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नोबेल पुरस्कार विजेता बिशप कार्लोस फिलिपे जिमेनेस बेलो (फाइल फोटो) |
पत्रिका ने अपनी रिपोर्ट में कुछ पीड़ितों के बयान भी प्रकाशित किए हैं, जिन्होंने बताया कि बिशप कार्लोस फिलिपे जिमेनेस बेलो ने उनका यौन शोषण किया और बदले में पैसे दिए। ये पीड़ित तब किशोरावस्था में थे और काफी गरीब परिवारों से आते थे। पीड़ितों ने बताया कि वो इस बारे में बात करने को लेकर डरे हुए थे। ईस्ट तिमूर का ये कैथोलिक चर्च वहाँ के लोगों के बीच काफी सम्मानजनक है। जब मैगजीन ‘De Groene Amsterdammer’ ने इस संबंध में बात करने के लिए बिशप बेलो को कॉल किया तो उन्होंने फोन काट दिया।
For years, Timor-Leste’s Nobel Peace Prize winner Bishop Carlos Filipe Ximenes Belo has been sexually abusing boys, survivors and others claim.https://t.co/tNxAOI53GW
— Evi Mariani (@evimsofian) September 28, 2022
For those who want to know how the journalists did the research for this article: pic.twitter.com/tOzr4YgZnu
— Evi Mariani (@evimsofian) September 28, 2022
एक पीड़ित ने कहा कि वो इस घटना को लेकर चर्च से और बिशप कार्लोस फिलिपे जिमेनेस बेलो से माफीनामा चाहता है। उसने कहा कि वो चाहता है कि ये घटना सबके सामने आए और आगे कोई सत्ता के नशे में चूर होकर इस तरह की यौन हिंसा न करे। उसने कहा कि जो पीड़ितों पर बीती, उस पर चर्च और आरोपित को अफ़सोस जताना चाहिए। वेटिकन के प्रवक्ता ने इस मामले पर ध्यान देने का आश्वासन दिया है। बेलो को 1996 में नोबेल पुरस्कार मिला था।
एक 42 वर्षीय पीड़ित ने बताया कि तब बिशप ने उसे नंगा कर के उसके साथ ओरल सेक्स किया था। बिशप बेलो को नोबेल पुरस्कार देते हुए कहा गया था कि उन्होंने अहिंसक तरीके से अपनी मातृभूमि ईस्ट तिमोर पर इंडोनेशिया के 24 साल के कब्जे के खिलाफ अभियान चलाया। उनके साथ-साथ जोस रामोस होर्टा को भी ये पुरस्कार मिला था, जो फ़िलहाल ईस्ट तिमूर के राष्ट्रपति हैं। वो फ़िलहाल पुर्तगाल में रहते हैं। 1975-99 तक ईस्ट तिमोर में इंडोनेशिया का कब्ज़ा था और इस बीच भारी कत्लेआम हुआ।
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