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केजरीवाल की फ्री रेवड़ियों पर बीजेपी की रेवड़ियां जिससे ‘AAP-दा’ मुक्त हुई दिल्ली; नेशनल मीडिया की हार, Man of the Match रहे प्रवेश वर्मा और स्वाति मालीवाल ; कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त

आज 27 साल के बाद बीजेपी की वापसी ने साबित कर दिया है कि दिल्ली वाले बिकाऊ हैं खरीदार चाहिए। लोहे को लोहा ही काटता है यानि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां नहीं बांटी होती अभी भी बीजेपी सत्ता से दूर रहती। इस कटु सच्चाई से कोई दिल्लीवासी इंकार नहीं कर सकता। केजरीवाल ने इतने साल सत्ता किसी काम के बूते नहीं बल्कि रेवड़ियों के दम पर किया। 
दिल्ली से केजरीवाल सत्ता जाने से आम आदमी पार्टी को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, क्योकि दिल्ली निकलने से पंजाब सरकार और दिल्ली नगर निगम भी कभी भी जा सकती है। पंजाब में सरकार जाने का कांग्रेस को फायदा हो सकता है। 

केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां बांट मोदी ने केजरीवाल के उस अहंकार को भी धराशाही कर दिया जो केजरीवाल ने पब्लिक मीटिंग में कहा था कि "केजरीवाल को हराने के लिए मोदी को दोबारा जन्म लेना पड़ेगा"। लेकिन तपस्वी मोदी ने एक तीर से दो निशाने साधे है। एक तो केजरीवाल का अहंकार दूसरा Deep State और toolkit जिसकी फंडिंग से मोदी विरोधी उछलते रहते हैं। मोदी ने केजरीवाल और इसकी पार्टी को नेस्ताबूत करने अर्थव्यवस्था की भी परवाह नहीं की।   

रही बात कांग्रेस की, इसके लगभग उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का जिम्मेदार राहुल गाँधी है। जो पार्टी के नए कार्यालय के उद्घाटन पर बीजेपी और आरएसएस से लड़ाई लड़ने की बात बोलने तक तो ठीक था, लेकिन to fight against nation कहना कांग्रेस को खा गया। कई बार लिखा जा चुका है कि कांग्रेस ने अपने आपको बचाए रखने के लिए गाँधी परिवार से दूरी बनानी होगी। कांग्रेस का जो पतन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद शुरू हुआ है आज तक जारी है। सोनिया की कसर को पूरा कर रही भाई-बहन(राहुल और प्रियंका) की जोड़ी। 

आम आदमी पार्टी के साथ मीडिया की भी हार

त्रेता युग से लेकर आज कलयुग तक इतिहास साक्षी है कि महिला के अपमान का क्रोध सत्ता को खा जाता है। आप सांसद स्वाति मालीवाल ने जिस तरह अरविन्द केजरीवाल पार्टी की नाकामियों को उछाला पंजाब सरकार से विज्ञापन मिलने की वजह से किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाया, क्योकि मीडिया को अपने राजस्व की चिंता थी जनता की समस्याओं से नहीं। स्वाति के वीडियोस सोशल मीडिया पर छाए रहे। अगर यही वीडियो बीजेपी के खिलाफ होते सारा मीडिया खूब प्रसारित कर रहा होता। इसलिए दिल्ली से केजरीवाल सरकार के जाने में स्वाति मालीवाल की अहम् भूमिका होने के कारण मालीवाल को Man of the Match कहना कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। लेकिन प्रवेश वर्मा की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिसने केजरीवाल की नाक में नकेल डाल कही का नहीं छोड़ा। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के दिलों में बसते हैं। जनता पर उनका ना सिर्फ भरोसा बरकरार है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दस वर्षों से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप- AAP) और कांग्रेस ने मतदाताओं से खूब लोकलुभावन वादे किए और रेवड़ियां बांटी। इसके बावजूद बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में मोदी लहर कायम है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर बहुमत मिला है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। इस बार के चुनाव में दिल्ली के वोटरों ने AAP पर ही झाड़ू चला दी है। AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे खराब स्थिति तो राहुल गांधी की कांग्रेस की है। कांग्रेस का तो एक तरह से सफाया ही हो गया है। सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति से लोग कांग्रेस से कटते जा रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। नतीजे देख न केवल बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता खुश हैं बल्कि वो आम जनता भी खुश है जो रोजमर्रा की समस्याओं से तंग आकर सत्ता परिवर्तन को ही एक विकल्प मान रही थी। वैसे तो इतने वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने कई फैक्टर्स पर काम किया होगा, लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें असल में किसलिए वोट दिया ये समझना जरूरी है।

