पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सत्ता लोलुपता और तुष्टिकरण के कारण टीएमसी के नेताओं ने हिंदुओं पर अत्याचार की हदें पार कर दी है। टीएमसी नेता शाहजहां शेख और उसके गुंडे वर्षों से हिंदुओं पर अत्याचार करते रहे। हिंदुओं की जमीनें छीन ली गई, महिलाओं और बेटियों के साथ बलात्कार किया गया, पुरुषों की बेरहमी से पिटाई की गई। जब वे इसकी शिकायत करने पुलिस के पास जाते तो शिकायत नहीं ली जाती। इस अवर्णनीय अत्याचार की अंतहीन दास्तां है। लेकिन कहते हैं कि हर अत्याचार का एक दिन अंत होता है। आज संदेशखाली उबल रहा है। इसके पीछे एक नाम है शाहजहां शेख। वह मंत्री नहीं है, विधायक नहीं है, वह जिला परिषद का अध्यक्ष है। पूरे इलाके में जगजाहिर है कि शाहजहां के इशारे के बिना संदेशखाली में एक पत्ता भी नहीं हिलता। वामपंथी शासन काल से ही शाहजहां के कारनामे चर्चा में रहे हैं। पिछले दिनों ईडी ने शाहजहां के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट किया उसके बाद से वह फरार है। उसके बाद वहां की हिंदू महिलाओं ने इस अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन किया और संदेशखाली सुर्खियों में आया। संदेशखाली में शाहजहां शेख का दबदबा
शाहजहां शेख अभी भी फरार है। कुछ लोग कहते हैं कि शाहजहां संदेशखाली में ही है। कुछ लोग कहते हैं कि शाहजहां ने किसी सुनसान जगह पर शरण ले रखी है। ईडी के वारंट के बाद भी पुलिस के नाक के नीचे से वह फरार हो गया। इससे पता चलता है कि सत्ता पक्ष में उसकी कितनी पैठ है। पश्चिम बंगाल का उत्तर 24 परगना जिले का संदेशखाली पिछले दो महीने से सुर्खियों में है। टीएमसी नेता शाहजहां शेख के ठिकाने पर रेड डालने पहुंचे ईडी के अधिकारियों पर हमले किए गए। केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी का सिर फट गया। 5 जनवरी को संदेशखाली की घटना की पूरे देश में सुर्खियां बनी। ईडी ने शाहजहां शेख के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। लुकआउट नोटिस जारी किया, लेकिन वह अब तक फरार है।
#Sandeshkhali : In a stinging indictment of Bengal CM Mamata Banerjee, these women strip her lies. They have been trying to file complaint since 2011, that was also the year Mamata Banerjee took over as Home Minister of Bengal, but were turned down. These women are born and… pic.twitter.com/3U9d6AqljP
— Amit Malviya (@amitmalviya) February 17, 2024
BIG ⚡️ ⚡️ Supreme Court agrees to consider listing PIL for court-monitored probe into violence in West Bengal's #Sandeshkhali village. pic.twitter.com/CIlbP2seVw
— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) February 16, 2024
TMC party is well-wisher of Bangladeshi Muslims, this party should be banned otherwise Bengal will become an Islamic state 😠
— Āryāvarta (@Indo__Aryan) February 16, 2024
बीते कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल का संदेशखाली हिंसा की आग में झुलस रहा है। संदेशखाली का पूरा मामला ED की कार्रवाई के बाद लोगों के सामने आया है। काबिले जिक्र है कि पिछले माह 5 जनवरी, 2024 को ED के अधिकारियों ने राशन भ्रष्टाचार मामले में संदेशखाली के सरबेड़िया में तृणमूल नेता शेख शाहजहां से पूछताछ करने पहुंचे हुए थे। तृणमूल के गुंड़ों की मदद से न सिर्फ नेता शाहजहां शेख फरार हो जाने में कामयाब रहा, बल्कि इस दौरान सरकारी अधिकारियों पर भी हमले भी किए गए थे। इसके बाद से ही स्थानीय लोगों ने अपनी आवाज तेज कर दी और खुल कर सामने आ गए। गांव के लोग शेख शाहजहां और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल हो रही है।
Horror of #Sandeshkhali
— Dilip Ghosh (@DilipGhoshBJP) February 6, 2024
TMC rule has created a system has made people of all ranks waiting for corruption. If common people protest, they were beaten with spades. Hear the dire situation from the residents.
