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AC, कुर्सी, टीवी, पंखा… सरकारी ऑफिस से सब कुछ लेकर चले गए मनीष सिसोदिया


विधानसभा चुनाव हारने के बाद AAP नेता मनीष सिसोदिया कैम्प कार्यालय से लाखों का सामान चुरा ले गए। वह पटपडगंज में बने PWD के विधानसभा कैम्प कार्यालय से AC, LED TV, कुर्सी-मेज समेत साउंड सिस्टम भी उठा ले गए। यह आरोप पटपडगंज के नए विधायक रविंदर सिंह नेगी ने लगाया है।

उन्होंने इस कार्यालय पर जाकर स्थिति बताई है। रविंदर सिंह नेगी ने कहा, “ईमानदारी का ढोंग रचने वाले सरकारी समान लेकर चले गए… खाली ढाँचा खड़ा है।” रविंदर सिंह नेगी ने दावा किया कि सिसोदिया 250-300 कुर्सियाँ, हॉल में लगे हुए AC और ₹2-3 लाख का टीवी भी ले गए। उन्होंने कहा कि अब केवल टीवी का स्टैंड बचा हुआ है।

रविंदर सिह नेगी ने यह भी आरोप लगाया है कि सिसोदिया ₹12 लाख साउंड सिस्टम भी उखाड़ ले गए। नेगी ने हर कमरे का हाल दिखाया है। रविंदर नेगी ने आरोप लगाया कि चोरी के साथ ही सिसोदिया के लोगों ने कार्यालय को क्षतिग्रस्त भी किया और दरवाजे तोड़े।

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नेगी ने नाराजगी जताते हुए कहा, “इन लोगों को इतना शर्म नहीं आई कि नया विधायक कहाँ बैठेगा।” नेगी ने ऐलान किया है कि भाजपा की सरकार सिसोदिया को कानूनी नोटिस भेजेगी और इस मामले में कार्रवाई होगी।

नई दिल्ली से अरविंद केजरीवाल हार ने जेल का रास्ता साफ, जंगपुरा की जंग जीत नहीं पाए मनीष सिसोदिया; दिल्ली सचिवालय सील किया; कश्मीरी पंडितों के दर्द पर हंसने वाली राखी बिड़ला भी गयी


दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP मुखिया अरविन्द केजरीवाल नई दिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं। उन्हें भाजपा के प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने पटखनी दी है। वोटों की गिनती के दौरान अरविन्द केजरीवाल लगातार पीछे चल रहे थे। इस सीट पर कांग्रेस के संदीप दीक्षित तीसरे नम्बर पर रहे हैं।

दिल्ली से केजरीवाल सरकार जाते ही दिल्ली सरकार प्रशासन ने दिल्ली सचिवालय को सील करने का बहुत ही जबरदस्त कार्यवाही कर सीधा संकेत दे दिए हैं कि केजरीवाल और इनके कई मंत्री जेल जा सकते हैं। शराब घोटाले में केजरीवाल पहले ही आतिशी और सौरभ का नाम ले चुके हैं।  

जैसाकि शंका जताई जा रही थी कि दिल्ली की सत्ता जाने पर पंजाब में केजरीवाल की सरकार पर खतरे के बादल मंडराने शुरू हो गए हैं। इतना ही नहीं दिल्ली नगर निगम भी हाथ से जाती नजर आने लगी है। जिसका असर INDI गठबंधन में अरविन्द और राहुल के भविष्य पर भी पड़ेगा। अगर कांग्रेस ने ज्यादा मजबूती से चुनाव लड़ा होता केजरीवाल पार्टी को हाशिए पर लाकर कांग्रेस को हर चुनाव में मात देने का बदला ले लिया होता, लेकिन कांग्रेस ने हाथ से मौका निकाल दिया। 

दिल्ली विधानसभा चुनाव में AAP की तगड़ी हार पर पार्टी के पूर्व नेता और कवि कुमार विश्वास ने तंज कसा है। उन्होंने 2022 में किया गया एक ट्वीट वापस डाला है। इसमें उन्होंने लिखा था, “अहंकार ईश्वर का भोजन है।” इसमें उन्होंने सहयोग करने वालों का तिरस्कार ना करने की हिदायत दी थी। उन्होंने भाजपा को जीत पर बधाई दी।

उन्होंने चुनाव के बाद केजरीवाल पर कहा ,”अन्ना आंदोलन से आए AAP के लाखों कार्यकर्ताओं के भारत के राजनीति को बदलने के सपने की हत्या निर्लज्ज, नीच, मित्रहंता, आत्ममुग्ध और चरित्रहीन व्यक्ति ने की, उसके प्रति कोई संवेदना नहीं। अब AAP में बचे हुए लोग भी छोड़कर जाएँगे।”

इसके अलावा दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी हार गए हैं। वह जंगपुरा से चुनाव लड़ रहे थे। उन्हें भाजपा के तरविंदर सिंह मारवाह ने शिकस्त दी है। मारवाह ने सिसोदिया को लगभग 600 वोटों से हराया है। मनीष सिसोदिया ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। सिसोदिया पटपडगंज सीट छोड़ कर यहाँ चुनाव लड़ने आए थे।

मनीष सिसोदिया ने कहा है कि उन्हें 600 वोट कम मिले, इसके चलते वह हारे। दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणामों में भाजपा बड़े बहुमत की तरफ बढ़ रही है। भाजपा इस चुनाव में 48 सीट लाती दिख रही है तो वहीं AAP 22 सीटों पर सिमट रही है। कॉन्ग्रेस का लगातार तीसरी बार खाता नहीं खुला है।

दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजों की तस्वीर देख आम आदमी पार्टी की हालत खस्ता है। बड़े-बड़े नेता अपनी सीटों पर पीछे चल रहे हैं। इसी लिस्ट में एक नाम राखी बिड़ला का भी है जो कुछ समय पहले कश्मीरियों पंडितों के दर्द पर ठहाके मारकर हँसने के कारण वायरल हुई थीं।

आम आदमी पार्टी की नेता राखी बिड़ला को इस बार AAP ने मादीपुर विधानसभा सीट से उतारा था। अभी तक सामने आई जानकारी के अनुसार, राखी बिड़ला पीछे चल रही हैं। उन्हें टक्कर दे रहे हैं भाजपा के कैलाश गंगवाल।


5 साल में AAP नेता मनीष सिसोदिया की संपत्ति में 7 गुना इजाफा, कमाई भी 7 गुना बढ़ी: हलफनामे से खुलासा, बेटी के कनाडा के ओंटारियो शहर में चल रहे 3 खाते


दिल्ली उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की चल सम्पत्ति में बीते पाँच वर्षों में 7 गुना की बढ़ोतरी हुई है। उनकी सालाना कमाई भी लगभग 7 गुना की बढ़ोतरी हुई है। उनकी पत्नी के पास भी प्रॉपर्टी बढ़ गई है। यह सब जानकारी उनके चुनावी हलफनामे से बाहर आई है। सिसोदिया आम आदमी पार्टी के जंगपुरा विधानसभा सीट से AAP के उम्मीदवार हैं।

AAP ने इस बार उनकी सीट बदल दी है। उन्होंने जंगपुरा सीट से गुरुवार(16 जनवरी, 2025) को नामांकन किया है। इसी में उन्होंने अपना हलफनामा दिया है, जिसके भीतर उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी सामने आई है। मनीष सिसोदिया ने बताया है कि उनके पास 34.43 लाख रूपए की चल सम्पत्ति है।

उन्होंने बताया है कि उनके पास 4 बैंक खाते और फिक्स्ड डिपाजिट (FD) हैं। मनीष सिसोदिया ने खुलासा किया है कि इनमें 34 लाख रूपए जमा हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के खाते में 2 लाख रूपए जमा हैं। हलफनामे में मनीष सिसोदिया ने बताया है कि उनके और उनकी पत्नी के पास 40 हजार रूपए नकद हैं।

