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केजरीवाल की फ्री रेवड़ियों पर बीजेपी की रेवड़ियां जिससे ‘AAP-दा’ मुक्त हुई दिल्ली; नेशनल मीडिया की हार, Man of the Match रहे प्रवेश वर्मा और स्वाति मालीवाल ; कांग्रेस के अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त

आज 27 साल के बाद बीजेपी की वापसी ने साबित कर दिया है कि दिल्ली वाले बिकाऊ हैं खरीदार चाहिए। लोहे को लोहा ही काटता है यानि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरविन्द केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां नहीं बांटी होती अभी भी बीजेपी सत्ता से दूर रहती। इस कटु सच्चाई से कोई दिल्लीवासी इंकार नहीं कर सकता। केजरीवाल ने इतने साल सत्ता किसी काम के बूते नहीं बल्कि रेवड़ियों के दम पर किया। 
दिल्ली से केजरीवाल सत्ता जाने से आम आदमी पार्टी को अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ेगा, क्योकि दिल्ली निकलने से पंजाब सरकार और दिल्ली नगर निगम भी कभी भी जा सकती है। पंजाब में सरकार जाने का कांग्रेस को फायदा हो सकता है। 

केजरीवाल से ज्यादा रेवड़ियां बांट मोदी ने केजरीवाल के उस अहंकार को भी धराशाही कर दिया जो केजरीवाल ने पब्लिक मीटिंग में कहा था कि "केजरीवाल को हराने के लिए मोदी को दोबारा जन्म लेना पड़ेगा"। लेकिन तपस्वी मोदी ने एक तीर से दो निशाने साधे है। एक तो केजरीवाल का अहंकार दूसरा Deep State और toolkit जिसकी फंडिंग से मोदी विरोधी उछलते रहते हैं। मोदी ने केजरीवाल और इसकी पार्टी को नेस्ताबूत करने अर्थव्यवस्था की भी परवाह नहीं की।   

रही बात कांग्रेस की, इसके लगभग उम्मीदवारों की जमानत जब्त होने का जिम्मेदार राहुल गाँधी है। जो पार्टी के नए कार्यालय के उद्घाटन पर बीजेपी और आरएसएस से लड़ाई लड़ने की बात बोलने तक तो ठीक था, लेकिन to fight against nation कहना कांग्रेस को खा गया। कई बार लिखा जा चुका है कि कांग्रेस ने अपने आपको बचाए रखने के लिए गाँधी परिवार से दूरी बनानी होगी। कांग्रेस का जो पतन सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बनने के बाद शुरू हुआ है आज तक जारी है। सोनिया की कसर को पूरा कर रही भाई-बहन(राहुल और प्रियंका) की जोड़ी। 

आम आदमी पार्टी के साथ मीडिया की भी हार

त्रेता युग से लेकर आज कलयुग तक इतिहास साक्षी है कि महिला के अपमान का क्रोध सत्ता को खा जाता है। आप सांसद स्वाति मालीवाल ने जिस तरह अरविन्द केजरीवाल पार्टी की नाकामियों को उछाला पंजाब सरकार से विज्ञापन मिलने की वजह से किसी भी मीडिया ने नहीं दिखाया, क्योकि मीडिया को अपने राजस्व की चिंता थी जनता की समस्याओं से नहीं। स्वाति के वीडियोस सोशल मीडिया पर छाए रहे। अगर यही वीडियो बीजेपी के खिलाफ होते सारा मीडिया खूब प्रसारित कर रहा होता। इसलिए दिल्ली से केजरीवाल सरकार के जाने में स्वाति मालीवाल की अहम् भूमिका होने के कारण मालीवाल को Man of the Match कहना कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। लेकिन प्रवेश वर्मा की भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जिसने केजरीवाल की नाक में नकेल डाल कही का नहीं छोड़ा। 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की जनता के दिलों में बसते हैं। जनता पर उनका ना सिर्फ भरोसा बरकरार है, बल्कि इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पिछले दस वर्षों से केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद जनता पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू सर चढ़कर बोल रहा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप- AAP) और कांग्रेस ने मतदाताओं से खूब लोकलुभावन वादे किए और रेवड़ियां बांटी। इसके बावजूद बीजेपी के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश में मोदी लहर कायम है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बंपर बहुमत मिला है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। इस बार के चुनाव में दिल्ली के वोटरों ने AAP पर ही झाड़ू चला दी है। AAP को करारी हार का सामना करना पड़ा है। सबसे खराब स्थिति तो राहुल गांधी की कांग्रेस की है। कांग्रेस का तो एक तरह से सफाया ही हो गया है। सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी की नकारात्मक राजनीति से लोग कांग्रेस से कटते जा रहे हैं।

दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। नतीजे देख न केवल बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता खुश हैं बल्कि वो आम जनता भी खुश है जो रोजमर्रा की समस्याओं से तंग आकर सत्ता परिवर्तन को ही एक विकल्प मान रही थी। वैसे तो इतने वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने कई फैक्टर्स पर काम किया होगा, लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें असल में किसलिए वोट दिया ये समझना जरूरी है।

दिल्ली में जब पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही हैं तो समझते हैं कि आखिर वो कौन-कौन से कारण थे जिनके चलते भाजपा पर लोगों ने विश्वास जताया।

क्या वो सिर्फ केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार से छुटकारा चाहते थे या वाकई उन्हें दिल्ली में विकास की दरकार है? क्या उनके लिए सिर्फ फ्री बिजली पानी महत्व रखता था या उनको स्वच्छ क्षेत्र, पक्की सड़कें, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चाहिए?

दिल्ली में भाजपा की जीत के सबसे बड़ा कारण इस बार महिलाओं की भागीदारी को, मिडिल क्लास को मिली राहत को, पूर्वांचलियों के प्रयास, साफ पानी के वादे को माना जा सकता है…।

महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान

इस विधानसभा चुनाव में राजधानी में पंजीकृत महिला मतदाताओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। महिलाएँ समाज का वो वर्ग हैं जो बुनियादी सुविधाएँ न मिलने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इन्हें पता होता है कि घर के नल से आता गंदा पानी, गली की टूटी सड़क, नाले में भरा पानी कैसे उनके परिवार के लिए घातक है। दिल्ली की महिलाओं को इन्हीं सबसे छुटकारा चाहिए था। उन्हें फ्री बिजली से ज्यादा साफ पानी की जरूरत थी। उन्हें मोहल्ला क्लिनिक से ज्यादा आयुष्माम योजना की जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने 10 साल पहले केजरीवाल सरकार में संभावना देखकर उन्हें मौका दिया था, मगर जब उनकी जरूरतें पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने AAP को देखा-परखा और फिर बदलाव के नाम पर अपना वोट दिया।

मोदी की गारंटी

दूसरा, आम आदमी पार्टी ने इन्हीं महिलाओं को टारगेट करते हुए 2100 रुपए देने का ऐलान किया था। लेकिन, दिल्ली की महिलाएँ AAP की फ्री वाले हथकंडे को भाँप चुकी थी। उन्हें उन 2100 रुपए से ज्यादा दिल्ली के विकास को तवज्जो दी। उधर भाजपा ने भी अपने संकल्प पत्र में महिलाओं से साफ कह दिया था कि वो न केवल दिल्ली को हर स्तर पर बेहतर बनाएँगे बल्कि जो दिल्ली सरकार इस समय जनकल्याण की योजना चला रहे हैं उन्हें भी बंद नहीं करेंगे।
महिलाओं को इस बात पर डर नहीं था कि अगर वो AAP को वोट नहीं देंगी तो उनके घरेलू बजट पर कोई असर पड़ेगा। उलटा वह संतुष्ट थीं कि भाजपा से उन्हें सम्मान के तौर पर 2500 रुपए की राशि तो मिलेगी ही। साथ ही गर्भवतियों को 25000 रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा घर के गैस सिलेंडर, बिजली की भी उन्हें चिंता नहीं करनी होगी और दिल्ली में बीजेपी के आने पर आयुष्मान योजना जैसी स्कीम भी लागू हो पाएँगी जिससे उनके परिवार को ही फायदा होगा।

