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बंगाल : 15 साल से बंद आसनसोल का Durga Mandir के बीजेपी के जीतते ही खुले कपाट: हिंदू भगवा लहराकर बोले- जय श्रीराम; हिन्दुओं योगी की बात याद रखो कि "बंटे तो कटे।"

            बंगाल में BJP की जीत के बाद आसनसोल में दशकों बाद खुला दुर्गा माता मंदिर (साभार : Video SS)
पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया है। 15 साल बाद ममता बनर्जी की सत्ता चली गई है और BJP ने 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इस बड़ी जीत के साथ ही आसनसोल में बरसों से बंद पड़ा एक Durga Mandir सोमवार (4 मई 2026) को भक्तों के लिए खोल दिया गया है। जो दिखाता है कालनेमि हिन्दू महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज में हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया था। हिन्दुओं को अपने धार्मिक उत्सवों को मनाने के लिए कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते थे। यह तो एक झांकी है पूरी फिल्म तो अब सामने आनी शुरू होनी है। 
बीजेपी को भी महिला आरक्षण मुद्दे पर फोकस करने की बजाए बंगाल में हिन्दुओं के खोए स्वाभिमान को जीवित करना होगा। आरक्षण देना है तो वर्तमान संख्या में दो। ये नई दुकाने खोलकर अर्थव्यवस्था पर बोझा मत डालो। 

बंगाल चुनाव सारे हिन्दू समाज के लिए eye opener है। इसे सिर्फ ममता की हार मत समझो। जिस तरह बंगाल में हिन्दू ने एकजुट होकर वोट दिया है बंगाल की तर्ज पर शेष भारत में भी करनी होगी। अगर हिन्दू ऐसा करता है सारे कट्टरपंथी और सनातन विरोधी बिलों में घुस जाएंगे। हिन्दुओं को जातियों में बाँटने वाले नेताओं और उनकी पार्टियों को सत्ता से दूर रखना होगा। योगी की बात याद रखो कि "बंटे तो कटे।"   

यह भी नहीं भूलना चाहिए कि मुसलमानों में हिन्दुओं से कही अधिक फिरके हैं, एक फिरका दूसरे फिरके की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकता, दूसरे फिरके के कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न नहीं कर सकता। इतना ही नहीं शादी उर्फ़ निकाह तक नहीं कर सकता। लेकिन चाहे किसी भी जाति से हो एक भी मंदिर में जाकर पूजा करता है और एक ही शमशान में अंतिम संस्कार करता है। ये सब जातियों का बवंडर इन्ही हिन्दू विरोधी नेताओं का है। जो अपनी कुर्सी की खातिर हिन्दुओं को विभाजित करने का घिनौना काम करता है और हिन्दू इनके मकड़जाल में फंस जाता है। कालनेमि हिन्दुओं से लेकर मुस्लिम नेताओं से दलित उत्पीड़न की बात सुनी जाती है लेकिन इनमे से किसी माँ का दूध नहीं पिया जो मुसलमानों की जातियों में भेदभाव को दूर करने के लिए मुंह खोल सके। इसे बोलते हैं इस्लामिक एकजुटता।  

चुनावी वादे के साथ खुले ताले

आसनसोल उत्तर से BJP के नए विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने चुनाव से पहले एक बड़ा वादा किया था। उन्होंने कहा था कि जीत मिलते ही वह बंद Mandir को खुलवाएँगे। सोमवार (4 मई 2026) को जैसे ही BJP की जीत पक्की हुई, विधायक जी खुद मंदिर पहुँचे। उन्होंने Mandir के ताले खुलवाए और पूजा-अर्चना की।

श्री श्री Durga Mata चैरिटेबल ट्रस्ट इस मंदिर की देखरेख करता है। स्थानीय विवादों और प्रशासनिक पाबंदियों की वजह से यह Mandir सालों से आम लोगों के लिए बंद था। यहाँ साल में सिर्फ दुर्गा पूजा और लक्ष्मी पूजा के वक्त ही थोड़ी-बहुत चहल-पहल होती थी। अब यह मंदिर पूरे साल भक्तों के लिए खुला रहेगा।

भक्तों और कार्यकर्ताओं का जश्न

जैसे ही Durga Mandir के गेट खुले, वहाँ भारी भीड़ जमा हो गई। BJP कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने मिलकर जयकारे लगाए। लोग इसे सिर्फ एक मंदिर का खुलना नहीं, बल्कि इलाके में आए राजनीतिक बदलाव का प्रतीक मान रहे हैं। पश्चिम बर्धमान जिले की सभी 9 सीटों पर BJP ने कब्जा किया है, जिससे समर्थकों में जबरदस्त उत्साह है।

इस चुनाव में BJP ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने 206 सीटें जीतकर TMC(80 सीट) को काफी पीछे छोड़ दिया है। पूरे बंगाल में औसतन 92 फीसदी वोटिंग हुई थी। हालाँकि, फालता सीट पर गड़बड़ी की शिकायतों के बाद 21 मई को दोबारा वोट डाले जाएँगे और वहाँ का रिजल्ट 24 मई को आएगा।

बंगाल : दूसरे चरण के मतदान से पहले तृणमूल कांग्रेस(TMC) के कार्यकर्ता रफीकुल इस्लाम के घर मिला क्रूड बमों का जगीरा

                   NIA ने शुरू की TMC कार्यकर्ता के घर मिले बम मामले की जाँच (साभार: न्यूज18/एनडीटीवी)

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से दूसरे चरण से पहले पश्चिम बंगाल में 79 क्रूड बम बरामद होने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर उठाया गया है।

कोलकाता पुलिस ने दक्षिण 24 परगना जिले के भांगड़ इलाके में रफीकुल इस्लाम के घर से ये बम और दूसरी आपत्तिजनक सामग्री बरामद की थी। बीजेपी ने आरोपित को तृणमूल कांग्रेस(TMC) का कार्यकर्ता बताया है। इन विस्फोटकों को इस तरह रखा गया था जिससे आम लोगों की जान और संपत्ति को सीधा खतरा था।

इससे पहले चुनाव आयोग ने रविवार (26 अप्रैल 2026) को पश्चिम बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि राज्य में बम बनाने की गतिविधियों में शामिल लोगों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए और ऐसी सभी सामग्री जब्त की जाए।

आयोग ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर, सभी डीसीपी, एसपी और थाना स्तर तक के अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है कि अगर उनके क्षेत्र में विस्फोटक बरामद हुए या धमकी की कोई घटना सामने आई तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। आयोग ने साफ कहा है कि संबंधित अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन्हें ‘बख्शा नहीं जाएगा।’