मनीष सिसोदिया के हलफनामे से यह भी खुलासा हुआ है कि उनकी बेटी मीर सिसोदिया के विदेश में तीन खाते हैं। यह तीनों खाते कनाडा के ओंटारियो शहर में हैं। इन खातों में 2.4 लाख रूपए जमा हैं। उनकी पत्नी के पास 10 लाख रूपए से ज्यादा का लगभग 150 ग्राम सोना है। कुल मिलाकर दंपती के पास 47.30 लाख रूपए की चल सम्पत्ति है।

मनीष सिसोदिया की चल सम्पत्ति 2020 के चुनाव के दौरान 4.74 लाख रूपए और उनकी पत्नी की सम्पत्ति 2.66 लाख रूपए थी। इसकी तुलना वर्तमान सम्पत्ति से की जाए तो मनीष सिसोदिया की सम्पत्ति 700% जबकि उनकी पत्नी की सम्पत्ति 483% बढ़ गई है।

दोनों ने अपनी अचल सम्पत्ति की भी हलफनामे में जानकारी दी है। मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी के पास 93 लाख रूपए के 2 फ़्लैट हैं। एक फ़्लैट दिल्ली तो वहीं दूसरा गाजियाबाद में हैं। एक की कीमत 23 लाख रूपए और दूसरे की 70 लाख रूपए है। उन्होंने इस हलफनामे में अपने मुकदमों और कमाई के बारे में भी बताया है।

उनके मुकदमे शराब घोटाला से जुड़े हैं। वहीं सालाना कमाई में भी अच्छी खासी बढ़त हुई है। हलफनामे के अनुसार, 2021-22 में उन्होंने अपने ITR में बताया है कि उनकी कमाई 1.59 लाख रूपए थी। यह 2023-24 में बढ़ कर 11.59 लाख रूपए हो गई। उनकी पत्नी ने भी 78 हजार रूपए सालाना कमाई का खुलासा किया है।

दारू घोटाले से दिल्ली को हुआ 2026 करोड़ रूपए का नुकसान: CAG रिपोर्ट में खुलासा; मुख्यमंत्री आतिशी उपराज्यपाल के कहने के बावजूद क्यों नहीं CAG रिपोर्ट विधान सभा में प्रस्तुत की?

आम आदमी पार्टी झूठों, मक्कारों और घोटालेबाज़ों का गैंग है। अरविन्द केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आतिशी के मुख्यमंत्री बनने पर उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने मुख्यमंत्री कार्यालय में रखी CAG रिपोर्ट्स को विधानसभा में रखने के कहने के बावजूद टेबल नहीं कर दिल्ली वालों को गुमराह किया। आतिशी अच्छी तरह जानती है कि CAG रिपोर्ट्स को विधानसभा में रखते ही सरकार ही नहीं आम आदमी पार्टी की बड़ी तेजी के साथ उलटी गिनती शुरू हो जाएगी, कोई पार्टी को भी नहीं बचा पाएगा। आधी से ज्यादा पार्टी तिहाड़ में चली जाएगी।

इस चुनाव में अगर कांग्रेस आक्रामक हो केजरीवाल पर हमला करती है, केजरीवाल सरकार एक इतिहास ही नहीं बनेगी बल्कि कांग्रेस को ही नई जान मिलेगी। पंजाब में आप सरकार की उलटी गिनती शुरू हो जाएगी वो कांग्रेस की दूसरी सबसे जीत होगी। पंजाब में सरकार गिरते ही केजरीवाल पार्टी इतिहास बन जाएगी, जिसे एक-दो चुनाव के बाद जनता भी भूल जाएगी बशर्ते न कांग्रेस और न बीजेपी इस पार्टी के किसी भी तथाकथित नेता को अपनी पार्टी में शामिल करे। दूसरे, अगर कांग्रेस 10 सीटें भी जीत जाती है केजरीवाल कम से कम 20/22 सीटों का नुकसान होगा। जो कांग्रेस की बहुत बड़ी जीत होगी। बीजेपी का भी 30 से 32 सीटें जीतने की संभावनाएं की जा रही है। लेकिन कांग्रेस बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के किसी भी कीमत पर 2013 वाली भयंकर गलती कर केजरीवाल को समर्थन न दे, जो कांग्रेस के लिए आत्मघाती कदम होगा। अगर उस समय कांग्रेस ने समर्थन नहीं दिया होता एक विपक्ष के रूप में उभर कर आती।        

दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, अरविंद केजरीवाल सरकार की इस शराब नीति के कारण दिल्ली सरकार को 2026 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। यह नीति नवंबर 2021 में लागू की गई थी और इसका उद्देश्य शराब की बिक्री के माध्यम से राजस्व बढ़ाना और व्यवस्था में सुधार लाना था। हालाँकि, रिपोर्ट में इसे भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और कमीशनखोरी से भरा बताया गया है। इस चक्कर में मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी, क्योंकि शराब घोटाले से जमा किए पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग का भी मामला सामने आ गया था।

कथित तौर पर लीक हुई CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी करने में नियमों का उल्लंघन किया गया। कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए, जो घाटे में थीं या जिनके खिलाफ शिकायतें थीं। नियम तोड़ने वालों को सज़ा देने की बजाय उन्हें छूट दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि शराब नीति के कई अहम फैसले बिना कैबिनेट और उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए गए।

यही नहीं, दिल्ली शराब नीति घोटाले के दौरान एक्सपर्ट पैनल की सिफारिशों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से फैसले लिए गए। लाइसेंसधारकों और थोक विक्रेताओं के बीच अनुचित समझौते हुए। सरकार ने कोविड-19 के नाम पर 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।

CAG ने अपने विश्लेषण में बताया कि शराब नीति के तहत कई मोर्चों पर नुकसान हुआ। इसमें-

  • लाइसेंस वापस लिए गए, लेकिन उन्हें दोबारा टेंडर नहीं किया गया, जिससे ₹890 करोड़ का नुकसान हुआ।
  • ज़ोनल लाइसेंसधारकों को दी गई छूट से ₹941 करोड़ का घाटा हुआ।
  • कोविड-19 के नाम पर ₹144 करोड़ की माफी ने राजस्व को और कमजोर किया।
  • सुरक्षा जमा राशि सही से वसूलने में ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ।
शराब की गुणवत्ता और जाँच पर ध्यान नहीं: नीति के तहत शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टेस्टिंग लैब और अन्य बुनियादी ढाँचे की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शराब की दुकानों का वितरण समान रूप से नहीं किया गया, जिससे जनता को परेशानी हुई।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस नीति से आप नेताओं को सीधा फायदा हुआ। उस समय आबकारी विभाग के प्रमुख मनीष सिसोदिया और उनके साथी मंत्रियों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया। लाइसेंस जारी करने और शुल्क माफी जैसे फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही।
CAG की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दिल्ली चुनाव नजदीक हैं। भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जवाब माँगा है। हालाँकि आम आदमी पार्टी ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा, “यह रिपोर्ट अभी दिल्ली विधानसभा में पेश नहीं हुई है। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने के लिए गलत दावे कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस रिपोर्ट का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी की छवि खराब करने के लिए कर रही है।
दिल्ली शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार के शीर्ष लोगों को जेल जाना पड़ा था। इस मामले में जाँच अभी जारी है। मनीष सिसोदिया को काफी समय बाद जेल से बेल मिली थी, तो अरविंद केजरीवाल को भी महीनों जेल में बिताना पड़ा, इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी हटना पड़ा। हालाँकि जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था।
बहरहाल, दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर यह विवाद राजनीति के नए मोड़ ले सकता है। जनता यह जानना चाहती है कि 2026 करोड़ का नुकसान क्यों हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रिपोर्ट के बाद आम आदमी पार्टी पर जनता और विपक्ष का दबाव बढ़ गया है।

