जया अमिताभ बच्चन बार-बार बिदकना फिल्मों में भले अच्छे लगते हों पर संसद में सही नहीं; अगर अमिताभ के नाम से चिढ़ है फिर " जया अमिताभ बच्चन" क्यों लिखा ?

लोक सभा से लेकर राज्य सभा तक विपक्ष के रवैया को देख साफ जाहिर है कि देश की मूर्ख जनता ने किन बुद्धिविहीन विपक्ष को वोट देकर संसद ने में भेजा है। बात-बात पर हंगामा करना दिखाना है कि ये संसद में गंभीरता से बात करने की बजाए गली-कूचे की तरह बिगड़े बच्चों की तरह चीखना-चिल्लाना। दूसरे राज्य सभा में सदस्य मनोनीत किये जाते हैं, लेकिन 5 बार से समाजवादी पार्टी की राज्य सभा सांसद जया अमिताभ बच्चन को यह भी नहीं मालूम कि राज्य सभापति सांसद नहीं , बल्कि उपराष्ट्रपति होते है। अगर अमिताभ बच्चन के नाम से चिढ़ है फिर आवेदन में जया अमिताभ बच्चन क्यों लिखा?      
सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की पत्नी और राज्य सभा सांसद जया बच्चन आजकल विवादों में चल रही हैं। संसद सत्र के दौरान अपने नाम के साथ पति का नाम आने पर वो बार-बार भड़क जाती हैं। जबकि उन्होंने खुद राज्य सभा सदस्य के रूप में शपथ पत्र और चुनाव शपथ पत्र में भी अपना पूरा नाम ‘जया अमिताभ बच्चन’ ही लिखवाया है। ऐसे में जया बच्चन के बार-बार ‘अमिताभ का नाम सुनते ही’ अपना आपा खो देने पर लोग हैरान हैं। 

9 अगस्त को वो एक बार फिर उखड़ गईं। दरअसल में फिल्म अभिनेत्री और समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन पिछले 10 दिनों में राज्यसभा में तीसरी बार भड़की हैं। ताजा मामले में आज जया बच्चन और राज्य सभा के सभापति जगदीप धनखड़ के बीच तीखी बहस हुई। वो आज एक बार फिर सभापति धनखड़ के ‘जया अमिताभ बच्चन’ कहने पर भड़क गईं। सभापति ने जया बच्चन को रजिस्टर में दर्ज उनके नाम के अनुसार ‘जया अमिताभ बच्चन’ कहकर बुलाया। इस पर गुस्से से भड़कते हुए उन्होंने यहां तक कह दिया कि आपकी जो टोन है, वो मुझे स्वीकार नहीं है। वो एक एक्टर हैं और बॉडी लैंग्वेज को अच्छी तरह से समझती हैं। इसपर जगदीप धनखड़ ने भी उनकी क्लास लगा दी। सभापति ने कहा कि भले ही आप कोई भी हों, भले ही आप सेलिब्रिटी ही क्यों ना हों। मैं इस तरह की चीजें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा।

राज्यसभा सदन में सभापति जगदीप धनखड़ ने जब उन्हें एक मुद्दे पर बोलने के लिए उनका पूरा नाम लिया तो वह इसे सुन भड़क गईं और कहा कि वो कलाकार हैं। चेहरे के हाव-भाव समझती हैं। उन्हें सभापति की टोन पसंद नहीं आई। इस दौरान सभापति ने भी सख्ती से जया बच्चन को बैठने को कहा और समझाया- “आप सेलिब्रिटी होंगे लेकिन आपको सदन की गरिमा का ध्यान रखना होगा।”

जया बच्चन ने पहली बार राज्यसभा सदन में इस प्रकार ‘जया अमिताभ बच्चन’ कहे जाने पर नाराजगी नहीं जताई। कुछ दिन पहले उपसभापति ने हरिवंश नारायण सिंह ने उन्हें उनके पूरे नाम ‘जया अमिताभ बच्चन’ से संबोधित किया, तो इस पर वह नाराज हो गईं और इसे नारीवाद का मुद्दा बना दिया था।

इसके कुछ दिन बाद उपराष्ट्रपति व सदन के सभापति जगदीप धनखड़ ने उन्हें इस नाम से पुकारा तो उन्हें इससे भी आपत्ति हो गई। हालाँकि तब जगदीप धनखड़ ने उन्हें सलाह दी कि अगर उन्हें नाम नहीं पसंद तो वो नाम बदल लें, मगर तब जया बच्चन ने कहा कि उन्हें इस पर और अपने पति पर गर्व है और इस तरह उस दिन भी ये मामला हँसी में टल गया।

अब आज दोबारा यही हुआ। सदन में जब सभापति ने जया बच्चन को उनके पूरे नाम से बुलाया तो वह फिर भड़क गईं और खड़े होकर कहा, “मैं कलाकार हूँ। बॉडी लैंग्वेज समझती हूँ और चेहरे की अभिव्यक्ति समझती हूँ। सर! माफ कीजिएगा, आपका लहजा स्वीकार्य नहीं है। भले ही आप आसन पर बैठे हैं, लेकिन हम आपके साथी हैं।”  … यह सुन जगदीप धनखड़ ने उन्हें जमकर फटकारा।

कुछ दिन पहले भी दूसरी बार जया बच्चन ने अपने नाम के साथ अमिताभ आने पर टोका-टोकी की थी। इस पर सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा था कि जो नाम इलेक्शन सर्टिफिकेट में आता है और जो यहां जमा किया जाता है, उसे ही बोला जाता है। इसके अंदर बदलाव की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया का लाभ मैंने खुद उठाया था 1989 में। वो बदलाव की प्रक्रिया हमने हर मेंबर को बताई है।

