हर अपराधी को छोड़ते रहेंगे तो अपराध कैसे रुकेंगे ; देखिए वीडियो

सुभाष चन्द्र

उदयपुर के कन्हैया लाल के “सिर तन से जुदा’ करने वाले मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी ने 5 सितंबर को एक co-accused मोहम्मद जावेद को जमानत पर छोड़ दिया 28 जून, 2022 को उदयपुर में कन्हैया लाल टेलर की दिन दहाड़े रियाज़ अटारी और Ghous मोहम्मद ने हत्या कर दी थी और सुप्रीम कोर्ट के महान जजों ने पारदीवाला और सूर्यकांत ने उसके लिए नूपुर शर्मा को दोष दे दिया था। 

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जावेद को हत्या के एक महीने बाद 22 जुलाई को NIA ने गिरफ्तार किया था उस पर आरोप था कि उसने कन्हैया लाल की दुकान के इलाके की Reiki की थी और हत्यारों को मुहैया कराई थी

हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी ने अपने फैसले में NIA को उड़ा दिया उन्होंने कहा कि - 

-जावेद को उसकी call details के आधार पर पकड़ा था लेकिन NIA उसकी उस दिन की location साबित नहीं कर सकी;

-जावेद के पास से कुछ बरामद नहीं हुआ मुझे नहीं लगता उस  आरोप था कि उनके पास हथियार थे लेकिन फिर भी जज साहब ने ऐसा कहा;

-जावेद लंबे समय से जेल में है और मुकदमा चलने में लंबा समय लगेगा और इसलिए उसको हम जमानत देते हैं

-जस्टिस पंकज ने यह भी कहा कि कन्हैया की दुकान की CCTV से confirm हुआ है कि जावेद उसकी दुकान पर गया ही नहीं इसलिए यह साबित नहीं होता कि उसने Reiki की 

अजीब तरह से बचाव किया गया जावेद का, भला यह कहां कहा गया कि उसने दुकान के अंदर की Reiki की थी, आरोप तो इलाके की reiki करने का था जो दुकान के CCTV से साबित नहीं हो सकता 

एक चाय वाले ने गवाही नहीं दी और कथित मीटिंग में शामिल 9 लोगों ने ऐसी किसी मीटिंग से इंकार कर दिया गवाहों को जैसे मर्जी गवाही देने के लिए राजी किया जा सकता है उन्हें क्या ईशारा नहीं किया गया होगा कि तुम्हें भी कन्हैया बना देंगे, फिर कौन बोलेगा?

दूसरे केस में मुंबई सेशन कोर्ट के जज SM Patil ने 2 सितंबर को एक बांग्लादेशी को जमानत दे दी जिसे महाराष्ट्र ATS ने गिरफ्तार किया था। आरोप : फर्जी भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर और 2024 के चुनाव में वोट भी दिया

सुल्तान सिद्दीकी शैख़ 54 साल का रिक्शा ड्राइवर मलाड का रहने वाला रियाज़ हुसैन शेख(33) इब्राहिम शैफुल्ला शैख़ 44 और फारूख उस्मान गनी शैख़ 39 के साथ रहता था और सब  नोआखाल बांग्लादेश के रहने वाले थे

सेशन जज ने जमानत देने से पहले उसके अपराध को देखा और उस पर मिलने वाली सजा को देखा और कहा कि अगर उसे कठोर शर्तों पर जमानत दी जाती है तो मकसद हल हो सकता है, और tempering of record with the witnesses may be curtailed. जज ने माना उसके पास से 15 पासपोर्ट प्राप्त हुए 

11 जून, 2024 को ATS ने चारों को गिरफ्तार किया

मतलब एक घुसपैठिये पर कोर्ट मेहरबान हो गया, उसके फर्जी Documents बनाने और वोट डालने को भी बड़ा अपराध नहीं माना सुल्तान को बेल दे दी, बाकी का पता नहीं अभी क्या status है

इसके पहले 21 मई 2024 बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक और बांग्लादेश के नागरिक को जमानत दे दी थी जिस पर drugs case में फर्जी documents का आरोप था। मोहम्मद मुराद ओलियर शेख भारत में घुसा बिना किसी पासपोर्ट, और वीज़ा के और forged documents के सहारे आधार कार्ड और पैन कार्ड बनवा लिया 13 मई, 2022 को गिरफ्तार हुआ ड्रग्स रखने के लिए 

कोर्ट ने कहा - उसके पास कुछ नहीं मिला; सबूत नहीं मिला कि वह co-accused के साथ गुनाह में शामिल था; उसके पास से मिले कथित फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड सब जब्त हो चुके हैं  और उसकी गिरफ़्तारी co-accused  के गिरफ्तार होने के 3 महीने बाद की गई, फिर उसे जेल में रखना उचित नहीं है 

यानी दामाद हो गया जब कोई कसूर ही नहीं पाया गया तो बरी ही कर देते 

ऐसे अपराधी छोड़े जाएंगे तो फिर तो देश का भगवान ही मालिक है

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