भारत से लेकर अमेरिकी चुनावों में एक से नारों जैसे संविधान खतरे में, तानाशाह, चुनाव नहीं होना आदि आदि का असली मकसद जनता को गुमराह कर कुर्सी के भूखे नेताओं द्वारा अपने परिवारों को बचाना था। 1976 में भारत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने इमरजेंसी लगाई कोर्ट के निर्णय को रौंद अपनी कुर्सी बचाने के लिए। जनता को गुमराह किया देश खतरे में और सारे विपक्ष, कम्युनिस्टों को छोड़, को जेल में भर दिया। संविधान की धज्जियाँ उड़ाने वाले ही संविधान को बचाने का शोर मचाने का मतलब है 'चील के खोंसले में मांस ढूँढना'। साफ जाहिर है कि अपने अपने परिवारों की रक्षा के लिए मुद्दा विहीन, आधारहीन और बेसिर पैर के नारों से जनता को गुमराह करने भारत से लेकर अमेरिका तक देश विरोधी ताकतें लगी हुई थीं।
अमेरिकी चुनाव में Democrats ने ढोल पीटा था कि अगर ट्रंप जीत गया तो वो संविधान को ख़त्म कर देगा और तानाशाह बन जाएगा। ऐसा ही ढोल भारत के विपक्ष ने मोदी के लिए बजाया था और आज भी बजा रहा है।
लेकिन जो बाइडन ने अपने पुत्र हंटर बाइडन पर चल रहे सभी आपराधिक मुकदमों के लिए उसे माफ़ी दे दी जबकि ये मुक़दमे उस पर 2018 से भी पहले से चल रहे थे। अमेरिकी प्रशासन के legal attorney केस लड़ रहे थे और हंटर पर आरोप भी तय हो चुके थे और किसी किसी में तो दोष भी सिद्ध हो गया था।
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“मैंने देखा कि मेरे बेटे पर जानबूझकर और गलत तरीके से मुकदमा चलाया गया। हंटर के मामले में तथ्यों को देखने वाला कोई भी व्यक्ति किसी अन्य निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता कि उसे केवल इसलिए फंसाया गया, क्योंकि वह मेरा बेटा है”।
डोनाल्ड ट्रंप ने तंज कसा और कहा कि इस क्षमादान में 6 जनवरी, 2020 के दंगों में शामिल उनके समर्थक भी शामिल है जो जेल की सजा काट रहे हैं।
हंटर पर आरोप है कि उसने Rehabilitation Center से निकलने के 2 महीने बाद अक्टूबर, 2018 में कॉल्ट कोबरा स्टोर से एक बंदूक खरीदी लेकिन उसके लिए फॉर्म भरते हुए अपने ड्रग्स लेने की बात छुपाई जिसके लिए उसे 10 साल की जेल हो सकती है। कानून के अनुसार ड्रग्स लेने वाला व्यक्ति अपने पास बंदूक या कोई अन्य हथियार नहीं रख सकता पर हंटर ने यह किया जिसके लिए उसे 5 साल की सजा हो सकती है।
हंटर पर यह भी आरोप है कि उसने 2017 और 2018 में 15 लाख डॉलर से अधिक का टैक्स रिटर्न समय पर जमा नहीं किया जिस पर एक लाख डॉलर से ज्यादा उस पर टैक्स बकाया है।
हंटर ने दिसंबर 2020 में publicly disclose किया था कि उसकी चीन में business dealings, टैक्स के क्लेम और मनी लॉन्ड्रिंग उल्लंघन के लिए उसके खिलाफ Federal Investigation चल रही है। ध्यान रहे दिसंबर, 2020 में बाइडन चुनाव जीत चुके थे।
अब इन आरोपों को देख कर बाइडन कैसे इस निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं कि हंटर पर मुक़दमे केवल इसलिए चलाये गए क्योंकि वह उनका पुत्र है।
अगर देखा जाए तो अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव होने के बाद सत्ता हस्तांतरण में ढाई महीने का समय लगना और इस कालखंड में जाने वाले राष्ट्रपति के पास सभी शक्तियों का होना बहुत ही बेहूदा व्यवस्था है। चुनाव नतीजे आने के बाद एक हफ्ते में नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण हो जाना चाहिए और कार्यवाहक राष्ट्रपति के पास काम चलाऊ शक्तियां ही होनी चाहिए। लेकिन बाइडन अपनी पूरी शक्तियों के उपयोग कर रहे हैं चाहे वे अमेरिका के हित में हों या संविधान के विरोध में और चाहे निजी स्वार्थ पूरा करने के लिए। कुछ फैसले तो बाइडन ऐसे कर रहे हैं जो ट्रंप के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं।
जो बाइडन जाते जाते “Democrat” से “Dictator” बन गए और पहले राष्ट्रपति बन गए जिसने अपने बेटे को अपराधों के लिए माफ़ कर दिया। इसके पहले बिल क्लिंटन ने अपने सौतेले भाई राजर को ड्रग संबंधी मामले में और डोनाल्ड ट्रंप ने अपने समधी चार्ल्स कुशनर को गलत टैक्स रिटर्न जमा करने के लिए क्षमादान दिया था।
वैसे हमारे देश में हमारा सुप्रीम कोर्ट अपराधियों को छोड़ने का काम करता है और संविधान पर हथौड़ा चलाता है लेकिन आज यदि प्रधानमंत्री मोदी आसाराम बापू को क्षमादान दे दें तो सुप्रीम कोर्ट विपक्ष के साथ नंगा होकर तांडव कर देगा।
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