मैं कई दिन से इस विषय से इतना विचलित था कि कुछ लिखने का मन नहीं किया। 16 दिसंबर, 2012 के निर्भया कांड को भी कोलकाता के RG kar अस्पताल में एक डॉक्टर बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध ने मात दे दी। मात इसलिए दे दी क्योंकि निर्भया के अपराधी ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे लेकिन “अभया” के मामले में दरिंदे सब पढ़े लिखे थे।
उन्हें बचाने के लिए ममता बनर्जी आगे आई और समूचे विपक्ष के नेता अपनी आत्मा मार कर “खामोश” बैठे हैं। क्या इन लोगों को वक्त और ईश्वर का कोई डर नहीं जो इतना भी अहसास नहीं है कि कल इन पर कुदरत का ऐसा कहर टूट सकता है कि ये कहीं के नहीं रहेंगे। कुदरत कब कैसे दंड देती है, यह कोई नहीं जानता।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
सौरव गांगुली कह रहा है - “मुझे नहीं लगता कि हमें इस एक घटना के लिए अपनी सुरक्षा एजेंसी/सरकार को दोषी ठहराने की जरूरत है, यह उन दुर्घटनाओं में से एक है जो इस दुनिया में हर जगह होती रहती है”।
इस आदमी को जनता ने सिर पर बिठाया था और आज यह इतनी निर्लज्जता दिखा रहा है।
सारे Bollywood के कलाकारों को जैसे मौत आ गई हो, सब खामोश हैं किसी एक भी आवाज़ नहीं उठी। जो अपना नाम जया अमिताभ बच्चन लेने पर समझ रही थी कि एक महिला का अपमान हो गया, उसकी नज़र में एक 25 वर्ष की डॉक्टर से दरिंदगी अपमान भी नहीं है जो मुंह सिले हुए बैठी है। शत्रुघ्न सिन्हा “खामोश” है। TMC की 29 सांसदों में 11 महिलाएं हैं लेकिन सब चुप हैं।
CJI चंद्रचूड़ मणिपुर की एक घटना के लिए तड़प उठे थे लेकिन कोलकाता की दरिंदगी पर स्वतः संज्ञान लेने की जरूरत नहीं समझ रहे। उनकी इंसानियत भी “Selectively” नींद से जगती है और यह देश और न्यायपालिका का दुर्भाग्य ही तो है।
जो महुआ मोइत्रा बड़ी बेशर्मी से NCW की Chairperson रेखा शर्मा के लिए कह रही थी कि “वे अपने बॉस का पायजामा पकड़ने में व्यस्त हैं” जबकि उसे पता था कि उसके लिए भी कुछ भी टिप्पणी की जा सकती है, आज उस महुआ के लिए भी “अभया” से दरिंदगी कोई बड़ी बात नहीं है जो खामोश है। सोनिया गांधी और प्रियंका चतुर्वेदी जो जया अमिताभ बच्चन के लिए अश्रु बहा रही थीं, उन्हें जैसे सांप सूंघ गया है और प्रियंका वाड्रा तो लड़कियों के लड़ना ही भूल गई जैसे।
राहुल गांधी लगता है महिलाओं की समाज में ऐसी ही हिस्सेदारी चाहता है जिससे उन्हें प्रताड़ित किया जा सके, उनके बलात्कार की छूट हो और जो मर्जी जब मर्जी उनकी हत्या कर दे। उसके जोड़ीदार अखिलेश यादव को बस इसमें भाजपा की राजनीति दिखाई दे रही है।
समूचा विपक्ष इस जघन्य अपराध पर तो खामोश है ही, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही निर्ममता और महिलाओं से बलात्कारों और उनके घरों को जलाये जाने के लिए ऐसे चुप हैं जैसे उनके खेमे में मरघट का सन्नाटा छाया हुआ हो। ये हैं मानवता के असली शत्रु।
बहुत बुरी बीतेगी ऐसे निष्ठुर और मानवता के शत्रुओं पर। ईश्वर दंड देता जरूर है। अभी ममता की गद्दी भी हिलने के आसार बन सकते हैं, देखते जाओ। बांग्लादेश और बंगाल पर जिनके लिए चुप हैं विपक्षी नेता, उनके लिए वो “काफिर” ही रहेंगे।
बंगाल के बेटी “अभया” को नमन और श्रद्धांजलि।


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