सभी जिलों में विशेष अभियान पहले से शुरू हो चुका है। आयोग ने यह भी तय किया है कि बम बनाने से जुड़े सभी मामलों की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) करेगी ताकि चुनावी माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए चुनाव प्रचार सोमवार (27 अप्रैल 2026) को खत्म हो जाएगा। दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा।

असम : कांग्रेस उम्मीदवार ने कांग्रेस को बताया ‘गद्दार’, मतदान से पहले छोड़ी पार्टी: कहा- मियाँ लोगों का करती है तुष्टिकरण


आज परिवार के कारण कांग्रेस में ही फूट पड़ती जा रही है। लगता है कुछ समय बाद पार्टी में सिर्फ परिवार गुलामों का ही बोलबाला रहने वाला है। 2024 के बाद से जिस तेजी से लोग कांग्रेस की देश विरोधी नीतियों की वजह से पार्टी छोड़ रहे हैं कांग्रेस को जड़ से ख़त्म करने में लगे हैं। हकीकत यह है कि ब्रिटिश नागरिक द्वारा कांग्रेस का गठन आज़ादी के लिए नहीं बल्कि स्वतंत्रता संग्राम से भारतीयों का ध्यान भटकाने के लिए किया था, जिसे आज राहुल गाँधी द्वारा भारत विरोधियों से मेलजोल जाहिर कर रहा है।     

असम में विधानसभा चुनाव के लिए गुरुवार (9 अप्रैल 2026) को मतदान से ठीक एक दिन पहले उदलगुरी सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेन दैमरी ने पार्टी से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए और पार्टी को ‘गद्दार’ बताया है। मीडिया से बातचीत में दैमरी ने कहा कि कांग्रेस ने उनके साथ धोखा किया और उनकी बातों को नजरअंदाज किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरेन ने कहा, “कांग्रेस एक गद्दार पार्टी है। उन्होंने मुझे ठगा है। टिकट देने के बाद भी उन्होंने मुझसे कोई संपर्क नहीं किया। मैंने कई बार फोन किया लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।” दैमरी ने दावा किया कि उन्हें पार्टी नेताओं से कोई समर्थन या सहयोग नहीं मिला है।

इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस मियाँ समुदाय का तुष्टिकरण करती है।” गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में होने हैं और मतदान सुबह 7 बजे से शुरू होगा।

असम CM की पत्नी को निशाना बनाने के लिए कांग्रेस का फर्जीवाड़ा, पाकिस्तानी के खोए अमीरात ID कार्ड में हेराफेरी कर बताया रिनिकी का UAE पासपोर्ट


असम विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर लगाए गए आरोपों को लेकर कांग्रेस खुद ही फँसती नजर आ रही है। दरअसल, पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ व बारबुडा के 3 विदेशी पासपोर्ट हैं। उन्होंने इन दावों के समर्थन में कुछ दस्तावेज भी दिखाए।

हालाँकि, मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी दोनों ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि ये आरोप झूठे, मनगढ़ंत और राजनीतिक मकसद से लगाए गए हैं। इस पूरे मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। जिन दस्तावेजों को कांग्रेस की ओर से पेश किया गया था, उनमें कई गड़बड़ियों की चर्चा पहले ही सामने आ गई थीं।

अब सामने आया है कि यह दस्तावेज असल में एक पाकिस्तानी नागरिक के खोए हुए अमीरात आईडी कार्ड की फोटो से छेड़छाड़ करके बनाया गया था। जानकारी के मुताबिक, ‘Pakistani in Ajman’ नाम के एक फेसबुक ग्रुप में टीपू सुल्तान नाम के व्यक्ति ने 28 मार्च को पोस्ट कर बताया था कि उसके दो एमिरेट्स आईडी कार्ड, एक कार का दस्तावेज और एक एटीएम कार्ड खो गए हैं। उसने अपने आईडी कार्ड की तस्वीर भी शेयर की थी।

उस आईडी कार्ड का नंबर 784-1996-5557498-8 है। यह वही नंबर है जिसे कांग्रेस ने रिनिकी भुइयां सरमा के कथित ‘UAE पासपोर्ट’ के रूप में दिखाया था। उस व्यक्ति की जन्मतिथि 10 जुलाई 1996 थी और ID नंबर के बीच के अंक भी उसी वर्ष को दिखाते हैं।

जब दोनों तस्वीरों की तुलना की गई तो साफ दिखा कि नाम को बदलकर ‘अशरफ अब्देलकादर अब्देलसमद हुसैन’ की जगह ‘रिनिकी भुइयां सरमा’ कर दिया गया। जन्मतिथि, जारी करने और समाप्ति की तारीख भी बदल दी गई लेकिन ID नंबर वही रखा गया।

यहाँ तक कि राष्ट्रीयता भी नहीं बदली गई और मिस्र ही बनी रही। यह भी सामने आया कि फेसबुक पोस्ट में ID कार्ड का पीछे का हिस्सा नहीं था। ऐसे में माना जा रहा है कि पीछे की तस्वीर किसी और स्रोत से ली गई और उसमें भी बदलाव किया गया।

इस पूरे मामले पर असम के मंत्री पियूष हजारिका ने भी प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह ‘गोल्डन कार्ड’ नंबर उसी फेसबुक ग्रुप से लिया गया है। उन्होंने लिखा, “पवन खेड़ा ने ‘गोल्डन कार्ड’ नंबर फेसबुक से चुराया है। कितनी शर्मनाक बात है।”

‘गोल्डन कार्ड VS रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड’

फेसबुक पर जो दस्तावेज सामने आया उसमें ‘रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड’ लिखा हुआ है जबकि कांग्रेस द्वारा पेश किए गए दस्तावेज में उसे ‘गोल्डन कार्ड’ बताया गया। ऐसे में कांग्रेस यह दावा कर सकती है कि यह जालसाजी नहीं है बल्कि एक अलग असली कार्ड है जिसका आईडी नंबर वही है। लेकिन यह संभव नहीं है। UAE में हर निवासी को 15 अंकों का एक यूनिक एमिरेट्स आईडी नंबर दिया जाता है।

यह नंबर व्यक्ति के बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से जुड़ा होता है, जो फेडरल अथॉरिटी फॉर आइडेंटिटी, सिटिजनशिप, कस्टम्स एंड पोर्ट सिक्योरिटी के केंद्रीय डेटाबेस में दर्ज रहता है। यह नंबर कभी नहीं बदलता, चाहे कार्ड की अवधि खत्म हो जाए, उसे रिन्यू किया जाए, व्यक्ति वीजा या स्पॉन्सर बदल ले या फिर गोल्डन वीजा में अपग्रेड हो जाए।

