कुछ ऐसे आदेश होते हैं विभिन्न हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जिनके अनुसार महिलाओं और बच्चियों पर यौन अपराध करने वालों राहत दे दी जाती है और ये एक मुख्य कारण माना जा सकता है ऐसे यौन अपराधों के बढ़ने के पीछे। ऐसे कुछ मामलों पर नज़र डालते हैं।
कुछ दिन पहले 26 जून, 2024 को ओडिशा हाई कोर्ट के जस्टिस एस के साहू और जस्टिस आर के पटनायक की खंडपीठ ने मुस्लिम अपराधियों की फांसी की सजा बदल दी। आरोपी अकील को तो बरी कर दिया और आसिफ की सजा फांसी से उम्रकैद में बदल दी। इन दोनों ने 21 अगस्त, 2014 को एक 6 साल की बच्ची का अपहरण किया और उससे दुष्कर्म किया जिसकी बाद में मौत हो गई।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अभी कल ही मेघालय हाई कोर्ट के Chief Justice S. Vaidyanathan and Justice W. Diengdoh ने 13 वर्षीय पीड़िता के बयानों में एकरूपता को देखते हुए, आरोपों की गंभीरता को भी समझते हुए और पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि को देखते हुए फैसला देते हुए आरोपी की उम्रकैद (30 साल) की सजा को मात्र 7 साल की सजा में बदल दिया। ऐसा करने के पीछे एक कारण और दिया जो बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि बच्ची आरोपी को जानती थी।और आरोपी को पश्चाताप का मौका ही नहीं मिलेगा।
जून, 2021 में नागपुर हाई कोर्ट की जस्टिस पुष्पा गनेड़ीवाला ने आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि पीड़िता के साथ कोई skin to skin contact नहीं हुआ। इस केस में रिपोर्ट थी कि accused had taken the 12-year-old victim to his house on the pretext of giving her guava, tried to remove her salwar and pressed her breast. He then pressed her mouth when she started shouting... इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था 19 नवंबर 2021 को जब हाई कोर्ट के फैसले की सोशल मीडिया पर बहुत निंदा हुई थी। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में थे जस्टिस UU Lalit, Bela Trivedi, और S. Ravindra Bhat...
समस्या यह है कि नाबालिग बच्चियों से बलात्कार के मामले सामने आने पर विभिन्न हाई सुप्रीम कोर्ट एक ही गीत गाने लगते हैं कि सेक्स के लिए लड़कियों के लिए सहमति की आयु कम करनी चाहिए। लेकिन आप सहमति की आयु कितनी कम कर देंगे। अभी पोक्सो एक्ट कहता है नाबालिग से सेक्स चाहे सहमति से हो या न हो, रेप ही माना जाएगा।
रेप तो हर आयु की बच्ची के साथ हो रहे हैं 4 साल, 6 साल, 12 साल, 14 साल, 15 साल। ऐसे में कैसे सहमति की आयु नियत कर सकते हो।
अभी 2 दिन पहले अजमेर में 32 साल पहले 100 लड़कियों से बलात्कार और blackmailing के मामले में 6 मुस्लिम आरोपियों को उम्रकैद दी गई है। पता नहीं सुप्रीम कोर्ट तक जाते जाते क्या होगा?
सबसे ज्यादा विचारणीय बात यही है जो मैं बहुत समय से कहता आ रहा हूं कि क्योंकि न्यायपालिका के जज और उनके परिवार संरक्षित और सुरक्षित रहते हैं और अपराध के शिकार नहीं होते, इसलिए ऐसे फैसले दिए जाते हैं, बरी कर दो, या सजा कम कर दो। पोक्सो एक्ट की तो ऐसी तैसी करने में लगे हैं अदालतें।


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