दिल्ली : केजरीवाल का शिक्षा मॉडलः सरकारी स्कूलों में 9वीं कक्षा के 1 लाख से ज्यादा विद्यार्थी फेल; 2000 करोड़ का शिक्षा घोटाला; 6000 शिक्षकों और 5200 क्लर्क और लेखा कर्मचारियों की कमी


दिल्ली में शिक्षा क्रांति का ढोल पीटने वाले आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के शिक्षा मॉडल का भांडा फूट गया है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाने का दावा लंबे समय से दिल्ली सरकार करती आई है। इसी बीच ऐसा खुलासा हुआ है जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। केजरीवाल के इन विश्वस्तरीय स्कूलों में फेल होने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती जा रही है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 2023-24 में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 1 लाख से अधिक छात्र वार्षिक परीक्षा में फेल हो गए। इसी तरह 8वीं में 46 हजार से अधिक और 11वीं में 50 हजार से अधिक छात्र वार्षिक परीक्षा पास नहीं कर सके। यही हाल पिछले साल (2023 में) भी रहा था जब दिल्ली के अधिकतर स्कूलों के परीक्षा परिणाम 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच ही रहे और पास होने से ज्यादा फेल होने वालों की संख्या रही। उस वक्त शिक्षकों ने कहा था कि खुद कॉपी लिखकर नौवीं और 11वीं के फेल छात्रों को पास करना पड़ा। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के रिजल्ट से केजरीवाल के उस दावे की भी पोल खुल गई है कि दिल्ली में शिक्षा को विश्वस्तरीय बना दिया है। अब उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या इसी शिक्षा व्यवस्था के लिए वे शराब घोटाले में फंसे उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया के लिए ‘भारत रत्न’ की मांग कर रहे थे?

9वीं कक्षा में 1 लाख और 11वीं में 50 हजार से ज्यादा छात्र फेल

दिल्ली के सरकारी स्कूलों का परीक्षा परिणाम इस बार भी बहुत ही खराब रहा है। रिजल्ट के आंकड़े चौंकाने वाले हैं और उस दावे से बिल्कुल उलट हैं जिसमें दिल्ली सरकार दावा करती है कि उसने सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार करके बच्चों के शिक्षा स्तर में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 2023-24 के शैक्षणिक सत्र में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक लाख से ज्यादा छात्र सालाना एग्जाम में फेल हो गए। 8वीं में 46 हजार और 11वीं क्लास में 50 हजार से ज्यादा बच्चे फाइनल एग्जाम में फेल हुए हैं। यह जानकारी दिल्ली शिक्षा निदेशालय (डीडीई) ने आरटीआई के जवाब में दी है। दिल्ली में 1,050 सरकारी स्कूल और 37 डॉ. बी.आर.अंबेडकर स्पेशिलाइज एक्सिलेंस स्कूल हैं।

9वीं में वर्ष 2022 में 88 हजार हुए थे फेल

दिल्ली सरकार के स्कूलों में 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 1,01,331 बच्चे एकेडमिक सेशन 2023-24 में फेल हुए, जबकि 2022-23 में 88,409, 2021-22 में 28,531 और 2020-21 में 31,540 छात्र फेल हुए। इसके अलावा, कक्षा 11 में एकेडमिक सेशन 2023-24 में 51,914 बच्चे, 2022-23 में 54,755, 2021-22 में 7,246 और 2020-21 में केवल 2,169 बच्चे फेल हुए। डीडीई के अनुसार, शिक्षा के अधिकार के तहत ‘नो-डिटेंशन पॉलिसी’ रद्द होने के बाद एकेडमिक सेशन 2023-24 में 8वीं कक्षा में 46,622 छात्र फेल हो गए। यानी स्कूलों में फेल होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में साल-दर-साल इजाफा ही हो रहा है।