UAE के असली एमिरेट्स आईडी नंबर पूरी तरह यूनिक होते हैं और दोबारा इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। इसलिए अलग-अलग दस्तावेज होने के बावजूद एक ही नंबर का इस्तेमाल संभव नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि कॉन्ग्रेस द्वारा पेश किया गया दस्तावेज फर्जी है।

विदेशी-घुसपैठिए ही नहीं, बिहार में 12.5 लाख ऐसे भी वोटर जो अब नहीं हैं जिंदा: 35.5 लाख लोगों को लिस्ट से बाहर करेगा चुनाव आयोग

                                                                      बिहार में वोटर वैरिफिकेशन जारी ( फोटो साभार- X @ECI)
बिहार में वोटर वेरिफिकेशन का काम जोर शोर से चल रहा है। अब तक करीब 7.90 करोड़ लोगों में से 6.60 करोड़ मतदाताओं का गणना फॉर्म जमा कराया जा चुका है यानी करीब 88 फीसदी मतदाताओं का वेरिफिकेशन हो चुका है। अब तक 5.74 करोड़ फॉर्म चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। बीएलओ अभी भी घर-घर जाकर फॉर्म जमा कर रहे हैं और 963 एईआरओ लगातार इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

चुनाव आयोग ने कहा, “करीब 1 लाख बीएलओ जल्द ही घर-घर जाकर तीसरे राउंड का दौरा शुरू करेंगे। सभी राजनीतिक दलों के 1.5 लाख बूथ-स्तर के एजेंट हर दिन 50 मतदाता पहचान पत्र सत्यापित और जमा कर सकते हैं। बिहार के 261 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के सभी 5,683 वार्डों में विशेष शिविर भी लगाए जा रहे हैं ताकि कोई भी मतदाता वोटर लिस्ट में शामिल होने से वंचित न रह जाए”

                                                                                                              (ग्राफिक्स साभार- न्यूज 18)

किसके नाम कटे हैं?

अब तक की कवायद में ही करीब 35.50 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं जिनमें मृतकों के नाम, डुप्लिकेट मतदाता या प्रवासियों के नाम शामिल हैं। इनमें 1.59 फीसदी मृत मतदाता, 2.2 फीसदी स्थायी रूप से राज्य से बाहर गए मतदाता, 0.73 फीसदी ऐसे मतदाता हैं जिन्होंने एक से अधिक जगहों पर अपना नाम वोटर लिस्ट में रखा हुआ है। ये पूरा आँकड़ा 4.52 फीसदी है जिसे संख्या के हिसाब से बात की जाए तो ये 35.69 लाख से ज्यादा हैं।

चुनाव आयोग को नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों के कुछ विदेशी नागरिक भी मिले, जो मतदाता के रूप में पंजीकृत थे। जाँच के बाद उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएँगे।

राज्य से बाहर रहने वाले मतदाता ऐसे भरें फॉर्म

जो मतदाता अस्थायी रूप से राज्य से बाहर हैं, उनसे या तो सीधे संपर्क किया जा रहा है या उन्हें अखबारों में विज्ञापन देकर जानकारी दी है ताकि वे अपने गणना फॉर्म भर सकें।

चुनाव आयोग ने कहा, “अस्थायी रूप से राज्य से बाहर रहने वाले मतदाता अपने मोबाइल फोन का उपयोग करके ECINet ऐप या https://voters.eci.gov.in पर ऑनलाइन गणना फॉर्म भर सकते हैं। अगर उनके परिवार का कोई सदस्य राज्य में मौजूद है तो व्हाट्सएप या किसी अन्य माध्यम से एप्लिकेशन फॉर्म लेकर ऑनलाइन BLO को भेज सकते हैं।”

चुनाव आयोग ने कहा है कि अगर कोई गलती सुधारना चाहता है या कोई अपडेट करना चाहता है तो ऑनलाइन कर सकता है।

विपक्ष पहुँचा सुप्रीम कोर्ट

बिहार में मतदाता सूची संशोधन का विपक्ष लगातार विरोध कर रहा है। इसको लेकर चुनाव आयोग भी विपक्ष के निशाने पर है। महुआ मोइत्रा, योगेंद्र यादव, मनोज झा और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) सहित कई विपक्षी नेताओं और संगठनों ने इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चुनाव आयोग ने नागरिकों पर ही पहचान साबित करने का भार डाल दिया है। राज्य में प्रवासियों की संख्या और गरीबी को देखते हुए ये गलत है। चुनाव आयोग ने जिन दस्तावेजों की माँग की है इससे लाखों मतदाता वोटिंग प्रक्रिया से वंचित रह जाएँगे। उन्होंने मतदाता प्रमाण पत्र के रूप में आधार कार्ड को शामिल नहीं करने पर भी सवाल उठाए।

हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (10 जुलाई 2025) को एसआईआर पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने हालाँकि सुझाव दिया कि चुनाव आयोग आधार कार्ड, ईपीआईसी कार्ड और राशन कार्ड को भी पहचान पत्र के लिए शामिल करे। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

सीमांचल राज्यों में मिले थे जनसंख्या से ज्यादा आधार कार्ड

बिहार के सीमांचल 4 जिलों कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया में आधार कार्ड की संख्या आबादी से अधिक मिली है। इन सीमांचल इलाकों में 100 लोगों पर 120-126 आधार कार्ड मिले हैं। इससे आधार कार्ड की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठ गए हैं। ऐसे में आधार कार्ड को पहचान पत्र में शामिल नहीं करने के फैसले पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया है कि 2025 में जनवरी से मई तक हर महीने औसतन 26 हजार से लेकर 28 हजार आवेदन निवास प्रमाण पत्र के लिए किशनगंज में आ रहे थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही चुनाव आयोग की यह प्रक्रिया चालू हुई यह संख्या तेजी से बढ़ गई।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि जुलाई के 6 दिनों में ही निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 1.28 लाख से अधिक आवेदन किशनगंज में आ गए। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि किशनगंज में घुसपैठिए बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

दिल्ली दंगों में IB अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोपी ताहिर हुसैन AIMIM से टिकट पाकर पहुँचा हाईकोर्ट, ‘विधायकी का चुनाव लड़ना है, जमानत दे दो’

