात्र ने राहुल गांधी से पूछा कि क्या जाति आधारित आरक्षण के अलावा जमीनी स्तर पर संस्थानों को मजबूत करने के और भी बेहतर तरीके हैं? इसके जवाब में राहुल गांधी ने आरक्षण को लेकर बयान दे दिया। उन्होंने कहा कि, ”कांग्रेस तब आरक्षण खत्म करने के बारे में सोचेगी, जब देश में सभी को समान अवसर मिलने लगेंगे और फिलहाल भारत में ऐसी स्थिति नहीं है।” उनका इशारा साफ था कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद आरक्षण जैसी व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा। राहुल के बयान ने आरक्षण के जिन्न के फिर जिंदा कर दिया और भाजपा से लेकर बसपा और अन्य दलों ने राहुल गांधी के बयान की आलोचना की है।

जब तक बीजेपी है, आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता 

आरक्षण खत्म करने वाले राहुल गांधी के बयान की केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि आरक्षण विरोधी एजेंडे का समर्थन करना हो या विदेश में भारत विरोधी बयान देना हो, राहुल गांधी ने हमेशा देश की सुरक्षा को खतरे में डाला है और देशवासियों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि जब तक बीजेपी है, आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही देश की एकता के साथ खिलवाड़ करने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि, “भाषा से भाषा, क्षेत्र से क्षेत्र और धर्म से धर्म में भेदभाव लाने की बात करना राहुल गांधी की विभाजनकारी सोच को दर्शाता है।

चीन उत्पादन में सबसे आगे, भारत में कुशल लोगों का सम्मान नहीं
कांग्रेस नेता राहुल गांधी का चीन के प्रति प्रेम अमेरिका की यात्रा के दौरान एक बार फिर छलका। इतना ही नहीं उन्होंने चीन के कसीदे पढ़ते-पढ़ते भारत के कौशल का भी अपमान कर दिया। उन्होंने टेक्सास यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक उत्पादन में चीन का प्रभुत्व है, चीन में कौशल का सम्मान होता है, इसलिए वहां बेरोजगारी नहीं है। उन्होंने भारत में उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किए जाने की जरूरत पर जोर देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि चीन इसीलिए बेरोजगारी का सामना नहीं कर रहा है, जबकि भारत और अमेरिका समेत पश्चिमी देश बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं।

विदेश में जाकर अपने देश की बुराई करना राहुल की आदत
राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि, अमेरिका में राहुल ने चीन की तारीफ की और कहा कि रोजगार के मोर्चे पर भारत फेल हो रहा है। उन्हें अपने देश में सारी बुराइयां दिखती हैं। उन्हें लगता है दूसरे देशों में सब कुछ अच्छा चल रहा है। विदेश में जाकर अपने देश की बुराई करना उनकी आदत बन गई है। ये बेहद गलत राजनीतिक परंपरा की शुरुआत है। सरकार और विपक्ष में आपसी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन विदेशी मंच पर जाकर अपने राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के लिए इस तरीके से इस्तेमाल करना उचित नहीं है। राहुल विपक्ष के नेता हैं, वे सरकार के समक्ष अपना सुझाव रख सकते हैं, लेकिन इस तरह से देश की बुराई करना कतई उचित नहीं है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि, राहुल गांधी चीन की झूठी ब्रांडिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समय में रक्षा क्षेत्र में आयात ज्यादा था, जबकि अब हम निर्यात कर रहे हैं। इससे पता चलता है कि देश में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ रही है। जो कोई भी विदेश में भारत को गाली देता है, मेक इन इंडिया को गाली देता है, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग को गाली देता है, वो देश का दुश्मन होगा, वो विपक्ष का नेता नहीं हो सकता है।

भारत में बेरोजगारी बढ़ने से युवा हो रहे हैं परेशान
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अमेरिका में भारत में बेरोजगारी का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि महाभारत में युद्ध लड़ने की कला में निपुण गुरु द्रोणाचार्य से जब आदिवासी समुदाय से आने वाले एकलव्य ने धनुर्विद्या सीखने की इच्छा प्रकट की तो उन्होंने उससे उसका दाहिना अंगूठा मांग लिया था। उन्होंने कहा कि कौशल का सम्मान करके तथा कुशल लोगों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर भारत की क्षमता को उभारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि आप सिर्फ आबादी के एक-दो प्रतिशत लोगों को सशक्त बनाकर भारत की क्षमता में इजाफा नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में बेरोजगारी बढ़ने से युवा परेशान हो रहे हैं।

