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वामपंथी संगठन ‘The Himkhand’ का उतरा मुखौटा, ‘प्रदूषण’ के बहाने नक्सलियों को बढ़ावा और हिंसा भड़काने की कोशिश

                                           अर्बन नक्सल क्रांति, सोनम वांगचुक और प्रशांत भूषण
अर्बन नक्सल्स ने बीते रविवार (23 नवंबर 2025) को ‘प्रदूषण विरोध’ के नाम पर इंडिया गेट को घेर लिया। ‘प्रदूषण’ की बात करते हुए इन कथित प्रदर्शनकारियों ने मारे गए नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा के समर्थन में नारे लगाए और पुलिस पर मिर्च स्प्रे से हमला भी किया।

इस सोची-समझी प्रदर्शन की कमान दो कट्टर वामपंथी संगठनों के हाथ में थी। इसका मकसद ‘प्रदूषण’ के नाम पर लाल आतंक की विचारधारा का प्रचार करना और लोगों का समर्थन हासिल करना था। इन संगठनों में भगत सिंह छात्र एकता मंच (bsCEM) और ‘द हिमखंड’ शामिल थे।

भारत में अर्बन नक्सल अब जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण आंदोलन को हथियार बनाकर वामपंथी चरमपंथ को बढ़ावा दे रहे हैं और देश की संप्रभुता और अखंडता को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘द हिमखंड’ इंस्टाग्राम पर दो अकाउंट चलाता है- एक ‘thehimkhand‘ नाम से और दूसरा ‘the.himkhand‘ के नाम से। इनके पोस्ट देखने से पता चलता है कि यह वामपंथी समूह मई 2024 से सक्रिय है।

शुरुआत में यह ग्रुप खुद को ‘क्लाइमेट चेंज’ और ‘पर्यावरणीय असंतुलन’ के खिलाफ लड़ने वाला संगठन बताता था लेकिन जल्द ही इसने क्षेत्रीय राजनीति और सरकार-विरोधी नैरेटिव को भी अपने एजेंडे में शामिल कर लिया।  

लद्दाख प्रशासन द्वारा सोनम वांगचुक की संस्था Himalayan Institute of Alternative Learning (HIAL) का जमीन आवंटन उसमें भारी गड़बड़ियों के चलते रद्द कर दिया गया था। इसके कुछ दिनों बाद, वांगचुक ने लद्दाख को ‘राज्य का दर्जा’ दिए जाने का मुद्दा उठाकर अराजकता और तनाव पैदा करने की कोशिश की और लोगों को भड़काया।

इसी दौरान यानी इस साल अक्टूबर में ‘द हिमखंड’ भी ‘लद्दाख आंदोलन’ का समर्थन कर रहा था। इतना ही नहीं, यह समूह हिंसा को सही ठहराने की कोशिश भी कर रहा था।

5 अक्टूबर को डाले गए एक पोस्ट में लिखा था, “प्रदर्शनकारियों द्वारा बीजेपी ऑफिस में आग लगाना, पार्टी के हिमालय-विरोधी विकास मॉडल को खारिज करना है। लद्दाख के लोगों ने अपना फैसला सुना दिया है।”

                                         The Himkhand की इंस्टा पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

एक दूसरे पोस्ट में, इस वामपंथी समूह ने हिंसा को सही ठहराने की कोशिश की और इसे सिर्फ ऐसी धारणा बताया, जिन्हें कथित तौर पर ‘शासक वर्ग लोगों की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए बनाता है।’   

‘The Himkhand’ ने 2020 में दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों को उकसाने वाले प्रशांत भूषण को ‘वायू प्रदूषण’ के खिलाफ अपने एक इवेंट में स्पीकर बताया था।  

ऑपइंडिया ने पता लगाया कि इस कट्टर वामपंथी ग्रुप को आगे बढ़ाने वालों में से एक एक्टिविस्ट का नाम ‘क्रांति’ है।  

उसे भगत सिंह छात्र एकता मंच (bsCEM) के ‘कार्यकर्ता’ रवजोत के साथ देखा गया था, जिसने ‘कॉमरेड हिड़मा अमर रहे’ जैसा भड़काऊ नारा लगाया था।  

यह साफ दिखाई देता है कि bsCEM और ‘The Himkhand’ मिलकर हिंसा भड़काने और जलवायु आंदोलन की आड़ में लाल आतंक को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं।

                                        The Himkhand की इंस्टा पोस्ट का स्क्रीनग्रैब

यहाँ यह बताना भी जरूरी है कि ‘द हिमखंड’ लगातार चार धाम रेलवे प्रोजेक्ट जैसे विकास कार्यों का विरोध करता रहा है और इसे वह ‘पर्यावरण संरक्षण’ के नाम पर रोकने की कोशिश करता रहा है।

अब जबकि ‘ऑपरेशन कगार’ अपने अंतिम चरण में है और ‘लाल आतंक’ का खात्मा हो रहा है, ऐसे में अर्बन नक्सल और उनसे जुड़े संगठन अब लोगों को भ्रमित और कट्टरपंथी बनाने के लिए अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को हथियार की तरह उपयोग कर रहे हैं।

दिल्ली चुनाव में EVM बदनाम नहीं हुई क्योकि आकाओं पर ट्रम्प ने डाल दी नकेल; चर्च, जिहादी, नक्सली, NGO… भारत विरोधी हर एजेंट को पाल-पोस रहा था अमेरिका का USAID, हिंदुओं के धर्मांतरण पर भी था जोर