असदुद्दीन ओवैसी को दिल्ली में चुनाव लड़ने के लिए हिन्दू दंगों के आरोपी मिलने से स्पष्ट हो गया है कि AIMIM सिर्फ मुसलमानों के लिए है इसे न हिन्दुओं की चिंता और न ही संविधान की। अपने आपको बैरिस्टर कहने वाले को क्या कानून नहीं मालूम? पूछो इस बैरिस्टर से कि एक कातिल और हिन्दू विरोधी दंगे के आरोपी को टिकट क्यों दिया? जो भी, चाहे वह किसी भी धर्म या मजहब से ताल्लुक रखता हो, दिल्ली या दिल्ली से बाहर AIMIM को वोट देता है उसे दोगला कहने में कोई हिचक नहीं। तेलंगाना में भी केवल मुस्लिम इलाके या जहाँ मुसलमान आबादी हिन्दुओं से ज्यादा हो वहां से AIMIM अपना उम्मीदवार उतारती है। हिन्दुओं को बाटने के लिए दलित हितों की बात करता है। लेकिन मुसलमानों में हिन्दुओं से ज्यादा जातियां है और इतनी दुश्मनाई है कि एक दूसरे की मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ सकते, दूसरे के कब्रिस्तान में मुर्दा दफ़न नहीं कर सकते।   

दिल्ली में फरवरी 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने अंतरिम जमानत माँगी है। ताहिर हुसैन अब एआईएमआईएम में शामिल हो चुका है, उसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद सीट से AIMIM ने टिकट दिया है। इसके बाद उसने चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की है। ताहिर हुसैन ने याचिका में 14 जनवरी से 9 फरवरी 2024 तक का समय माँगा है, ताकि वो चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सके।

याचिका पर सुनवाई पहले जस्टिस अमित शर्मा के सामने होनी थी, लेकिन उन्होंने खुद को मामले से अलग कर लिया। इसके बाद इसे जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की अदालत में भेजा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब यह मामला 13 जनवरी को सुना जाएगा।

अरविंद केजरीवाल के मामले का दिया हवाला

ताहिर हुसैन की दलील है कि वह चार साल नौ महीने से जेल में हैं और अब तक मुकदमे में अभियोजन पक्ष के केवल 20 गवाहों की गवाही हुई है, जबकि कुल गवाहों की संख्या 114 है। उनका तर्क है कि मुकदमे के लंबा खिंचने के कारण उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए ताकि वह चुनाव प्रचार कर सकें। हुसैन ने याचिका में यह भी कहा कि चुनाव प्रचार प्रक्रिया का हिस्सा बनना उनके लिए जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें AAP नेता अरविंद केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेने के लिए जमानत दी गई थी।
हुसैन पर दिल्ली दंगों के समय खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था, जिनके शरीर पर 51 चोटों के निशान पाए गए थे। उनके पिता रविंदर कुमार ने पुलिस को बताया था कि उनका बेटा 25 फरवरी 2020 से लापता था। अगली सुबह उनका शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ। शर्मा के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले, जो उनके साथ हुई क्रूरता को दर्शाते हैं। इस मामले के साथ ही हुसैन पर कई अन्य आरोप भी हैं।
जानकारि के मुताबिक, हुसैन ने अब तक अपने खिलाफ दर्ज 12 मामलों में से 8 में जमानत हासिल की है। हालाँकि, वह अभी भी 3 मामलों में हिरासत में हैं, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक मनी लॉन्ड्रिंग मामला और दिल्ली दंगों से संबंधित बड़ी साजिश का मामला शामिल है।

 

दिल्ली : अरविंद केजरीवाल के लिए उत्तर प्रदेश-बिहार के वोटर फर्जी और बांग्लादेशी-रोहिंग्या जान से प्यारे ; जिन रोहिंग्यों को कोई मुस्लिम देश तक पनाह देने को तैयार नहीं विपक्ष क्यों तड़प रहा; जागो दिल्लीवालों जागो, बटोगे तो निश्चितरूप से कटोगे

                                अरविंद केजरीवाल और बांग्लादेशी (साभार: हिंदुस्तान/X-AmitMalviya)
CAA विरोध में बने शाहीन बागों का असली मकसद पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और रोहिंग्यों का जमावड़ा था। जिसे लगभग हर विपक्षी ने बिरयानी, कोरमा और फलों का नाश्ता देकर मुसलमानों में डर बैठाया कि मोदी सरकार तुम्हे निकालने की तैयारी कर रही है और पागल मुसलमान भी इस झूठे पाखंड को सच मान बैठा। पूरी दुनिया में भारतीय विपक्ष घुसपैठियों के साथ खड़ा होता, जबकि विदेशों में ऐसे नेताओं और पार्टियों पर कानूनी कार्यवाही होती है। खैर, दिल्ली चुनाव में असलियत सामने आ गयी। दिल्ली चुनाव साबित करेगा कि जनता देश के साथ है या घुसपैठियों के साथ। अगर दिल्ली में केजरीवाल की सरकार बनती है तो ये दिल्ली वालों के लिए डूब मरने की बात होगी। आसानी से किसी घुसपैठिये पर हाथ नहीं डाल पाओगे। यानि बटोगे तो निश्चितरूप से कटोगे।    

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में जारी विधानसभा चुनावों के नाम पर स्कैम का आरोप लगाया है। यूपी-बिहार के लोगों को फर्जी वोटर बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर रही है और स्थानीय चुनाव अधिकारी बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। वहीं, भाजपा ने केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में चुनाव के नाम पर स्कैम हो रहा है। बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर रही है। स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। आज चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत की है। अगर चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद संजय सिंह के साथ चुनाव आयुक्त से मिलने के लिए गए। वहाँ उन्होंने भाजपा को लेकर कई शिकायतें कीं। केजरीवाल ने कहा, “हमारे कुछ मुद्दे थे। इनमें से एक था दिल्ली विधानसभा के अंदर 15 दिसंबर से 7 जनवरी के बीच यानी 22 दिन में 5500 वोट कटने के लिए आ गए हैं।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ एक लाख मतदाता हैं और इसमें से साढ़े पाँच लाख वोट काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी अधिकारियों ने जब इन मामलों में सुनवाई की तो पता चला इन लोगों में से किसी ने वोटर लिस्ट में से अपना नाम हटाने का आवेदन नहीं दिया था। केजरीवाल का कहना है कि इन लोगों के नाम से फर्जी आवेदन दिया गया था।

केजरीवाल ने घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा, “इसका मतलब ये हुआ कि बहुत बड़े स्केल पर स्कैम चल रहा है। बहुत बड़ा फ्रॉड चल रहा है। पिछले 15 दिनों में 13000 नए वोटरों का नाम जोड़ने के लिए आवेदन आए हैं। ये लोग अचानक कहाँ से आ गए? जाहिर है ये यूपी-बिहार से ला-ला कर… यूपी और आसपास के स्टेट से ला-ला कर फर्जी वोट बनवा रहे हैं ये लोग (भाजपा)।”