हकीकत : हमने बेरोजगारी की दर कम की, राहुल देश को बदनाम ना करें
राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि, ”मुझे लगता है कि शायद कुछ लोगों को पढ़ने-लिखने की आदत कम है। वे अपने समय के आंकड़े देख लें और एनडीए के समय के आंकड़ों को देखें, बड़ा अंतर है। हमने बेरोजगारी की दर को बहुत कम किया है। राहुल गांधी बाहर जाकर भारत को बदनाम ना करें । दुनिया का जो विश्वास भारत पर बना है, उससे हजारों लाख करोड़ का निवेश भारत में आ रहा है। दुनिया को भारत से बहुत उम्मीद है। केंद्रीय कृषि, किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, ”राहुल गांधी लगातार तीन बार हारने के बाद कुंठित हो गए हैं और देश की छवि खराब करके अमेरिका में अपनी कुंठा निकाल रहे हैं। देश के बाहर जाकर देश की छवि खराब करना देशद्रोह जैसा अपराध है। कोई देश भक्त ऐसा नहीं कर सकता।

मीलॉर्ड, क्या एक बार फिर अराजकता फैलाने की सुपारी ले ली आपने? क्या चाहते हैं हाई कोर्ट के जज? कथित किसानों को दिल्ली जाकर आग लगाने दी जाए और प्रधानमंत्री मोदी के आवास को घेरने दिया जाए; गुंडों को अधिकार दे रहे हो और सरकार को फर्ज समझा रहे हो?

मीलॉर्ड ये किसान प्रदर्शन है या दंगाइयों को छुड़वाने का प्रदर्शन?
सुभाष चन्द्र

लेखक 
पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट ने लगता है एक बार फिर देश को अराजकता की आग में झोकने की सुपारी ले ली है जो आदेश में यह कहा है कि ‘किसानों” को प्रदर्शन का अधिकार है लेकिन नागरिकों की सुरक्षा करना सरकार का भी कर्तव्य है।  

जिन आंदोलनों में बंदूक, लाठी और तलवारें हो, उपद्रविओं को रिहा करने की मांग हो, प्रधानमंत्री के मरने की बात हो रही हो, क्या उसे प्रदर्शन कहा जा सकता है? किसानों की आड़ में देश को अराजकता की आग में झोंका जा रहा है, जिसे मोदी-योगी विरोधी पार्टियों के पूर्ण समर्थन से देश में आग लगाने का प्रयास किया जा रहा है, क्या अदालतों को नहीं मालूम? क्या मीलॉर्ड पिछले प्रदर्शन में लाल किले पर हुए हंगामे को भूल गए हैं? इतना ही नहीं, जिस प्रकार ट्रैक्टरों को लेकर आया गया है, क्या मीलॉर्ड ने ऐसे ट्रेक्टर देखे हैं? अराजक तत्वों के हाथ की कठपुतली मत बनो मीलॉर्ड?

यही हाई कोर्ट पिछले वर्ष NH - 44 पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से हाईवे को मुक्त कराने के आदेश दे रहा था यानी उस आदेश में किसानों को बलपूर्वक उठाने की बात कर रहा था और आज कह रहा है उन्हें प्रदर्शन का अधिकार है। साथ में सरकार को प्रवचन दे रहे हैं हाई कोर्ट के जज कि नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी का काम आपका(सरकार) का है।

किसान आंदोलन में शरजील इमाम, उमर खालिद का पोस्टर

किसान आंदोलन में शरजील इमाम और उमर खालिद का पोस्टर क्या कर रहा है।

हरियाणा सरकार ने अदालत में बताया कि किस तरह का उग्र प्रदर्शन करने की तैयारी की हुई है कथित किसानों ने और वे शम्भू बॉर्डर पर खालिस्तान से जुडी बातें भी कर रहे हैं, किसान मोडिफाई किए गए ट्रैक्टरों के साथ हैं और हथियारों की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता।  

इतने पर भी यदि हाई कोर्ट के जजों को लगता है कि कथित किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे तो ऐसे जजों की सोच पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है। यह नहीं माना जा सकता कि सोशल मीडिया, टीवी और समाचार-पत्रों की रिपोर्ट हाई कोर्ट के जजों तक नहीं पहुँच रही होंगी  फिर भी आप उन्हें प्रदर्शन का अधिकार दे रहे हो।  

“रेलवे ट्रैक रोकना किस तरह जायज है, सड़के जाम करना कैसे जायज है, मोदी अबकी पंजाब आएगा तो जिंदा वापस नहीं जाने देंगे, हमें खालिस्तान दे दो, हमें पाकिस्तान से जुड़ जाने दो,  मोदी का ग्राफ बढ़ गया है, उसे नीचे लाना है किसी भी तरह से और हम विपक्ष के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं”। 

अफ़सोस की बात है कि इतना सब होने के बाद भी हाई कोर्ट के जज कह रहे थे कि किसान प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे हैं तो इसमें हरियाणा सरकार को क्या आपत्ति है; आखिर क्यों हरियाणा सरकार हाइवे पर बेरिकेडिंग कर रही है।  