 11वीं वर्ष 2022 में 54 हजार हुए थे फेल

11वीं कक्षा में वर्ष 2023-24 में 51,914 बच्चे फेल हुए. वर्ष 2022-23 में 54,755, 2021-22 में 7,246 और 2020-21 में सिर्फ 2169 बच्चे फेल हुए थे।
फेल छात्रों को दोबारा परीक्षा के जरिए मिलेगा मौका
दिल्ली शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘दिल्ली सरकार की नई ‘प्रोमोशन पॉलिसी’ के तहत 5वीं से 8वीं कक्षा के छात्र यदि वार्षिक परीक्षा में फेल हो जाते हैं तो उन्हें अगली कक्षा में प्रोमोट नहीं किया जाएगा। लेकिन उन्हें दो महीने के भीतर दोबारा परीक्षा के ज़रिए अपने प्रदर्शन को सुधारने का एक और मौका मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि दोबारा परीक्षा पास करने के लिए हर एक विषय में 25 प्रतिशत नंबर ज़रूरी हैं, ऐसा न करने पर छात्र को ‘रिपीट कैटेगरी’ में डाल दिया जाएगा, जिसका मतलब है कि छात्र को अगले सेशन तक उसी कक्षा में रहना होगा।
अध्यापकों की कमी, शिक्षा तंत्र की लापरवाही से खराब हुआ रिजल्ट
‘ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष और दिल्ली उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के फेल होने के कारण के बारे में पूछे जाने पर दावा किया कि सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी के अलावा शिक्षा तंत्र की भी लापरवाही है. उन्होंने कहा कि भले ही विद्यालयों में ढांचागत सुविधाओं का स्तर बेहतर हुआ हो, शिक्षकों की भर्ती होने लगी हो लेकिन 20 से 25 हजार पद आज भी खाली हैं और ज्यादातर पदों पर अतिथि शिक्षकों को ही नियुक्त किया जाता है.
टीचरों की कमी से शिक्षा व्यवस्था बदहाल
कुछ समय पहले एक आरटीआई में यह बात भी सामने आयी थी कि पिछले 10 साल में विभिन्न कारणों से 5747 स्थायी शिक्षकों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया लेकिन उनके एवज में केवल 3715 पदों पर ही शिक्षकों को भर्ती किया गया। निदेशालय से मिली जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2014 में कुल 448 शिक्षकों ने सरकारी विद्यालयों को छोड़ा. वहीं 2015 में 411, 2016 में 458, वर्ष 2017 में 526, वर्ष 2018 में 515, 2019 में 519, 2020 में 583, 2021 में 670, 2022 में 667 और 2023 में 950 शिक्षकों ने सरकारी विद्यालयों को छोड़ा। इस प्रकार पिछले दस सालों में शिक्षकों के 5747 पद रिक्त हुए। लेकिन इनके एवज में 2014 में केवल 9 स्थायी शिक्षकों की भर्ती हुई। वर्ष 2015 में आठ, 2016 में 27, 2017 में 668, 2018 में 207, 2019 में 1576 , 2020 में 127, 2021 में 42, 2022 में 931 और 2023 में 120 शिक्षकों की स्थायी भर्ती हुई।
दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था, सरकारी स्कूलों की हालत और अरविंद केजरीवाल के कारनामों पर एक नजर… 
दिल्ली सरकार के स्कूलों में लगभग 6000 शिक्षकों की कमी
दिल्ली सरकार के स्कूलों में लगभग 62000 शिक्षकों की आवश्यकता है, जबकि केवल लगभग 43000 नियमित शिक्षक हैं और साथ ही लगभग 13000 अतिथि शिक्षक हैं। दिल्ली सरकार के स्कूलों में लगभग 6000 शिक्षकों की कमी है। दिल्ली सरकार के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, फिर भी केजरीवाल सरकार ने 5000 से अधिक शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों में तैनात कर दिया है, जिससे स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
स्कूलों में 5200 क्लर्क और लेखा कर्मचारियों के पद रिक्त
दिल्ली सरकार के स्कूलों में लगभग 5200 क्लर्क और लेखा कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। जबकि उनमें से आधे पर 25000 रुपये प्रति माह के वेतन पर अनुबंध कर्मचारियों को रखा गया है, जबकि अन्य आधे के खिलाफ 70000 रुपये प्रति माह के वेतन ब्रैकेट के लगभग 1500 शिक्षकों को क्लर्क और लेखा अधिकारी के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया गया है।
बिजनेस ब्लास्टर योजना का मकसद वोटबैंक बनाना
दिल्ली सरकार एक बिजनेस ब्लास्टर योजना चला रही है जिसके तहत कक्षा 11 और 12 के छात्रों को व्यावसायिक विचार विकसित करने के लिए प्रति वर्ष 2000 रुपये दिए जाते हैं। कोई भी कल्पना कर सकता है कि 4000 रुपये में कोई व्यावसायिक विचार विकसित नहीं किया जा सकता। बिजनेस ब्लास्टर योजना का वास्तविक उद्देश्य स्कूल के छात्रों को नकद पैसे बांटना है जिनमें से अधिकांश कक्षा 12 पूरी करने तक 18 वर्ष की आयु के हो जाते हैं और पहली बार मतदाता बन जाते हैं। उनके युवा दिमाग के 4000 रुपये से प्रभावित होने की पूरी संभावना है। यह अफसोसजनक है कि जिन्होंने विश्व स्तरीय शिक्षा मॉडल विकसित करने का दावा किया है, वे युवाओं को भटकाने और वोटबैंक बनाने में जुटे हैं।
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में
राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ (जीएसटीए) की ओर से कांस्टीट्यूशन क्लब में 8 जुलाई को आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संघ के महासचिव अजय वीर यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 18 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने जिन स्कूलों का नाम बदला है, वहां की स्थिति अभी तक नहीं बदली है। स्कूलों में विशेष विषयों के शिक्षक नहीं है। ऐसे में छात्र उन विषयों की पढ़ाई से कोसों दूर रह गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का स्कूलों के निर्माण पर अधिक जोर है, ऐसे में खेलने के मैदान खत्म हो गए हैं। इससे छात्र शारीरिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि स्कूलों के अंदर शिक्षक सुरक्षित नहीं है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से इस दिशा में कार्य करने की अपील की।
केजरीवाल सरकार में दिल्ली की स्कूल शिक्षा प्रणाली हुई बदहाल
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली में शिक्षा मंत्री रहे मनीष सिसोदिया और वर्तमान शिक्षा मंत्री आतिशी की जोड़ी ने दिल्ली की स्कूल शिक्षा प्रणाली को बदहाल कर दिया है। उन्होंने न तो नियमित शिक्षकों की भर्ती की है और न ही अतिथि शिक्षकों की। इसके बजाय, उन्होंने शिक्षकों को गैर-शिक्षण कार्यों में तैनात कर दिया है, जिससे दिल्ली के सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सबसे खराब हो गया है। आज 2024 में दिल्ली में 995 सामान्य स्कूल हैं, जबकि 2015 में जब अरविंद केजरीवाल सरकार पहली बार सत्ता में आई थी, तब 1015 स्कूल थे और इन 10 वर्षों में उन्होंने कोई नया नियमित या अतिथि शिक्षक नहीं रखा। अन्य 32 विशेष शिक्षा वाले स्कूलों में पूरी तरह से सुविधाओं की कमी है, जिनमें से कुछ सबसे खराब स्कूल हैं।
स्कूल शिक्षकों से लिया जा रहा कर्ल्क और कानूनी सहायक का काम
दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि स्कूल शिक्षकों को लिपिकीय कार्य करने, कानूनी सहायकों के रूप में काम करने और वरिष्ठ अधिकारियों के ओएसडी के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। 6000 शिक्षकों की कमी के बावजूद सिसोदिया-आतिशी की जोड़ी ने लगभग 5000 शिक्षकों को शिक्षण कर्तव्यों से हटा दिया है। 205 शिक्षकों को स्कूल मेंटर बनाया गया है, जबकि 1027 को स्कूल समन्वयक बनाया गया है और 1027 को शिक्षक विकास समन्वयक बनाया गया है और अब वे कोई शिक्षण कार्य नहीं करते हैं। 70 शिक्षक जिनके पास कानून की योग्यता है, उन्हें शिक्षा विभाग के कानूनी सहायकों के रूप में काम करने के लिए तैनात किया गया है, जबकि 102 अन्य शिक्षकों को शिक्षा विभाग में उप और सहायक निदेशकों के ओएसडी के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया गया है।
डीडीए ने 13 जगह भूमि आवंटित की, एक पर भी स्कूल नहीं बना
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने स्कूलों के निर्माण के लिए दिल्ली सरकार को 13 जगह भूमि आवंटित की, लेकिन अब तक इन पर एक भी स्कूल नहीं बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1,600 और 8,000 वर्ग मीटर के बीच के 13 भूखंडों को डीडीए द्वारा दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय को आवंटित किया गया था। वर्ष 2015 और अगस्त 2022 के बीच 13 भूखंड आवंटित किए गए। इन भूखंडों में सबसे छोटा, 1,600 वर्ग मीटर में फैला हुआ है, जो उत्तरी दिल्ली में शाही ईदगाह में स्थित है और सबसे बड़ा वसंत कुंज में 8,093.72 वर्ग मीटर है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि सभी भूखंड वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के निर्माण के लिए आवंटित किए गए थे, लेकिन इनमें से एक भी काम शुरू नहीं हो पाया।
दिल्ली में 2000 करोड़ का शिक्षा घोटाला, आरटीआई से हुआ खुलासा
वर्ष 2019 में दिल्ली शिक्षा घोटाला सामने आया। ये घोटाला स्कूलों के निर्माण से जुड़ा है। एक आरटीआई में ये खुलासा हुआ है कि एक स्कूल का कमरा 24,85,323 रुपए बनाया है। आरटीआई से पता चला है कि 312 कमरे 77,54,21,000 रुपये में और 12748 कमरे 2892.65 करोड़ रुपये में बनाए गए हैं। अरविंद केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि 5 लाख का कमरा 25 लाख रुपये में बनवाया गया। वहीं कई स्कूलों में बिना बनाए ही कमरों का भुगतान कर दिया गया। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरटीआई का हवाला देते हुए केजरीवाल सरकार पर शिक्षा के नाम पर 2000 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप लगाया था।
दिल्ली के 80 प्रतिशत स्कूलों में नहीं हैं हेडमास्टर
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने दिल्ली सरकार को पत्र लिखकर दावा किया है कि दिल्ली के 80 प्रतिशत से ज्यादा सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल या हेडमास्टर नहीं है। एनसीपीसीआर के मुताबिक दिल्ली के कुल 1,027 सरकारी स्कूलों में से सिर्फ 203 स्कूलों में ही प्रिंसिपल या हेडमास्टर थे जिसमें से 3 में एक्टिंग हेडमास्टर, 9 में हेडमास्टर और 191 में प्रिंसिपल मौजूद थे।
केजरीवाल का शिक्षा मॉडल : दसवीं की टॉप 10 रैंकिंग से दिल्ली बाहर
पिछले साल 2023 में दिल्ली में सरकारी स्कूलों के दसवीं का रिजल्ट 81.27 प्रतिशत रहा है, जो देश के ओवरऑल 94.40 प्रतिशत से काफी कम है। दिल्ली ना सिर्फ रिजल्ट बल्कि रैंकिंग के मामले में काफी नीचे आ गई है। दसवीं की रैंकिंग में दिल्ली टॉप 10 से बाहर हो गई है। दिल्ली को 15वें नंबर से संतोष करना पड़ा है। नोएडा और पटना रैंकिंग में दिल्ली से आगे हैं। इतना ही नहीं इस बार दिल्ली 10वीं और 12 वीं दोनों की रैंकिंग में टॉप तीन से बाहर है। ये है केजरीवाल के शिक्षा का दिल्ली मॉडल। 