उन्होंने कहा कि किसी विधानसभा में 18.5 प्रतिशत वोट इधर-उधर कर दिए जाएँ तो ये चुनाव थोड़े है, ये तो तमाशा है… नाटक है। इसके अलावा, केजरीवाल ने नई दिल्ली से भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा पर नोट बाँटने और जॉब लगाने जैसे वोटरों को लुभाने का आरोप लगाया और इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से की।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “प्रवेश वर्मा खुलेआम नई दिल्ली क्षेत्र में जॉब कैंप लगा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। खुलेआम पैसे बाँटे जा रहे हैं। हेल्थ कैंप में खुलेआम चश्मे बाँटे जा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि 15 जनवरी को जॉब फेयर लगाए जाएँगे। ये सब कुछ चुनाव आयोग के विभिन्न नियम-कानूनों के तहत भ्रष्ट कृत्य के तहत आता है।”

उन्होंने कहा कि प्रवेश वर्मा के घर पर रेड मारकर पता लगाने और चुनाव लड़ने से रोकने का आग्रह किया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर भी आरोप लगाए और भाजपा के कथित गलत कामों को उनके द्वारा आसान बनाने का आरोप लगाया गया। उन्होंने लोकल DO और ERO को हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को भाजपा को रोकने की हिम्मत नहीं है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा यूपी-बिहार के लोगों को ‘फर्जी’ वोटर कहने पर भाजपा ने जबरदस्त पलटवार किया है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में रह रहे यूपी-बिहार के लोग अरविंद केजरीवाल के लिए फर्जी! लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये इनके रिश्तेदार? अब नहीं चाहिए आप-दा…।”

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम आकर दिल्ली में बसे। उन्हें दिल्ली सरकार बिजली-पानी जैसी मुफ्त सुविधाएँ लगातार उपलब्ध करा रही हैं, जिसको लेकर AAP सरकार की बड़े पैमाने पर आलोचना होती है। इन बांग्लादेशी-रोहिंग्याओं के पहचान का काम बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है।

हिन्दुओं में जातपात रोने वाले I.N.D.I. गठबंधन ने एकमुश्त मुस्लिम वोट के लिए मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेके ; महाराष्ट्र चुनाव से पहले ‘बेरोजगार’ मुस्लिम युवकों के खाते में 125 करोड़ रूपए ट्रांसफर, उलेमा बोर्ड ने MVA को दिया समर्थन: शर्त- RSS को बैन करो, 10% रिजर्वेशन दो

               मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेकने के बाद उलेमा बोर्ड ने दिया महा विकास आघाड़ी को समर्थन
महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड ने अपना सीधा समर्थन कांग्रेस के नेतृत्व में बने महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन को दिया है। अपने आधिकारिक पत्र में उलेमा बोर्ड ने 17 शर्तों के साथ ये समर्थन देने की बात ही है। इसमें वक्फ बोर्ड को 1000 करोड़ रुपए देने, आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने जैसी माँग की गई है।

इसके अलावा उलेमा बोर्ड ने महाविकास आघाड़ी से वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध करने और इसे निरस्त करने की माँग की है। वक्फ संपत्तियों से अतिक्रमण हटाने के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में कानून बनाने माँग रखी है। महाराष्ट्र बोर्ड में मुसलमानों के लिए 10% आरक्षण और राज्य में पुलिस भर्ती में शिक्षित मुसलमानों को प्राथमिकता देने की माँग उठाई है।

इतना ही नहीं बोर्ड ने भाजपा नेता नितेश राणे और रामगिरी महाराज को तत्काल कारावास में डालने तथा सलमान अझेरी को रिहा करने की माँग की है। साथ ही राज्य सरकार से मोहम्मद पैगंबर के खिलाफ बोलने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून लागू करने को कहा है। बोर्ड यह भी चाहता है कि राज्य सरकार राज्य में संचालित मस्जिदों के मौलानाओं और इमामों को 15,000 रुपए प्रति माह का भुगतान करे।

एक तरफ उलेमा बोर्ड ने अपना समर्थन देने के लिए ये सारी शर्तें रखी हैं तो दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि एनसीपी नेता शरद पवार ने इन सभी स्थितियों पर संज्ञान लेकर इन्हें स्वीकार भी कर लिया है।

उलेमा बोर्ड की ऐसी माँगे उस समय सामने आई हैं जब पिछले दिनों खुलासा हुआ है कि कैसे राज्य में 180 एनजीओ मिलकर मुस्लिम वोटों को जुटा रही हैं ताकि राज्य से भाजपा को बाहर किया जा सके। ऐसे ही प्रयास लोकसभा चुनावों के वक्त भी हुए थे और इस बार भी शुरू हो गए हैं।

कुछ दिन पहले की बात है महाराष्ट्र के नासिक में 12 मुस्लिम युवाओं को बेरोजगार बताकर उनके अकॉउंट में 125 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे। हर युवक के अकॉउंट में 12-15 करोड़ भेजे गए। रकम को जमा कराने वाला सिराज अहमद था जो कि एक लोकल व्यवसायी है। उसने मालेगाँव मर्चेंट बैंक के जरिए ये रकम भिजवाई थी। इस मामले के खुलासे के बाद अब नासिक पुलिस जाँच कर रही है कि ये कोई धोखाधड़ी का मामला है या इसके पीछे मंशा अलग है।

महाराष्ट्र चुनाव में भी ‘वोट जिहाद’ की तैयारी, मुस्लिमों को साधने में जुटे 180 NGO: रोहिंग्या-बांग्लादेशियों के बढ़ते दखल पर TISS भी कर चुका है आगाह


मुंबई की जानी-मानी यूनिवर्सिटी टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंस में हाल में एक अध्य्यन हुआ था जिससे ये पता चला कि मुंबई में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों का प्रभाव बढ़ रहा है। अब इसी के बाद एक जानकारी और सामने आई जिससे ये खुलासा हुआ है कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिम वोटों को बीजेपी के खिलाफ लामबंद करने के लिए 180 से ज्यादा एनजीओ काम कर रहे हैं। इन एनजीओ ने केवल मुंबई में 9 लाख मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ा है।

रिपोर्टों के अनुसार, ये एनजीओ के लोग मुस्लिम समुदाय के बीच जाते हैं, उन्हें समझाते हैं और फिर इनका इस्तेमाल वोटिंग टर्नआउट बढ़ाने के लिए किया जाता है। कहने को ये एनजीओ इसलिए जागरूकता फैला रही हैं ताकि मुस्लिम मतदाता अपने अधिकारों का सहीं इस्तेमाल करें। लेकिन, ये सभी जानते हैं कि इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए वोट का सही इस्तेमाल असल में भाजपा को सत्ता से बाहर निकालने से अधिक कुछ भी नहीं है।

