लकड़ी जल गई लेकिन हमास की अकड़ बाकी है; बंधकों का पता लगाने में मोसाद और CIA विफल रहे क्या? गाज़ा नागरिकों को कोई भी इस्लामिक देश पहले की तरह आज भी लेने को तैयार नहीं

सुभाष चन्द्र

फरवरी 11 को डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि शनिवार(फरवरी 15)  तक शेष बंधकों को नहीं छोड़ा गया तो तबाही आ जाएगी उधर नेतन्याहू ने भी स्पष्ट चेतावनी दी है कि शनिवार को उसके बंधक नहीं छूटे तो युद्धविराम भंग कर दिया जाएगा और इज़रायल सैन्य कार्रवाई फिर शुरू कर देगा

पिछले 16 महीने में इज़रायल ने हमास को तबाह कर दिया और पूरे गाज़ा को खंडहर बना दिया, साथ ही हिज़्बुल्ला को भी ख़त्म करते हुए लेबनान को भी तबाह कर दिया लेकिन लकड़ी जलने पर भी हमास की अकड़ बाकी है। 

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अब भी हमास बंधकों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है हमास ने ट्रंप की चेतावनी को अनदेखा करते हुए कहा है कि शेष बंधकों की रिहाई तभी होगी जब सभी पक्ष युद्धविराम समझौते का सम्मान करेंगे 

लेकिन यह सम्मान तो हमास को करना है क्योंकि बंधकों को छोड़ना तो उस समझौते की सहमति में शामिल था जो 19 जनवरी 2025 को लागू हुआ

7 अक्टूबर, 2023 को इज़रायल पर हमास ने बर्बर हमला करके 251 लोगों को बंधक बनाया था और अभी भी 76 बंधक हमास के कब्जे में हैं जिसमें 73 महिलाएं बताई जाती हैं और उनमे 2 अमेरिकी भी हैं इनमे से पहले फेज में 33 बंधकों की रिहाई के बदले हमास ने केवल 16 को छोड़ा जबकि इज़रायल हमास के 150 लोगों को मुक्त कर चुका है

ऐसा लग रहा है कि गाज़ा को पूरी तरह तबाह हुआ देखने के बाद भी हमास में कोई बदलाव नहीं है गाज़ा के लोगों की कथित दयनीय स्थिति का मीडिया में गलत चित्रण प्रस्तुत किया गया क्योंकि समझौता होते ही गाज़ा के बाजार ऐसे सज गए जैसे कुछ हुआ ही न हो

इस्लामिक देशों की तरह भारत में मुस्लिम कट्टरपंथी इजराइल द्वारा फिलिस्तीन पर हमले पर इजराइल की आलोचना कर रहे हैं लेकिन भारत में मुस्लिम समर्थक और कट्टरपंथियों को यह भी मालूम है कि किसी भी हालत में कोई इस्लामिक मुल्क किसी भी फिलिस्तीन को शरणांथी की शक्ल में एक दिन भी तैयार नहीं फिर क्यों तुम्हे दर्द हो रहा है। क्या ये लोग फिलिस्तीनियों की हरकतों के बारे में नहीं जानते या फिर सबको पागल बना रहे हो? एक बार पाकिस्तान के ज़िआ उल हक़ ने गलती की थी, जब उनको हालत ठीक होने पर वापस जाने को कहने पर मना करने पर गोलियों से भून दिया गया था। तुम सब तब खामोश रहे, क्यों?    

डोनाल्ड ट्रंप गाज़ा को अमेरिकी नियंत्रण में लेने की इच्छा जता चुके है और अब देखना है कि गाज़ा पर अमेरिका का अधिकार होगा या उसे इज़रायल में मिला लिया जाएगा गाज़ा के बचे हुए नागरिकों को ट्रंप मिस्र और जॉर्डन में बसाना चाहते हैं लेकिन उन्हें कोई भी इस्लामिक देश नहीं लेगा लेबनान, सीरिया, ईरान अभी सब शांत हैं लेकिन ईरान से हमास अपना कारोबार चला रहा लगता है क्योंकि ईरान स्थित हमास का प्रतिनिधि कुछ दिन पहले पाकिस्तान में LeT और Jaish की मीटिंग में गया था जिससे कयास लगाए गए कि हमास पाकिस्तान का कश्मीर में आतंकी हमलों के लिए साथ देगा

हमास की और गाज़ा की जो अभी और क्या दुर्दशा होगी, यह समय बताएगा लेकिन अमेरिका की CIA और इज़रायल की Mosad जैसी सर्वोत्तम ख़ुफ़िया एजेंसी 16 महीनों में बंधकों को ढूंढ नहीं सकी, यह बड़े आश्चर्य की बात है जबकि इज़रायल ने पूरा गाज़ा खोद दिया और हमास का पूरा सुरंगों का जाल ख़त्म कर दिया क्या दोनों एजेंसी विफल हो गई जबकि मोसाद तो अपनों और दुश्मनों को पाताल तक से निकालने में सक्षम है

बेहतर होगा हमास के नेताओं को सद्बुद्धि आए और वह अब बंधकों को रिहा करे अन्यथा और विध्वंस देखना पड़ेगा

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