दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलों की दीवार खड़ी होती जा रही है। करोड़ों के शराब घोटाले में जेल जाने से उनकी कथित ईमानदार होने की इमेज पूरी तरह धुल चुकी है। महिलाओं को वोट के बरगलाने के लिए एक हजार रूपये देने की गारंटी केजरीवाल पूरी नहीं कर पा रहे हैं। दिल्ली सरकार के अफसरों ने ही केजरीवाल की घोषणाओं के खिलाफ अखबारों में विज्ञापन तक दे डाले हैं। अपनी नानी की कहानी सुनाकर राम मंदिर का विरोध करने वाले चुनावी हिंदू केजरीवाल का पुजारियों-ग्रंथियों को लुभाने का ड्रामा भी फेल हो रहा है। उनके चुनाव के लिए चले सारे पासे उलटे पड़ रहे हैं। अब दिल्ली में मंदिरों के पुजारियों ने कहा है कि ‘कौए को कितना भी रंग दो, वो हंस नहीं बन सकता है। जैसे चोर अपनी प्रवृत्ति नहीं छोड़ता, वैसे ही केजरीवाल की झूठ बोलने की आदत है। हमें BJP ने मंदिर प्रकोष्ठ के नाम पर जोड़ा है। हम पहले भी भाजपा के साथ थे और अब भी हम BJP के ही साथ हैं।’
आम आदमी पार्टी में ही माता सीता हरण पर गलत बोलकर केजरीवाल के विरुद्ध गुप्त लड़ाई
आम आदमी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि अरविन्द केजरीवाल, जिसे भारतीय राजनीति का नटवर लाल माना जाता है, के लिए दिल्ली चुनाव 2025 लोहे के चने चबाने से कम नहीं। अरविन्द केजरीवाल का माता सीता हरण पर गलत बोलने पर पार्टी में ही दो फाड़ हो गए हैं। प्रवक्ता जरूर बीजेपी को रावण प्रेमी बताकर केजरीवाल का बचाव कर रहे हैं, लेकिन सनातन का अपमान बर्दाश्त नहीं कर पा रहे। दूसरे पार्टी के सत्ता में आने पर केजरीवाल मुख्यमंत्री नहीं सकते, उस हालत में केजरीवाल आतिशी को अस्थाई मुख्यमंत्री बता अपनी पत्नी सुनीता का मुख्यमंत्री बनाएंगे। जो आतिशी और मनीष सिसोदिया केजरीवाल को ही हराने की कोशिश कर रहे हैं तो केजरीवाल इन दोनों को। आतिशी मनीष के निकट होने के कारण उनका केजरीवाल के खिलाफ काम कर रहे हैं। इसका पार्टी पर बुरा असर पड़ रहा है। इसी वजह से तीनों घबराए हुए है।
इतना नहीं एक CD लीक होने से केजरीवाल और पार्टी बेनकाब हो गयी है। जिस अपनी सांसद स्वाति मालीवाल को अपने शीश महल में पिटवाया था कांग्रेस और बीजेपी से ज्यादा वही पीड़ित नारी केजरीवाल और आम आदमी पार्टी को बेनकाब कर रही है।
दूसरे, पार्टी यह भी समझ रही है कि जिन CAG रिपोर्ट्स को छुपाया जा रहा है, एक न एक दिन इनका सार्वजनिक होना तय है और जिस दिन सार्वजनिक होंगी पार्टी एक इतिहास बन जाएगी। आखिर बकरे की माँ कब तक बचेगी?