मिडिल क्लास की ताकत

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जिस समय जातियों पर लोगों को बाँटकर भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रही थीं उस समय बीजेपी लगातार मिडिल क्लास वर्ग पर फोकस बनाए हुई थी। बजट वाले दिन विपक्षी दलों की बाजी तब पलटी जब ऐलान हुआ कि अब 12 लाख रुपए तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। विपक्ष ने इस बजट को बकवास तक बताया, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस एक घोषणा ने दिल्ली के मिडिल क्लास को सीधे बीजेपी के पाले में खड़ा कर दिया है।

अभी तक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस भाजपा के खिलाफ जिस मिडल क्लास को भड़का रही थीं, उसी मिडल क्लास को चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने टैक्स में छूट देकर बड़ा तोहफा दे दिया था।
इसके अलावा पिछले दिनों केंद्र सरकार ने जो 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की थी उससे भी मिडल क्लास काफी प्रभावित हुआ था। इस फैसले से करीबन 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलती। वहीं 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में बढौतरी होती।

पूर्वांचली भी साथ

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के एक बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए ऐसे दिखाया था कि भाजपा पूर्वांचलियों से इतनी नफरत करती है कि उन्हें गाली दे रही है। हकीकत जबकि ये थी कि पूनावाला ने वहाँ गाली नहीं दी थी। लेकिन जो खेल आप खेल रही थी उससे निपटना जरूरी था। नतीजतन जमीनी स्तर पर काम करने की कमान बीजेपी ने कई पूर्वांचलियों को सौंपी। इन्हीं पूर्वांचलियों ने दिल्ली में अपनी पूर्वांचल सम्मान मार्च जैसे इवेंट करके अपनी ताकत लगाई और नतीजे सामने हैं।

करप्शन से केजरीवाल चित

इन सब वजहों के अलावा एक सबसे बड़ा कारण दिल्ली में भाजपा की जीत का यह भी था कि दिल्ली की जनता आए दिन AAP के काल में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरों से त्रस्त हो गई थी। कभी शीश महल पर खर्च हुए 30-40 करोड़ रुपए की बात मीडिया में आ रही थी तो कभी दिल्ली शराब घोटाला के जरिए फजीहत हो रही थी। इन सारे मुद्दों ने पार्टी की छवि और नेताओं की ईमानदारी पर तमाम सवाल खड़े कर दिए थे। वहीं दिल्ली की सड़कों में हर साल भरने वाला पानी और 10 साल से यमुना के साफ करने के झूठे वादे ने भी लोगों का विश्वास AAP से उठा दिया था।
इन्हीं सब बिंदुओं का फायदा भाजपा को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जमकर हुआ और उनके दिए नारे ‘AAP-DA मुक्त’ का असर दिखा। जनता ने मोदी की गारंटियों पर भरोसा दिखाते हुए 5 फरवरी को कमल दबाया। जिसके परिणाम आज देखने को मिले। बीजेपी की इस जीत में 2M (महिला+मिडिल क्लास) 2P (पूर्वांचली+पानी) फैक्टर का बड़ा रोल दिख रहा है। दिल्ली में भाजपा 48 सीट जीत रही है जबकि आम आदमी पार्टी को केवल 22। पिछले चुनाव में इसी आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।
अवलोकन करें:-
शायद पहली बार AAP की हार के बाद दिल्ली सचिवालय सील, कोई भी फाइल-दस्तावेज-कंप्यूटर हार्डवयेर बाहर ल

 चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने पलटी हारी बाजी

हाल ही में बीजेपी ने चंडीगढ़ में मेयर पद का चुनाव जीत लिया है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव परिणाम आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के इंडी गठबंधन के लिए एक बड़ा झटका है। I.N.D.I. Alliance उम्मीदवार को हराकर बीजेपी ने हारी बाजी पलट दी है। बीजेपी की हरप्रीत कौर बबला I.N.D.I. Alliance के आप-कांग्रेस उम्मीदवार प्रेमलता को हराकर चंडीगढ़ की मेयर बन गई हैं। इस चुनाव में 36 वोटों में से बीजेपी को 19 वोट मिले, जबकि आप-कांग्रेस के इंडी गठबंधन को सिर्फ 17 वोट ही मिले। सबसे बड़ी बात यह है कि बहुमत के बावजूद गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है। AAP और कांग्रेस के पार्षदों के क्रॉस वोटिंग के कारण गठबंधन को हार का मुंह देखना पड़ा। हैरानी की बात यह भी है कि चंडीगढ़ में एक साथ लड़ने वाली कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रही है।