शराब घोटाला : जेल में ही रहेंगे मनीष सिसोदिया; सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की जमानत अर्जी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (4 जून 2024) को दिल्ली शराब घोटाला केस में आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया। मनीष सिसोदिया पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। हालाँकि कोर्ट ने पूर्व उपमुख्यमंत्री को नए सिरे से जमानत अर्जी डालने की छूट दी है। मनीष सिसोदिया की तरफ से अदालत में अभिषेक मनु सिंघवी ने बहस की।

बार एन्ड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जमानत अर्जी की सुनवाई न्यायमूर्ति अरविन्द कुमार और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की बेंच में हुई। मनीष सिसोदिया की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उनका मुवक्किल लगभग 15 महीनों से जेल में हैं और अभी ट्रायल भी शुरू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट राजनैतिक रूप से संवेदनशील मामलों को सही समय पर नहीं निबटाती है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की स्वतंत्रता पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह लगाया है। बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया और जमानत देने से इनकार कर दिया। मनीष सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनको फिर से गुण-दोष के आधार पर जमानत अर्जी दाखिल करने का अधिकार है।

हालाँकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं हुआ कि नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल करने के लिए मनीष सिसोदिया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँ या ट्रायल कोर्ट का। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ चल रही जाँच में 3 जुलाई 2024 तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।

मनीष सिसोदिया 26 फरवरी 2023 को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद से वे जेल में हैं। वहीं, उनकी पत्नी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस मामले में जमानत के लिए उन्होंने ट्रायल कोर्ट और बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल की थी। हालाँकि, दोनों ही अदालतों में उनकी याचिका ख़ारिज हो चुकी है। 

दिल्ली शराब घोटाला : पैसा नहीं मिलने का मतलब यह नहीं कि भ्रष्टाचार नहीं हुआ: हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि किसी के पास नकदी नहीं मिली, इसका मतलब यह नहीं है कि कि भ्रष्टाचार नहीं किया है। कोर्ट ने कहा कि अब यह अपराध करने के लिए नई तकनीक अपनाई जाती हैं। कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली शराब घोटाला मामले में आरोपित मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

हाई कोर्ट ने कहा, “मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में किसी व्यक्ति के पास से नकदी की बरामदगी कोई जरुरी नहीं है जहाँ साजिश का हिस्सा कई लोग हैं।” कोर्ट ने कहा कि शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप हैं जिनसे देश के सामाजिक-आर्थिक ढाँचे पर जोर पड़ता है और जनता का विश्वास सरकारी संस्थाओं में घटता है।”

हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की शराब नीति ने छोटे और मझोले दुकानदारों को बिक्री से बाहर करके उनको सारी ताकत दे दी जिनके पास पैसा और पहुँच थी और जिन्होंने अपना एक कार्टेल बना लिया था। कोर्ट ने कहा कि शराब नीति को वितीय फायदे के लिए बनाया गया जो कि इस अपराध की गंभीरता को बढ़ाता है।

कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया का आचरण लोकतांत्रिक सिद्धांतों को धोखा है। कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया ने ऐसा दिखाया कि दिल्ली की शराब नीति सबको फायदा पहुँचाने के लिए लाई गई है, जबकि असल में यह कुछ लोगों को लाभ पहुँचाने की नीति थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिसोदिया ने दो फोन तोड़ दिए और महत्वपूर्ण सबूत मिटाए।

मनीष सिसोदिया को जमानत देने से मना करते हुए कहा कि वह अभी तक यह बात स्थापित नहीं कर पाए हैं कि उन्हें जमानत क्यों दी जाए। कोर्ट ने इसी के साथ उन्हें जमानत देने से मना कर दिया। सिसोदिया लगातार अलग-अलग अदालतों में जमानत के लिए याचिकाएँ लगाते रहे हैं।

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री को फरवरी, 2023 में दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था। वह दिल्ली के आबकारी मंत्री थे। इसी के अंतर्गत वह शराब नीति बनाई गई थी जिसमें गड़बड़ी के आरोप एजेंसियों ने लगाए हैं। एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि इस नई नीति ने बड़े शराब डीलरों को फायदा पहुँचाया गया और उनसे मिले पैसे का उपयोग आम आदमी पार्टी ने गोवा चुनावों में किया।

CCTV फुटेज गायब, फोन फॉर्मेट: जाँच में सहयोग नहीं कर रहा विभव कुमार; क्या 3W(Wine, Wealth, Woman) केजरीवाल को ले डूबेगा?

किसी भी व्यक्ति के पतन में 3W(Wine, Wealth, Woman) का जरूर रोल होता है। जो अरविन्द केजरीवाल पर शत-प्रतिशत सटीक बैठती है। दौलत(wealth) हासिल करने के केजरीवाल ने क्या नहीं किया, केजरीवाल खुद जानते हैं; शराब(wine) घोटाले ने तिहाड़ पहुंचा दिया तो बाकि कसर स्वाति मालीवाल(woman) से पंगा लेना पूरा करने जा रहा है।    

स्वाति मालीवाल पिटाई मामले में बिभव की गिरफ्तारी से अरविंद केजरीवाल बौखलाए दिख रहे हैं। वो बीजेपी ऑफिस तक मार्च कर रहे हैं। मजे की बात है कि सारे निगम पार्षद, विधायक तक प्रदर्शन में नहीं पहुंचे। यानि पार्टी में ही मतभेद। वहीं, बिभव कुमार को कोर्ट ने 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है, क्योंकि पुलिस ने बताया कि बिभव कुमार जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और वो मजबूत आदमी हैं। वो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और चीजों को बदल सकते हैं। कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने बताया कि स्वाति मालीवाल पर हुआ हमला भयावह था, इसमें उन्हें काफी नुकसान पहुँच सकता था। यही नहीं, पुलिस ने कहा है कि बिभव कुमार ने अपने फोन तक को फॉर्मेट कर दिया है, ताकि उसकी जानकारी पुलिस तक न पहुँचे।

केजरीवाल के मार्च पर स्वाति का तंज

बिभव कुमार को 5 दिन के लिए पुलिस कस्टडी में भेजे जाने के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी ऑफिस को घेरने के ऐलान के बाद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी के जेल में बंद नेता मनीष सिसोदिया का नाम लेकर तंज कसा है।
स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “किसी दौर में हम सब निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क पर निकलते थे, आज 12 साल बाद सड़क पर निकले हैं ऐसे आरोपी को बचाने के लिए, जिसने CCTV फुटेज गायब किए और फोन फॉर्मेट किया? काश इतना ज़ोर मनीष सिसोदिया जी के लिए लगाया होता… वह यहां होते तो शायद मेरे साथ इतना बुरा नहीं होता!”
इससे पहले, स्वाति मालीवाल को पीटने के मामले में पुलिस ने शनिवार को बिभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। शनिवार देर शाम दाखिल की गई रिमांड अर्जी में कहा गया था यह एक गंभीर मामला है जिसमें बेरहमी से किया गया हमला घातक हो सकता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी बिभव कुमार शनिवार को घटनास्थल पर सबूत नष्ट करने के लिए गया था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने अदालत में एक वीडियो पेश किया। जिसमें वह बिभव से पूछ रहे हैं कि उन्होंने राज्यसभा सांसद पर हमला क्यों किया, लेकिन वह जवाब नहीं दे रहा। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उपलब्ध कराया गया सीसीटीवी फुटेज खाली है और बिभव का जो फोन जब्त किया गया था, वह फॉर्मेट किया गया है, इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया।

