कुछ व्यक्ति कह रहे है कि यदि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में गठबंधन हो जाता तो आपियें हारते नहीं, किंतु होनी को कौन रोक सकता है और केजरीवाल के पाप का घड़ा तो भर ही चुका था और भगवान को उसको सजा देनी ही थी, यदि आपने गरुड़ पुराण पढ़ा हो या सुना हो तो उसमें एक व्यक्ति मृत्यु से बचने की पूरी कोशिश करता है और अंत में एक गुफा में छुप जाता है किन्तु वहां एक भयंकर काला नाग सो रहा होता है जो जगने पर उसे डस लेता है और उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो अर्थ स्पष्ट है जो आप समझ ही गए कि "होए वही जो राम रचि राखा", फिर केजरीवाल को तो भगवान राम के बारे में उसकी नानी ने काफी कुछ कहा ही था तो उसकी सजा तो उसको मिलनी ही थी, अब मेरी केजरीवाल को सलाह हैं कि चुपचाप कुछ समय आराम करे वैसे इसकी दुर्दशा तो निश्चित हैं।
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अब अन्ना जी के भ्रष्टाचार आंदोलन की उपज केजरीवाल वास्तव में पहले दिन से बेईमान रहा, सिर्फ आरोप प्रत्यारोप की राजनीति कर दिल्ली की जनता को धोखा देता रहा, 2015 के दिल्ली चुनाव में केजरीवाल ने जीती 67 सीटे और 2020 के चुनाव में जीती 62 सीटे, लेकिन फिर भी ना प्रथम कार्यकाल में, ना दूसरे कार्यकाल में केजरीवाल ने ढंग से कोई काम किया सिर्फ आरोप प्रत्यारोप की छीछलेदारी में लगा रहा और जनता के टैक्स पैसों का तो इसना इतना अपव्यय किया काम 1 रूपए का होने पर विज्ञापन करता था 10 रूपए के, किसी को भी गाली बक दो अपशब्द बोलो फिर मानहानि के केसों में वकील करो दिल्ली के टैक्सपेयर की जनता के करोड़ों रुपए उन वकीलों को फीस दो, बहुत ही बेशर्मी से इस केजरीवाल ने 10 साल सरकार चलाई, अब यह देखो - ना कभी किसी फाइल पर यह साइन करता था और ना ही इसके पास कोई मंत्रालय था तो फिर किस चीज की यह जिम्मेदारी उठा रहा था, फिर यह भी राहुल गांधी की तरह देशविरोधी टुकड़े गैंग को बचाने की कोशिश करता था, जेएनयू टुकड़े गैंग कांड में इस केजरीवाल ने भी राहुल गांधी की तरह अपराधियों को बचाने की कोशिश करी जैसे कन्हैया और उमर खालिद, वगैरह को, फिर दिल्ली दंगों के अपराधियों, क्रिमिनलों पर इसने मुकदमा चलाने की परमिशन भी जानबूझकर बहुत देर से दी, शाहीन बाग के दंगाइयों को भी इसने शह दी,
फेस 4 के मेट्रो प्रोजेक्ट को इसने परमिशन ना देकर इतना डिले कर दिया कि उसकी लागत कई गुना बड़ गई अब वह पैसा भी मतलब सरकार को पब्लिक टैक्स से ही देना है अभी तो शुरुआत है, केजरीवाल के गुनाहों की लिस्ट बहुत लंबी है और विधायकों ने सही कहा है कि इसके लिए एसआईटी गठित होनी चाहिए और जांच होने के बाद इस पर आपराधिक कार्यवाही होनी चाहिए और इसको सजा मिलनी चाहिए।
दिल्ली के चुनाव में सबसे बड़े हारे हुए लोगों की सूची इस प्रकार है:-
अनुमानित 300 पत्रकार, जिन्हें हर महीने 50,000 रूपए से 1 लाख रूपए तक के ‘उपहार’ मिल रहे थे।
दिल्ली सरकार के 200 स्थायी वकील, जो 50,000 रूपए से 2 लाख रूपए प्रति माह की मासिक रिटेनरशिप पर थे।
वे मीडिया हाउस, जो हर साल 300 करोड़ रूपए के विज्ञापन राजस्व प्राप्त कर रहे थे।
4 विज्ञापन एजेंसियां (जो पिछले 8-10 वर्षों में बनीं), जिन्होंने विज्ञापन पर 15% एजेंसी कमीशन को घुमा-फिराकर AAP तक पहुँचाया।
एक विशेष समुदाय के सैकड़ों छोटे सिविल ठेकेदार, जो सभी ठेके हड़प रहे थे (विशेषकर AAP द्वारा MCD का नियंत्रण पाने के बाद)। अनुमानित घोटाला सैकड़ों करोड़ का है।
पानी टैंकर माफिया—करीब 50 ऑपरेटर। इनके नियंत्रक रहे दिनेश मोहनिया की हार विशेष रूप से आनंददायक है।
वे 3 बिजली वितरण कंपनियां, जो पिछले 10 वर्षों से मध्यम वर्ग को ठग रही थीं और जिनका ऑडिट नहीं हुआ, ताकि भारी सब्सिडी को सही ठहराया जा सके।


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