जया बच्चन को सभापति ने सख्त लहजे में कहा, “‘जया जी, कृपया अपने स्थान पर बैठिए। आपने अपनी एक प्रतिष्ठा बनाई है। आप जानती हैं कि अभिनेता निर्देशक के अनुसार काम करता है। आपने वह चीजें नहीं देखी हैं, जो मैंने यहाँ इस आसन पर बैठकर देखा है। आप मेरे लहजे के बारे में बात कर रही हैं? बस बहुत हुआ। आप होंगे सेलिब्रिटी, लेकिन आपको यहाँ सदन की गरिमा का ध्यान रखना होगा।” सभापति से फटकार पाने के लिए जया बच्चन ने मीडिया से बात की और कहा कि उन्हें सभापति का तरीका पसंद नहीं आया, कोई उन्हें डांट नहीं सकता उन्हें संबंध में चाहिए कि उनसे माफी माँगी जाए।

राज्यसभा में दिखा जया बच्चन का गुस्सा होना या किसी बात पर नाराज होना कोई नया नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर उन्हें कई बार उनके प्रशंसकों के बर्ताव से, पैपराजियों के बिन परमिशन फोटो खींचने लेने के अंदाज से, उनके फैमिली टाइम में दखल देने पर, उन्हें कई बार नाराज होते देखा जा चुका है। ज्यादा वक्त नहीं बीता जब साल 2021 में बंगाल चुनावों के वक्त वह रैली करने बंगाल पहुँची थीं और रोड शो के दौरान एक फैन जब उनके साथ सेल्फी लेने आया था तो उन्होंने उसे थप्पड़ मार दिया था।

क्लॉस्टेरोफोबिया कारण है गुस्से का?

जया बच्चन के गुस्से के बारे में सिर्फ मीडिया में और सोशल मीडिया यूजर्स ही चर्चा नहीं करते। उनके बच्चे खुद भी इस बात को मानते हैं कि उनकी माँ गुस्सैल स्वभाव की हैं। एक बार कॉफी विथ करण में जया के दोनों बच्चों यानी श्वेता बच्चन और अभिषेक बच्चन ने बताया भी था कि उनकी माँ को क्लॉस्टेरोफोबिया नाम की बीमारी है। ये एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें इंसान अचानक भीड़ को देखकर परेशान हो जाता है और गुस्सा करने लगता है।
अब जाहिर सी बात है कि बेटी श्वेता द्वारा करण के शो में जो बात कही गई वो वजह जया को गुस्सा आने का एक कारण हो सकती है… लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं कि वो इसके कारण अपनी उस छवि को नष्ट करें जो उन्होंने 70 के दशक में बतौर अभिनेत्री दर्शकों के दिलों में कायम की थी। लोग आज भी पुरानी फिल्में देखते हुए उनकी अदाकारी को सराहने में कोई कसर नहीं छोड़ते, उनकी राजनैतिक यात्रा के बारे में सुनते हैं तो उनकी तारीफ करते हैं… ये सब कुछ उन्हें उनकी पुरानी छवि के कारण ही मिला है। वह खुद कहती हैं कि अमिताभ बच्चन पर उन्हें गर्व है फिर आखिर क्यों उन्हें ये नहीं पसंद कि लोग उनके नाम के साथ उनके पति का नाम लें? इसमें महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई या अपमानित करने की बात तो कहीं नहीं आती… उलटा इससे तो ये पता चलता है कि अमिताभ बच्चन जहाँ एक्टिंग तक सीमित रह गए उनकी पत्नी जया बच्चन ने आगे बढ़कर पहचान बनाई।
फिल्मी दुनिया में किसी मुद्दे का बवाल बनाना, नाराज होना क्रांतिकारी समझा जाता हो, मगर वो पर्दे की दुनिया है। आम जिंदगी में भी जरा-जरा सी बात बात पर गुस्सा करने वाले व्यक्ति को व्यवहार सुधारने की सलाह दी जाती है। उसे बोलते समय और प्रतिक्रिया देते समय नियंत्रित रहने को कहा जाता है, फिर जया बच्चन तो सम्मानित अभिनेत्री और वर्तमान सांसद दोनों है। सार्वजनिक जीवन में रहते हुए गुस्से को हावी होने देना या पैपराजी से लेकर सभापति को एक बराबर तोलना कहाँ तक उचित है ये जया बच्चन को खुद सोचना चाहिए। साथ ही ये सोचना चाहिए कि क्या इतना सबकुछ हासिल करने के बाद अगर कोई दूसरा व्यक्ति उन्हें उनके पूरे नाम से बुला दे तो क्या इससे उनकी उपलब्धि सच में खत्म हो जाएगी?

अमिताभ बच्चन की पत्नी जया बच्चन ने पहली बार राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश के संबोधन पर उखड़ गई थी। उस समय उपसभापति ने जैसे ही ‘जया अमिताभ बच्चन’ नाम लिया वैसे ही समाजवादी पार्टी सांसद जया बच्चन भड़क गईं। समाजवादी पार्टी सांसद ने कहा कि आप सिर्फ जया बच्चन कहते तो काफी होता। इस पर हरिवंश जी कहते हैं कि यहां पूरा नाम लिखा है इसलिए मैंने बोला। जया बच्चन इस पर जवाब देती हैं कि ‘ये नया तरीका निकला है कि महिलाएं अपने पति के नाम से जानी जाएंगी। उनका कोई अस्तित्व नहीं हैं। उनकी कोई उपलब्धि नहीं हैं।’

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