मीलार्ड सोमेन सेन अकेला जज नहीं है, “हर शाख पे उल्लू बैठा है” क्योंकि हर कोई Collegium की पैदावार है ; अब सुप्रीम कोर्ट जजों के झगड़े भी सुनेगा

सुभाष चन्द्र

कोलकाता हाई कोर्ट में जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के आदेश को पलटने वाली जस्टिस सोमेन सेन और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ पर गंभीर टिप्पणी करते हुए जस्टिस गंगोपाध्याय ने आरोप लगाया कि जस्टिस सोमेन सेन एक राजनीतिक पार्टी (TMC) के लिए काम कर रहे हैं। 

जस्टिस गंगोपाध्याय ने आदेश दिए थे कि MBBS दाखिले से संबंधित SC/ST सर्टिफिकेट घोटाले की जांच CBI से कराई जाए और इसे सोमेन सेन की पीठ ने एडवोकेट जनरल की Mentioning के आधार पर बिना कोई नियम कायदा देखे स्टे कर दिया। 

लेखक 
जस्टिस गंगोपाध्याय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में खड़े हुए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी जो ममता सरकार की वकालत कर रहे थे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि “मैं अपील ज्ञापन या किसी आदेश के खिलाफ याचिका दायर किए बिना आदेश पारित करने को लेकर अधिक चिंतित हूं”।  इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 141 के तहत इसे प्रतिबंधित कर दिया यानी दोनों आदेशों पर रोक लगा दी और जस्टिस गंगोपाध्याय के आदेश के खिलाफ अपील करने की भी अनुमति दे दी। 

जस्टिस गंगोपाध्याय के खिलाफ सिब्बल ने पुराने मामले को भी उछाला और अदालत से कहा कि इनके खिलाफ आप पहले भी संज्ञान ले चुके हैं गंगोपाध्याय ने सोमेन सेन के खिलाफ कोई गलत आरोप नहीं लगाया है क्योंकि वे ममता के भतीजे के पक्ष में बातें करते रहे हैं एक जज अमृता सिन्हा को अपने चैम्बर में बुला कर सोमेन सेन ने निर्देश दिया था कि अभिषेक बनर्जी के खिलाफ कोई फैसले मत करो। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में Suo Moto संज्ञान लिया है परंतु संज्ञान लेने से पहले सोमेन सेन और गंगोपाध्याय से बात करना भी जरूरी था जो नहीं किया गया आज स्थिति न्यायपालिका की ऐसी हो गई कि सुप्रीम कोर्ट को अपने जजों के झगड़े भी सुनने की जरूरत पड़ गई CJI चंद्रचूड़ और जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, सूर्यकांत और अनिरुद्ध बोस की संविधान पीठ द्वारा संज्ञान लेना बता रहा है कि मामला कितना गंभीर है। 

वैसे संविधान पीठ को यह याद रखना चाहिए कि जस्टिस सोमेन सेन अकेले ऐसे जज नहीं हैं जो किसी राजनीतिक दल के लिए काम कर रहे हैं या उन पर ऐसा करने के आरोप उनके साथी जज ने लगाए हों। Collegium के पैदा किए हुए अधिकांश जज किसी न किसी दल से जुड़े दिखाई देंगे और ऐसा उनके फैसलों से नज़र आता है। 

जब बीआर गवई जैसे जज सुप्रीम कोर्ट में बैठ कर कह सकते हैं कि वह कांग्रेस परिवार से संबंध रखते हैं तो उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे कांग्रेस के लिए “निष्ठा” नहीं रखेंगे। अनेक जज हैं जो हिन्दू धर्म के खिलाफ मुखर रहते हैं और अन्य धर्मों पर चुप रहते हैं। कुरान की 26 आयतों के खिलाफ उसी धर्म का व्यक्ति याचिका लेकर गया था तो उस पर जुर्माना ठोक दिया था जबकि नूपुर शर्मा के खिलाफ भयंकर Hate Speech दी थी और दो दिन पहले जस्टिस संदीप मेहता रामायण की चौपाई के खिलाफ खुलकर सामने खड़े हो गए। 

कुछ दिन पहले गुजरात हाई कोर्ट में दो जज आपस में भिड़ गए थे जिनमे एक महिला थी। अभी कुछ दिन पहले मध्यप्रदेश हाई कोर्ट द्वारा 6 जूनियर जजों को बर्खास्त करने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। केरल में तो कई ऐसे जजों को हटाने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया था जिनकी नियुक्ति गलत हुई थी और कहा था कि Experienced लोगों से हम वंचित नहीं होना चाहते। 

बेहतर होगा संविधान पीठ सोमेन सेन की पीठ के आदेश को रद्द कर गंगोपाध्याय के आदेश को बरक़रार रखे लेकिन ऐसा होगा, मुझे शंका है क्योंकि अदालत गंगोपाध्याय पर ज्यादा मेहरबान नहीं है शुरू से(लेख में विचार लेखक के हैं)

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