आजकल घटिया राजनीति करने के लिए नेताओं की जिहवा से बिगड़े बोल निकलने की पराकाष्ठा हो गई है। कांग्रेस के नेता उदित राज ने आज कहा कि अब मायावती का गला घोटने का समय आ गया है। इस पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़के जो स्वयं एक दलित हैं, क्यों चुप है? अखिलेश यादव क्यों चुप हैं? अपनी बात के समर्थन में उदित राज ने भगवान कृष्ण को न जाने कैसे याद कर लिया जबकि कांग्रेसी तो हिंदू धर्म और हिंदू देवी देवताओं का जी भर कर अपमान करते हैं।
उदित राज ने कहा कि -
“श्री कृष्ण ने कहा कि अपने संबंधियों को कैसे मारोगे, कोई सगा संबंधी नहीं है, न्याय के लिए लड़ो और अपने लोगों को ही मार दो; आज हमारे श्री कृष्ण ने उसी मोड़ पर कह दिया कि सबसे पहले जो अपना दुश्मन है, उसी को मार दो; जो सामाजिक न्याय का दुश्मन है, जिसका जिक्र मैंने अपने प्रेस रिलीज़ में लिख दिया है (मायावती); मायावती ने सामाजिक आंदोलन का जो गला घोटा है, ऐसे में अब उनका गला घोटने का समय आ गया है।”
उदित राज जैसे मूढ़मति को कदाचित पता नहीं कि भगवान कृष्ण ने उन सगे संबंधियों से लड़ने की बात कही थी जो अधर्म के पथ पर हैं, उन्होंने अर्जुन को कहा था कि जो तुम्हारे सामने युद्ध के लिए खड़े है, उनमें अपने शत्रु को देखो, सगे संबंधियों को मत देखो, वे अधर्म के मार्ग पर हैं और युद्ध में उन्हें मारने से तुम्हें कोई पाप नहीं लगेगा”।
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भगवान कृष्ण का मतलब यह नहीं था कि अपने निहित स्वार्थ के लिए तुम अपने ही संबंधियों को मार दो। जो भगवान के शब्द थे और जो उदित राज ने उनकी व्याख्या की, उनमे पृथ्वी आकाश का अंतर है।
फिर उदित राज, तुम यह तो बताओ कि मायावती तुम्हारी अपनी संबंधी कैसे है और तुम्हारे अन्य संबंधी कौन हैं? जब तुम अकेले थे तो सभी दल तुम्हारे दुश्मन थे लेकिन तुम अपने स्वार्थ के लिए भाजपा में घुस गए और मलाई चाटते रहे, तब कांग्रेस और अन्य दल तुम्हारे शत्रु हो गए और जब भाजपा ने तुम्हे टिकट नहीं दिया तो तुम कांग्रेस में घुस गए। तब से, तुम्हें सहारा देने वाली भाजपा और मोदी तुम्हारे शत्रु हो गए। मतलब तुम केवल अंधेरे में भटकने वाले जीव हो जिसे पता नहीं कहां जाना है।
ठीक है मायावती की राजनीति आज उसकी अपनी ही गलतियों के कारण शून्य हो चुकी है और इसमें मायावती का अटल बिहारी वाजपेयी को समर्थन देने का आश्वासन देने के बाद भी उनकी सरकार एक वोट से गिराने में मदद करना मुख्य कारण था। वह एक विश्वासघात था अटल जी जैसे एक भले आदमी के साथ। कर्म का फल जरूर मिलता है लेकिन कब, कैसे और कितना यह समय पर निर्भर करता है। वाजपेयी को गिरा कर उस दिन हसने वाले आज सब रसातल में जा चुके हैं।
लेकिन उदित राज, मायावती में आज भी वह शक्ति है कि उसकी एक आवाज़ पर दलित समाज के हजारों लोग एकत्र हो सकते हैं जबकि तुम्हारी आवाज़ पर 100-200 लोग भी नहीं आएंगे। और तुम कहते हो कि मायावती ने सामाजिक आंदोलन का गला घोटा है। तनिक अपने गिरेबान में झांक कर देखो।
कुछ लोग कहते हैं कि ईश्वर सब देखता है लेकिन कुछ लोग कहते है ईश्वर देख रहा है।

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