पीएम मोदी एवं सैन्य सुधार (फोटो साभार: टाइम्स नाऊ/इंडिया अहेड)
आज सडकों पर उपद्रव, धरने और आगजनी आदि से विपक्ष भारत में अशांति फैलाकर क्या सिद्ध करना चाहता है? इन मुद्दों पर देश का माहौल ख़राब किया जा रहा है, क्या वह राष्ट्र एवं जनहित में है? क्या कभी चिंतन करने का साहस कर सकते हो? यह देश का दुर्भाग्य है कि आज विपक्ष पूर्णरूप से दिशाहीन हो चूका है। लोकतंत्र को शक्तिशाली बनाने के लिए विरोध बहुत जरुरी है और उसके लिए बुद्धि की जरुरी है, जिसका शायद विपक्ष के पास अकाल पड़ चूका है। मुद्दे एक नहीं हज़ारों हैं, जिन पर सरकार को घेरा जा सकता है, लेकिन उसके लिए हिम्मत चाहिए, तुष्टिकरण नहीं। लेकिन कुछ मुद्दों पर मोदी सरकार भी भीगी बिल्ली नज़र आयी।
नूपुर शर्मा के विरुद्ध उपजा विवाद एक ही दिन में समाप्त हो सकता था, बशर्ते कट्टरपंथियों और इनके समर्थकों से यह पूछा जाता कि जो नूपुर ने जो कहा है वह हदीस में लिखा है या नहीं? जब वही बात ज़ाकिर नाइक बोले ठीक फिर नूपुर गलत क्यों? क्या यह दोगलापन नहीं? ज्ञानवापी का सर्वे करवाने वाले जज को धमकी, क्यों? क्यों नहीं तुरंत गिरफ्तार किया धमकी देने वाले को। दूसरे, श्रीराम से लेकर शिवलिंग और कृष्ण भगवानों तक के लिए अपशब्द बोलने वालों पर तुरंत कार्यवाही होनी थी। अगर कार्यवाही हुई होती, किसी तस्लीम रहमानी की नूपुर को उकसाने की हिम्मत नहीं होती। अधिकांश मुसलमानों को यह भी नहीं पता की असली मसला क्या है, नूपुर ने पैगम्बर की शान में कौन-सी गाली दी है, गाली दी है या हदीस में लिखी बात कही है। अपनी TRP बढ़ाने के चक्कर में मीडिया भी असली मुद्दा छुपा गया। अंजाम क्या हुआ, नूपुर विवाद में काशी और मथुरा पर कोई चर्चा ही नहीं होती। और कट्टरपंथी यही चाहते थे।
दूसरे, अग्निवीर के विरुद्ध युवाओं को भड़काने की बजाए नेताओं और पार्टियों को विरोध करना चाहिए था कि जब अग्निवीरों को पेंशन नहीं फिर नेताओं को पेंशन क्यों? जिस दिन नेताओं को पेंशन बंद हो गयी, हर महीने सरकार को करोड़ों की बचत होगी। महंगाई पर फर्क पड़ेगा। परन्तु उस पर कोई नहीं बोलता, क्योकि उससे नेताओं को ही नुकसान है। तीसरे, सरकार चाहिए कि मुंह को ढककर पत्थरबाज़ी या उपद्रव करने वालों पर लाठीचार्ज नहीं रबर बुलेट चलानी चाहिए।
भारतीय सेना में एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अग्निपथ योजना की शुरुआत की है। हालाँकि, कांग्रेस सहित विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे है। कांग्रेस का कहना है कि कृषि कानूनों की तरह ही इसे भी वापस लेना पड़ेगा है।
राहुल गाँधी ने कहा कि युवाओं को भाजपा कार्यालयों में चौकीदार नहीं बनाना है, कि वे अग्निवीर बनें। कांग्रेस इसे सेना को खत्म करने की साजिश बताया है। वहीं, भाजपा इसे सेना में सुधार की प्रक्रिया में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम कहा है।
आज कांग्रेस भाजपा पर सेना को कमजोर और खत्म करने का आरोप लगा रही है तो हमें देखना होगा कि कांग्रेस ने सेना को मजबूत और देश की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए क्या किया है। इस देश में कांग्रेस ने लंबे समय, लगभग 40 सालों तक शासन किया है।
साल 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में पहली बार केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी, तब देश के हालात बहुत बढ़िया नहीं थे। हम खासतौर पर सुरक्षा हालातों की बात कर रहे हैं। उस समय देश के पास ना तो पर्याप्त गोला-बारूद थे और ना ही अत्याधुनिक हथियार। पुराने पड़ चुके लड़ाकू विमान अपनी अंतिम साँसें गिन रहे थे।
कांग्रेस शासन में सेना के पास गोला-बारूद तक नहीं थे
कंपनियों को कांग्रेस ने किया था ब्लैकलिस्ट
तख्ता पलट का आरोप लगाकर सेना को बदनाम करने की कोशिश
साल 2014 में पीएम मोदी के सामने चुनौतियाँ
आत्मनिर्भरता के लिए मेक इन इंडिया प्रोग्राम
अत्याधुनिक हथियारों की खरीद
सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए सैन्य ताकत का प्रदर्शन
CDS की नियुक्ति और आपातकाल में रक्षा खरीद का अधिकार
