जब किसी की मृत्यु होती थी तब भी 13 दिन तक उस घर में कोई प्रवेश नहीं करता था। यही Isolation period था। क्योंकि मृत्यु या तो किसी बीमारी से होती है या वृद्धावस्था के कारण जिसमें शरीर तमाम रोगों का घर होता है। यह रोग हर जगह न फैले इसलिए 14 दिन का quarantine period बनाया गया। जो शव को अग्नि देता था उसको घर वाले तक नहीं छू सकते थे 13 दिन तक। उसका खाना पीना, भोजन, बिस्तर, कपड़े सब अलग कर दिए जाते थे। तेरहवें दिन शुद्धिकरण के पश्चात, सिर के बाल हटवाकर ही पूरा परिवार शुद्ध होता था।
जबकि आर्य समाज पद्धति में ऐसा कुछ नहीं। इस रीति में 3 दिन में ही सबकुछ हो जाता है। लेकिन आज आर्य समाज के पंडितों(महाशय) का लगभग अकाल ही पड़ गया है। हमारे युवा दिनों में निगम बोधघाट पर आर्य समाज पद्धति से अंतिम संस्कार करने के अलग से चिता स्थल थे, लेकिन अब सब समाप्त कर दिए गए। और इस काम के लिए जितनी सरकारें दोषी हैं, उतना हिन्दू समाज भी। ये नेता तो अपनी कुर्सी और तिजोरी की खातिर कब क्या कर दें, कुछ नहीं पता। क्योकि पिछली सरकारों द्वारा सनातन पर इतने कुठाराघात किए जिस कारण आर्य समाज लगभग लुप्त ही हो गया है। अब कौन-सी सरकार आएगी कि आर्य समाज पुनः जीवित होगा। अभी देख लो, ये कुर्सी और तिजोरी के भूखे नेता सनातन पर प्रहार कर रही और हिन्दू चुप बैठा है। जिस दिन हिन्दुओं ने इन नेताओं और इनकी पार्टियों को अनदेखा कर सामाजिक बहिष्कार करना शुरू कर दिया इन्हे औकात पता चल जाएगी। लेकिन हिन्दू खामोश है जिस कारण हर कोई मजहब का पिद्दी न पिद्दी का शोरबा कुछ भी बोल देता है। न्यायालय तक हिन्दुओं को न्याय देने में वर्षों लगा देती हैं।
तब भी आप बहुत हँसे थे। bloody indians कहकर मजाक बनाया था। और आज भी बन रहा है। वर्ष 2022 में करवा चौथ वाले दिन न्यूज़ 18 पर अमिश देवगन के शो 'आर पार' में चर्चा में, सहभागी हिन्दू महिला ने घूँघट को लेकर मौलाना रशीदी का जो पलीता बनाया था देखते ही बनता था। पहली बार उस सम्मानित महिला को 'इतने विकराल रूप' में देखा था। काश, दोनों स्टूडियो में होते, रशीदी को अपनी ऋग्वेद पर गलत बयानी के लिए शो छोड़कर जान बचाकर भागना पड़ता। क्योकि एंकर देवगन पहले ही हथियार डाल दिए कि 'मुंह में हाथ दिया है तो सुनना पड़ेगा। ऐसे में रशीदी को बचाता कौन? ऐसे ही सनातन विरोधियों को ईंट का जवाब पत्थर से देना होगा। किसी अन्य चैनल ने रशीदी द्वारा ऋग्वेद पर व्हाट्सअप ज्ञान देने के दुस्साहस को प्रमुखता नहीं दी, क्यों? जबकि नूपुर शर्मा को हर चैनल अपनी TRP के चक्कर में कई दिनों तक चर्चा करते रहे। केवल एक चैनल 'नवभारत' पर एंकर सुशांत सिन्हा ने समस्त मुल्ला, मौलवी और इस्लाम विशेषज्ञों को खुली चुनौती थी कि "बताएं नूपुर शर्मा गलत है या तुम्हारी किताबे", लेकिन किसी में सच बोलने की हिम्मत नहीं हुई। नूपुर शर्मा विवाद में Jaipur Dialogue, Sach, News Nation पर 'इस्लाम क्या कहता है' ने तो अनेक ऐसे मुद्दों को खड़ा कर दिया, जिसका किसी मौलवी से लेकर किसी इस्लामिक विद्वान तक के पास कोई जवाब नहीं था। चर्चा दो मुसलमानों के बीच होने के कारण कोई 'संर तन से जुदा' गैंग सक्रीय पाया। वातानुकूलित कमरों में बैठे मौलानाओं को जवाब देने की बजाए पसीने पोंछते देखा गया। अगर किसी हिन्दू ने किसी अन्य मजहब के बारे में चर्चा को गलत तरीके से पेश करने वाले के विरुद्ध हमारा मीडिया उसकी गिरफ़्तारी की मांग को लेकर छाती पीट रहे होते। किसी हिन्दू द्वारा सनातन पर गलत टिप्पणी करने पर देखो मीडिया कितना उछालता है, यानि हिन्दू को हिन्दू से लड़ाओ और अपनी TRP बढ़ाओ। हमारी मीडिया भी किसी छद्दम सेक्युलरिस्ट नेता से कम नहीं।