ऐसी बातों के चलते भी अगर हाई कोर्ट के जज अंधे हो कर कहते रहेंगे कि किसानों को प्रदर्शन का अधिकार है तो इसका मतलब साफ़ है कि ऐसे जजों ने देश को अराजकता की आग में झोकने की सुपारी ली हुई है। उधर CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर वकीलों को अदालत में आने में समस्या होती है तो हम “सामजस्य बैठाएंगे”। मतलब केवल वकीलों की समस्या पर ध्यान है जनता जाए भाड़ में। 

सपा नेता दे रहा गृहयुद्ध की धमकी
तजिंदर विर्क खुद को किसान बताने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन ये समाजवादी पार्टी के नेता हैं। ये शख्स भारत में गृहयुद्ध की धमकी दे रहा है।

खालिस्तान बनाने दो…हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जाएंगे
फर्जी किसान आंदोलन में शामिल एक किसान की बात सुनिए, हमको छोड़ दो, खालिस्तान बनाने दो…हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जायेंगे।

पंजाब पुलिस के जवान को ट्रैक्टर से कुचला
ये कौन से किसान हैं जो खून के प्यासे हैं? पंजाब पुलिस के जवान को ये उग्रवादी ट्रैक्टर से कुचलता हुआ, 50 मीटर तक घसीटता रहा। ये आतंकवाद है, उग्रवाद है। पंजाब आम आदमी पार्टी की सरकार है और उन्होंने फर्जी किसानों और खालिस्तानी आतंकवादियों को खुली छूट दे रखी है। पुलिस के जवानों को रौंदा जा रहा है और प्रशासन सोया हुआ है।

किसानों ने फ्लाईओवर पर सुरक्षा बोर्ड को तोड़ दिया
फर्जी किसान प्रदर्शनकारियोंने हरियाणा-पंजाब शंभू सीमा पर फ्लाईओवर पर सुरक्षा के लिए लगाए गए बोर्ड को तोड़ दिया। यह कैसा शांतिपूर्ण आंदोलन है।

बंदूक के साथ प्रदर्शन करने आए किसान
क्या किसान कभी बंदूक लेकर चलता है। ये किसान बंदूक के साथ प्रदर्शन करने आए हैं। बंदूक के साथ आए ये लोग किसान नहीं हैं। ये युद्ध पर आमादा हैं।

16 लाख की कार के साथ प्रदर्शन
किसान इतने मजबूर हैं कि उन्हें अपनी 16 लाख की कार के साथ प्रदर्शन करने सड़क पर उतरना पड़ा है। जिस गाड़ी पर ये “तथाकथित किसान” बैठे हैं उसकी कीमत 16 लाख से अधिक है! क्या कोई बता सकता है कि एक सामान्य किसान इतनी कमाई कैसे कर सकता है कि उसके पास 16 लाख से अधिक की कार हो? क्या वाकई एक सामान्य किसान सिर्फ एक राज्य तक सीमित इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन कर रहा है? और अगर वे किसान हैं और इतने अमीर हैं तो अब वे क्या चाहते हैं? संपूर्ण ऋण माफ़ किया जाए ताकि सामान्य भारतीय करदाता उसका भुगतान कर सके?

क्या चाहते हैं हाई कोर्ट के जज? कथित किसानों को दिल्ली जाकर आग लगाने दी जाए और प्रधानमंत्री मोदी के आवास को घेरने दिया जाए जैसा अमेरिका में बैठा गुरपतवंत सिंह पन्नू आदेश दे रहा है। दिल्ली को श्रीलंका बनाना चाहता है विपक्ष। 

यही किया था CJI बोबडे ने पिछले किसान आंदोलन के समय जब दिल्ली पुलिस से किसानों के 26 जनवरी के मार्च पर रोक लगाने की मांग की थी लेकिन बोबडे ने मना कर दिया और कहा था कि कानून व्यवस्था देखना आपका काम है और उसके बाद क्या हुआ लाल किले पर सबने देखा। आज वही सुप्रीम कोर्ट कह रहा है मुझे RTI के जवाब में कि मुझे उस विषय पर सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है और यह भी कहा है कि जो Experts की Committee बनाई थी उसकी रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई यह भी उनके रिकॉर्ड में नहीं है। कितना बड़ा फ्रॉड किया कोर्ट ने। 

कथित किसानों को लेकर जितना कांग्रेस, आप या अन्य विपक्षी नेताओं को कटघरे में खड़ा करने की जरूरत है उससे ज्यादा जरूरत न्यायाधीशों की हरकतों को बेनकाब करने की है।  

मोदी की लोकप्रियता कम नहीं होगी पाखंडी राहुल “कालनेमि” समझ ले और तू भी समझ ले केजरीवाल और अखिलेश यादव : ये कथित किसान तुम्हारे दलों को खेतों में ही दफ़न कर देंगे अबकी बार।