यमुना की सफाई केजरीवाल ने नहीं की; चंद्रचूड़ की बेंच ने सफाई के कार्यक्रम को क्यों रोक दिया था? जवाब दो ! क्यों केजरीवाल द्वारा दायर किसी भी केस को हाथों-हाथ लिया जाता था?

सुभाष चन्द्र 

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने अपने 9 जनवरी, 2022 के आदेश में दिल्ली के उपराज्यपाल को यमुना नदी के प्रदूषण को दूर करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का चेयरमैन बनाया था। अपने आदेश में NGT ने कहा क़ि यमुना सफाई की अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के पीछे  दिल्ली में multiple authorities का होना एक कारण हो सकता है, और यह भी कहा कि कार्यों की जिम्मेदारी और जवाबदेही दिखाई नहीं देती और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समूह को समिति में शामिल किया गया

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इसके डेढ़ साल बाद 24 मई 2023 को केजरीवाल सरकार NGT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई

केजरीवाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि NGT के आदेश ने चुनी हुई सरकार की अनदेखी करते हुए एक अनिर्वाचित व्यक्ति (Unelected Figurehead) को नियुक्त किया है जिनके पास स्वयं कार्य करने की कोई शक्तियां नहीं हैं और वह केवल चुनी हुई सरकार की Aid and Advice पर ही काम कर सकता है

तत्कालीन चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीवी नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ के सामने केजरीवाल सरकार के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि कोई भी राज्यपाल ऐसी समिति का अध्यक्ष नियुक्त नहीं हो सकता, और चंद्रचूड़ की बेंच ने सिंघवी की हां में हां मिलाते हुए कहा कि संबंधित क्षेत्र के ही विशेषज्ञ को ऐसी समिति में नियुक्त किया जा सकता है  

और चंद्रचूड़ की बेंच ने 11 जुलाई, 2023 को NGT के उपराज्यपाल को समिति का अध्यक्ष बनाने के आदेश पर रोक लगा दी (Stay कर दिया) और यमुना सफाई का काम धरा का धरा रह गया निकम्मे केजरीवाल ने 10 साल में कुछ किया नहीं और जब उपराज्यपाल को NGT ने जिम्मेदारी दी तो उसमें चंद्रचूड़ ने टांग अड़ा दी

सुप्रीम कोर्ट में अगर केजरीवाल का कहना सही था कि उपराज्यपाल चुनी हुई सरकार की Aid and Advice पर ही काम कर सकता है तो चंद्रचूड़ को उससे पूछना चाहिए था कि 10 साल में उसकी सरकार ने उपराज्यपाल के सामने यमुना सफाई की क्या योजनाएं रखी जिन पर उपराज्यपाल ने काम करने से मना कर दिया NGT ने 22 नवंबर, 2024 को दिल्ली सरकार, MCD और दिल्ली जल बोर्ड पर यमुना साफ़ न करने के लिए कुल 60 करोड़ का जुर्माना भी लगाया फिर भी चंद्रचूड़ ने अपना स्टे नहीं हटाया

अगर देखा जाए तो यमुना की सफाई न होने में केजरीवाल के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट की चंद्रचूड़ की बेंच भी पूरी तरह जिम्मेदार है सुप्रीम कोर्ट के बस तीन काम रह गए हैं, रसूकदार लोगों को बेल देना, मुकदमों पर स्टे लगा कर कुम्भकर्ण की नींद सो जाना और अपराधियों की सजा कम कर देना या माफ़ करना इसके अलावा कानूनों की तर्कहीन विवेचना कर फैसले करना भी सुप्रीम कोर्ट की आदत बन चुकी है

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