वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा जो अपने शो में नूपुर शर्मा से लेकर हैदराबाद के राजा सिंह तक के विवादित मुद्दों पर मुस्लिम कट्टरपंथियों को भी नापने में क्षण भर भी नहीं झिझके। उसी बेबाकी से अरविन्द केजरीवाल के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की नयी शराब नीति का पर्दाफाश किया है, उतनी बेबाकी से भाजपा भी नहीं कर पायी। जब दिल्ली में एक के साथ एक फ्री शराब की बोतल मिलने पर शराब पीने वाले बहुत खुश हुए, लेकिन उन्हें नहीं मालूम की दुकानदार अपनी जेब से कुछ नहीं दे रहा था, परन्तु सरकार को कितना अधिक नुकसान हो रहा था, उससे शराबियों के साथ समस्त दिल्ली अनजान थी, और इस अति गंभीर मुद्दे को भाजपा ने भी उठाने में जरुरत से ज्यादा देर की है। गौरतलब बात यह है कि कोरोना के समय सबसे पहले शराब की बिक्री शुरू हुई,क्यों? क्योकि जितनी अधिक आय शराब की बिक्री से सरकार को होती है,उतनी किसी अन्य उत्पादन से नहीं।
दिल्ली सरकार की पुरानी शराब नीति की तुलना में 2021-22 में मनीष सिसोदिया द्वारा लाई गई नई नीति के तहत शराब विक्रेताओं को रिटेल मार्जिन में 989% की वृद्धि हो गई। यानी नई शराब नीति लाए जाने के बाद शराब कारोबारी लगभग एक हजार प्रतिशत का मुनाफा कमा रहे थे। वहीं सरकार को नई नीति से राजस्व का घाटा हो रहा था। एक उदाहरण से समझिए नई पुरानी शराब नीति में फर्क। RK ब्रांड की शराब की 750 ml बोतल पर कारोबारी पुरानी नीति के तहत 33.35 रुपए कमा रहे थे। वहीं, नई नीति के तहत इसी बोतल पर कारोबारी 363.27 रुपए कमा रहे थे। यानी हर बोतल पर 330 रुपए ज्यादा।
अब नई नीति से सरकार को कैसे घाटा हुआ यह देखिए।
दिल्ली की पुरानी शराब नीति बनाम AAP की नई शराब नीति। pic.twitter.com/KgTf1xlYLh
— BJP Delhi (@BJP4Delhi) August 24, 2022
पुरानी नीति के तहत सरकार को 530 रुपए की एक बोतल पर 223.89 रुपए मिलते थे। नई नीति के तहत एक्साइज ड्यूटी होलसेल प्राइज का सिर्फ 1% कर दी गई। यानी ग्राहकों को 560 रुपए में मिलने वाली बोलत पर पुरानी नीति में सरकार को जहां 223.89 रुपए मिलते थे वहीं नई नीति में एक्साइज ड्यूटी होलसेल प्राइज का सिर्फ 1% कर देने से सरकार को सिर्फ 1.88 पैसा एक्साइज ड्यूटी मिली। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली में कितना बड़ा शराब घोटाला हुआ है।
If Kejriwal has located all his MLAs and run out of ideas to deflect attention from the liquor excise scam, he should explain why the policy was reversed immediately after an inquiry was ordered, retailer margin increased more than 10x and Govt revenue dropped to Rs 8 (from 329). https://t.co/TaxEqs5jbx
— Bhavin Shah (@bjpbhavinshah) August 26, 2022
नई और पुरानी शराब नीति में फर्क इस टेबल के जरिये समझिएः
पुरानी शराब नीति
750ML थोक कीमत 166.73रूपए
एक्साइज ड्यूटी 223.88रूपए
VAT 106.00रूपए
रिटेलर कमीसन 33.39रूपए
एमआरपी 530.00रूपए
नई शराब नीति (लागू मार्च 2022)
750ML थोक कीमत 188.41रूपए
एक्साइज ड्यूटी 1.88रूपए
VAT 1% 1.90रूपए
रिटेलर मार्जिन 363.27रूपए
अतिरिक्त एक्साइज 4.54रूपए
एमआरपी 560.00रूपए
इस प्रकार पुरानी शराब नीति में एक बोतल पर सरकार की कमाई 329.89 रुपए थी जो नई शराब नीति में मात्र 8.32 रुपए रह गई। यानी नई नीति से प्रति बोतल सरकार को ₹321.57 का घाटा हुआ। पुरानी नीति में रिटेलर का कमीशन 33.39 था जबकि नई नीति में रिटेलर का कमीशन 363.27 हो गया अर्थात प्रति बोतल ₹330.12 का रिटेलर को फायदा को पहुंचा। इससे स्पष्ट होता है कि प्रति बोतल सरकार को जितना नुकसान होता है लगभग उतना ही बल्कि उससे भी थोड़ा ज्यादा रिटेलर को फायदा पहुंचता है। अब कोई भी आसानी से समझ सकता है कि सिसोदिया और केजरीवाल की चतुराई से तैयार की गई नई नीति से मैन्युफेक्टरर्स/ रिटेलर्स को कितना बड़ा फायदा पंहुचाया गया। अब ये फायदा मैन्युफैक्चरर को कैसे पंहुचे तो नई नीति में मैन्युफैक्चरर्स को रिटेल में भी शॉप खोलने की अनुमति दे दी गई (जो कि नियमानुसार गलत थी)।
दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने शराब नीति में परिवर्तन करके कैसे कैसे राजस्व कि जगह रिटेलर्स के के मार्जिन को बढ़ाया
— Saurabh Srivastava HHB (@Saurabh37244583) August 26, 2022
और रिटेलर्स के मार्जिन में बन्दरबांट कि गई यह इस साधारण आंकड़े से समझा जा सकता है
इस घोटाले के मास्टरमाइंड मनीष सिसोदिया ही हैं
आखिर चुनावों के लिए फण्ड भी तो चाहिए, pic.twitter.com/M22H9qEm9A
पुरानी नीति में शराब की बिक्री प्रतिमाह 132 लाख लीटर थी जो नई नीति में 245 लाख लीटर हो गई
पुरानी नीति में जहां शराब की बिक्री प्रतिमाह 132 लाख लीटर थी तो नई शराब नीति में प्रतिमाह शराब की बिक्री 245 लाख लीटर हो गई। इस बिक्री को बढ़ाने के लिए बाकायदा पीने बाले की उम्र घटाकर 18 साल और समय बढाकर रात्रि 3 बजे तक कर दिया गया। ड्राई डे 31 से कम करके सिर्फ़ 3 दिन कर दिए। जिससे शराब की खपत कम से कम 8-10 % और बढ़ गई।
आप की बात का बुरा कौन मानेगा आप का मक़सद तो सिर्फ़ प्रचार कर अपना चेहरा चमकाना है और जनता के टैक्स को शराब के ठेकेदारों में बाँटना है!
— Manoj Tiwari 🇮🇳 (@ManojTiwariMP) August 26, 2022
आप से झूठ बोलना नही सीखाना है किसी को भी
और हाँ 2 नए स्कूल का पता ही बता दो जो आप ने दिल्ली में बनवाए हो..
शराब नीति पर जवाब क्यों नही देते #AAP? https://t.co/5largTwWXl
नई शराब नीति के जरिये की गई मनी लॉन्ड्रिंग
नई शराब नीति के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग भी की गई। कई बड़े शराब करोबारियों ने अपनी दुकानों पर एक के साथ एक फ्री बोतल का आफर दिया। यानी शराब की किसी एक बोतल की कीमत 500 रुपए है तो लोगों को 500 रुपये में एक बोतल के साथ एक फ्री दिया गया। अब सरकार की नजर में तो एक बोतल बिका लेकिन कारोबारी ने दो बोतल के दाम यानी 1000 रुपए बैंक में जमा किए। यहां सवाल यह उठता है कि जब जनता से 500 रुपए लिए गए तो 1000 रुपए कैसे बैंक में जमा कराए गए। यानी यहां काला धन को सफेद किया गया। जांच एजेंसियां इस पहलू से भी मामले में जांच कर रही हैं। इन्हीं गोरखधंधे की वजह से दिल्ली में शराब की बिक्री करने वाले कई छोटे वेंडर्स दुकानें बंद कर चुके हैं। उनका आरोप है कि बड़े कारोबारी अपने यहां भारी छूट देते रहे हैं और ऐसे में उनके लिए कारोबार कर पाना लगभग नामुमकिन हो गया है।
आज दिल्ली के सी.आर पार्क में @BJP4Delhi के कार्यकर्ताओं के साथ दिल्ली सरकार की विनाशकारी शराब नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
— Meenakashi Lekhi (@M_Lekhi) August 25, 2022
यह "आप" के पाप हैं जो इनके शराब माफिया दोस्तावाद के लिए इन्होने उनका कमीशन बढ़ाया और दिल्ली की जनता की कमाई को लूटा। pic.twitter.com/ZHiqw6Wqb6
बकलोली बंध कर .
— 🇮🇳 (@Prakash74933439) August 26, 2022
7 साल में कितने स्कूल बनाये ये बताओ. pic.twitter.com/nXRNvkLl4c
इन बातों से यह साफ हो जाता है कि नई शराब नीति कितना बड़ा घोटाला है और केजरीवाल गैंग में इस नीति की आड़ में कितनी कमाई की होगी। यह वजह है दिल्ली के मुख्य सचिव ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर इसमें हो रही गड़बड़ी की तरफ ध्यान दिलाया और जांच की बात कही। अब इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों को शक है कि सिसोदिया और केजरीवाल ने अगर शराब कारोबारियों को इतना लाभ पहुंचाया तो आम आदमी पार्टी के नेताओं को रिश्वत के तौर पर पैसे मिल रहे होंगे। बीजेपी इसीलिए लगातार आरोप लगा रही है कि यह हजारों करोड़ रुपये का घोटाला है।

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