इन इस्लामी संगठनों ने पिछले कुछ महीनों में मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच पहुँच बनाने के लिए कई अभियान चलाए हैं। इस दौरान इन्होंने सैंकड़ों बैठकें की, सूचना सत्र आयोजित किए और सामुदायिक कार्यक्रम किए…। हाल में कुछ ऐसी कुछ बैठकों की वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आई। वीडियोज में देखा जा सकता है कि कि कैसे मुस्लिमों को भाजपा के खिलाफ भड़काया और इंडी के समर्थन में वोट देने के लिए कहा जा रहा है।

आपको पता हो कि ये एनजीओ सिर्फ मुस्लिमों को इकट्ठा करके उन्हें वोटिंग के अधिकार का इस्तेमाल करने को नहीं कहते बल्कि वो किसे वोट दें इस बात को भी सुनिश्चित किया जाता है। मजहबी उलेमा बताते हैं कि उनके अनुयायी किसे वोट दें और किसे बिलकुल नहीं नहीं।

चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ मुस्लिमों को एकत्रित करने का काम जो ये एनजीओ कर रहे हैं वो चिंताजनक है।

अगर इसे समझना है जो TISS की स्टडी में क्या कहा गया इसे जानना होगा।

मुंबई में बढ़ रही रोहिंग्या और मुस्लिमों की घुसपैठ

हाल में TISS ने ‘मुंबई में अवैध अप्रवासी: सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक परिणामों का विश्लेषण’ शीर्षक से किए गए अध्य्यन में जो निष्कर्ष आए, उन्हें सबके आगे पेश किया था। हैरानी की बात यह है कि इस रिपोर्ट से साफ पता चलता है कि कुछ राजनीतिक संस्थाओं ने वोट बैंक की राजनीति के लिए अवैध घुसपैठियों का इस्तेमाल करके लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित की और घुसपैठियों के फर्जी पहचान पत्र बनवाकर उन्हें चुनाव का हिस्सा बनवाया।
इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र के इलाकों में हुए जनसांख्यिकी बदलाव की ओर ध्यान उजागर किया गया है।बताया गया है कि मुंबई में 1961 में हिंदुओं की आबादी 88% थी, जो 2011 में घटकर 66% रह गई। इस दौरान, मुस्लिम जनसंख्या 8% से बढ़कर 21% तक पहुँच गई। यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो अनुमान है कि 2051 तक हिंदू आबादी 54% से कम हो जाएगी और मुस्लिम आबादी लगभग 30% तक बढ़ सकती है।
                                                          TISS की स्टडी का शीर्षक
रिपोर्ट में साफ कहा गया कि बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले अवैध प्रवासियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेष रूप से, बांग्लादेशी और रोहिंग्या समुदाय के लोग झुग्गी क्षेत्रों में बस रहे हैं, जिससे मुंबई के सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर दबाव बढ़ रहा है। इसके अलावा मुंबई के स्थानीय लोगों और अप्रवासी समुदायों के बीच आर्थिक असमानताओं की वजह से समाजिक तनाव, हिंसा की घटनाएँ , महिलाओं की तस्करी के मामले, देह व्यापार में भी वृद्धि हो रही है।

लोकसभा चुनावों में एनजीओ की बैठकों का दिखा था असर

गौरतलब है कि एक ओर मुंबई में बढ़ रही घुसपैठ की रिपोर्टें हैं और दूसरी ओर विधानसभा में मुस्लिमों को एकजुट करने की… दोनों खबरें एकदूसरे से अलग नहीं हैं। महाराष्ट्र में बढ़ती मुस्लिम घुसपैठियों की आबादी, उन्हें मिलते संरक्षण का परिणाम क्या होता है ये मई-जून में हुए लोकसभा चुनावों में हमने देखा था। मुस्लिमों को इसी तरह एकजुट करके, समझाकर उन्हें भाजपा के विरोध में वोट डालने के लिए कहा गया था।
खुलेआम फतवे निकाले गए थे कि मुस्लिमों को पुणे, शिरुर, बारामती और मावल निर्वाचन क्षेत्रों से क्रमशः कॉन्ग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) का प्रतिनिधित्व करने वाले उम्मीदवारों को ही वोट देना है। मौलाना सज्जाद नोमानी ने तो एक कार्यक्रम में कहा था कि आज वोट देने वाले हर मुसलमान को अपने समुदाय के पक्ष में अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने मुसलमानों के मन में यह डर भी भर दिया कि अगर मोदी सत्ता में आए तो सभी मज़ार और मदरसे जमींदोज कर दिए जाएँगे। मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) द्वारा आयोजित रैली में इस्लामी झंडे भी लहराए गए।
नतीजे क्या हुए ये सबने देखा। लोकसभा चुनावों में मुस्लिम क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत काफी बढ़ गया था। उदाहरण के लिए, शिवाजी नगर, मुम्बादेवी, बायकुला, और मालेगाँव सेंट्रल जैसे क्षेत्रों में मतदान की दर 60% से अधिक रही। वहीं अंतिम नतीजों की बात करें तो एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना ने लोकसभा चुनावों में 7 सीटें हासिल कीं, बीजेपी ने 9 सीटें जीतीं, जबकि एनसीपी (शरद पवार), कॉन्ग्रेस और उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना की पार्टियों ने मुस्लिम और वामपंथी समर्थन हासिल करके क्रमशः 8, 13 और 9 सीटें हासिल कीं।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में मुस्लिम इस बार भी लोकसभा चुनावों की तरह वोटिंग करने के लिए तैयार हैं। उनके पास पहले अलग-अलग विकल्प थे कि वो शरद पवार की एनसीपी को वोट दें या कॉन्ग्रेस को, एआईएमआईएम को दें या फिर उद्धव ठाकरे की शिवसेना को… लेकिन इस बार उन्हें पहले ही समझाया जा चुका है कि उन्हें अपने वोट बँटने नहीं देना नहीं है। संगठित होकर एक उम्मीदवार को जिताना है जो उनके हित में काम करे। वो चाहे इंडी गठबंधन का हो या फिर उनका चुना कोई अन्य।

हरियाणा में हैट्रिक लगाकर बहुमत के साथ बीजेपी ने अपना दबदबा बनाए रखा बल्कि कांग्रेस और केजरीवाल को ठुकराकर हरियाणावासियों ने भारत को बांग्लादेश बनने से रोकने का सफल प्रयास किया है, अब बाकि राज्यों की जनता को जागना होगा