चीन : सबसे सफल अरबपति, 3.18 लाख रूपए करोड़ (93%) घट गई उसकी संपत्ति; कंपनी पर 24 लाख करोड़ रूपए का कर्ज

चीन के अरबपति हुइ का यान  (साभार: Business Taoday)
चीन के सबसे सफल अरबपति माने जाने वाले हुइ का यान (Hui Ka Yan) कभी एशिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति थे। लेकिन देश में रियल एस्टेट संकट के कारण एवरग्रांडे ग्रुप के चेयरमैन की पिछले लगभग पाँच साल में 93 फीसदी, यानी 39 अरब डॉलर (3.18 लाख करोड़ रुपए) संपत्ति घट गई है। 2017 में उनकी नेटवर्थ 42 अरब डॉलर थी, अब 3 अरब डॉलर ही बची है। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार, एवरग्रांडे (Evergrande) 300 अरब डॉलर (24.47 लाख करोड़ रुपए) की देनदारियों के साथ सबसे ज्यादा कर्ज में डूबी कंपनी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के बाद से चीन रियल एस्टेट संकट से जूझ रहा है। हुइ (Hui) को मंदारिन में जू जियायिन (Xu Jiayin) के नाम से भी जाना जाता है, जिसने अपनी कंपनी को बचाने के लिए अपने घरों और निजी जेट विमानों को भी बेच दिया।

कर्ज में डूबी कंपनी को 2019 से अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर चाइना सिक्योरिटीज रेगुलेटरी कमिशन (CSRC) द्वारा एक जाँच का भी सामना करना पड़ रहा है। इससे भी इन्वेस्टर्स की चिंता बढ़ी है। बताया जाता है कि कर्जदारों, सप्लायर्स और इनवेस्टर्स को पैसा चुकाने के लिए कई महीने तक जूझने के बाद दिसंबर 2021 में Evergrande ने अपने यूएस डॉलर बॉन्ड्स को डिफॉल्ट कर दिया था। एवरग्रांडे चीन की बड़ी कंपनी है और उसके पास लगभग 200000 कर्मचारी हैं। 2020 में कंपनी की सेल्स 100 अरब डॉलर (816215000000) से ज्यादा रही थी। 280 शहरों में उसके 1300 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स हैं।

हालाँकि, इन सबके बावजूद हुइ और एवरग्रांडे ने एक नई सोच और उम्मीद के साथ 2023 की शुरुआत की। एएफपी के मुताबिक, एक ईमेल में हुइ का यान ने कर्मचारियों से कहा था, “2023 एवरग्रांडे के लिए कॉर्पोरेट जिम्मेदारी को पूरा करने और निर्माण परियोजनाओं में काफी कुछ करने के एक महत्वपूर्ण वर्ष है।”

हुइ ने यह भी लिखा था, “जब तक एवरग्रांडे में सभी एकजुट होकर काम करते रहेंगे, कभी हार नहीं मानेंगे, कड़ी मेहनत जारी रखेंगे। हम निश्चित रूप से कामयाब होंगे। साथ ही सभी प्रकार के कर्ज चुकाने और जोखिमों को हल करने के कार्यों को पूरा करने में सक्षम होंगे।”

दिल्ली को AAP की जीत मुबारक; भाजपा का 3% और कांग्रेस का 8% वोट बड़ा लेकिन आप का 11% कम हुआ