साजिशों की भी हद होती है: स्वाति

इस मामले में स्वाति मालीवाल ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, “पहले मुझे बेरहमी से बिभव ने पीटा। थप्पड़ और लातें मारी। जब मैंने ख़ुद को छुड़ा के 112 कॉल करी, तो बाहर जाके सिक्योरिटी बुलायी और वीडियो बनाने लगा। मैं सिक्योरिटी को चीख चीख के बता रही थी की मुझे बहुत बेरहमी से बिभव ने पीटा है। वो पूरा लंबा हिस्सा वीडियो का एडिट कर दिया गया। सिर्फ़ 50 सेकंड रिलीज़ किए गये जब मैं सिक्योरिटी वालों को समझा समझा के खीज चुकी थी। अब फ़ोन फॉर्मेट करके पूरी वीडियो डिलीट कर दी ? सीसीटीवी की फुटेज भी ग़ायब! साज़िश की भी हद्द है!”
13 मई की सुबह स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर मारपीट की गई। मारपीट उनके पीए बिभव कुमार ने की। इस मामले में 16 मई को आधिकारिक एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने 18 मई को बिभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने बिभव को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोप है कि बिभव ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी की है और अपना फोन भी फॉर्मेट कर दिया है। वो जाँच में सहयोग नहीं कर रहा है।



दिल्ली शराब घोटाले : केजरीवाल-सिसोदिया के साथ मिलकर के. कविता ने रची थी साजिश, AAP को दिए थे 100 करोड़ रुपये

               अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया और बीआरएस नेता के कविता (फोटो साभार: NDTV)
दिल्ली के सबसे बड़े शराब घोटाले की जांच कर रही एजेंसियों को कड़ी से कड़ी जोड़ने पर इसके तार सुदूर तेलंगाना से जुड़े मिले। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रहे के.चंद्रशेखर राव की बेटी और साउथ ग्रुप नाम की शराब लॉबी की मुख्य लीडर के.कविता पर दिल्ली के आप नेताओं को सौ करोड़ रुपये देने के प्रमाण प्रवर्तन निदेशालय की टीम को मिले हैं। इससे ईडी से एक ही मामले में नौ समन पा चुके दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। CBI ने कविता के अकाउंटेंट बुचीबाबू गोरंतला को गिरफ्तार किया। ईडी ने भी बुचीबाबू से पूछताछ की थी। फिर ईडी ने हैदराबाद के व्यवसायी अरुण रामचंद्रन पिल्लई को 7 मार्च 2023 को गिरफ्तार किया। पिल्लई ने पूछताछ में बताया था कि कविता और आम आदमी पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत 100 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जिससे कविता की कंपनी ‘इंडोस्पिरिट्स’ को दिल्ली के शराब कारोबार में एंट्री मिली।

कविता ने दिल्ली के आप नेताओं के साथ मिलकर घोटाले की साजिश रची
दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार BRS नेता के.कविता ने ED के समन के खिलाफ अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली है। कविता 23 मार्च तक ED की रिमांड में भेज दी गई हैं। जांच एजेंसी को पड़ताल में यह तथ्य मिले हैं कि के.कविता ने दिल्ली एक्साइज पॉलिसी के निर्माण और लागू करने में लाभ पाने के लिए AAP के सीनियर लीडर्स के साथ साजिश रची। एजेंसी का दावा है कि इसके लिए दिल्ली CM अरविंद केजरीवाल और डिप्टी CM मनीष सिसोदिया को 100 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया। कविता ने 18 मार्च को अपनी गिरफ्तारी के विरोध में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। याचिका वापस लेने के बाद उनके वकील ने कहा के वे कानून के अनुसार ही मामले से निपटने के लिए जरूरी नियमों का सहारा लेंगे।

प्रवर्तन निदेशालय का दावा- एहसान के बदले 100 करोड़ का भुगतान
प्रवर्तन निदेशालय का दावा है कि के.कविता को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी बनाने और लागू करने में AAP नेताओं की मदद मिली। इस एहसान के बदले उन्हें 100 करोड़ रुपए का भुगतान के.कविता ने किया है। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच के दौरान इन बातों का पता चला है। जांच एजेंसी का कहना है कि शराब के होलसेलर्स के जरिए आम आदमी पार्टी के लिए रिश्वत ली गई थी। इसके अलावा कविता और उसके सहयोगियों को AAP को अग्रिम भुगतान की गई राशि की वसूली करनी थी। उन्हें प्रॉफिट कमाना था। ईडी ने कहा है कि 23 मार्च तक सात दिन की रिमांड में के.कविता से इस मामले में पूछताछ की जाएगी। इस मामले में ED ने अब तक दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई और अन्य स्थानों सहित देश भर में 245 स्थानों पर रेड मारी है।

साल 2023 में कविता को भेजे गए थे तीन समन, इस साल 2 भेजे
शराब घोटाले के मामले में अब तक AAP के मनीष सिसौदिया, संजय सिंह और विजय नायर समेत कुल 15 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी अब तक 5 सप्लिमेंट्री कंप्लेंट और एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल कर चुकी है। साथ ही अपराध से प्राप्त आय में से अब तक 128.79 करोड़ रुपए की संपत्ति का पता लगाया गया है। इसे 24 जनवरी 2023 और 3 जुलाई 2023 के वाइड प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के जरिए से अटैच किया गया है। ईडी ने शराब नीति मामले में पूछताछ के लिए कविता को साल 2023 में 3 समन भेजे थे। इस साल 2 समन भेजे गए, लेकिन उन्होंने SC की कार्रवाई का हवाला देते हुए पेश होने से इनकार कर दिया।

दिल्ली के सबसे बड़े शराब घोटाले में कविता का नाम कब आया?
दिल्ली शराब घोटाले केस में ईडी ने गुरुग्राम से कारोबारी अमित अरोड़ा को 30 नवंबर, 2022 में गिरफ्तार किया था। ईडी के मुताबिक अमित ने अपने बयानों में TRS नेता के. कविता के नाम का लिया था। जांच एजेंसी ने दावा किया था कि कविता ‘साउथ ग्रुप’ नाम की एक शराब लॉबी की एक मुख्य लीडर थीं। उन्होंने विजय नायर के माध्यम से दिल्ली में AAP सरकार के नेताओं को 100 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया। फरवरी 2023 में CBI ने कविता के अकाउंटेंट बुचीबाबू गोरंतला को गिरफ्तार किया। ईडी ने भी बुचीबाबू से पूछताछ की थी। फिर ईडी ने हैदराबाद के व्यवसायी अरुण रामचंद्रन पिल्लई को 7 मार्च 2023 को गिरफ्तार किया। पिल्लई ने पूछताछ में बताया था कि कविता और आम आदमी पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। इसके तहत 100 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ, जिससे कविता की कंपनी ‘इंडोस्पिरिट्स’ को दिल्ली के शराब कारोबार में एंट्री मिली।

साउथ ग्रुप दक्षिण के राजनेताओं, कारोबारियों और नौकरशाहों का है ग्रुप
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक पिल्लई ने ये भी बताया कि एक मीटिंग हुई थी, जिसमें वो, कविता, विजय नायर और दिनेश अरोड़ा मौजूद थे। इस मीटिंग में दी गई रिश्वत की वसूली पर चर्चा हुई थी। साउथ ग्रुप दक्षिण के राजनेताओं, कारोबारियों और नौकरशाहों का ग्रुप है। इसमें अरबिंदो फार्मा के प्रमोटर सरथ रेड्डी, वाईएसर कांग्रेस के लोकसभा सांसद एम. श्रीनिवासुलु रेड्डी, उनके बेटे राघव मगुंटा और कविता शामिल थे। इस ग्रुप का प्रतिनिधित्व अरुण पिल्लई, अभिषेक बोइनपल्ली और बुचीबाबू ने किया था। तीनों को ही शराब घोटाले में गिरफ्तार किए गए हैं।

