सुभाष चन्द्र
अप्रैल 2 को लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन बिल पेश हो गया और पास भी हो गया। जो मुसलमानों को गुमराह करने वालों की बहुत बड़ी हार है। देखना यह है कि कुर्सी के भूखे नेताओं और उनकी पार्टियों द्वारा मुसलमानों को गुमराह कर मालपुए खा रहे थे उस ग़लतफ़हमी से कब बाहर आएगा? लेकिन कुछ वक्ताओं की बातें सुनकर यह अहसास हुआ कि वक़्फ़ बिल के विरोधी और मुस्लिम समुदाय के लोग भी वक़्फ़ से वाकिफ नहीं हैं।
राहुल गाँधी संसद में विपक्षी नेता जरूर बन गए लेकिन नेता बनने की एक भी खूबी नहीं। राहुल का काम सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने विपक्ष नेता बन गया। जबकि विपक्षी नेता देश का अघोषित दूसरा प्रधानमंत्री होता है। मुस्लिम वोट के ठेकेदारों को राहुल से पूछना चाहिए कि आखिर किस दबाव में वक़्फ़ बिल के खिलाफ क्यों नहीं बोले? क्या मुसलमान को पागल समझते हो?

आखिर एक बात का रोना हर वक्त क्यों रोया जाता है कि मुस्लिम गरीब हैं और मजलूम हैं जबकि उनका संगठन वक्फ बोर्ड वर्षों से काम कर रहा है? अकूत संपत्ति का मालिक है यह बोर्ड लेकिन उस संपत्ति से होने वाली आय उसने क्या कभी गरीब मुस्लिमों पर खर्च की है? मदरसे भी बनाए और चलाए जाते हैं तो वह भी सरकार के पैसे से।
![]() |
लेखक चर्चित YouTuber |
क्या कभी मुस्लिमों के लिए स्कूल बनाए जहां उच्च शिक्षा दी जाए, क्या कभी हॉस्पिटल बनाए जिनमें मुस्लिमों समेत सभी लोगों का इलाज किया जाता हो?
वक़्फ़ की संपत्ति किसी मुस्लिम द्वारा दान की हुई होनी चाहिए वह भी जरूरतमंदों के परोपकार के लिए और ऐसे जरूरतमंद जरूरी नहीं मुस्लिम हो। गैर मुस्लिमों को छोड़िए वक़्फ़ ने कभी मुस्लिमों की भी मदद नहीं की। यह कैसे हो सकता है कि एक तरफ तो मुस्लिम गरीब हैं और दूसरी तरफ वह अपनी इतनी संपत्ति दान कर देते हैं जिस पर वक़्फ़ बोर्ड बड़े बड़े होटल, रिसोर्ट और भवन खड़े कर लेता है।
मुस्लिम आपको कभी अंगदान करते नहीं मिलेंगे लेकिन अंगदान लेते जरूर मिलेंगे। इस्लाम में दान (जकात) गैर मुस्लिमों को तब ही दिया जाता है जब वह इस्लाम का विरोध न करते हो और इस्लाम की तरफ उनका रुझान हो।
आज के विधेयक से साफ़ है कि वक़्फ़ बोर्ड की मनमानी पर लगाम लगेगी। किसी की संपत्ति पर उंगली रखने से वह वक़्फ़ की नहीं होगी। कोई भी सरकारी संपत्ति वक़्फ़ की नहीं मानी जाएगी। और कोई भी मुस्लिम अपनी ही संपत्ति वक़्फ़ को दे सकेगा जिसके लिए उसका 5 साल तक इस्लाम महजब को मानना जरूरी होगा। संपत्ति का पंजीकरण भी होगा और कलेक्टर उसकी देखभाल करेगा। वक्फ बोर्ड के निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी जा सकेगी।
इमरान मसूद आज लोकसभा में कह रहा था कि उत्तर प्रदेश में वक़्फ़ की 74% संपत्ति सरकारी घोषित कर दी गई हैं। लूट कर संपत्ति वक़्फ़ में जोड़ी हैं तो उनका कब्ज़ा तो सरकार लेगी ही। वैसे इमरान मसूद को पता होना चाहिए कि ओवैसी खुद कहता रहता है कि उत्तर प्रदेश में वक़्फ़ की 129 लाख में से 112 लाख संपत्तियों के कागज ही नहीं हैं वक़्फ़ बोर्ड के पास। यानि वक़्फ़ बिल के विरोधी खुद ही सच्चाई कबूल रहे हैं। ये वही ओवैसी है जिसने वक़्फ़ संपत्ति पर मॉल और हॉस्पिटल बना करोडो की कमाई कर रहा है।
ऐसा कोई नहीं है जिसे वक़्फ़ बोर्ड ने ठगा नहीं। इसलिए 1000 चर्च भी इस बिल के समर्थन में खड़ी हैं। मजे की बात है 239 विपक्षी सांसदों में केवल 24 मुस्लिम है और 215 “हिंदू काफिर” है जो गला फाड़ फाड़ कर बिल का विरोध कर रहे हैं।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और विपक्ष को वक़्फ़ बोर्ड/कौंसिल में 2 मुस्लिम महिलाओं और 2 गैर मुस्लिमों को रखने से सबसे ज्यादा दर्द हो रहा है। महिलाओं को तो ये लोग कुछ समझते ही नहीं और जब गैर मुस्लिमों की संपत्ति हथियाने का काम करते हो तो उनका भी तो कोई प्रतिनिधि भी तो होना चाहिए।
मुस्लिम समुदाय के लोग भावनाओं में न बह कर एक बार ठंडे दिमाग से सोचें कि उन्हें क्या सच में वक़्फ़ बोर्ड से कुछ मिला है? इस बिल से मुस्लिमों का ही कल्याण होने वाला है।
No comments:
Post a Comment