संविधान से सेकुलर और सोशलिस्ट शब्द गायब : कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी का दावा- नए संसद में एंट्री के समय मिली कॉपी में नहीं थे ये शब्द

 (फोटो साभार: द हिंदू इंडिया टुडे)
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने संविधान को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि 19 सितंबर 2023 को सांसदों को संविधान की जो प्रति दी गई उसमें से ‘सेकुलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द गायब हैं।
यदि यह बात सत्य है तो इसका अर्थ है कि दिया गया संविधान आपातकाल से पूर्व का है, जिसे पुनः प्रकाशित कर वितरित किया गया है। क्योकि ये शब्द आपातकाल में तुष्टिकरण के चलते जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने विपक्ष को जेलों में भर दिया था, तब ये शब्द संविधान में डाल जनता विशेषकर हिन्दुओं को पागल बनाया जाता रहा। 

लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता चौधरी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, “आज हमें जो नया संविधान दिया गया, जिस संविधान को हाथ में लेकर प्रवेश (नए संसद भवन) किए, उसकी प्रस्तावना में ‘सोशलिस्ट सेकुलर’ शब्द नहीं हैं। हम जानते हैं कि ये शब्द 1976 में एक संशोधन के बाद जोड़े गए थे, लेकिन अगर आज कोई हमें संविधान देता है और उसमें ये शब्द नहीं हैं, तो यह चिंता का विषय है।”

अधीर रंजन चौधरी ने इसको लेकर सत्ताधारी बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ये सब कुछ बहुत सोच समझ कर किया गया है। बड़ी चतुराई से किया गया है। उन्होंने कहा कि भाजपा वाले बार-बार मौक़ा खोज रहे थे, लेकिन पहले ऐसा नहीं कर पाए थे। अब सरकार में बैठे लोग कहेंगे कि जब दिया था तो यही था, अब इसे मुद्दा क्यों बना रहे हो।

कांग्रेस सांसद चौधरी का यह भी कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की। लेकिन उनको मौका नहीं दिया गया। उनके अनुसार उन्होंने इससे राहुल गाँधी को भी अवगत करवा दिया है।

अभी संसद का विशेष सत्र चल रहा है। 19 सितंबर से सदन की कार्यवाही नए संसद में शुरू हो गई है। पुराने से नए संसद भवन में प्रवेश करने से पहले सांसदों ने संविधान के साथ मार्च किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुराने संसद का नाम ‘संविधान सदन’ रखने का प्रस्ताव दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 सितंबर को विशेष सत्र के दौरान तीसरे दिन महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा होने की संभावना है। 19 सितम्बर को सरकार ने लोकसभा में यह बिल पेश किया था।

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