दिल्ली की CAG रिपोर्ट दबाने में हाई कोर्ट जज ने हथेली लगा दी, क्यों ना माना जाए पैसा चढ़ा दिया गया? केजरीवाल में हर किसी को खरीदने की शक्ति है; अदालतें बन गयी एक मजाक!

सुभाष चन्द्र

आज दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता ने दिल्ली विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर CAG रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आदेश देने से साफ़ मना कर दिया हालांकि उन्होंने माना कि दिल्ली सरकार ने रिपोर्ट पेश करने में अत्यधिक विलंब किया है और यह भी कहा कि  CAG रिपोर्ट विधानसभा में पेश करना अनिवार्य (mandatory) है। स्पीकर के वकील ने कहा था कि कुल 20 दिन का कार्यकाल बचा है और वह कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा

एक बार फिर अदालत ने इस मामले में रायता फैला दिया और यह माना जा सकता है कि केजरीवाल में हर किसी को खरीदने की शक्ति है जाहिर तौर पर आज के आदेश में भी खरीद फरोख्त नज़र आती है यह हमारी सोच हो सकती है इसमें कुछ गलत नहीं है क्योंकि न्यायाधीश अपने व्यवहार से ऐसी शंकाओं को पैदा करते हैं

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उप राज्यपाल के कार्यालय ने 16 दिसंबर को हाई कोर्ट के जस्टिस संजीव नरूला (जो उस समय सुनवाई कर रहे थे) को हलफनामा देकर बताया था कि “शराब शुल्क, प्रदूषण और वित्त से संबंधित रिपोर्टों को मंजूरी दे दी गई है और साथ ही विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने को भी कहा गया है इस जवाब को रिकॉर्ड पर लेकर अदालत ने भाजपा नेताओं की याचिका का निपटारा कर दिया लेकिन यह मामला फिर जस्टिस सचिन दत्ता के पास चला गया लेकिन कैसे, यह समझ नहीं आया जब याचिका निपटारा हो गया?

इसका मतलब उपराज्यपाल के हलफनामे से अदालत संतुष्ट थी और तब तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर CAG रिपोर्ट को पेश कर देना चाहिए था लेकिन केजरीवाल तो घाघ आदमी है, उसे पता था कि वह इस रिपोर्ट के खुलने से नंगा हो जाएगा

जस्टिस सचिन दत्ता बड़ी गर्मी दिखा रहे थे उन्होंने 13 जनवरी, 2025 को मौखिक टिप्पणी में दिल्ली सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपका CAG रिपोर्ट को सदन में पेश करने से हाथ खींचना दुर्भाग्यपूर्ण है जो आपकी नीयत पर शक पैदा करता है

ये बस Oral Comment थे जो आज के आदेश से गायब थे जस्टिस सचिन दत्ता ने कोई कारण नहीं दिया कि वे विशेष सत्र बुलाकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश क्यों नहीं दे रहे? अगर स्पीकर के मत से सहमत थे कि सदन का कार्यकाल केवल 20 दिन बचा है तो या आदेश 16 दिसंबर को ही दे देने चाहिए थे जब LG Office में कहा कि विशेष सत्र बुलाकर रिपोर्ट पेश करने के आदेश दे दिए गए हैं

ऐसा लगता है माननीय जज साहब सचिन दत्ता ने भी केजरीवाल से प्रभावित होकर अपना रंग बदलना सीख लिया और सीधी राह पर चलते चलते विपरीत मार्ग पर चल पड़े और केजरीवाल को बचा लिया रिपोर्ट तो पेश होने देते, उस पर बाद की कार्यवाही अगली सरकार करती रहती लेकिन जज साहब को भी पता था कि जैसी रिपोर्ट बाजार में लीक हुई है, उससे केजरीवाल का चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है और इसलिए उस पर रिपोर्ट पेश करने की तलवार ही हटा दी 

यह काम फ्री में तो हुआ नहीं होगा? ऐसे लेन देन का पता कभी तो चलेगा, अलबत्ता यह साबित हो गया कि केजरीवाल हर किसी को खरीद सकता है यह हमारी Line of thought हो सकती है न्यायपालिका में बैठे जजों के बारे में क्योंकि यह गलत नहीं कहा गया कि न्यायाधीश को केवल निष्पक्ष होना ही नहीं चाहिए बल्कि दिखना भी चाहिए और आज के फैसले से निश्चित रूप से जज साहब निष्पक्ष दिखाई नहीं दिए

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