2024 लोक सभा चुनावों की तरह हरियाणा में भी सारे एग्जिट पोल और राजनीतिक पंडितों को धता बता हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। दूसरे, कांग्रेस के अभियान में यह कहना कि 'हुड्डा आ रहे हैं', जिसे जनता ने एक धमकी समझ हाथों-हाथ ले लिया, जिसे कांग्रेस समझ नहीं पाई और मुफ्त की रेवड़ियां भी नकाम रही। फिर शैलजा को नज़रअंदाज़ करने के साथ-साथ प्रदेश में बंसी लाल और भजन लाल के विकास कार्यों को भुनाने का बिलकुल भी प्रयास नहीं किया, बल्कि इनके परिवारों को भी नज़रअंदाज़ करना कांग्रेस की सबसे बड़ी भूल थी। बंसी लाल कहते थे कि प्रदेश में इतनी सड़कें बनवा दूंगा कहीं कोई खरंजा तक नज़र नहीं आएगा, प्रदेश दौड़ेगा। फिर विनेश फोगट का दुरूपयोग करना भी कांग्रेस को भारी पद गया। फोगट तो जीत गयी, लेकिन कांग्रेस सत्ता से बाहर रह गयी। खैर, कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। राहुल गाँधी का विदेशी धरती पर आरक्षण के विरोध में बोलना भी भारी पड़ा। यहां तक कि किसान नेता बन सौदेबाज़ी करने वाला उपद्रवी किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी सिर्फ 1170 वोट ले अपनी जमानत जब्त करवा बैठा। यानि जनता के बीच तथाकथित किसान आंदोलन आन्दोलनजीवी द्वारा एक षड़यंत्र साबित हो गया।  

जनता के दिमाग में बीजेपी के विरुद्ध केवल एक ही गलत धारणा थी कि केवल चुनावों में ही गाँधी परिवार घोटालों को क्यों उछाला जाता है। इतने सालों से राज्य और केंद्र में सत्ता होने के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्यवाही क्यों नहीं की? क्यों अब तक जमानत पर बाहर घूम रहे हैं? क्या कर रहे हैं अदालतें? 

इतना ही नहीं, जनता के सामने कांग्रेस द्वारा भारत को बांग्लादेश बनाने की धमकी भी कांग्रेस के खिलाफ गयी। कांग्रेस के सत्ता में आने से जनता को डर था कि शम्भू बॉर्डर खुलते ही तथाकथित आन्दोलनजीवी किसानों के समर्थन खालिस्तानी दिल्ली में ही उपद्रव नहीं मचाएंगे बल्कि दिल्ली से पहले हरियाणा ही बर्बादी की कगार पर पहुँच जाएगा। अरविन्द केजरीवाल की पार्टी को भी इसीलिए घास तक नहीं डाली।              
देश पर दस साल शासन करने के बाद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर मतदाताओं का ना सिर्फ भरोसा बरकरार है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने खूब लोकलुभावन वादे किए और रेवड़ियां बांटी। इसके बावजूद बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने फिर साबित कर दिया है कि मतदाताओं के बीच मोदी लहर कायम है। हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 48 सीटों पर जीत दर्ज कर बीजेपी ने हैट्रिक लगाकर सत्ता में वापसी की है। इसके साथ ही बीजेपी ने लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर एक नया रिकॉर्ड भी बना दिया है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में अभी तक कोई भी पार्टी लगातार तीन बार चुनाव नहीं जीत पाई है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को अकेले 39.88 प्रतिशत वोट मिले हैं। यह हरियाणा में बीजेपी का अब तक का सबसे ज्यादा मत प्रतिशत है।

देखते हैं प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने किस तरह लोकसभा,विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव में एक के बाद एक जीत हासिल की है…

बीजेपी नेतृत्व में केंद्र में एक बार फिर NDA की सरकार…

पीएम मोदी लगातार तीन टर्म देश चलाने वाले जवाहर लाल नेहरू के बाद दूसरे प्रधानमंत्री हैं। उनके नेतृत्व में एनडीए लोकसभा चुनाव में ना सिर्फ बहुमत से ज्यादा सीट पाने में कामयाब रहा है, बल्कि बीजेपी अपना वोट शेयर बढ़ाने में भी सफल रही है। ऐसा पहली बार है कि दस साल सत्ता में रहने के बाद भी बीजेपी के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर देखने को नहीं मिली और पार्टी वोट शेयर बढ़ाने में सफल रही।

लोकसभा चुनाव में फिर सबसे बड़ी पार्टी बनी

बीजेपी लोकसभा चुनाव 2024 में 240 सीटों के साथ एक बार फिर देश की सबसे बड़ी पार्टी बनने में सफल रही है। बीजेपी इस चुनाव में 36.56 प्रतिशत वोट हासिल करने में कामयाब रही है। इसके साथ ही एनडीए को कुल 292 सीटें मिली है, जो बहुमत 272 से काफी ज्यादा है। एनडीए घटक में जेडीयू को 12, टीडीपी को 16, शिवसेना शिंदे को 7 और एनसीपी अजीत पवार को एक और पवन कल्याण की जनसेना को दो सीटें मिली हैं। जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन को सिर्फ 233 सीटें ही मिली हैं। इंडी गठबंधन मिलकर भी उतनी सीटें जीत नहीं पाया, जितनी बीजेपी अकेले जीतने में सफल रही।

कई राज्यों में बीजेपी की दमदार उपस्थिति

बीजेपी ने इस लोकसभा चुनाव में कई राज्यों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की है। बीजेपी दिल्ली में सात की सात, मध्य प्रदेश में 29 की 29, हिमाचल प्रदेश में चार में से चार, उत्तराखंड में पांच में से पांच सीटें जीतने में सफल रही है। इतना ही नहीं बीजेपी को गुजरात में 26 में से 25, ओडिशा में 21 में से 20 और छत्तीसगढ़ में 11 में से 10 सीटें मिली हैं। इसके साथ ही बीजेपी ने तेलंगाना में 17 में से 8 सीटें जीत सभी को चौंका दिया है। 

ओडिशा में पहली बार बीजेपी सरकार
ओडिशा विधानसभा चुनावों में बड़ा उलटफेर करते हुए बीजेपी यहां सरकार बनाने जा रही है। बीजेपी ने राज्य में 24 साल से मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को हराकर इतिहास रच दिया है। बीजेपी ने ओडिशा में 147 सीटों में से 78 सीटों पर जीत हासिल कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। साल 2000 से सत्ता में काबिज बीजेडी 51 सीटें ही जीत पाई। कांग्रेस को भी सिर्फ 14 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। बीजेपी ने यहां विधानसभा में ही नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव में भी शानदार प्रदर्शन किया है। लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 21 सीटों में से 20 सीटों पर जीत हासिल की है।