दिल्ली चुनाव में मंदिर प्रकोष्ठ BJP का पायलट प्रोजेक्ट
मोदी के निर्देश पर दिल्ली में 2022 में मंदिर प्रकोष्ठ बनाया गया। देश में अभी सिर्फ दिल्ली में ही इसकी नींव रखी गई है। यानी सनातनी लोगों को जोड़ने के लिए ये BJP का पायलट प्रोजेक्ट है। दिल्ली चुनाव के बाद देश के बाकी हिस्सों में भी ऐसे प्रकोष्ठ बनेंगे। दिल्ली में 6 जनवरी को प्रदेश BJP दफ्तर में पुजारियों की भीड़ जुटी। पार्टी के मंदिर प्रकोष्ठ की बैठक हुई, जिसमें 250 से ज्यादा पुजारी शामिल हुए। मकसद था- दिल्ली चुनाव में पंडित पुजारियों को एकजुट करना। इसमें प्रकोष्ठ के संयोजक करनैल सिंह के नेतृत्व में में चुनाव को लेकर योजना बनाई गई। प्रकोष्ठ के सहसंयोजक आचार्य राकेश शुक्ला के मुताबिक हम राम मंदिर बनाने वाली भाजपा के साथ हैं। वे कहते हैं कि मंदिर में भगवान को प्रणाम करने हर कोई जाता है। बड़ी संख्या में लोग पंडित-पुजारियों से जुड़े होते हैं। इनकी बातों का बहुत असर होता है। यानी इस बार चुनाव में BJP को पंडित-पुजारियों से वोट का पूरा समर्थन मिलने वाला है।
दिल्ली की पब्लिक भी जानती है कि सनातन के साथ कौन है
दिल्ली के कई मंदिरों के पुजारी और सेवादारों का मानना है कि मंदिर में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड हमेशा होता है। ये BJP के कहने पर नहीं हो रहा, लेकिन ये बात सही है कि हम लोगों से बोलते हैं कि जहां सनातन की बात आए वहां खुलकर खड़े रहना है। पब्लिक भी जानती है कि सनातन के साथ कौन है। सनातन और राम मंदिर के खिलाफ अब तक कौन बोलता रहा है। त्रिलोकपुरी के खाटू श्याम मंदिर के पुजारी भागवत प्रसाद शर्मा का मानना है कि BJP अपना काम कर रही है। वे कहते हैं, ‘भक्तों को पता है कि मुहर किसे लगानी है। राम मंदिर किसके राज में बना। वे आगे कहते हैं, ‘मंदिर प्रकोष्ठ केजरीवाल के उस बयान को भी प्रमोट कर रहा है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर की जगह अस्पताल बनाने की बात कही थी। BJP के लिए पुजारी सिर्फ एक वोटर नहीं हैं, उससे एक बहुत बड़ा वर्ग जुड़ा है। पुजारियों के सहारे BJP उसे अपनी ओर लाने की कोशिश कर रही है।’
केजरीवाल का सनातन विरोधी चेहरा दिल्ली के घर-घर में उजागर
महाराष्ट्र और उससे पहले हरियाणा विधानसभा चुनाव में शानदार सफलता के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने ‘दिल्ली विजय’ का सुनियोजित प्लान बनाया है। भाजपा के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी दिल्ली चुनाव में अहम भूमिका निभा रहा है और आरएसएस के आनुषांगिक संगठनों ने जमीनी स्तर पर तेजी से काम भी शुरू कर दिया है। भाजपा-आरएसएस जहां एक ओर आप संयोजक अरविंद केजरीवाल का एंटी हिंदू चेहरा घर-घर तक पहुंचाएंगे, वहीं आप सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार, शराब घोटाले और वादे पूरे ना करने के भी जनता का अदालत में रखेंगे। वे मिलकर अरविंद केजरीवाल की वो छवि उजागर करेंगे, जिसे मुफ्त की योजनाओं के नाम पर ढंक रखा है। राम मंदिर और सनातन के विरोधी, चुनावी हिंदू और तुष्टिकरण करने वाले केजरीवाल ऐसे कई मुद्दों की लिस्ट भाजपा हैं। ये सीधे केजरीवाल की छवि पर वार करेंगे। हम उनका असली चेहरा लोगों के बीच लाएंगे।’ इसके साथ ही भाजपा अपने संकल्पपत्र में गारंटियों की सौगात देकर चुनाव से पहले सबसे आगे निकल गई है।
