एक गंभीर अपराध करने वाले की भी गिरफ़्तारी पर कोर्ट रोक लगाएगा तो पुलिस का मनोबल कैसे बना रह सकता है: #अमानतुल्लाह खान; अगर अदालत इसी तरह अपराधियों को संरक्षण देती रहेंगी तो बंद कर दो अदालतें?

सुभाष चन्द्र

एक कहावत है "you show me the man I will show you the rules" आज अदालतों के रवैया को देख सटीक बैठती है। फरवरी 12 को सुप्रीम कोर्ट घुसपैठी रोहिंग्यों को शिक्षा देने का उपदेश दे देती है। लगता है Deep State का चढ़ावा अदालतों में भी पहुँच चुका है। आखिर एक गंभीर आरोपों से घिरे कथित अपराधी अमानतुल्लाह खान की गिरफ़्तारी पर क्यों रोक लगाई? आखिर किस दबाव में अतिरिक्त सेशन जज जितेन्द्र सिंह ने गिरफ़्तारी पर रोक लगाई? क्या इस तरह पुलिस का मनोबल गिरा रही है अदालत? अतिरिक्त सेशन जज जितेन्द्र सिंह को चाहिए यह था कि आदेश देती कि पहले सामने आकर गिरफ़्तारी दो फिर जमानत की बात करो। अगर बेकसूर हो तो गिरफ़्तारी के डर से भागे क्यों?   

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Rouse Avenue कोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज जितेन्द्र सिंह ने गंभीर आरोपों से घिरे कथित अपराधी अमानतुल्लाह खान की गिरफ़्तारी पर आज 24 फरवरी तक रोक लगा दी और यह आशा करनी चाहिए कि यह रोक लगातार आगे भी बढ़ाई जाएगी ये न्यायालय आखिर चाहते क्या है? क्या अपराधियों को शरण देते हुए पुलिस को बिलकुल पंगु कर देना चाहते हैं?

अमानतुल्लाह खान ने एक भगोड़े अभियुक्त शाहबाज़ खान को पुलिस से बचा कर भागने में मदद की शाहबाज़ खान पर 2018 का केस चल रहा है जिसके अनुसार उसने अपने साथियों के साथ  किसी की हत्या की कोशिश की थी, उसे गिरफ्तार किया गया था और बाद में जमानत पर छूट गया उसके बाद उसने कोर्ट की तारीखों और पुलिस के summons को अनदेखा किया 2 दिन पहले जब पुलिस उससे पूछताछ के लिए गई तो अमानतुल्लाह खान ने अपने गुंडों के साथ हमला करके हुए शाहबाज़ को भगा दिया

अमानतुल्लाह खान ने पुलिस को कहा - “ये हमारा इलाका है; तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई यहां आने की; यहां से निकल जाओ, वरना जिंदा निकलना भारी पड़ेगा; हमारी आवाज़ पर इतने लोग इकट्ठे हो जाएंगे कि तुम लोगों का पता भी नहीं चलेगा … तुम कहां गए; मुझ पर पहले से 25 केस चल रहे हैं, एक और चल जाएगा तो भी कुछ नहीं होगा”

पुलिस को यह धमकी देना और जान से मारने की भी धमकी देना कोई छोटी बात है क्या, लेकिन सेशन जज ने उसकी अनदेखी करते हुए कहा कि “ पुलिस के इस आरोप में जान नहीं है कि अमानतुल्लाह खान ने अभियुक्त को (शाहबाज़ खान को) भगाने में मदद की, क्योंकि अभियुक्त तो पहले से ही अग्रिम जमानत पर था जिसके लिए पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी अगर वह अग्रिम जमानत पर भी था तो भी क्या अमानतुल्लाह खान को यह अधिकार किसने दिया कि उसे भागने में मदद करे?

जज साहब के अनुसार शाहबाज़ और अमानतुल्लाह खान दोनों शराफत के पुतले हैं जज साहब ने कहा कि 24 फरवरी तक अमानतुल्लाह खान को गिरफ्तार न किया जाए बस अमानतुल्लाह खान को पुलिस की जांच में सहयोग करने को कहा

जज साहब कभी अमानतुल्लाह खान को सजा दें क्योंकि उस पर 25 मुक़दमे दर्ज हैं, और अगर तब वह जज साहब को कहे कि “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे सजा देने की, आप जानते नहीं मैं कौन हूं, आपकी नौकरी खा सकता हूं” तो जज साहब को कैसा लगेगा और इस बयान पर भी यदि हाई कोर्ट गिरफ़्तारी पर रोक लगा दे तो क्या जज साहब पूरी तरह सुलग नहीं जाएंगे?

किस दिमागी फितूर में रहते हैं अदालतों में जज, यह समझ से परे है एक तरफ वह घर तो क्या कहीं भी नहीं मिल रहा था लेकिन अग्रिम जमानत की अर्जी लगा दी कोर्ट को चाहिए था उसके वकील को कहा जाता, इस अर्जी पर सुनवाई तब होगी जब आप उसे कोर्ट में पेश करेंगे और गिरफ़्तारी पर रोक लगाने की बजाय उसे गिरफ्तार होने देते, तब कहते कि पुलिस की जांच में सहयोग करो 

लेकिन कोर्ट ने उसे बचा लिया अब तो केजरीवाल की पार्टी की सत्ता चली गई, अब कौन सा दबाव हो सकता है अदालत पर जो ऐसी मेहरबानी की गई? 

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