दिल्ली नगर निगम चुनावों के नतीजे (MCD Election Results) आ गए हैं। न तो आम आदमी पार्टी (AAP) को वह जीत मिली है, जिसके ख्वाब वह 4 दिसंबर 2022 की तारीख करीब आते-आते देखने लगी थी। न उसे वह हार मिली है जो निगम चुनावों के ऐलान के बाद उसे खुद के सर्वे में मिली थी। न नतीजे वैसे आए हैं, जैसे एग्जिट पोल वाले पंडितों ने अनुमान लगाया था। नतीजे निगम चुनावों की ऐलान के साथ बीजेपी के सोच जैसी भी नहीं है। वैसी भी नहीं है जिसके बारे में सोचकर बीजेपी वाले 4 दिसंबर को मतदान के बाद से खौफजदा थे। उस तरह के भी नहीं हैं जो सोच कांग्रेस ने चुनाव से पहले ही सरेंडर कर दिया था। यानी इन नतीजों में बीजेपी, आप, 
कांग्रेस सबके लिए थोड़ा-थोड़ा बढ़िया है। पूरा मजा किसी के लिए नहीं है। यह पूरा मजा न होना ही दिल्ली के लिए सबसे खतरनाक है।

MCD में किसकी कितनी सीटें, कितने वोट

दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। आप को 134, बीजेपी को 104, कांग्रेस को 09 और अन्य को 03 सीटें मिली हैं। इसी तरह आप को 42.05% बीजेपी को 39.09% और कांग्रेस को 11.68% सीटें मिली हैं।
                         दिल्ली निगम चुनावों में विभिन्न दलों का वोट शेयर और सीटें (स्रोत: चुनाव आयोग)

जीत तो जीत होती है

जीत तो जीत होती है, चाहे एक सीट से मिले या 100 सीट का अंतर हो। भले यह कानों को अच्छा लगता हो, लेकिन दिल्ली नगर निगम में फिट नहीं बैठता। यही कारण है कि दिल्ली नगर निगम चुनावों के रूझान आने के साथ ही यह चर्चा भी शुरू हो गई थी कि आप से पिछड़ने के बाद भी बीजेपी अपना मेयर बनवाने में कामयाब हो सकती है। इसकी दो वजहें हैं। पहली, 12 लोगों को दिल्ली के उपराज्यपाल नगर निगम में मनोनीत करते हैं। माना जा रहा है कि ये बीजेपी के साथ जाएँगे।
दूसरी, एमसीडी चुनावों में दल-बदल कानून लागू नहीं होता। यानी, कोई पार्षद जब चाहे तब उस पार्टी को टाटा-टाटा बॉय-बॉय कर दे जिसके टिकट पर जीतकर आया है। वैसे भी राहुल गाँधी आए दिन रोते रहते हैं कि उनके जीते हुए लोगों को बीजेपी लेकर चली जाती है। निगम चुनावों में बेमन से लड़ी कांग्रेस के टिकट पर जीते पार्षद उसके प्रति कितने निष्ठावान होंगे आप समझ सकते हैं। इसी तरह केजरीवाल भी गाहे-बगाहे दिल्ली में ऑपरेशन लोटस का डर दिखाते रहते हैं, जबकि विधानसभा में नंबर एकतरफा आप के साथ है। दल-बदल का कानून भी विधानसभा के स्तर पर प्रभावी है। निगम में ऐसा कुछ भी आप के हक में नहीं है। यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि एक बार मेयर का चुनाव हो जाए तो अविश्वास प्रस्ताव भी नहीं लाया जा सकता है। ऐसे में आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए कि आप की बहुमत वाली दिल्ली नगर निगम में मेयर बीजेपी से हो।
भाजपा का वोट प्रतिशत 3%बड़ा, लेकिन आप का कम हुआ  

साल 2022 के दिल्ली MCD चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने बहुमत के आँकड़े को पार कर भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया है। भाजपा की सीटें भी कम हुई हैं, लेकिन अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो इसमें बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है।