मौलवियों को सैलरी देते समय हमारी याद क्यों नहीं आईचुनाव में करीब 29 हजार मंदिर और उनके पुजारी चर्चा में हैं। बीजेपी का मंजिक प्रकोष्ठ कितना अहम है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि प्रकोष्ठ के संयोजक करनैल सिंह शकूर बस्ती से पार्टी के उम्मीदवार भी हैं। उनके सामने AAP के सीनियर लीडर सत्येंद्र जैन हैं। BJP के मंदिर प्रकोष्ठ का जमीन पर गहरा असर नजर आता है। मयूर विहार फेज-2 के नीलम माता वैष्णो मंदिर में पुजारी राहुल तिवारी चुनावी घोषणा का जिक्र करने पर अपनी नाराजगी रोक नहीं पाते। वे कहते हैं, ‘केजरीवाल को इस बार दिल्ली चुनाव के वक्त ही हमारी याद क्यों आई। क्या इससे पहले मंदिर में पुजारी नहीं थे। मौलवियों को दिल्ली सरकार द्वारा कई साल से सैलरी दी जा रही थी,तब इन्हें (AAP) हमारे सम्मान की याद क्यों नहीं आई। जब चुनाव आता है, तब इन्हें सबके सम्मान की याद आ जाती है। वोट बैंक बनाने के लिए ये कुछ भी वादे कर सकते हैं।’ वे कहते हैं, ‘जहां-जहां मंदिर बने हैं वहां पुजारी भी रखे गए हैं। अगर वहां पुजारी हैं, तो उनका जीवन यापन भी हो ही रहा है। मतलब साफ है कि जितने मंदिर बनेंगे, उससे फायदा पुजारियों को ही होगा। ये काम बीजेपी ही करा सकती है।
पुजारियों और ग्रंथियों के लिए दिल्ली सरकार के पास बजट है क्या
BJP मंदिर प्रकोष्ठ के संयोजक करनैल सिंह का दावा है, ‘दिल्ली में 29 हजार रजिस्टर्ड मंदिर हैं। इसमें से आधे से ज्यादा मंदिर प्रकोष्ठ से जुड़े हैं। इन मंदिरों में प्रकोष्ठ की कार्यशाला चलती है। इसमें 252 वाल्मीकि मंदिर हैं और 180 रैदासपंथी मंदिर हैं।’ प्रकोष्ठ के सह संयोजक आचार्य राकेश इस गणित को और बड़ा करके बताते हैं। वे कहते हैं, ‘प्रकोष्ठ के नेटवर्क में करीब 1 लाख 47 हजार पुजारी आते हैं।’ केजरीवाल ने योजना का फर्जी ऐलान तो कर दिया, लेकिन बजट का आंकलन नहीं किया। प्रकोष्ठ के सह संयोजक आचार्य राकेश सवाल करते हुए कहते हैं, ’30 हजार मंदिर के पुजारियों और 15 हजार गुरुद्वारों के ग्रंथियों के लिए क्या दिल्ली सरकार के पास बजट है। हर एक मंदिर में औसतन 4-4 पुजारी और हर गुरुद्वारे में 4-4 ग्रंथी जोड़िए, कितने हुए? क्या दिल्ली सरकार के पास इतना बजट है?’त्रिनगर विधानसभा सीट के राजनगर में श्रीराम मंदिर के पुजारी रामदास शास्त्री आम आदमी पार्टी की पुजारियों को सम्मान देने की योजना की प्लानिंग पर ही सवाल उठा रहे हैं। मीडिया के बातचीत में वे कहते हैं, ‘एक मंदिर में एक ही पुजारी नहीं होता। इसी मंदिर में 3 पुजारी और 7 सेवादार हैं। हम कुल मिलाकर 10 लोग हैं। फिर ये कैसे तय करेंगे कि किस पुजारी को कितना वेतन देंगे।’ दिल्ली के नरेला में खेड़ा खुर्द के प्रसिद्ध पंचमुखी मंदिर के पुजारी श्रीभगवान भगत बताते हैं कि हमने 3 साल पहले केजरीवाल के घर के बाहर धरना दिया था और पुजारियों के लिए सुविधाओं की मांग की थी। तब हमारी एक नहीं सुनी गई। चुनाव आया तो पुजारी याद आ गए। वो हमारे लिए कुछ नहीं करेंगे। हिंदुओं के लिए प्रधानमंत्री मोदी और हमारे हनुमान योगी ही सही हैं। भक्तों से क्या कह रहे हैं? इसके जवाब में पुजारी भगत कहते हैं, ‘हम भक्तों को बोलते हैं- जय श्रीराम का नारा बोलो, हिंदू हमारा जोड़ो।’