शराब घोटाला मामला: अभी तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं?
कोरोना काल के बीच दिल्ली सरकार ने दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 लागू की थी। इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई। दिल्ली शराब नीति अनियमितता मामले की जांच कर रही दोनों एजेंसियां सीबीआई और ईडी अब तक 15 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, विजय नायर, समीर महेंद्रू, अरुण रामचंद्रन, राजेश जोशी, गोरन्तला बुचिबाबू, अमित अरोड़ा, बेनॉय बाबू (फ्रांसीसी शराब कंपनी पर्नोड रिकार्ड के महाप्रबंधक), पी सरथ चंद्र रेड्डी, अरबिंदो फार्मा के पूर्णकालिक निदेशक और प्रमोटर, व्यवसायी अमनदीप धाल और व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली शामिल हैं।

केजरीवाल को शराब घोटाले में नौवां और जल बोर्ड घोटाले में पहला समन
दिल्ली में एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं। शराब घोटाले के बाद अब दिल्ली जल बोर्ड का घोटाला सुर्खियों में है। इन दोनों घोटालों की आंच मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक आ चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले में नौवां और जल बोर्ड घोटाले में पहला समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया। लेकिन अरविंद केजरीवाल इन दोनों समन पर ईडी कार्यालय में पेश नहीं हुए। शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार के कई मंत्री जेल में बंद हैं। वहीं दूसरी तरफ जल बोर्ड में टेंडर बांटने में गबन का आरोप लग रहा है। इसी मामले में ईडी दो लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

जल बोर्ड घोटाला: ठेके का मूल्य 38 करोड़, खर्च किए 17 करोड़ बाकि का गबन
प्रवर्तन निदेशालय ने दावा किया है कि दिल्ली जल बोर्ड का ठेका बढ़ी हुई दरों पर दिया गया। ताकि ठेकेदारों से रिश्वत वसूली जा सके। ठेके का मूल्य 38 करोड़ रुपये था और इस पर सिर्फ 17 करोड़ रुपये खर्च किए गए और शेष राशि गबन कर ली गई। इस तरह के फर्जी खर्च रिश्वत और चुनावी कोष के लिए किए गए थे। कथित तौर पर जल बोर्ड के पूर्व मुख्य अभियंता जगदीश कुमार अरोड़ा ने एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को 38 करोड़ रुपये का ठेका दिया था। यह ठेका इलेक्ट्रोमेग्नेटिक फ्लो मीटर्स की आपूर्ति, स्थापना और परीक्षण के लिए दिया गया था। इस मामले में आरोप लगाया गया है कि बोर्ड और एनबीसीसी के अधिकारियों ने रिश्वत के लिए एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर का पक्ष लिया। ईडी ने इस मामले में गत 31 जनवरी को जगदीश कुमार अरोड़ा और ठेकेदार अनिल कुमार अग्रवाल को गिरफ्तार किया था। उधर ईडी ने मामले से जुड़ी मनी ट्रेल की जांच करते हुए आरोप लगाया है कि एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर को अनुबंध दिए जाने के बाद अरोड़ा को नकद और बैंक खाते में रिश्वत प्राप्त हुई थी। यह पैसा अलग-अलग पार्टियों को देने का आरोप लगाया गया। वहीं आम आदमी पार्टी को चुनावी फंड के तौर पर भी पैसा दिया गया। बीते दिनों मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक विभव कुमार, आम आदमी पार्टी के कोषाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद एनडी गुप्ता और अन्य लोगों के यहां छापेमारी की थी।

दिल्ली : अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करेगी ED: मंत्री आतिशी ने बाँच दिया ‘भविष्य’, शराब घोटाले में होनी है पूछताछ

                                                                                       साभार: News18 & Telegraph India
दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने दावा किया है कि 2 नवम्बर 2023 को आम आदमी पार्टी के मुखिया एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तार कर लेगी। उन्होंने यह दावा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किया है। दरअसल, केजरीवाल को ED ने 2 नवम्बर 2023 को घराब घोटालेे में पूछताछ के लिए बुलाया है।

PMLA (प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत ED द्वारा जारी किए गए समन पर आतिशी ने कहा, “2 नवम्बर को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविन्द केजरीवाल को समन किया है। हर तरफ से खबर आ रही है कि 2 नवम्बर को जब अरविन्द केजरीवाल को बुलाएँगे, तब ED उन्हें भी गिरफ्तार करके जेल में डाल देगी।”

आतिशी ने आगे कहा, “आज भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आम आदमी पार्टी को खत्म करना चाहते हैं। यही कारण है कि झूठे आरोप बनाकर और केस लगाकर आम आदमी पार्टी के नेताओं को एक-एक करके गिरफ्तार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि केजरीवाल को इसलिए गिरफ्तार किया जाएगा, क्योंकि वो प्रधानमंत्री के खिलाफ बोलते हैं।

आतिशी ने कहा कि अरविन्द केजरीवाल के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ED अरविन्द केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद I.N.D.I.A गठबंधन के अन्य नेता जैसे कि झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, केरल के सीएम पिनाराई विजय और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए ED और CBI का दुरुपयोग किया जाएगा।

हालाँकि, अभी आधिकारिक तौर पर ऐसी कोई सूचना नहीं है कि अरविद केजरीवाल को गिरफ्तार किया जाएगा। उनके विरुद्ध कोई वारंट भी नहीं जारी हुआ है। उन्हें ED शराब घोटाला मामले में हुई पैसों की हेराफेरी को लेकर पूछताछ करने के लिए बुला रही है। हालाँकि, आतिशी गिरफ्तार की आशंका को देखते हुए पहले ही आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।

शराब घोटाले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह को पहले ही ED गिरफ्तार कर चुकी है। मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में 9 मार्च 2023 को लम्बी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से वह जेल में बंद हैं। तब से कोर्ट भी उन्हें जमानत देने से इनकार करता आ रहा है। 

दिल्ली शराब घोटाला : ED ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को समन किया, सुप्रीम कोर्ट ने भी मानी है 338 करोड़ रूपए के लेनदेन की बात


शराब घोटाले की आँच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल तक पहुँच गई है। दिल्ली में AAP सरकार के मुखिया को अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने समन भेजा है। सोमवार (30 अक्टूबर, 2023) को ये कार्रवाई की गई। इस मामले में दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और AAP सांसद संजय सिंह पहले से ही जेल में बंद हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी 338 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए जाने जा जिक्र करते हुए मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

ED ने अरविंद केजरीवाल से कहा है कि वो गुरुवार (2 नवंबर, 2023) को जाँच एजेंसी के समक्ष पूछताछ के लिए पेश हों। 55 वर्षीय अरविंद केजरीवाल को PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत समन किया गया है। दिल्ली में उन्हें जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा। ED ने इस मामले की चार्जशीट में कई बार अरविंद केजरीवाल के नाम का जिक्र किया है। इसमें बताया गया है कि शराब घोटाले के आरोपित उनसे संपर्क में थे।

शराब नीति बनाने और इसे लागू करने के क्रम में अरविंद केजरीवाल से ये लोग संपर्क में थे। इससे पहले अप्रैल 2023 में इसी मामले को लेकर CBI भी उन्हें समन कर चुकी है। हालाँकि, अगस्त में जब CBI ने FIR दर्ज की तो उसमें आरोपित के रूप में अरविंद केजरीवाल का नाम बतौर आरोपित नहीं शामिल किया गया था। दिल्ली की शराब नीति को विरोध के बाद वापस लिया जा चुका है। ताज़ा कार्रवाई के बाद भड़के AAP नेताओं ने मोदी सरकार पर किस्म-किस्म के आरोप लगाने भी शुरू कर दिए हैं।