साल 2022 के MCD चुनावों में आम आदमी पार्टी को 42.10 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं भाजपा को 39.07 प्रतिशत और कांग्रेस को 11.65 प्रतिशत वोट मिले हैं। बहुजन समाज पार्टी से 2 प्रतिशत अधिक निर्दलीय उम्मीदवारों को वोट मिले हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों को 3.46 प्रतिशत वोट मिले हैं।
AAP ने 42.10 प्रतिशत वोटों के साथ MCD में 15 सालों से काबिज भाजपा को हटा दिया है। हालाँकि, उसे विधानसभा के मुकाबले वोटों के गिरे प्रतिशत उसे चिंतित कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनावों में AAP को 53.57 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में लगभग 11 प्रतिशत वोटों का उसे नुकसान हुआ है। यह AAP के लिए खुशी के साथ-साथ सतर्कता की घंटी भी है।
साल 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को 53.57 प्रतिशत वोट मिले थे। भाजपा को 38.51 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 4.26 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। इस तरह भाजपा को इस बार के MCD चुनाव में पिछले विधानसभा चुनावों के मुकाबले थोड़ा अधिक ही वोट मिला है।
हालाँकि, सबसे अधिक फायदा कांग्रेस को नजर आ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस  को सिर्फ 4.26 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि इस बार के MCD चुनाव में उसे 11.65 प्रतिशत वोट मिले हैं। इसका मतलब यह हुआ कि AAP से जो 11 प्रतिशत वोट छिटका है, उसका बहुत बड़ा हिस्सा कांग्रेस में शिफ्ट हुआ है। यानी इस बार कॉन्ग्रेस को वोट में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
पिछले MCD चुनाव की बात करें तो भी तस्वीर कुछ अलग है। साल 2017 में हुए MCD चुनाव की अपेक्षा इस बार के MCD चुनाव में AAP का वोट प्रतिशत लगभग 17 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी को लगभग 26 प्रतिशत वोट मिले थे।
इस बार के एमसीडी चुनावों में भाजपा का वोट शेयर लगभग 3 प्रतिशत बढ़ा है। पिछले MCD चुनाव में भाजपा को लगभग 36 प्रतिशत वोट मिले थे। वहीं, कांग्रेस को पिछले MCD चुनाव की अपेक्षा 9 प्रतिशत वोट का नुकसान हुआ है। पिछले एमसीडी चुनाव में कॉन्ग्रेस को लगभग 21 प्रतिशत वोट मिले थे।
साल 2017 में MCD तीन हिस्सों में थी। इसमें कुल वार्ड की संख्या 272 थी। इनमें से बीजेपी ने 181, आम आदमी पार्टी ने 49 और कांग्रेस ने 31 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा 104 सीटें मिली है, जबकि AAP को 134 सीटें मिली हैं। वहीं कांग्रेस को 9 और अन्य को 3 सीटें मिली हैं। हालाँकि, स्टोरी लिखे जाने तक मतगणना का अंतिम चरण पूरा नहीं हुआ है और इसमें कुछ बदलाव संभव हैं।

हर नंबर नेता और पोल पंडित के हक में ही होता है

नेताओं और पोल पंडितों का सबसे बड़ा हुनर यह होता है कि वे किसी भी नंबर को अपने हक में बता देंगे। इसलिए दिल्ली नगर निगम चुनाव नतीजों के भी कई विश्लेषण आपके सामने आएँगे। मसलन दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदेश गुप्ता कहेंगे कि सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया के इलाके में आप साफ हो गई है। लेकिन यह भी सच है कि उनके इलाके में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला है। इसके जवाब में वे कहेंगे कि प्रदेश अध्यक्ष का कोई इलाका नहीं होता। इलाका सांसद और विधायक का होता है। यानी चित भी मेरी, पट भी मेरी।
इसी तरह हारकर भी खुद को विजेता साबित करने के लिए नेता और खुद को जानकार साबित करने के लिए पोल पंडित अलग-अलग चुनावों के डाटा की तुलना करते हैं। बताते हैं कि फलाने का वोट इतना प्रतिशत बढ़ गया। फलाने की इतनी सीटें बढ़ गईं।
इस चुनाव के नतीजों का पिछले निगम चुनाव के नंबरों से तुलनात्मक अध्ययन नहीं होना चाहिए। क्योंकि एक बार फिर से दिल्ली में एक ही नगर निगम किया गया है। नए सिरे से परिसीमन हुआ है। आधी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कुल मिलाकर एक नए पिच पर यह चुनाव हुआ है। इसी तरह नंबरों की तुलना विधानसभा चुनाव के डाटा से भी नहीं किया जाना चाहिए। फिर यह तुलना लोकसभा चुनाव तक जा सकती है।

