दिल्ली चुनाव में EVM बदनाम नहीं हुई क्योकि आकाओं पर ट्रम्प ने डाल दी नकेल; चर्च, जिहादी, नक्सली, NGO… भारत विरोधी हर एजेंट को पाल-पोस रहा था अमेरिका का USAID, हिंदुओं के धर्मांतरण पर भी था जोर

                                                            USAID को ट्रंप ने किया बैन
डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर Deep State और Tool kit पर नकेल डाली उसका असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। Deep State और Tool kit की मिली भीख से भारत में कभी कहीं आंदोलन तो कभी किसी बात पर उपद्रव होते देखा। इतना ही नहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हुए चुनावों में बीजेपी की जीत पर EVM पर ऐसा शोर मचाया जाता था इस गीत "नाच मेरी बुलबुल पैसा मिलेगा" की याद ताजा हो जाती है। लेकिन जब "बुलबुल" को नचाने पर भीख मिलने का कोई आसार देख आन्दोलनजीवियों के आका मुंह में दही जमाकर बैठ गए। यानि देश में हंगामा अपने आपको जनहितैषी, संविधान रक्षक और देशप्रेमी कहने वाले नेता और उनकी पार्टियां Deep State और Tool kit की भीख से जनता को गुमराह किया जा रहा था।  
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद USAID पर ताला लगा दिया गया है। ‘मानव भलाई’ के नाम पर यह विवादित एजेंसी साल 1960 से ही अमेरिकियों का पैसा दुनिया भर में उथल-पुथल पैदा करने पर खर्च करती रही है। खासकर भारत और हिंदू इसके टारगेट पर रहे हैं।

भारत और हिंदू विरोधी गैर सरकारी संगठनों (NGO) से लेकर ईसाई-इस्लामी संगठनों तक को यह फंड देती रही है। ऐसे ही संगठनों में एटलांटिक काउंसिल और वर्ल्ड विजन शामिल है। ये संगठन भारत सरकार विरोधी गतिविधियों और हिंदुओं के धर्मांतरण को बढ़ावा देते हैं।

                                                                वर्ल्ड विजन को मिली मदद

एटलांटिक काउंसिल को जॉर्ज सोरोस तक से फंड मिला है। यह संगठन भारत के पत्रकारों और फैक्टचेकर्स का इस्तेमाल करके पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहा था। वहीं ‘वर्ल्ड विजन’ का दावा है कि वह बिना धार्मिक भेदभाव के इंसानों की भलाई के लिए काम करता है। लेकिन गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि उसकी निष्ठा केवल चर्चों तक सीमित है।

                                               वर्ल्ड विजन की साइट पर जुड़ी जानकारी

ये संगठन भारत के अलग-अलग इलाकों में काम कर रहा है। कुछ इलाकों में इसका खासा प्रभाव है। उड़ीसा के गजपति जिले के गुम्मा ब्लॉक में तो 85 से 90% लोग इसके झाँसे में आकर ईसाई बन चुके हैं। इनका एक साझेदार ‘वर्ल्ड एवेंजेलिकल एलायंस (WEA)’ भी है।

इस संगठन का उद्देश्य ही हर राष्ट्र में ईसाई धर्म स्थापित करना है और बच्चों के लिए चर्च बनाना है। ये बात धर्म की आजादी की करते हैं, लेकिन उससे इनका मतलब ईसाई धर्म में लोगों को परिवर्तित करना होता है। जानकर हैरानी होगी कि WEA धर्मांतरण की बातों को खुलेआम साल 2008 में स्वीकार भी कर चुके हैं।

एक इस्लामी संगठन से भी इसका समझौता भी हुआ था। इसका आधार यह था कि जब दोनों ही समुदायों का उद्देश्य धर्मांतरण है तो फिर बाद में विवाद नहीं होना चाहिए।

‘वर्ल्ड विजन’ आतंकी संगठन हमास को पैसे देने के कारण भी बदनाम है। साल 2021 में इजरायलियों ने इसकी एक ब्रांच को बंद करने के लिए आवाज उठाई थी। उस समय वर्ल्ड विजन का गाजा में मैनेजर मोहम्मद अल हबाबी था जिसपर हमास को 50 मिलियन डॉलर की मदद देने का आरोप था। जब इस पर सवाल उठे तो वर्ल्ड विजन के अन्य अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

इसी तरह वर्ल्ड विजन का कनेक्शन उस वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेस से भी है जिसके संपर्क में ब्रेड फॉर द वर्ल्ड जैसी संस्था है जो भारत में हर्ष मंदर जैसे हिंदू विरोधियों, अलगाववादियों और अर्बन नक्सलियों को सहायता करते हैं। इनको भी यूएसएड मदद करती है। खुद यूएसएड की एडमिनिस्ट्रेटर ने इसकी तारीफ कुछ ही महीने की थी।

साल 2024 में जब यूपी सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया तो वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेस, वर्ल्ड इवेंजेलिकल अलायंस और वर्ल्ड विजन ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ रैली निकाली थी। वहीं 2014 से पहले WEA हिंदुओं को निशाना बनाने का काम और तथ्यों को गलत दिखाने का काम करता था। इनकी यही भारत विरोधी हरकतों के साथ जनवरी 2024 में मोदी सरकार ने वर्ल्ड विजन का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित कर दिया जिससे वामपंथी काफी नाराज हुए थे।

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