मंत्री आतिशी ने दावा कर डाला कि BJP आम आदमी पार्टी से डर गई है। उन्होंने केजरीवाल को समन किए जाने को साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के लिए ये सब हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम जेल जाने से नहीं डरते। वहीं दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल जो अपने आप को कट्टर ईमानदार का सर्टिफिकेट देते फिरते हैं, अब उनकी काली परते खुलने लगी हैं। उन्होंने कहा कि जो सवाल दिल्ली की जनता कई महीनों से मुख्यमंत्री जी से पूछ रही है, अब उसका जवाब उन्हें देना होगा।

वीरेंद्र सचदेवा ने सवाल दागे – शराब नीति में बदलाव क्यों किया गया? 5% से 12% कमीशन क्यों की गई? 7% का किकबैक किसे मिला? इतने बड़े घोटाले का पैसा कहाँ खर्च हुआ? उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से कहती आई है कि इस घोटाले के असली साजिशकर्ता अरविंद केजरीवाल हैं। उन्होंने कहा कि खुद को ईमानदार बताने वाली इस जमात के चेहरे बेनकाब हो गए हैं। दिल्ली भाजपा ने कहा कि बहुत हुआ घोटाले का खेल, अब भ्रष्टाचारी केजरीवाल भी जाएगा जेल।

पार्टी ने कहा, “कट्टर भ्रष्ट मनीष सिसोदिया की सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब शराब घोटाले के सरगना केजरीवाल को ईडी ने पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उम्मीद ही नहीं हमे भरोसा है कि गली गली शराब के ठेके खोलने वाला, दिल्ली को शराब नगरी बनाने वाला, शराब की दलाली खाने वाला भी अब जल्द ही अपने अंजाम तक पहुँचेगा।” भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस पूरे घोटाले के मास्टरमाइंड अरविंद ही हैं और ‘शीशमहल’ भी इन्हीं पैसों से बना है।

दिल्ली शराब घोटाला : अब जल्दी सिसोदिया से केजरीवाल का मिलन होगा तिहाड़ में

सुभाष चन्द्र

जब से केजरीवाल सरकार का शराब घोटाला खुला और ED / CBI की जहां भी रेड हुई, केजरीवाल और उसके साथी एक ही गाना गाते रहे, किसी के यहां कुछ नहीं मिला, सब फर्जी केस बनाए जा रहे हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजीव खन्ना ने मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए ED से पूछ लिया था कि आपको यदि सिसोदिया के पास से कोई रकम बरामद नहीं हुई तो Money Laundering का केस कैसे बनता है?

सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर केजरीवाल उछल पड़ा था और बोला था कि जज पूछते रहे पैसा कहां मिला, किसी के पास कोई जवाब नहीं था जी, फिर भी सबको झूठे मुकदमों में फंसा रखा है।  लेकिन उसी सुनवाई में जस्टिस खन्ना ने ED को यह भी पूछा था कि सरकार ने “आप” को आरोपी क्यों नहीं बनाया। 

सुप्रीम कोर्ट का सिसोदिया के घर से पैसा न मिलने का सवाल सुनकर केजरीवाल के दिमाग में फितूर पक्का हो गया था कि अब सारा केस ही ख़त्म हो जाएगा क्योंकि किसी के घर से तो पैसा मिलेगा ही नहीं। 

लेकिन घर से पैसा न मिलना ही सब कुछ ख़त्म नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट ने सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए कहा है। 

"Legal questions have been answered in a limited way. In the analysis, there are certain aspects, which we said are doubtful. But one aspect, with regard to transfer of money, Rs 338 crores, is tentatively established. We have therefore dismissed the application for bail,"

सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे को fast track court में चला कर 6 से 8 महीने में पूरा करने के लिए कहा और यह भी कहा कि यदि 3 महीने में कोई विशेष प्रगति न हो तो सिसोदिया फिर से जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं। 

इस 338 करोड़ के लेनदेन ने केजरीवाल को चारों खाने चित कर दिया है, अब वह ये नहीं कह सकता कि पैसा मेरे घर में नहीं है या सिसोदिया और जैन या संजय सिंह के घर में नहीं है क्योंकि अदालत ने आगे और साफ़ शब्दों में कहा है कि “रूपए और धन के लेनदेन की कड़ियां साफ़ हैं” (यानी money trail साबित होती है) 

उसके पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने तो सिसोदिया की जमानत अर्जी ख़ारिज करते हुए और सख्त लहजे में कहा था कि - “उनके खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं, मनीष का इस मामले में व्यवहार भी सही नहीं रहा है और वो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं, इसके पास 18 विभाग रहे हैं, पूर्व उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं, इसलिए उनको अभी जमानत नहीं दी सकती है”। 

अब सिसोदिया के अलावा सत्येंद्र जैन बीमारी की वजह से 11 जुलाई से अंतरिम जमानत पर चल रहा है और 18 अक्टूबर को ये जमानत सुप्रीम कोर्ट ने 6 नवंबर तक के लिए बढ़ा दी थी। अब समय आ गया है, उसकी अंतरिम जमानत भी रद्द कर उसे वापस जेल भेजा जाए, संजय सिंह की न्यायिक हिरासत 10 नवंबर तक है लेकिन  सिसोदिया की जमानत ख़ारिज होते देख कर लगता है, उसकी भी जमानत नही अर्जी स्वीकार नहीं होगी। 

ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सरकार “आप” पार्टी को शराब घोटाले में आरोपी बनाने पर विचार कर रही है।  यह काम जल्दी ही होगा क्योंकि घोटाले का बचा खुचा पैसा 3 राज्यों के चुनावों में पेल सकती है “आप’।  एक बार पार्टी आरोपी बनी तो पार्टी संयोजक का नाम तो आपको पता ही है, वह कैसे बचेगा, उसका मिलन शीघ्र होगा सिसोदिया से तिहाड़ में। 

केजरीवाल जी सिसोदिया की 80 लाख की नहीं 52 करोड़ रूपए की संपत्ति जब्त हुई है

दिल्ली शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनीष सिसोदिया समेत कई आरोपियों की 52 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर ली है। यह खबर सामने आते ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अपने करीबी मनीष सिसोदिया के बचाव में सामने आ गए। आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने कहा कि मनीष सिसोदिया की सिर्फ 80 लाख की ही संपत्ति जब्त की गई है। केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा कि ईडी शाम से टीवी चैनलों पर झूठी खबरें चलवा रही है कि मनीष सिसोदिया की 52 करोड़ की संपत्ति ज़ब्त की गयी। ईडी ने असल में जो संपत्ति ज़ब्त की है, उसके काग़ज़ात ये रहे। टोटल 80 लाख की संपत्ति ज़ब्त की है, वो भी 2018 के पहले की, जब एक्साइज नीति बनी ही नहीं थी। सिसोदिया के बॉस दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के यह कहते ही लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर दौड़ाना शुरू कर दिया। बीजेपी नेता हरीश खुराना ने लिखा, ‘काहे जनता को घुमा रहे हो अरविंद केजरीवाल जी। प्रॉपर्टी अटैच हुई है घोटाले की वजह से। अभी तो बहुत रिकवरी बाकी है। चिंता ना करो आपसे भी रिकवरी होगी। वैसे, यह तो बताओ अगर केस में कुछ नहीं है तो मनीष सिसोदिया की बेल क्यों बार बार रिजेक्ट कर रहा है कोर्ट। आप तो अपने दिन गिनो। आपका नंबर भी आएगा।

सोशल मीडिया पर इसको लेकर केजरीवाल की फजीहत हो रही है। आप भी देखिए लोग क्या- क्या कमेंट कर रहे हैं।