इन नतीजों को कैसे समझे

  • लगातार दो विधानसभा चुनावों में दिल्ली में आप अपराजेय दिखी है। दिल्ली की जमीन पर भी उसका असर साफ दिखता है। लेकिन ये नतीजे दिखाते हैं कि आप अपराजेय नहीं रही है। उसके हर कहे पर जनता को यकीन नहीं है।
  • मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने जिस मंत्री सत्येंद्र जैन को ‘कट्टर ईमानदार’ बताते हैं उनके इलाके में आप साफ हो गई है। मतलब केजरीवाल के कहे की साख नहीं रही। जनता को दिख रहा है कि उसका नुमाइंदा जेल में बंद क्या कर रहा है।
  • आम आदमी पार्टी शिक्षा का जो मॉडल बेचती है उसे दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ही देखते हैं। लेकिन उनके इलाके में भी पार्टी को पराजय मिली है। खुद उनके रिश्तेदार तक हार गए हैं। मतलब सिसोदिया की छवि शराब से दागदार हुई है। जनता भी मानती है कि जिसका मॉडल बेचा रहा है उसमें खोट है।
  • कांग्रेस को 9 सीट और वोट डबल डिजिट में मिले हैं। यानी कांग्रेस दिल्ली के संगठन में ताकत झोंके, नए चेहरे लाएँ तो वह उस वोट बैंक का एक हिस्सा फिर से वापस ला सकती है जो उससे पूरी तरह छिटक कर आप के पास जा चुकी है। खासकर, कुछेक मुस्लिम बहुल सीटों पर उसकी जीत के गहरे मायने हैं।
  • लगातार 15 साल से दिल्ली नगर निगम पर काबिज रही बीजेपी को यह नतीजे बताते हैं कि पब्लिक को अपने घर के बाहर जमा कूड़ा दिख रहा था। वो देख रही थी कि कूड़े का ढेर बढ़ रहा है। वो समझ रही थी कि प्रचंड बहुमत से विधानसभा में काबिज आप, बीजेपी शासित नगर निगमों को कूड़ा उठाने से नहीं रोक रही है। यह भी कि 2024 से पहले वह अपने सांसदों का नट-बोल्ट टाइट करे। दिल्ली में कोई ऐसा चेहरा तैयार करे जो अपने प्रभाव से करीबी मुकाबलों को उसके पक्ष में झुका दे।
आज का दिन दिल्ली की आप सरकार की नाकामियों को गिनाने का नहीं है। यह भी बताने का नहीं है कि उसकी कारगुजारियों से जनता कितनी परिचित है। विधानसभा में प्रचंड बहुमत के बावजूद वह अपनी नाकामियों का ठीकरा आए दिन भाजपा शासित एमसीडी और उपराज्यपाल पर फोड़ती रही है। अब निगम वाला बहाना उसके हाथ से निकल गया है। कूड़े की नाराजगी ने भले बीजेपी को दूसरे नंबर पर धकेल दिया है, लेकिन आप को भी ऐसे नंबर नहीं दिए हैं कि कूड़ा उठाना अकेले उसकी जिम्मेदारी ही रहे। उलटे इन नतीजों से आप को मौका दिया है कि वह उन ‘कूड़ों’ का भी निगम के अधीन आने वाले क्षेत्रों में प्रसार करे जो केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के अपने अधीन आने वाले क्षेत्रों में पिछले सात-आठ साल में किया है।
कुल मिलाकर इन नतीजों से दिल्ली ने कूड़े के ढेर, राजनीतिक गंदगी और यमुना में झाग का बढ़ना ही अपने लिए तय किया है। ऐसा उसने केजरीवाल से भंग होते मोह और घर के बाहर लगे कूड़े के ढेर की दुविधा में किया है। दुखद यह है कि ये तथ्य आँकड़ें नहीं बताते। जिस जमीन पर यह सब लिखा होता है, वहाँ चरण धरते ही हमारे पोल पंडितों और नेताओं को रतौंधी हो जाती है।

दिल्ली : फार्महाउस में जिस अधनंगे AAP उम्मीदवार का वीडियो हुआ था वायरल, वो भाजपा से हार गया