घोंडा विधानसभा में आने वाले दुर्गा फकीरी मंदिर पहुंचे। यहां के सेवादार विजय कुमार भगत साफ-साफ कहते हैं कि 2020 के दंगों के दौरान मंदिर लूटा गया था। पुजारी को मार दिया गया था। केजरीवाल तब कहां थे। अब उन्हें पुजारियों के सम्मान की याद क्यों नहीं आई है।’ वो केजरीवाल को चैलेंज देते हुए कहते हैं, ‘अगर पुजारी प्रिय हैं तो एक नोटिफिकेशन जारी करें कि 12-13 साल से मौलवियों को जितना वेतन दिया गया है, पुजारियों को पहले वो सारा एरियर देंगे। पुजारियों का बिजली और पानी कनेक्शन फ्री करें। तब हम समझेंगे कि केजरीवाल सनातनी बनने लायक हैं। अब जब मौलवियों का वोट कांग्रेस की ओर खिसकता दिख रहा है, तब उन्हें पुजारियों की याद आ रही है।’ वो आगे कहते हैं, ‘चाहे वाल्मीकि मंदिर हो, रैदासपंथी हो या फिर कोई और मंदिर, उनके पुजारी बैठक कर रहे हैं। उनकी BJP को लाने की तैयारी है।
केशवपुरम के सनातन धर्म मंदिर के पुजारी आचार्य शिव तिवारी कहते हैं, ‘हमें BJP ने मंदिर प्रकोष्ठ के नाम पर जोड़ा। पहले किसी के भी साथ रहे हों, लेकिन अब हम BJP के साथ हैं।’ क्या कथा-पूजा में आप भक्तों से BJP को वोट देने के लिए कहते हैं, ‘कथा तो क्या, हम क्रिया में भी बोलते हैं- राम नाम सत्य है। इस बार BJP ही आएगी। मंदिर के पुजारी, सेवादार और यहां आने वाले भक्त सब इनके साथ हैं। सारे ब्राह्मण BJP के साथ हैं, राम के साथ हैं।’ कोंडली विधानसभा के सिद्ध हनुमान मंदिर के पुजारी राहुल दीक्षित हंसते हुए कहते हैं, ‘ केजरीवाल को डाउट हो रहा है कि इस बार कुछ गड़बड़ हो सकती है, तो पुजारियों को भी जोड़ो। हम उनके बहकावे में नहीं आएंगे। हम सनातन धर्म की बात करने वाली पार्टी के साथ हैं। ये सबको पता है कि कौन सी पार्टी सनातन और हिंदुत्व को जागृत करने का काम कर रही है।’
मंदिर प्रकोष्ठ के जरिए BJP की पुजारियों को जोड़ने की रणनीति साफ-साफ सफल होती दिख रही है। इसलिए केजरीवाल और AAP को डिफेंसिव मोड में आ गए हैं और पुजारी-ग्रंथियों के लिए चुनावी वादा कर रहे हैं। इसी वजह से अरविंद केजरीवाल को पुजारियों के लिए सैलरी का ऐलान करना पड़ा। इससे पहले केजरीवाल मौलवियों के बीच जाते रहे हैं, लेकिन इस बार नहीं गए। अभी वक्फ बोर्ड का इतना बड़ा मुद्दा उठा, लेकिन उन्होंने एक बयान नहीं दिया। BJP ने केजरीवाल के फ्रीबीज मॉडल का तोड़ भी निकाल लिया है। उन्होंने अपने मैनिफेस्टो में इसे और बड़ा करने की गारंटी दे दी है। AAP सरकार तो अभी महिलाओं को 1000 रुपए भी नहीं दे पा रही है। दूसरी ओर BJP ने 2500 प्रतिमाह देने की पक्की गारंटी दे दी है। कुल मिलाकर BJP को इस स्ट्रैटजी का फायदा मिलेगा और AAP को नुकसान उठाना पड़ेगा।