दिल्ली में जब पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही हैं तो समझते हैं कि आखिर वो कौन-कौन से कारण थे जिनके चलते भाजपा पर लोगों ने विश्वास जताया।

क्या वो सिर्फ केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार से छुटकारा चाहते थे या वाकई उन्हें दिल्ली में विकास की दरकार है? क्या उनके लिए सिर्फ फ्री बिजली पानी महत्व रखता था या उनको स्वच्छ क्षेत्र, पक्की सड़कें, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चाहिए?

दिल्ली में भाजपा की जीत के सबसे बड़ा कारण इस बार महिलाओं की भागीदारी को, मिडिल क्लास को मिली राहत को, पूर्वांचलियों के प्रयास, साफ पानी के वादे को माना जा सकता है…।

महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान

इस विधानसभा चुनाव में राजधानी में पंजीकृत महिला मतदाताओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। महिलाएँ समाज का वो वर्ग हैं जो बुनियादी सुविधाएँ न मिलने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इन्हें पता होता है कि घर के नल से आता गंदा पानी, गली की टूटी सड़क, नाले में भरा पानी कैसे उनके परिवार के लिए घातक है। दिल्ली की महिलाओं को इन्हीं सबसे छुटकारा चाहिए था। उन्हें फ्री बिजली से ज्यादा साफ पानी की जरूरत थी। उन्हें मोहल्ला क्लिनिक से ज्यादा आयुष्माम योजना की जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने 10 साल पहले केजरीवाल सरकार में संभावना देखकर उन्हें मौका दिया था, मगर जब उनकी जरूरतें पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने AAP को देखा-परखा और फिर बदलाव के नाम पर अपना वोट दिया।

मोदी की गारंटी

दूसरा, आम आदमी पार्टी ने इन्हीं महिलाओं को टारगेट करते हुए 2100 रुपए देने का ऐलान किया था। लेकिन, दिल्ली की महिलाएँ AAP की फ्री वाले हथकंडे को भाँप चुकी थी। उन्हें उन 2100 रुपए से ज्यादा दिल्ली के विकास को तवज्जो दी। उधर भाजपा ने भी अपने संकल्प पत्र में महिलाओं से साफ कह दिया था कि वो न केवल दिल्ली को हर स्तर पर बेहतर बनाएँगे बल्कि जो दिल्ली सरकार इस समय जनकल्याण की योजना चला रहे हैं उन्हें भी बंद नहीं करेंगे।
महिलाओं को इस बात पर डर नहीं था कि अगर वो AAP को वोट नहीं देंगी तो उनके घरेलू बजट पर कोई असर पड़ेगा। उलटा वह संतुष्ट थीं कि भाजपा से उन्हें सम्मान के तौर पर 2500 रुपए की राशि तो मिलेगी ही। साथ ही गर्भवतियों को 25000 रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा घर के गैस सिलेंडर, बिजली की भी उन्हें चिंता नहीं करनी होगी और दिल्ली में बीजेपी के आने पर आयुष्मान योजना जैसी स्कीम भी लागू हो पाएँगी जिससे उनके परिवार को ही फायदा होगा।

मिडिल क्लास की ताकत

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जिस समय जातियों पर लोगों को बाँटकर भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रही थीं उस समय बीजेपी लगातार मिडिल क्लास वर्ग पर फोकस बनाए हुई थी। बजट वाले दिन विपक्षी दलों की बाजी तब पलटी जब ऐलान हुआ कि अब 12 लाख रुपए तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। विपक्ष ने इस बजट को बकवास तक बताया, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस एक घोषणा ने दिल्ली के मिडिल क्लास को सीधे बीजेपी के पाले में खड़ा कर दिया है।