                                                            USAID को ट्रंप ने किया बैन
डोनाल्ड ट्रम्प के अमेरिका का राष्ट्रपति बनने पर Deep State और Tool kit पर नकेल डाली उसका असर भारत में भी दिखाई दे रहा है। Deep State और Tool kit की मिली भीख से भारत में कभी कहीं आंदोलन तो कभी किसी बात पर उपद्रव होते देखा। इतना ही नहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले हुए चुनावों में बीजेपी की जीत पर EVM पर ऐसा शोर मचाया जाता था इस गीत "नाच मेरी बुलबुल पैसा मिलेगा" की याद ताजा हो जाती है। लेकिन जब "बुलबुल" को नचाने पर भीख मिलने का कोई आसार देख आन्दोलनजीवियों के आका मुंह में दही जमाकर बैठ गए। यानि देश में हंगामा अपने आपको जनहितैषी, संविधान रक्षक और देशप्रेमी कहने वाले नेता और उनकी पार्टियां Deep State और Tool kit की भीख से जनता को गुमराह किया जा रहा था।  
डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद USAID पर ताला लगा दिया गया है। ‘मानव भलाई’ के नाम पर यह विवादित एजेंसी साल 1960 से ही अमेरिकियों का पैसा दुनिया भर में उथल-पुथल पैदा करने पर खर्च करती रही है। खासकर भारत और हिंदू इसके टारगेट पर रहे हैं।

भारत और हिंदू विरोधी गैर सरकारी संगठनों (NGO) से लेकर ईसाई-इस्लामी संगठनों तक को यह फंड देती रही है। ऐसे ही संगठनों में एटलांटिक काउंसिल और वर्ल्ड विजन शामिल है। ये संगठन भारत सरकार विरोधी गतिविधियों और हिंदुओं के धर्मांतरण को बढ़ावा देते हैं।

                                                                वर्ल्ड विजन को मिली मदद

एटलांटिक काउंसिल को जॉर्ज सोरोस तक से फंड मिला है। यह संगठन भारत के पत्रकारों और फैक्टचेकर्स का इस्तेमाल करके पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहा था। वहीं ‘वर्ल्ड विजन’ का दावा है कि वह बिना धार्मिक भेदभाव के इंसानों की भलाई के लिए काम करता है। लेकिन गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि उसकी निष्ठा केवल चर्चों तक सीमित है।

                                               वर्ल्ड विजन की साइट पर जुड़ी जानकारी

ये संगठन भारत के अलग-अलग इलाकों में काम कर रहा है। कुछ इलाकों में इसका खासा प्रभाव है। उड़ीसा के गजपति जिले के गुम्मा ब्लॉक में तो 85 से 90% लोग इसके झाँसे में आकर ईसाई बन चुके हैं। इनका एक साझेदार ‘वर्ल्ड एवेंजेलिकल एलायंस (WEA)’ भी है।

इस संगठन का उद्देश्य ही हर राष्ट्र में ईसाई धर्म स्थापित करना है और बच्चों के लिए चर्च बनाना है। ये बात धर्म की आजादी की करते हैं, लेकिन उससे इनका मतलब ईसाई धर्म में लोगों को परिवर्तित करना होता है। जानकर हैरानी होगी कि WEA धर्मांतरण की बातों को खुलेआम साल 2008 में स्वीकार भी कर चुके हैं।

एक इस्लामी संगठन से भी इसका समझौता भी हुआ था। इसका आधार यह था कि जब दोनों ही समुदायों का उद्देश्य धर्मांतरण है तो फिर बाद में विवाद नहीं होना चाहिए।

‘वर्ल्ड विजन’ आतंकी संगठन हमास को पैसे देने के कारण भी बदनाम है। साल 2021 में इजरायलियों ने इसकी एक ब्रांच को बंद करने के लिए आवाज उठाई थी। उस समय वर्ल्ड विजन का गाजा में मैनेजर मोहम्मद अल हबाबी था जिसपर हमास को 50 मिलियन डॉलर की मदद देने का आरोप था। जब इस पर सवाल उठे तो वर्ल्ड विजन के अन्य अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

इसी तरह वर्ल्ड विजन का कनेक्शन उस वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेस से भी है जिसके संपर्क में ब्रेड फॉर द वर्ल्ड जैसी संस्था है जो भारत में हर्ष मंदर जैसे हिंदू विरोधियों, अलगाववादियों और अर्बन नक्सलियों को सहायता करते हैं। इनको भी यूएसएड मदद करती है। खुद यूएसएड की एडमिनिस्ट्रेटर ने इसकी तारीफ कुछ ही महीने की थी।

साल 2024 में जब यूपी सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया तो वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेस, वर्ल्ड इवेंजेलिकल अलायंस और वर्ल्ड विजन ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ रैली निकाली थी। वहीं 2014 से पहले WEA हिंदुओं को निशाना बनाने का काम और तथ्यों को गलत दिखाने का काम करता था। इनकी यही भारत विरोधी हरकतों के साथ जनवरी 2024 में मोदी सरकार ने वर्ल्ड विजन का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित कर दिया जिससे वामपंथी काफी नाराज हुए थे।