अरुणाचल प्रदेश में भी बीजेपी सरकार
पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश में भी बीजेपी की सरकार बनने जा रही है। बीजेपी ने यहां की 60 विधानसभा सीटों में से 46 पर जीत दर्ज कर सभी को हैरत में डाल दिया है। बीजेपी के इस प्रचंड जीत से पार्टी नेता गदगद हैं। बीजेपी के 10 उम्मीदवार यहां चुनाव से पहले ही निर्विरोध जीत गए थे। अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस को सिर्फ एक ही सीट जीत मिली है। राज्य में नेशनल पीपुल्स पार्टी को पांच और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को तीन सीटें मिली हैं।

अवलोकन करें:-

किसान नेता बन डील करने वाले गुरनाम सिंह चढूनी की जमानत जब्त
किसान नेता बन डील करने वाले गुरनाम सिंह चढूनी की जमानत जब्त
जहाँ 80% मुस्लिम, वहाँ जीता मामन खान जिसका हिंदू विरोधी दंगों में नाम, BJP के मुस्लिम नहीं कबूल: फिर ब
मामन खान (हाथ में टोपी लिए) (चित्र साभार: Mammankhan 


दक्षिण भारत में मजबूत हुई स्थिति, सीट के साथ वोट भी बढ़े

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दक्षिण में भी बीजेपी का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। तमिलनाडु में बीजेपी का वोट प्रतिशत 3.62 प्रतिशत से तीन गुना बढ़कर 11.24 प्रतिशत हो गया है। आंध्र प्रदेश में वोट प्रतिशत 0.90 से 11 गुना बढ़कर 11.28 प्रतिशत हो गया है। पार्टी आंध्र प्रदेश में 3 सीट भी जीत ली है। तेलंगाना में 19.65 प्रतिशत से बढ़कर 35.08 प्रतिशत हो गया है। बीजेपी तेलंगाना में 17 में से 8 सीटें जीतने में भी सफल रही है। इसके साथ ही दक्षिण भारत में अपना स्थिति मजबूत करते हुए बीजेपी पहली बार केरल में अपना खाता खोलने में सफल रही है। बीजेपी उम्मीदबार सुरेश गोपी त्रिशुर से जीत गए हैं। केरल में बीजेपी का वोट प्रतिशत भी 12.99 से बढ़कर 16.68 प्रतिशत हो गया है।

अरुणाचल प्रदेश : बिना मतदान के ही खुल गया BJP का खाता, 5 लोगों ने निर्विरोध जीता चुनाव: विजेताओं में CM पेमा खांडू भी

मोदी के साथ अरुणाचल CM पेमा खांडू 
अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का मतदान होने से पहले ही भाजपा के पाँच प्रत्याशी विजयी हो गए हैं। इनके विरुद्ध कॉन्ग्रेस समेत किसी राजनीतिक दल ने प्रत्याशी ही नहीं उतारे। निर्विरोध विजयी होने वालो में अरुणाचल प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री पेमा खांडू भी शामिल हैं।

अरुणाचल प्रदेश में लोकसभा चुनावों के साथ ही विधानसभा के भी चुनाव भी प्रस्तावित हैं। इनके लिए मतदान 19 अप्रैल, 2024 को होने वाला है। इन विधानसभा चुनावों के लिए बुधवार (27 मार्च, 2024) तक नामांकन भरे जाने थे। हालाँकि, शाम तक अरुणाचल की पाँच सीटों पर मात्र एक ही नामांकन प्राप्त हुआ जो कि भाजपा के उम्मीदवारों का था।

ऐसे में नामांकन ना प्राप्त होने की दशा में यह उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो रहे हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के विरुद्ध भी कोई नामांकन नहीं हुआ। वह अरुणाचल के तवांग जिले की मुक्तो सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। वह इस सीट से चौथी बार निर्वाचित हो रहे हैं। इनमें से तीन बार वह निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री खांडू के अलावा ताली से जिक्के ताको, सागाली से रातू तेची, तलिहा से न्यातो डुकोम, और रोइंग विधानसभा सीट से से मुच्चू मीठी के विरोध में भी कोई प्रत्याशी नहीं खड़ा हुआ। ऐसे में मुख्यमंत्री खांडू के साथ ही यह भी निर्विरोध विधायक निर्वाचित होंगे। अभी चुनाव आयोग ने इस सम्बन्ध में औपचारिक घोषणा नहीं की है। गौरतलब है कि इसमें से न्यातो डुकम उस सीट से निर्विरोध जीते हैं जो राज्य के पूर्व कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री नबाम तुकी की सीट रही है।

निर्विरोध निर्वाचित होने को लेकर पेमा खांडू ने कहा, “पांच विधानसभा क्षेत्रों में केवल एक नामांकन पत्र भरा गया है। हमें आशा है कि नाम वापसी के आखिरी दिन तक कुछ और सीटें इसमें जुड़ जाएँगी।” अरुणाचल में 30 मार्च, 2024 नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख है।

राज्य विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने जहाँ सभी 60 प्रत्याशियों की घोषणा नामांकन से कुछ दिन पहले ही कर दी थी, वहीं कॉन्ग्रेस और NPP इस मामले में पिछड़ गईं। कॉन्ग्रेस ने राज्य में 60 विधानसभा सीटों में से मात्र 34 विधानसभा सीटों पर ही अपने प्रत्याशी घोषित किए। कॉन्ग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की एक ही सूची जारी की और उसके बाद नामांकन की समय सीमा समाप्त हो गई।

इससे पहले 2019 के राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत से जीत कर सरकार बनाई थी। तब राज्य की 60 सीटों में से भाजपा को 41 सीटें मिली थी। कॉन्ग्रेस ने इस चुनाव में भी मात्र 46 प्रत्याशी ही उतारे थे। कॉन्ग्रेस को यहाँ मात्र 4 सीटों पर विजय मिली थी। जदयू के भी राज्य में 15 में से 7 उम्मीदवार जीते थे जिन्होंने बाद में भाजपा का दामन थाम लिया था।

राज्य की अन्य पार्टी NPP ने विधानसभा चुनाव लड़ने और लोकसभा में भाजपा के उम्मीदवारों का समर्थन करने का निर्णय लिया है। मेघालय की सत्ता में काबिज NPP ने राज्य में 29 उम्मीदवार उतारे हैं। राज्य में दो लोकसभा की भी सीट हैं। इन दोनों सीटों पर भाजपा ने अपने प्रत्याशी रिपीट किए हैं। अरुणाचल प्रदेश पूर्वी से तापिर गाओ जबकि पश्चिमी सीट से केन्द्रीय मंत्री करें रिजीजू को फिर से उतारा गया है।

कॉन्ग्रेस ने भी इन दोनों सीट से अपने लोकसभा उमीदवार घोषित किए हैं। अरुणाचल प्रदेश पश्चिमी से पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी जबकि पूर्वी सीट से बोसिराम सीरम को उतारा गया है। राज्य इस बार भी भाजपा की सरकार बनने के कयास लग रहे हैं।