Video Courtesy #TV9Bangla pic.twitter.com/FWu7jClLmp
संदेशखाली में शुरू हुए बवाल ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान महिलाएं लाठी-डंडों और बांस के साथ सड़कों पर उतर आईं। महिलाओं की मांग थी कि तृणमूल के स्थानीय नेता शेख शाहजहां, ब्लॉक अध्यक्ष शिवप्रसाद हाजरा और उनके साथी उत्तम सरदार को गिरफ्तार किया जाए। संदेशखाली की महिलाओं में भयंकर आक्रोश देखने को मिल रहा है। महिलाएं शाहजहां की गिरफ्तारी की मांग करते हुए फिर से सड़कों पर उतर आईं। आरोप है कि शाहजहां ने पार्टी के नाम पर गांव वालों पर लम्बे समय तक जो अत्याचार किया है। ऐसे में महिलाओं की मांग है कि उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस दौरान गांववालों और तृणमूल समर्थक के एक गुट के बीच मारपीट की घटना भी सामने आई थी। जानकारी के मुताबिक, केंद्र द्वारा बंगाल को बकाया फंड से वंचित करने का आरोप लगाकर तृणमूल ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में जनजाति समुदाय के एक वर्ग के साथ एक रैली निकाली थी। इसमें शेख शाहजहां के जयकारे लगाने के बाद ही हंगामा शुरू हुआ था।
Sandeshkhali horror
— ᴅᴇʙᴀᴊɪᴛ ꜱᴀʀᴋᴀʀ🇮🇳 (@debajits3110) February 11, 2024
Just listen to what this Hindu woman is saying. Police and some unidentified people are roaming around Sandeshkhali all night.#Sandeshkhali Section 144 has been issued and internet suspended.Kolkata Police is sending legal notices to those who are posting… pic.twitter.com/IiQLkgna3x
Reminds me of Noakhali Genocide
— Ravish (@Ravish75939890) February 11, 2024
यह स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द का मतलब अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए बहुसंख्यकों के अधिकारों में कटौती करना नहीं है। राम धेनु को रोंग धेनु और आकाशी को आसमानी में बदलने से लेकर टीएमसी को अपनी छद्म-धर्मनिरपेक्ष रणनीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। यह हिंदुओं पर अत्याचार की पराकाष्ठा ही थी बंगाल में आज सोया हुआ हिंदू जाग चुका है और ममता सरकार के काले कारनामे से पर्दा उठ रहा है।
बंगाल में 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। ममता बनर्जी इनके तुष्टिकरण से ही सत्ता में बनी हुई है और इस्लामी एजेंडे को आगे बढ़ा रही है। इसके लिए पर्याप्त राजनीतिक प्रोत्साहन मिलता है। कुछ क्षेत्रों में, उदाहरण के लिए, मुर्शिदाबाद का सीमांत क्षेत्र, जहां 63 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम हैं, वहां सभी लोगों पर शरीयत थोपा जा रहा है। अधिकांश राजनीतिक उम्मीदवार, और प्रशासन मुस्लिम है और हिंदुओं के लिए आर्थिक संभावनाएं कम हो गई हैं क्योंकि मुस्लिम गैर-मुसलमानों के स्वामित्व वाले व्यवसायों को समर्थन देने से इनकार करते हैं। कुरान के साथ पोज देना, बुर्का पहनना और वर्तमान टीएमसी सरकार द्वारा इस तरह की अल्पसंख्यक तुष्टिकरण किया जाता है। ये सब इसलिए किया जाता है कि पूरा मुस्लिम वोट बैंक उनकी झोली में बना रहे। केवल 10 प्रतिशत या उससे अधिक हिंदू के वोट मिल जाए तो वे सत्ता बरकरार रख सकती हैं।
बंगाल ऐतिहासिक रूप से बुद्धिजीवियों की भूमि रही है, जिसने भारत को विद्यासागर से लेकर रवीन्द्र नाथ टैगोर और सुभाष चंद्र बोस जैसे प्रसिद्ध समाज सुधारकों, शिक्षाविदों और कलाकार दिए है। हालांकि, इन महान लोगों की भूमि में, एक व्यक्ति को सीना चौड़ा करके खड़े होने और जय श्री राम बोलने में सक्षम होना चाहिए। ऐसा करते समय उन्हें जेल जाने का डर नहीं होना चाहिए। जयश्रीराम बोलने पर मुख्यमंत्री द्वारा धमकी दी जाती है। अब हिंदू जाग चुका है और वह दिन दूर नहीं जब कोलकाता की सड़कें जय श्री राम के नारों से गूंज उठेंगी और लोकप्रिय जनादेश छद्म धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की राजनीति को खारिज कर देगा।
कभी भारतीय संस्कृति का प्रतीक माने जाने वाले पश्चिम बंगाल की दशा आज क्या हो चुकी है, ये बात तो किसी से छिपी नहीं है। हिंदुओं के खिलाफ साम्प्रदायिक दंगे तो पिछले काफी वक्त से हो रहे हैं। अब तो हालात ये हैं कि त्योहार मनाने तक पर रोक लगाई जानी शुरू हो गई है। प्रदेश में इस घातक परिवर्तन की धमक अमेरिका तक पहुंच गई। मशहूर अमेरिकी पत्रकार जेनेट लेवी ने 2015 में ही ऐसे खुलासे किए थे जो हैरान करने वाले हैं। उन्होंने अपने लेख The Muslim Takeover of West Bengal में आशंका व्यक्त की थी कि पश्चिम बंगाल जल्द ही एक इस्लामिक देश बन जाएगा!
