7 जनवरी को दिल्ली के चुनाव घोषित हुए। तुरंत मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट लग गया।
इसके चलते कोई पार्टी घोषणा पत्र तो जारी कर सकती है लेकिन रोज रोज रेवड़ी नहीं बांट सकती जो केजरीवाल/कांग्रेस आये दिन करते रहे।
सबसे पहली बात तो चुनाव में बोगस वोटरों को बाहर करना चाहिए। एक ही पते पर 3-4 से ज्यादा मुस्लिम वोट हो तो वो कैंसिल होने चाहिए, वो सब फर्जी है।
केजरीवाल ने पहले 11 जनवरी को RFA को गार्ड रखने के लिए पैसा देने की बात कही।
फिर 18 जनवरी को किरायेदारों को मुफ्त बिजली पानी देने की गारंटी दी।
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लेखक चर्चित YouTuber |
उधर कांग्रेस ने 2500 रुपये महिलाओं के लिए पहले घोषणा की। फिर बेरोजगारों को 8500 रुपये महीना कहा लेकिन यह घोषणा पत्र का पार्ट नहीं थे।
फिर ये कैसा मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट है?
फिर उदित राज केजरीवाल के घर के बाहर प्रदर्शन करने पहुंच गए, किसलिए?
पुजारी और ग्रंथियों के साथ बौद्ध भिक्षुओं, वाल्मीकि और रविदास मंदिर और चर्च के पुजारियों के लिए 18000 रुपये की मांग करने गए।
कांग्रेस इमामों को सैलरी देने के समय नहीं बोली कि पुजारियों को क्यों नहीं दिया? आज जब पुजारियों की बात कर दी केजरीवाल ने तो कांग्रेस को बौद्ध भिक्षुओं, वाल्मीकि और रविदास मंदिर और चर्च के पादरी याद आए जबकि चर्च में तो पहले ही विदेशियों से बहुत पैसा आता है।
ये दिल्ली की जनता ही है जो केजरीवाल की रेवड़ियों के झांसे में आती है, या रेवड़ियां केजरीवाल ने हर राज्य में दी थी मगर कहीं किसी ने परवाह नहीं की।
आप देखिये इसका अन्य राज्यों में क्या हश्र हुआ : मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में 205 सीट लड़ी और सब पर हार हुई। किसी को रेवड़ी पसंद नहीं आई। कितना कितना वोट मिला इससे साबित होता है -
मध्यप्रदेश 0.53% (Nota 0.98%)
छत्तीसगढ़ 0.93%
राजस्थान 0.38%
उत्तर प्रदेश 2022 0.34% (NOTA 0.69%)
उत्तराखंड 3.3%
हरियाणा 1.79%
केजरीवाल को वोट देने का कोई एक कारण हो तो हो दिल्ली वालों के पास। इसने खुद कहा था यमुना साफ़ न हो तो मुझे 2025 में वोट मत देना और आज भी इस बात को यह नकार नहीं रहा कि इसने नहीं कहा। टूटी से पानी नहीं दिया और सड़के बर्बाद हैं।
जबकि मोदी ने 5 साल में 15 करोड़ घरो को नल से जल पहुंचा दिया। इसलिए दिल्ली की जनता पानी के लिए मोदी पर भरोसा कर सकती है।
अब रावण को मारीच बना दिया और उसे कह दिया सोने का हिरण बनकर आया।
केजरीवाल का मुस्लिम वोट इस बार कांग्रेस खींच सकती है और दलित वोट में बसपा सेंध लगा सकती है। और इस तरह यदि इसका 10% वोट भी इधर उधर हो गया तो केजरीवाल की पार्टी दिल्ली से बाहर। वैसे भी अपनी ही इसकी पार्टी में बगावत चल रही है।
बिहारियों और पूर्वी यूपी के लोग भूले नहीं होंगे जब एक तरफ कोरोना में ये शीश महल बनवा रहा था और दूसरी तरफ उन्हें बसों में भर कर घर भेज रहा था।
केजरीवाल की पार्टी basically कांग्रेस और बसपा का वोट बैंक छीन कर खड़ी हुई लेकिन भाजपा की 2013, 2015 में वोट percentage में कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा जबकि 2020 में 6% वोट बढे थे। जबकि कांग्रेस सवा 4% पर सिकुड़ गई। केजरीवाल का वोट लोकसभा में दबा कर गिरा है हमेशा और अबकी बार लगता है विधानसभा में भी बुरी तरह गिरेगा। 2020 में इसे करीब 54% वोट मिला था और 2024 लोकसभा में 24% और कांग्रेस का 19% जबकि दोनों गठबंधन में थे।
इस बार केजरीवाल का वोट पिछली बार की तरह 50% से ऊपर न रह कर 25-30% रहेगा। और उसका कारण है कि इसे अबकी बार मुस्लिम वोट पर भरोसा नहीं है और तभी अन्य तबकों के आगे सर मार रहा है। पुजारी, RWAs और अब मिडिल क्लास को पकड़ा है।
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