दिल्ली में 70 सीटों पर 5 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद दिल्ली में चुनाव के लिए BJP-RSS ने काम करना शुरू कर दिया है। आरएसएस का प्लान केजरीवाल की हिंदू विरोधी छवि जनता के सामने लाना है। सेवा भारती समेत आरएसएस के संगठन झुग्गी-बस्तियों और मौहल्ला-चौपाल तक एक्टिव हो गए हैं। उन्होंने तय किया है कि घर-घर जाकर फैमिली डिस्कशन से BJP के लिए वोट निकालेंगे। आरएसएस के लोग दिल्ली की घनी बस्तियों में अलग-अलग शाखाओं के स्वयंसेवक बैक टु बैक बैठकें करेंगे। ये बैठकें 10-12 लोगों के छोटे-छोटे ग्रुप्स के बीच होंगी। आरएसएस की बातचीत की शुरुआत किसी चुनावी मुद्दे से नहीं, बल्कि पारिवारिक मुद्दों से करेगा। जैसे- जॉइंट फैमिली की क्या अहमियत है। अगर सबका साथ रहना संभव नहीं, तो कम से कम हफ्ते में एक बार साथ खाना जरूर खाएं।’ भाजपा-आरएसएस के प्लान के केंद्र में केजरीवाल की ‘हिंदू विरोधी छवि’ को भी हाइलाइट करना है।
भाजपा और आरएसएस थिंक टैंक ने अरविंद केजरीवाल को इन पांच प्वांइट पर घेरने की पुख्ता रणनीति बनाई है…
भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस की प्लानिंग अरविंद केजरीवाल के सारे झूठे वादों को जनता के बीच लाने की तैयारी है। केजरीवाल ने कहा था कि गाड़ी, बंगला और सुरक्षा नहीं लेंगे। वे अपने आपको कट्टर ईमानदार की छवि वाला नेता बताते थे, लेकिन करोड़ों के शराब घोटाले में जेल जा आए हैं। जनता से पूछकर ठेका खोलेंगे, लेकिन आप सरकार ने स्कूलों की जगह पर शराब के ठेके खोल दिए। इसकी चर्चा उनके शीशमहल के खर्च और गाड़ियों की कीमत के साथ करेंगे। इसमें हवाला और शराब घोटाले में बंद हुए CM, डिप्टी CM और मंत्रियों की भी चर्चा होगी।
केजरीवाल ने राम मंदिर का कई बार विरोध किया। अपनी नानी की आड़ लेकर वे करते रहे कि ऐसे राम मंदिर में कैसे पूजा करेंगे, जो किसी और धार्मिक स्थल को तोड़कर बनाया हो। इतना ही नहीं दिल्ली के स्कूलों में इकोनॉमिक वीकर सेक्शन कोटे के तहत दलित हिंदुओं की संख्या ना के बराबर है, जबकि मुसलमानों की संख्या काफी है। यूपी के दादरी में अखलाक की मौत हुई, तो अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया- मैं आ रहा हूं। वहीं, बजरंग दल के रिंकू शर्मा की हत्या पर शोक तक नहीं जताया। अयोध्या में राम मंदिर बना, तो केजरीवाल ने अस्पताल बनाने का सुझाव दिया।
केजरीवाल ने तुष्टिकरण की तो सारी सीमाएं ही लांघ दीं। वो सिर्फ ‘चुनावी हिंदू’ हैं और वोट लेने के लिए सनातन का बाना ओढ़ लेते हैं। हकीकत तो यह है कि केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के द्वारका सेक्टर-22 में सरकारी खर्च पर 100 करोड़ का हज हाउस बनवाया है। मौलवियों की सैलरी तय कर दी है। केजरीवाल को पुजारियों और ग्रंथियों की याद 12 साल बाद चुनाव से पहले आई है। उन्होंने क्या किसी मंदिर आंदोलन में हिस्सा लिया। वो मौकों के हिसाब से कभी हनुमान चालीसा पढ़ते हैं, तो कभी कृष्ण बन जाते हैं।
भाजपा और आरएसएस का प्लान केजरीवाल के उस चेहरे को भी उजागर करना है, जिसका कनेक्शन अर्बन नक्सल से है। सोर्स के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल उस गैंग का हिस्सा हैं, जिसने नक्सल मूवमेंट खड़ा किया। नक्सली, जो देश विरोधी ताकतों के हाथों की कठपुतली हैं। ये भी जनता के सामने लाएंगे कि केजरीवाल ने पंजाब में खालिस्तान मूवमेंट को भी अपरोक्ष समर्थन दिया हुआ है। उन्होंने तो कुमार विश्वास से आजाद पंजाब का प्रधानमंत्री तक बनने की बात कही है।