अभी तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भाजपा के खिलाफ जिस मिडल क्लास को भड़का रही थीं, उसी मिडल क्लास को चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने टैक्स में छूट देकर बड़ा तोहफा दे दिया था।
इसके अलावा पिछले दिनों केंद्र सरकार ने जो 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की थी उससे भी मिडल क्लास काफी प्रभावित हुआ था। इस फैसले से करीबन 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलती। वहीं 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में बढौतरी होती।

पूर्वांचली भी साथ

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के एक बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए ऐसे दिखाया था कि भाजपा पूर्वांचलियों से इतनी नफरत करती है कि उन्हें गाली दे रही है। हकीकत जबकि ये थी कि पूनावाला ने वहाँ गाली नहीं दी थी। लेकिन जो खेल आप खेल रही थी उससे निपटना जरूरी था। नतीजतन जमीनी स्तर पर काम करने की कमान बीजेपी ने कई पूर्वांचलियों को सौंपी। इन्हीं पूर्वांचलियों ने दिल्ली में अपनी पूर्वांचल सम्मान मार्च जैसे इवेंट करके अपनी ताकत लगाई और नतीजे सामने हैं।

करप्शन से केजरीवाल चित

इन सब वजहों के अलावा एक सबसे बड़ा कारण दिल्ली में भाजपा की जीत का यह भी था कि दिल्ली की जनता आए दिन AAP के काल में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरों से त्रस्त हो गई थी। कभी शीश महल पर खर्च हुए 30-40 करोड़ रुपए की बात मीडिया में आ रही थी तो कभी दिल्ली शराब घोटाला के जरिए फजीहत हो रही थी। इन सारे मुद्दों ने पार्टी की छवि और नेताओं की ईमानदारी पर तमाम सवाल खड़े कर दिए थे। वहीं दिल्ली की सड़कों में हर साल भरने वाला पानी और 10 साल से यमुना के साफ करने के झूठे वादे ने भी लोगों का विश्वास AAP से उठा दिया था।
इन्हीं सब बिंदुओं का फायदा भाजपा को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जमकर हुआ और उनके दिए नारे ‘AAP-DA मुक्त’ का असर दिखा। जनता ने मोदी की गारंटियों पर भरोसा दिखाते हुए 5 फरवरी को कमल दबाया। जिसके परिणाम आज देखने को मिले। बीजेपी की इस जीत में 2M (महिला+मिडिल क्लास) 2P (पूर्वांचली+पानी) फैक्टर का बड़ा रोल दिख रहा है। दिल्ली में भाजपा 48 सीट जीत रही है जबकि आम आदमी पार्टी को केवल 22। पिछले चुनाव में इसी आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।
अवलोकन करें:-
शायद पहली बार AAP की हार के बाद दिल्ली सचिवालय सील, कोई भी फाइल-दस्तावेज-कंप्यूटर हार्डवयेर बाहर ल

 चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने पलटी हारी बाजी

हाल ही में बीजेपी ने चंडीगढ़ में मेयर पद का चुनाव जीत लिया है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव परिणाम आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इंडी गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। I.N.D.I. Alliance उम्मीदवार को हराकर बीजेपी ने हारी बाजी पलट दी है। बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला I.N.D.I. Alliance के आप-कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमलता को हराकर चंडीगढ़ की मेयर बन गई हैं। इस चुनाव में 36 वोटों में से बीजेपी को 19 वोट मिले, जबकि आप-कांग्रेस के इंडी गठबंधन को सिर्फ 17 वोट ही मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि बहुमत के बावजूद गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है। AAP और कांग्रेस के पार्षदों के क्रॉस वोटिंग के कारण गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा। हैरानी की बात यह भी है कि चंडीगढ़ में एक साथ लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही है।

AAP के खिलाफ आए ExitPolls पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित का झलका दर्द; Exit Polls ने आम आदमी को कम आँका है


दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त होने के बाद Exit Polls आ चुके हैं। एग्जिट पोल्स को लेकर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने निराशा जताई। जिससे यह साबित हो गया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी हम प्याला हम नवाला बन जनता को पागल बनाते रहे। वैसे इसमें गलत भी नहीं कि पिछले दिल्ली चुनावों में आए 
Exit Polls में कम ही आंका गया था लेकिन रेवड़ियों के सहारे दो-तिहाई बहुमत से सरकार बनाई। 

