आपको याद होगा नूपुर शर्मा भी अपने विरोध में दायर की गई कई राज्यों में FIRs को एक जगह एकत्रित करने की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के महा-बददिमाग जजों, जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के इतिहास के सबसे घटिया और नूपुर को अपमानित करने वाली “Hate Speech” दी थी। कठोरतम शब्दों का प्रयोग करते हुए उन्होंने नूपुर शर्मा को देश के बिगड़े हालातों के लिए जिम्मेदार ठहरा दिया जबकि सर तन से जुदा के नारे वो लोग लगा रहे थे जिन्होंने टेलर कन्हैया लाल की गर्दन उड़ा दी।
बेशर्मी और निर्लज्जता की सारी सीमाएं पार करने वाला रणवीर इलाहबादिया भी सुप्रीम कोर्ट गया है अपने विरुद्ध सभी FIRs की एक जगह सुनवाई करने के लिए। CJI संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कह तो जरूर दिया कि तुरंत सुनवाई नहीं होगी लेकिन साथ में यह भी कहा कि याचिका दो-तीन दिन में सूचीबद्ध की जाएगी और आप इसके लिए रजिस्ट्री से संपर्क करें। ढोल ऐसा पीटा गया मीडिया में कि CJI ने रणवीर को बड़ा झटका दे दिया जबकि ऐसा मतलब नहीं निकाला जा सकता उनकी बात का।
जो गंदगी रणवीर और उसके साथियों ने फैलाई youtube पर, वह क्या मीलॉर्ड को पसंद आएगी और पसंद नहीं आती तो क्या वे रणवीर के खिलाफ वैसी ही “Hate Speech” देंगे जो नूपुर शर्मा के लिए दी थी? और नूपुर शर्मा की तरह रणवीर को भी क्या हाई कोर्ट जाने के लिए कहेंगे क्योंकि दोनों के मुद्दे एक ही हैं सुप्रीम कोर्ट के सामने? किसी जज में यह पूछने की हिम्मत नहीं थी कि जो नूपुर ने बोला है वह उनकी मजहबी किताबों में लिखा है या नहीं? जब वही बात मजहबी किताबों में लिखा है फिर नूपुर दोषी क्यों? "सिर तन से जुदा" गैंग पर सख्त कार्यवाही करने का आदेश देने की अपने आपको बुद्धिमान कहलवाने वाले किसी जज में सच बोलने की हिम्मत नहीं थी।
जजों को हिन्दुओं द्वारा सिर्फ मजहब पर कुछ बोलने पर चाहे वह उनकी किताबों में ही क्यों न लिखा हो, बोलने पर "Hate Speech" कहने की हिम्मत करने वाले सनातन संस्कृति के खिलाफ बोलने को जरुरत से ज्यादा हलके में लेकर अपनी मानसिकता को जाहिर करते हैं।
यदि रणवीर और उसके गिरोह को सजा होती है तो अंत में यह मामला सुप्रीम कोर्ट जायेगा और मुझे तो यह डर है कि जब सुप्रीम कोर्ट के जज स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा भगवान राम के अपमान करने को Line of thought कह सकते हैं तो वे रणवीर की बातों को भी माता पिता के लिए एक Line of thought कह सकते हैं और freedom of conscience भी कह सकते हैं। वे उसे संविधान के अनुच्छेद 19(1) में Right to express oneself through speech, writing, printing and other means … भी कह सकते हैं - However, it should not be against Public Order, decency or morality.
पब्लिक आर्डर तो नहीं बिगड़ता, जहां तक decency और morality का प्रश्न है, सुप्रीम कोर्ट कह सकता है जिसे पसंद न हो वह न देखे। जैसे टूल किट के लिए कहा था चंद्रचूड़ ने कि आपको पसंद नहीं तो उस पर ध्यान मत दीजिए।
आज रणवीर कह रहा है वो भागा नहीं है, डरा हुआ है। उसके माता पिता दोनों डॉक्टर हैं और एक बहन है आकांशा। लेकिन उनके शो के बारे में उनका कोई बयान नहीं है। लगता है जो कुछ रणवीर ने माता पिता के यौन संबंधों के बारे में कहा, वह घर में देखता रहा होगा। और एक लड़की होकर अपूर्वा मखीजा ने तो हद ही कर दी। इंटरनेट पर उसके माता पिता भाई बहनों के बारे में कोई सूचना नहीं है। इन लोगों को संस्कार नाम की तो कोई सौगात मिली ही नहीं अपने अभिभावकों से।
कहते है “कटोरे में कटोरा, बेटा बाप से भी गोरा”, डी वाई चंद्रचूड़ ने विवाहित महिलाओं को sexual autonomy देकर उनका चारित्रिक पतन किया और उसका बेटा अभिनव चंद्रचूड़ रणवीर के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। अभी हो सकता है उसका केस हर कोर्ट में वो ही लड़े।
जया बच्चन ने पूरे कुंभ पर उंगली उठा दी लेकिन रणवीर के बेशर्मी पर खामोश है। गंगा मैया को अपवित्र बताने वाली को शायद पता नहीं कि Bollywood सारा गंदगी से भरा हुआ है। हर कोई “थाली में छेद” कर समाज को कलंकित कर रहा है।


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