जनवरी 2020 में थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत के सेवानिवृत होने के बाद उन्हें पहला CDS नियुक्त किया गया था। दिसंबर 2021 में एक दुर्घटना में निधन होने तक वे इस पद पर बने रहे थे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद हाईब्रिड वारफेयर की दुनिया में अहम माना जाता है। इस पद के सृजन की बात 1999 में कारिगल युद्ध के बाद दी गई थी।
ऑर्डिनेंस कंपनियों का एकीकरण
मोदी सरकार ने आपातकाल में कल-पुर्जे और गोला-बारूद की खरीद करने की ताकत भी सेना को दे दी। अब कोई भी सर्विस हेडक्वार्टर्स 300 करोड़ रुपए तक की खरीद खुद कर सकता है। वहीं, अब रक्षा मंत्रालय को भी 2,000 करोड़ रुपए तक की रक्षा खरीद के लिए कैबिनेट की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं है।
अक्टूबर 2021 में 41 ऑर्डिनेस कंपनियों को एकीकृत कर 7 नयी कंपनियाँ बनायी गईं, जिनमें से 6 कंपनियों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, मोदी सरकार ने 100 करोड़ रुपए का एक कॉर्प्स फंड बनाया है। इसका प्रयोग रक्षा उत्पादन में लगे भारतीय उद्योग, खासकर मध्यम और सूक्ष्म उद्योग रक्षा उत्पादों के भारतीयकरण पर काम कर सकें।
वन रैंक वन पेंशन को लागू करना
एक महत्वपूर्ण सुधार के तहत मोदी सरकार ने दशकों से लंबित वन रैंक वन पेंशन को लागू कर दिया। इसके तहत 20.6 लाख पेंशन धारकों या उनके परिवार वालों को बकाया राशि दी गयी। इस योजना पर सरकार सालाना लगभग 7,123 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
इसके साथ ही सरकार ने स्पर्श योजना शुरुआत की, जिसके तहत पेंशन धारकों को उनके बैंक खाते में सीधे पैसा मिलने लगा। इस स्पर्श प्लेटफॉर्म पर 5 लाख से ज्यादा पेंशन धारक है, जिन्हें 2021-22 में 11,600 करोड़ रुपए दिए गए।
अग्निपथ: सेना को जवान बनाए रखने की कोशिश
कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट के आधार पर सैन्य सुधारों को आगे बढ़ाते हुए मोदी सरकार ने अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की नियुक्ति की मंजूरी दी है। यह सुधार तीन मायनों में प्रमुख है। पहली बात, सेना पर से खर्च का दबाव कम करना ताकि वह अपने आधुनिकीकरण पर ध्यान दे सके। दूसरे, सेना की औसत आयु को कम करना, ताकि सेना हमेशा जवान और फिट बनी रहे। तीसरा, आपातकालीन स्थिति में देश में प्रशिक्षित लोगों की तैयार करना, जो जरूरत पर देश के काम आए।
अग्निपथ योजना के तहत सरकार ने तीनों सेनाओं में अग्निवीरों की भर्ती का ऐलान किया है। यह भर्ती सिर्फ 4 वर्षों के लिए की जाएगी। इसके लिए 17.5 साल से 21 साल की उम्र निर्धारित की गई है। इन चार वर्षों में अग्निवीर सेवा से अलग नहीं हो सकते। अगर ऐसा करने की कोशिश करते हैं तो उन्हें शीर्ष अधिकारियों की स्वीकृति लेनी पड़ेगी।
सैन्य सुधार के लिए करगिल रिव्यू कमिटी की सिफारिशें
सैन्य सुधारों की दिशा में करगिल रिव्यू कमिटी की सिफारिशें महत्वपूर्ण थी। कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, “सेना को हर समय जवान और फिट रहना चाहिए। इसलिए 17 साल की सेवा (जैसा कि 1976 से नीति रही है) की वर्तमान प्रथा के बजाय, यह सलाह दी जाएगी कि सेवा को सात से दस साल की अवधि तक कम कर दिया जाए। इसके बाद अधिकारियों और जवानों को देश के अर्धसैनिक बलों में सेवा के लिए मुक्त कर दिया जाए।”
समिति ने महसूस किया था कि 1999-2000 में सेना का ₹6,932 करोड़ का पेंशन बिल कुल वेतन बिल का लगभग दो-तिहाई था और यह हर साल तेजी से बढ़ रहा था। इस वर्ष के बजट में रक्षा के लिए ₹5.25 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं। इनमें से ₹1,19,696 करोड़ अकेले पेंशन के लिए आवंटित किए गए हैं। इसका अर्थ है कि रक्षा बजट का लगभग 25% केवल पेंशन के भुगतान के लिए खर्च किया जाता है। वन रैंक वन पेंशन (OROP) योजना के लागू होने के बाद सेना की पेंशन में तेजी से वृद्धि हुई है।
कारगिल समिति ही नहीं, भारतीय सेना ने भी जनशक्ति लागत को बचाने के लिए अग्निपथ योजना के समान एक भर्ती योजना का प्रस्ताव दिया था। सेना ने 2020 में युवाओं को 3 साल के लिए भर्ती करने के लिए ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ योजना का प्रस्ताव दिया था। मौजूदा योजना में इस प्रस्ताव के साथ कई समानताएँ हैं। हालाँकि, सेना द्वारा प्रस्तुत योजना में सेवा अवधि 4 साल के बजाय 3 साल तय की गई थी।

No comments:
Post a Comment