‘हमें अलग हो जाने दो, खालिस्तान बनाएँगे’, किसानों के प्रदर्शन को खालिस्तानियों ने किया हाइजैक; क्या अभी भी कांग्रेस और AAP इसका समर्थन करेंगे?

             किसान प्रदर्शन की आड़ में खालिस्तान का एजेंडा (साभार: Satya Khabar & Punjab Kesari)
पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों से आए कथित किसानों ने 13 फरवरी 2024 को दिल्ली में घुसने की कोशिश की। किसान सरकार से अपनी माँगें मनवाना चाहते हैं। कहा जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन में लगभग 200 किसान संगठन शामिल हैं। किसान प्रदर्शनों की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिनसे साबित होता है कि यह प्रदर्शन भी पिछले प्रदर्शन की तरह खालिस्तानियों और आन्दोलनजीवियों की भेंट चढ़ चुका है।

हरियाणा के एक यूट्यूब चैनल सत्य खबर ने 12 फरवरी को एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कुछ सिख खालिस्तान की माँग करते दिख रहे हैं। उनमें से एक सिख ने कहा, “हम सिंघु बॉर्डर पर खड़े हैं, जहाँ तुम लोगों ने बैरिकेड लगा रखे हैं। एक काम करो: हरियाणा के बॉर्डर को हमेशा के लिए बंद कर दो। हम पाकिस्तान के साथ सीमा खोलेंगे। तुम लोगों ने हमें भारत से अलग किया तो अब अलग ही हो जाते हैं।”

इसके बाद इन लोगों ने केंद्र की मोदी सरकार पर भी निशाना साधा। उस कथित किसान ने आगे कहा, “मोदी सरकार पंजाब को अपना नहीं समझती है। अगर वो पंजाब को अपना नहीं समझते हैं तो हमें अलग हो जाने दो। हमें अपना देश खालिस्तान बनाने दो। हम पाकिस्तान के साथ जुड़ जाएँगे। हमने दीवारें नहीं बनाईं, तुमने बनाईं। तुमने हमें भारत से अलग कर दिया है। अब हम खालिस्तान बनाएँगे।”

इस वीडियो में खालिस्तान की बात करने वाले किसानों ने बताया कि वे एयरपोर्ट जाना चाहते था। हालाँकि, इस दौरान वे ये भूल गए कि जहाँ से वो आए हैं, उस पंजाब में 9 घरेलू और 3 अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। वे इस दौरान विरोधाभासी दावे भी करते रहे। वे एक तरफ दिल्ली के एयरपोर्ट जाने की बात करते हैं तो दूसरे ही पल कहते हैं कि वे बैरिकेड देखने आए थे।

इसके बाद वह कथित किसान कहता है, “हम अपनी फसलें अपने आप बेच लेंगे। हमें अलग हो जाने दो।” इसके बाद इस सिख व्यक्ति ने हिन्दुओं पर उलटी सीधी टिप्पणियाँ कीं। उसने कहा, “अमृतसर से लाखों ट्रॉलियाँ आ रही हैं। सबमें लंगर लगे हुए हैं। ये हिन्दू लंगर लगा पाएँगे? ये भूख से मरते हुए हमारे लंगर में आते हैं। ये लोग चावल, कढ़ी और पूड़ी का भी इंतजाम नहीं कर सकते लेकिन यहाँ जलेबी, पूड़ी और लड्डू भी बाँटेंगे।”

इसके बाद उस सिख व्यक्ति ने एक फर्जी तर्क गढ़ा। उसने दावा किया कि देश में सबसे ज्यादा अन्न पंजाब पैदा करता है। हालाँकि, सच्चाई यह है कि पंजाब देश में अन्न का सबसे बड़ा उत्पादक नहीं है, खासकर चावल और गेहूँ। पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा चावल पैदा करता है। वहीं, उत्तर प्रदेश गेहूँ सबसे ज्यादा पैदा करता है। यहाँ पंजाब दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक तक नहीं है।

एक अन्य वीडियो में ट्रैक्टर पर चढ़ा एक निहंग सिख प्रदर्शन के बारे में बताता है, “किसानों की फौज आ रही है। हम तो किसी भी हालत में दिल्ली में घुसेंगे।” जब उससे पूछा गया कि सरकार उनकी माँगें मानेगी, तो उसने कहा, “हमें तो कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने हमें धोखा दिया है। 700 किसान मरे हैं। दीप सिद्धू मर गया। हमें कोई आशा नहीं है। हम आजाद पंजाब चाहते हैं, खालिस्तान वाला पंजाब।”

अब इस प्रदर्शन को समर्थन कर रही कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य पार्टियां राष्ट्र को जवाब दे। पिछले प्रदर्शन में दो/तीन अवसर ऐसे भी जब उस प्रदर्शन के सूबेदार बने राकेश टिकैत पीछे हटने वाले थे, लेकिन किसी दबाव में पीछे नहीं हैट पाए। लेकिन 26 जनवरी को लाल किले पर हुए हमले से राकेश बहुत सदमे में आकर प्रदर्शन से हटने को तैयार ही हो रहे थे, कि उनके अंदर टैंट में ले जाकर क्या दवा दी गयी, उसका खुलासा राकेश ही कर सकते हैं, बहरहाल वापस बैठ गए। 

अगर राकेश टिकैत में तनिक भी देश भावना है तो पिछले प्रदर्शन की तरह इस प्रदर्शन में भी खालिस्तान की बात आने पर इस प्रदर्शन के विरोध में खड़ा होना पड़ेगा। अन्यथा यही अर्थ निकाला जाएगा कि 'किसान आंदोलन एक बहाना है, देश को खंडित कर खालिस्तान बनाना है'।   

किसान आन्दोलन के बारे में आई थी खुफिया जानकारी

हरियाणा और पंजाब से प्रदर्शनकारी किसान दिल्ली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए दिल्ली की ओर मार्च कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) और किसान मजदूर मोर्चा सहित 200 से अधिक किसान संघों ने एमएसपी और अन्य माँगों के लिए कानूनी गारंटी की माँग को लेकर 13 फरवरी (मंगलवार) को ‘दिल्ली चलो’ मार्च की घोषणा की थी।
अवलोकन करें:-
एमएसपी पर एक कानून तैयार करने के अलावा, प्रदर्शनकारी किसान माँग कर रहे हैं कि भारत को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) तक को छोड़ देना चाहिए, अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों को रोक देना चाहिए और 60 साल से ऊपर के किसानों को ₹10,000 रुपये की महीने की पेंशन देनी चाहिए। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसान के प्रधान मंत्री आवास और गृह मंत्री आवास पर भी आ सकते हैं।

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