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| शास्त्र विधि के अनुसार अंतिम यात्रा से पूर्व अंतिम बार सुहागन की मांग भरायी |
आज भी गांवों में एक परंपरा है कि बाहर से कोई भी आता है तो उसके पैर धुलवायें जाते हैं। जब कोई भी बहू लड़की या कोई भी दूर से आता है तो वह तब तक प्रवेश नहीं पाता जब तक घर की बड़ी बूढ़ी लोटे में जल लेकर, हल्दी डालकर उस पर छिड़काव करके वही जल बहाती नहीं हों, तब तक। खूब मजाक बनाया था न।
इन्हीं सवर्णों को और ब्राह्मणों को अपमानित किया था जब ये गलत और गंदे कार्य करने वाले माँस और चमड़ों का कार्य करने वाले लोगों को तब तक नहीं छूते थे जब क वह स्नान से शुद्ध न हो जाय। ये वही लोग थे जो जानवर पालते थे जैसे सुअर, भेड़, बकरी, मुर्गा, कुत्ता इत्यादि जो अनगिनत बीमारियाँ अपने साथ लाते थे।
ये लोग जल्दी उनके हाथ का छुआ जल या भोजन नहीं ग्रहण करते थे तब बड़ा हो हल्ला आपने मचाया और इन लोगों को इतनी गालियाँ दी कि इन्हें अपने आप से घृणा होने लगी।
यही वह गंदे कार्य करने वाले लोग थे जो प्लेग, टी बी, चिकन पॉक्स, छोटी माता, बड़ी माता, जैसी जानलेवा बीमारियों के संवाहक थे और जब आपको बोला गया कि बीमारियों से बचने के लिए आप इनसे दूर रहें तो आपने गालियों का मटका इनके सिर पर फोड़ दिया और इनको इतना अपमानित किया कि इन्होंने बोलना छोड़ दिया और समझाना छोड़ दिया।
आज जब आपको किसी को छूने से मना किया जा रहा है तो आप इसे ही विज्ञान बोलकर अपना रहे हैं। Quarantine किया जा रहा है तो आप खुश होकर इसको अपना रहे हैं ।
पर शास्त्रों के उन्हीं वचनों को तो ब्राह्मणवाद/मनुवाद कहकर आपने गरियाया था और अपमानित किया था।
आज यह उसी का परिणति है कि आज पूरा विश्व इससे जूझ रहा है।
याद करिये पहले जब आप बाहर निकलते थे तो आप की माँ आपको जेब में कपूर या हल्दी की गाँठ इत्यादि देती थी रखने को।
यह सब कीटाणु रोधी होते हैं।
शरीर पर कपूर पानी का लेप करते थे ताकि सुगन्धित भी रहें और रोगाणुओं से भी बचे रहें।
लेकिन सब आपने भुला दिया।
आपको तो अपने शास्त्रों को गाली देने में और ब्राह्मणों को अपमानित करने में उनको भगाने में जो आनंद आता है शायद वह परमानंद आपको कहीं नहीं मिलता।
अरे समझो अपने शास्त्रों के level के जिस दिन तुम हो जाओगे न तो यह देश विश्व गुरु कहलायेगा।
तुम ऐसे अपने शास्त्रों पर ऊँगली उठाते हो जैसे कोई मूर्ख व्यक्ति के मूर्ख 7 वर्ष का बेटा ISRO के कार्यों पर प्रश्नचिन्ह लगाए।
अब भी कहता हूँ अपने शास्त्रों का सम्मान करना सीखो। उनको मानो। बुद्धि में शास्त्रों की अगर कोई बात नहीं घुस रही है तो समझ जाओ आपकी बुद्धि का स्तर उतना नहीं हुआ है। उस व्यक्ति के पास जाओ जो तुम्हे शास्त्रों की बातों को सही ढंग से समझा सके।
लेकिन गाली मत दो उसको जलाने का दुष्कृत्य मत करो।
जिसने विज्ञान का गहन अध्ययन किया होगा वह शास्त्र वेद पुराण इत्यादि की बातों को बड़े ही आराम से समझ सकता है correlate कर सकता है और समझा भी सकता है।
आप भले ही किसी भी जाति/समाज से हों धर्म के नियमों का पालन कीजिये इससे इहलोक और परलोक दोनों सुधरेगा।
॥सर्वे भवन्तु सुखिनः सवेँसनतु निरामया:॥


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