दिल्ली MCD चुनावों में आप प्रत्याशी अमरजीत छिल्लर
दिल्ली में हुए MCD चुनावों में जनता ने आम आदमी पार्टी को 134 सीटें देकर जरूर सत्ता में ला दिया है, जिसकी जिम्मेदार केवल भाजपा ही नहीं, कांग्रेस भी है। आम आदमी पार्टी के गठन होने से अक्सर इस बात को लिखता हूँ कि मोदी विरोध में इस पार्टी को गुप्त समर्थन कांग्रेस को ही ख़त्म कर रहा है। कांग्रेस को अपने अस्तित्व को बनाने के लिए केजरीवाल पार्टी को समर्थन बंद करना होगा। जिस दिन कांग्रेस इसे अपना गुप्त समर्थन बंद कर अपने आपको मजबूत करना शुरू कर देगी, केजरीवाल पार्टी स्वतः अपने पतन की ओर अग्रसर हो जाएगी। उसके लिए गाँधी परिवार की अंध भक्ति को त्यागना होगा। टीवी पर चुनाव चर्चा में एक सनसनीखेज समाचार सुनने को मिला कि कई क्षेत्रों में कांग्रेस को उम्मीदवार के लाले पड़े हुए थे। यह उस पार्टी की दुर्दशा है जो देश को आज़ादी दिलवाने वाली पार्टी कहती है। 

जिन-जिन राज्यों में कांग्रेस मजबूत है, केजरीवाल पार्टी के उम्मीदवारों की जमानतें जब्त हुई हैं। अभी भी समय है कांग्रेस परिवार भक्ति को त्याग जनहित समस्याओं जैसे महंगाई, भ्रष्टाचार, दिल्ली प्रशासन और केंद्र के कार्यालयों में रिक्त पड़े स्थानों आदि पर धरने/प्रदर्शन कर जनता की सहानुभूति लेने का प्रयास करे, अन्यथा वह दिन दूर नहीं, जब कांग्रेस की हालत क्षेत्रीय दलों जैसी होने वाली है। 

ताजा जानकारी के मुताबिक, वसंत कुंज से भाजपा प्रत्याशी ने बाजी मार ली है। यहाँ भाजपा उम्मीदवार जगमोहन मेहलावत ने आम आदमी पार्टी (AAP) कैंडिडेट अमरजीत छिल्लर को हरा दिया है। कुछ ही समय पहले आप कैंडिडेट का बिना शर्ट के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जगमोहन मेहलावत के समर्थकों ने जीत का जश्न भी मनाना शुरू कर दिया है। कुछ समय पहले आप प्रत्याशी अमरजीत का बिना शर्ट वीडियो वायरल हुआ था। दिल्ली भाजपा के ट्विटर हैंडल से 3 दिसम्बर 2022 (शनिवार) को इस 25 सेकेण्ड के वीडियो को शेयर करते हुए उन पर शराब के नशे में होने का आरोप लगाया है। उस वीडियो में कुछ ने लोग भी दिख रहे थे जो बिना रिजल्ट आए ही अमरजीत को विजेता घोषित कर रहे थे।

अवलोकन करें:-

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दिल्ली की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के 

वीडियो में छिल्लर के साथ कुछ अन्य लोग भी दिखाई दे रहे थे। उसमें से कुछ लोगों ने छिल्लर की तरह शर्ट नहीं पहनी थी। यह वीडियो रात में बनाया गया है जिसमे अमरजीत 360 डिग्री घुमा कर बना रहे हैं। इस वीडियो में छिल्लर को ‘एक तू ही धनवान है गोरी, बाकी सब कंगाल’ वाला गाना गाते सुना जा सकता है। पीछे की तरफ स्विमिंग पुल दिखाई दे रहा। पीछे खड़े लोगों ने छिल्लर से पार्षद बनने का टाइम पूछा तो जवाब मिला, “बहुत जल्द’। आप प्रत्याशी के हाथ में एक फाइबर का ग्लास भी नजर आ रहा है जिसमें कुछ तरल पदार्थ है। भाजपा के मुताबिक, ये दारू का ग्लास है।