आज 27 साल के बाद बीजेपी की वापसी ने साबित कर दिया है कि दिल्ली वाले बिकाऊ हैं खरीदार चाहिए। लोहे को लोहा ही काटता है यानि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां नहीं बांटी होती अभी भी बीजेपी सत्ता से दूर रहती। इस कटु सच्चाई से कोई दिल्लीवासी इंकार नहीं कर सकता। केजरीवाल ने इतने साल सत्ता किसी काम के बूते नहीं बल्कि रेवड़ियों के दम पर किया।
केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां बांट मोदी ने केजरीवाल के उस अहंकार को भी धराशाही कर दिया जो केजरीवाल ने पब्लिक मीटिंग में कहा था कि "केजरीवाल को हराने के लिए मोदी को दोबारा जन्म लेना पड़ेगा"। लेकिन तपस्वी मोदी ने एक तीर से दो निशाने साधे है। एक तो केजरीवाल का अहंकार दूसरा Deep State और toolkit जिसकी फंडिंग से मोदी विरोधी उछलते रहते हैं। मोदी ने केजरीवाल और इसकी पार्टी को नेस्ताबूत करने अर्थव्यवस्था की भी परवाह नहीं की।
रही बात कांग्रेस की, इसके लगभग उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का जिम्मेदार राहुल गाँधी है। जो पार्टी के नए कार्यालय के उद्घाटन पर बीजेपी और आरएसएस से लड़ाई लड़ने की बात बोलने तक तो ठीक था, लेकिन to fight against nation कहना कांग्रेस को खा गया। कई बार लिखा जा चुका है कि कांग्रेस ने अपने आपको बचाए रखने के लिए गाँधी परिवार से दूरी बनानी होगी। कांग्रेस का जो पतन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद शुरू हुआ है आज तक जारी है। सोनिया की कसर को पूरा कर रही भाई-बहन(राहुल और प्रियंका) की जोड़ी।
आम आदमी पार्टी के साथ मीडिया की भी हार
त्रेता युग से लेकर आज कलयुग तक इतिहास साक्षी है कि महिला के अपमान का क्रोध सत्ता को खा जाता है। आप सांसद स्वाति मालीवाल ने जिस तरह अरविन्द केजरीवाल पार्टी की नाकामियों को उछाला पंजाब सरकार से विज्ञापन मिलने की वजह से किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाया, क्योकि मीडिया को अपने राजस्व की चिंता थी जनता की समस्याओं से नहीं। स्वाति के वीडियोस सोशल मीडिया पर छाए रहे। अगर यही वीडियो बीजेपी के खिलाफ होते सारा मीडिया खूब प्रसारित कर रहा होता। इसलिए दिल्ली से केजरीवाल सरकार के जाने में स्वाति मालीवाल की अहम् भूमिका होने के कारण मालीवाल को Man of the Match कहना कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। लेकिन प्रवेश वर्मा की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिसने केजरीवाल की नाक में नकेल डाल कही का नहीं छोड़ा।
इसकी ऐसी lgi🤣🤣 pic.twitter.com/i9blGC7N94
— Sunil kumar Gupta (@Sunilku03423142) February 8, 2025
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के दिलों में बसते हैं। जनता पर उनका ना सिर्फ भरोसा बरकरार है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दस वर्षों से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप- AAP) और कांग्रेस ने मतदाताओं से खूब लोकलुभावन वादे किए और रेवड़ियां बांटी। इसके बावजूद बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में मोदी लहर कायम है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर बहुमत मिला है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। इस बार के चुनाव में दिल्ली के वोटरों ने AAP पर ही झाड़ू चला दी है। AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे खराब स्थिति तो राहुल गांधी की कांग्रेस की है। कांग्रेस का तो एक तरह से सफाया ही हो गया है। सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति से लोग कांग्रेस से कटते जा रहे हैं।
दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। नतीजे देख न केवल बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता खुश हैं बल्कि वो आम जनता भी खुश है जो रोजमर्रा की समस्याओं से तंग आकर सत्ता परिवर्तन को ही एक विकल्प मान रही थी। वैसे तो इतने वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने कई फैक्टर्स पर काम किया होगा, लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें असल में किसलिए वोट दिया ये समझना जरूरी है।
दिल्ली में जब पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही हैं तो समझते हैं कि आखिर वो कौन-कौन से कारण थे जिनके चलते भाजपा पर लोगों ने विश्वास जताया।
क्या वो सिर्फ केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार से छुटकारा चाहते थे या वाकई उन्हें दिल्ली में विकास की दरकार है? क्या उनके लिए सिर्फ फ्री बिजली पानी महत्व रखता था या उनको स्वच्छ क्षेत्र, पक्की सड़कें, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चाहिए?
दिल्ली में भाजपा की जीत के सबसे बड़ा कारण इस बार महिलाओं की भागीदारी को, मिडिल क्लास को मिली राहत को, पूर्वांचलियों के प्रयास, साफ पानी के वादे को माना जा सकता है…।
महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान
मोदी की गारंटी
मिडिल क्लास की ताकत
पूर्वांचली भी साथ
करप्शन से केजरीवाल चित
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने पलटी हारी बाजी
हाल ही में बीजेपी ने चंडीगढ़ में मेयर पद का चुनाव जीत लिया है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव परिणाम आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इंडी गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। I.N.D.I. Alliance उम्मीदवार को हराकर बीजेपी ने हारी बाजी पलट दी है। बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला I.N.D.I. Alliance के आप-कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमलता को हराकर चंडीगढ़ की मेयर बन गई हैं। इस चुनाव में 36 वोटों में से बीजेपी को 19 वोट मिले, जबकि आप-कांग्रेस के इंडी गठबंधन को सिर्फ 17 वोट ही मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि बहुमत के बावजूद गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है। AAP और कांग्रेस के पार्षदों के क्रॉस वोटिंग के कारण गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा। हैरानी की बात यह भी है कि चंडीगढ़ में एक साथ लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही है।