2014 चुनावों के अपनी नवासी के मुंडन के दौरान बनारस जाना पड़ा। वहां लोगों से बात करने पर जो जवाब मिला सिर शर्म से झुक जाता है। लोगों ने कहा कि 'हम बनारस वाले दिल्ली वालों की लालची नहीं।'  

लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ऐसा लपेटा की दिल्ली जीतने की मंशा से फ्री की रेवड़ियां बांटने को मजबूर कर दिया। यानि दिल्ली वालों ने खुद ही साबित कर दिया कि 'हम मतदाता नहीं, चुनाव के बाजार में बिकने वाला माल है।' अब फरवरी 8 को देखना है कि किस पार्टी की रेवड़ियों ने दिल्ली को ललचाया। जनता को घरों में साफ स्वच्छ पानी नहीं, प्रदुषण से मुक्ति नहीं बल्कि फ्री की रेवड़ियां चाहिए। दिल्ली और पंजाब वालों से कहीं अच्छी अन्य राज्यों की जनता है जो केजरीवाल की रेवड़ियों को ठोकर मार केजरीवाल पार्टी को धूल चटवाती है। 

   

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 5 फरवरी को मतदान खत्म हो चुके हैं। सभी 70 सीटों पर  66.14 फीसदी मतदान हुआ। वहीं चुनाव के बाद Exit Polls भी सामने आ गए। Exit Polls के मुताबिक दिल्ली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। MATRIZE के Exit Polls के मुताबिक, दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। आम आदमी पार्टी को 32-37 सीटें मिलती दिखाई गई हैं, तो वहीं भाजपा को 35 से 40 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। वहीं कांग्रेस केवल एक सीट पर सिमट जाएगी। 

Exit Polls को देख निराश हुए संदीप दीक्षित

ऐसे में कांग्रेस से नई दिल्ली सीट के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने एग्जिट पोल्स पर बात करते हुए कहा कि 'Exit Polls की मानें तो दिल्ली में भाजपा की सरकार बन रही है लेकिन मेरी ये फीलिंग है कि Exit Polls में आम आदमी पार्टी को कम आंका जा रहा है। मुझे नहीं लगता कि आम आदमी पार्टी इतना खराब प्रदर्शन करेगी।' वहीं उन्होंने Exit Polls से निराशा जताते हुए कहा कि 'मुझे Exit Polls से निराशा हुई है, जिसके कारण मुझे लगता है कि कांग्रेस को 17-18 फीसदी वोट आसानी से मिल रहा था।

एग्जिट पोल्स को देख निराश हुए संदीप दीक्षित

ऐसे में कांग्रेस से नई दिल्ली सीट के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे संदीप दीक्षित ने Exit Polls पर बात करते हुए कहा कि 'Exit Polls की मानें तो दिल्ली में भाजपा की सरकार बन रही है लेकिन मेरी ये फीलिंग है कि Exit Polls में आम आदमी पार्टी को कम आंका जा रहा है। मुझे नहीं लगता कि आम आदमी पार्टी इतना खराब प्रदर्शन करेगी।' वहीं उन्होंने एग्जिट पोल्स से निराशा जताते हुए कहा कि 'मुझे Exit Polls से निराशा हुई है, जिसके कारण मुझे लगता है कि कांग्रेस को 17-18 फीसदी वोट आसानी से मिल रहा था।

इसके कारण मुझे ये लग रहा है कि क्या हमें अपने वो 18 फीसदी वोट भी नहीं मिले और अगर नहीं मिले हैं, तो हम कहां कमजोर रह गए, ये हमें देखना है।' संदीप दीक्षित ने आगे कहा कि Exit Polls कभी सही होते हैं, तो कभी गलत भी हो जाते हैं, ये कोई इतनी बड़ी बात नहीं है। अगर आप केवल Exit Polls देखें, तो मुझे नहीं लगता जैसी तस्वीर दिखाई जा रही हैं, वैसा होगा। हालांकि 8 फरवरी को रिजल्ट आने पर स्थिति साफ हो जाएगी कि किसे कितने वोट मिले और किसकी जीत या हार रही।