हनुमान चालीसा का पाठ केवल भक्ति नहीं, यौगिक ब्रीदिंग भी… हार्ट रेट रखता है स्थिर, एंग्जायटी भी करता है दूर: डॉक्टर ने चौपाइयों सहित बताए फायदे, पढ़ने का सही तरीका भी समझाया

कालचक्र किस गति से बदलता है किसी को आभास नहीं होता। पहले बड़ों के पैर छूने और माता-पिता की सेवा, सुबह उठकर आने पर परिवारजनों को राम-राम बोलना आदि का चलन था जो आज पश्चिमी सभ्यता ने लगभग समाप्त ही कर दिया। कहते हैं जिसने माता-पिता की मन से सेवा कर ली चारों धामों की यात्रा कर ली, क्योकि अगर माँ के चरणों में स्वर्ग होता है तो उस स्वर्ग में जाने का मार्ग पिता के ही चरणों में होता है। लेकिन आज लोग अपने बूढ़े माता-पिता को वृद्ध आश्रम में डाल खोखले सांसारिक सुख भोग खुश हो रहा है। इस सन्दर्भ 1960 के दशक में राजेंद्र कुमार अभिनीत फिल्म "माँ बाप" का गीत "ले लो दुआएं माँ बाप की सिर से उतरेगी गठरी महापाप की . .." मुखरित हो जाती है। 

दूसरे, जब से आयुर्वेद की जगह अलोपैथ ने ली लोगों ने डॉक्टरों को भगवान मान असली भगवान को भूल गए। जबकि ऋग्वेद में लिखा है "मै(डॉ) इलाज कर रहा हूँ, स्वस्थ परमपिता परमेश्वर करेगा", लेकिन आज बदलते परिवेश में सनातन प्रभावी होता दिख रहा है। गायत्री मन्त्र और महामृत्युंजय उच्चारण से उस मरीज को जीवित होते देखा जिसका जीवन बचा होता है। लेकिन जब कोई डॉक्टर हृदय को स्वस्थ रखने के लिए हनुमान चालीसा पढ़ने बोले हैरान नहीं होना चाहिए। एक बात और ह्रदय ही नहीं शरीर के समस्त नाड़ियों को स्वस्थ रखने के लिए प्रतिदिन 5 मिनट का उच्चारण करना चाहिए। पूजा में ताली बजाना भी धार्मिक ही नहीं प्राणी के स्वास्थ्य से भी सम्बंधित है। इसके लिए सनातन को समझना बहुत जरुरी है।               

ज्योतिष शास्त्र में हनुमान चालीसा पढ़ने के बहुत से फायदे आपने सुने होंगे, लेकिन मेडिकली भी इसके फायदे होते हैं ये शायद कम ही सुना होगा। हाल में यूट्यूब पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ स्वेता अड़ातिया ने इसपर वीडियो बनाई है। डॉ स्वेता ने अपनी वीडियो में हनुमान चालीसा के वैज्ञानिक दृष्टि से फायदे गिनाए और दावा किया कि हनुमान चालीसा पढ़ना दिल और दिमाग के लिए बहुत लाभकारी है।

उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा को ‘यौगिक ब्रीदिंग’ माना जाता है। इसका अर्थ है कि जब आप इसे पढ़ते हैं, तो आपकी सांसें एक विशेष पैटर्न में चलती हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ चौपाइयों को बोलते समय सांस अंदर ली जाती है (जैसे- जय हनुमान ज्ञान गुण सागर), जबकि अन्य चौपाइयों को बोलते समय सांस बाहर छोड़ी जाती है (जैसे- जय कपिस तिहु लोक उजागर), कुछ में होल्ड रखी जाती है (जैसे- रामदूत अतुलित बलधामम), कुछ में सांस होल्ड रखने के बाद बाहर जाती है ( जैसे-अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।)

डॉक्टर स्वेता के अनुसार यह प्रक्रिया हार्ट रेट वैरिएबिलिटी (HRV) को प्रभावित करती है, जो दिल की स्थिति को स्वस्थ रखने में मदद करती है। वहीं अगर हनुमान चालीसा का उच्चारण सही से किया जाए तो इसका सीधा असर ‘लिम्बिक सिस्टम’ पर पड़ता है जिसकी वजह से वाकई व्यक्ति की एंग्जायटी कम होती है और भीतर बसा डर दूर होता है।

डॉक्टर ने बताया कि हनुमान चालीसा पढ़ने से वेगस नर्व सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर के कई कार्यों जैसे डाइजेशन (पाचन) और तनाव प्रबंधन में मदद करता है। जब यह नर्व सक्रिय होती है, तो शरीर की कई प्रक्रियाएँ अपने आप ठीक हो जाती हैं।

अपनी वीडियो में उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि इसके फायदे इसे आराम से पाठ करके हासिल किए जा सकते हैं, तेज-तेज पढ़ना गलत है। उन्होंने कहा कि ये सारी बातें प्रयोग करके देखी जा चुकी हैं कि हनुमान चालीसा पढ़कर दिल और दिमाग दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

इस वीडियो को यूट्यूब पर 18 जनवरी को अपलोड किया गया था। अब तक इसे 57 हजार व्यूज आ चुके हैं। वहीं इसे 2 हजार 400 लोगों ने लाइक किया है। इसमें उन्होंने हनुमान मंत्र से लेकर सांस लेने के पैटर्न तक को बताया है।

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