इस बात का भी खुलासा होगा कि दिल्ली की आप सरकार पिछले एक दशक के घुसपैठियों का समर्थन करने में लगी हुई है। बताते हैं कि बांग्लादेशियों और घुसपैठियों के आधार कार्ड अभियान चलाकर बनवाए गए। बिना ये सोचे कि इससे देश की राजधानी के दरवाजे उन लोगों के लिए खुल सकते हैं, जो दिल्ली को असुरक्षित कर सकते हैं। आम आदमी पार्टी ने सिर्फ वोटों के लालच में इस खतरनाक साजिश को अंजाम दिया है। भाजपा और आरएसएस केजरीवाल का ये सच भी सबके सामने लाएंगे।
आरएसएस की बैठकों में चर्चा का विशेष मॉडल बनाया जाएगा। इसके तहत स्वयंसेवकों की टोली का कॉम्बिनेशन ऐसा बनाया जाएगा, जिसमें पुरुष, महिला और युवा हों। एक परिवार में अगर एक टोली गई तो वो उस परिवार के हर वर्ग से चर्चा कर सकेंगे। फैमिली गैदरिंग के जरिए देश की बात जनसंपर्क के दौरान बातचीत का शुरुआती टॉपिक ‘परिवार’ होगा। जैसे- मोबाइल और बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट के फैमिली गैदरिंग क्यों जरूरी है। फैमिली वैल्यूज की चर्चा को आगे बढ़ाते हुए देश की चर्चा तक ले जाना होगा। इसके बाद केजरीवाल की छवि पर चर्चा होगी। शराब घोटाले से महिलाओं की परेशानी का कनेक्शन भी जोड़ा जाएगा। इसमें गरीब और लोअर मिडिल क्लास के परिवारों की महिलाओं से भी चर्चा होगी। परिवार की महिलाओं के लिए सबसे बड़ी दुश्मन शराब है। घर की इकोनॉमी और शांति खतरे में पड़ जाती है। अरविंद केजरीवाल के दारूवाला अवतार की तस्वीर भी लोगों के बीच लाई जाएगी।
2. लघु उद्योग भारती: ये संगठन छोटे स्तर के व्यापारियों के साथ काम करेगा, जिनकी फैक्ट्रियों में गरीब तबका काम करता है। इनके साथ बैठकों के जरिए RSS मुफ्त की योजनाओं का इस्तेमाल करने वाले तबके तक पहुंचेगा। ये संगठन 15-20 हजार बैठकें कराएगा।
3. राष्ट्र सेविका समिति: इस संगठन के पास टारगेट नहीं है। बल्कि इस संगठन की महिलाएं दूसरे संगठनों के साथ जुड़कर काम करेंगी। इन्हें हर परिवार की महिलाओं के बीच RSS के चुनावी मुद्दों पर बात करनी है।
4. भारतीय मजदूर संघ: मजदूर संघ दिल्ली में उस तबके के बीच पहुंचेगा, जिस तक केजरीवाल की रेवड़ियां पहुंचती हैं। आम आदमी पार्टी सरकारी स्कीम का फायदा ले रहे लोगों तक रेवड़ी के पैकेट पहुंचा रही है। मजदूर संघ के पास उनके साथ बैठकें करने का टारगेट है।
6. त्रिदेव संगठन: जमीन पर एक्टिव आरएसएस के त्रिदेव संगठन की हर विंग के पास बूथ लेवल पर 3 त्रिदेव उतारे हैं। यानी बूथ लेवल पर आरएसएस के 3 पदाधिकारी एक्टिव हैं। इसके ऊपर अध्यक्ष, सह-अध्यक्ष, प्रांत अध्यक्ष जैसे पदाधिकारी होंगे। हर त्रिदेव अपने नीचे कम से कम 10 आम लोगों को जोड़ेगा। दिल्ली में 13,000 बूथ हैं। इस हिसाब से 39,000 त्रिदेव हैं और वे करीब 3 लाख 90 हजार लोगों को अपने साथ जोड़ेंगे।
7. भारत विकास परिषद: इस टोली की जिम्मेदारी बुद्धिजीवियों तक पहुंचना है। इस संगठन के लोग डॉक्टर, CA, इंजीनियर, साइंटिस्ट, वकील और प्रोफेसर्स के बीच जाकर बैठकें करेंगे। ये सभी चुनाव में RSS के लिए बैठकें करेंगे।

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