जेनेट लेवी ने दावा किया है कि भारत का एक और विभाजन होगा और वह भी तलवार के दम पर। उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि कश्मीर के बाद पश्चिम बंगाल में अब गृहयुद्ध होगा और अलग देश की मांग की जाएगी। बड़े पैमाने पर हिंदुओं का कत्लेआम होगा और मुगलिस्तान की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी दावा किया है कि यह सब ममता बनर्जी की सहमति से होगा। जेनेट लेवी ने कहा है कि 2013 से पहली बार बंगाल के कुछ कट्टरपंथी मौलानाओं ने अलग ‘मुगलिस्तान’ की मांग शुरू कर दी है। इसी साल बंगाल में हुए दंगों में सैकड़ों हिंदुओं के घर और दुकानें लूट लिए गए और कई मंदिरों को भी तोड़ दिया गया। इन दंगों में सरकार द्वारा पुलिस को आदेश दिये गए कि वो दंगाइयों के खिलाफ कुछ ना करें।
जेनेट लेवी ने इसके लिए कई तथ्य पेश किए हैं और इसके लिए मुख्य जिम्मेदार बंगाल में बिगड़ते जनसांख्यिकीय संतुलन को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने हिंदुओं की घटती और मुस्लिमों की तेजी से बढ़ती आबादी का जिक्र करते हुए देश के एक और विभाजन की तस्वीर प्रस्तुत की है।
जेनेट लेवी ने दावा किया है कि इस्लामिक देश बनाने की सूत्रधार ममता बनर्जी बनने जा रही हैं। उन्होंने अपने दावे में तथ्य भी दिए हैं और कहा है कि यह सब अरब देशों की फंडिंग से होने जा रहा है। उन्होंने दावा किया है कि ममता सरकार ने सऊदी अरब से फंड पाने वाले 10 हजार से ज्यादा मदरसों को मान्यता देकर वहां की डिग्री को सरकारी नौकरी के काबिल बना दिया है। सऊदी से पैसा आता है और उन मदरसों में वहाबी कट्टरता की शिक्षा दी जाती है।
जेनेट लेवी ने दावा किया है कि पूरे बंगाल में मुस्लिम मेडिकल, टेक्निकल और नर्सिंग स्कूल खोले जा रहे हैं। इनमें मुस्लिम छात्रों को सस्ती शिक्षा मिलेगी। इसके अलावा कई ऐसे अस्पताल बन रहे हैं, जिनमें सिर्फ मुसलमानों का इलाज होगा। मुसलमान नौजवानों को मुफ्त साइकिल से लेकर लैपटॉप तक बांटने की स्कीमें चल रही हैं। इस बात का पूरा ख्याल रखा जा रहा है कि लैपटॉप केवल मुस्लिम लड़कों को ही मिले, मुस्लिम लड़कियों को नहीं।
जेनेट लेवी ने दावा किया है कि हिंदुओं को भगाने के लिए जिन जिलों में मुसलमानों की संख्या ज्यादा है, वहां के मुसलमान हिंदू कारोबारियों का बायकॉट करते हैं। मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तरी दिनाजपुर जिलों में मुसलमान हिंदुओं की दुकानों से सामान तक नहीं खरीदते। यही वजह है कि वहां से बड़ी संख्या में हिंदुओं का पलायन होना शुरू हो चुका है। कश्मीरी पंडितों की ही तरह यहां भी हिंदुओं को अपने घरों और कारोबार छोड़कर दूसरी जगहों पर जाना पड़ रहा है। ये वे जिले हैं जहां हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं। जेनेट लेवी ने दावा किया है कि बंगाल में बेहद गरीबी में जी रहे लाखों हिंदू परिवारों को कई सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं दिया जाता।
जेनेट लेवी ने दुनिया भर की कई मिसालें देते हुए दावा किया है कि, मुस्लिम आबादी बढ़ने के साथ ही आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता और अपराध के मामले बढ़ने लगते हैं। उन्होंने कहा है कि आबादी बढ़ने के साथ ऐसी जगहों पर पहले अलग शरिया कानून की मांग की जाती है और फिर आखिर में ये अलग देश की मांग तक पहुंच जाती है। जेनेट ने इस समस्या के लिए इस्लाम को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने लिखा है कि कुरान में यह संदेश खुलकर दिया गया है कि दुनिया भर में इस्लामिक राज स्थापित हो। जेनेट ने दावा किया है कि हर जगह इस्लाम जबरन धर्म-परिवर्तन या गैर-मुसलमानों की हत्याएं करवाकर फैला है। उन्होंने लिखा है कि 2007 में कोलकाता में बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन के खिलाफ दंगे भड़क उठे थे। ये पहली कोशिश थी जिसमे बंगाल में मुस्लिम संगठनों ने इस्लामी ईशनिंदा (ब्लेसफैमी) कानून की मांग शुरू कर दी थी।
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