क्यों किया जाता है ग्रहण में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल


क्यों होता है तुलसी का इस्तेमाल
तुलसी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के प्रतिदिन दर्शन करने से सभी पाप खत्म हो जाते है। ऐसा माना जाता है कि इसकी पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ग्रहण को अशुभ काल माना जाता है। कहते हैं कि सूर्य ग्रहण के दौरान धरती पर बुरी शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए ग्रहणकाल के समय तुलसी का प्रयोग घर की शुद्धि करने में मदद की जाती है। वहीं, मान्यता है कि तुलसी होने से ग्रहण के बाद आई सभी तरह की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी दोषों का नाश करने वाली होती है, इसलिए नेगेटिव ऊर्जा खत्म करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

नहाने की बाल्टी में रखें तुलसी का पत्ता
तुलसी के पत्तों को घर के नहाने के पानी वाली टंकी में या बाल्टी में डाल दें। ग्रहण खत्म होने के बाद परिवार के सभी लोग इस पानी से ही नहाएं। कहते हैं कि ऐसा करने से ग्रहण का अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है और साथ ही लक्ष्मी का वास सदैव बना रहता है।

तुलसी में पारा होता है
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुलसी में पारा होता है और तुलसी में अन्य कई औषधीय गुण भी होते है। तुलसी सेहत के लिए भी वरदान मानी गई है। तुलसी में कई बीमारियों से लड़ने के गुण बताए गए है। दरअसल पारा के ऊपर किसी भी तरह की किरणों का कोई असर नहीं होता है। ग्रहण के समय पैराबैंगनि किरणें निकलती है जो सेहत के लिए हानिकारक होती है। पारे के गुण के कारण खाने में तुलसी के पत्ते रखने से वह निष्क्रिय हो जाती है।

खाने-पीने की चीजों में रखें तुलसी
ग्रहण के दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी का पत्ता रख देने से उस पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता। ग्रहण के सूतक शुरू होने से पहले लोगों को खाने-पीने की चीजों में खासकर अचार, मुरब्बा, दूध, दही और अन्य खाद्य पदार्थों में तुलसी का पत्ता रख देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से खाने की चीजों पर ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता है। चंद्रग्रहण के बाद घर में तुलसी के पत्ते से पूजा, व्रत, यज्ञ, जप और हवन करने के समान पुण्य प्राप्त होता है।

ग्रहण के समय वातावरण में घातक कीटाणु
सूर्य ग्रहण के बाद तुलसी रखे पानी से घर के सभी लोगों को नहाना चाहिए। इससे घर में लक्ष्मी का निवास होता है। परिवार में सुख-संपत्ति और शांति का वास होता है। पौराणिक शास्त्रों में ग्रहणकाल में भोजन करने से भी मना किया गया है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि ग्रहण के समय वातावरण में घातक कीटाणु तेजी से फैलते हैं और ये कीटाणु खाने-पीने की वस्तुओं और पानी में इकट्ठा होकर उसे दूषित कर देते हैं, ऐसे में भोजन और जल के पात्रों में क़ुश अथवा तुलसी डालने से कीटाणु समाप्त हो जाते है।

पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है

सूर्यग्रहण के समय तुलसी के प्रयोग करने के पीछे न सिर्फ धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक तर्क भी बताए गए है। मान्यता है कि ग्रहण के समय मनुष्य के पेट की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और फिर इस दौरान ग्रहण किया गया भोजन अपच, बदहजमी जैसी कई शारीरिक या मानसिक हानि पहुंचा सकता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, ग्रहण के समय भोजन में मनुष्य जितनी संख्या में अन्न के दाने खाता है, उतने ही सालों तक नरक में यातनाएं झेलनी पड़ती है। इसलिए भोजन में तुलसी डालने से उसमें से सब तरह की अशुद्धियां दूर हो जाती है और बाद में वह भोजन खराब नहीं होता है। 

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