(#5% आबादी की कौम अल्पसंख्यक हो) अली खान सीधा सुप्रीम कोर्ट कैसे चला गया? विजय शाह पर SIT भी बना दी, लेकिन रामगोपाल यादव पर स्वतः संज्ञान लेंगे; फिर कहते हैं कोर्ट के खिलाफ कोई कुछ न बोले

सुभाष चन्द्र

अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद का मुकदमा लेकर कपिल सिब्बल सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और CJI गवई ने एक दो दिन में सुनवाई के लिए लिस्टिंग का भी भरोसा दे दिया। यानी चीफ जस्टिस कोई भी आ जाए कपिल सिब्बल जैसे लोगों की सुप्रीम कोर्ट में हनक चलती रहेगी

सवाल यह उठता है कि अली खान पहले पंजाब&हरियाणा हाई कोर्ट क्यों नहीं गया और सुप्रीम कोर्ट ने बिना हाई कोर्ट गए उसकी अपील पर सुनवाई कैसे स्वीकार कर ली? कानून का उड़ता  मजाक जब सुप्रीम कोर्ट में ही प्रत्यक्ष दिखाई देगा को कोई क्या कर सकता है?

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अली खान के जिस बयान पर उसे गिरफ्तार किया गया है उसमे उसने कहा था कि -

“कर्नल कुरैशी की सराहना करने वाले दक्षिणपंथी लोगों को मॉब लिंचिंग और संपत्तियों को मनमाने ढंग से गिराए जाने के पीड़ितों के लिए सुरक्षा की मांग करनी चाहिए; कर्नल कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की मीडिया ब्रीफिंग “दिखावटी” है लेकिन दिखावटीपन को हकीकत में बदलना चाहिए, नहीं तो यह सिर्फ पाखंड है” राज्य महिला आयोग ने अली खान के बयान को दोनों महिला अधिकारियों और सेना को कमतर आंकने वाला बताया

अली खान ही नहीं हर किसी मुस्लिम नेता को “मॉब लिंचिंग” का मुद्दा उठाना जरूरी होता है जबकि इक्का दुक्का मामलों को छोड़ कर ऐसे केस सुनाई नहीं देते और जो सुनाई भी देते हैं उनके लिए मुस्लिम ही जिम्मेदार होते है क्योंकि वे अक्सर गोवंश की अवैध तस्करी करते पकड़े जाते हैं अवैध निर्माण गिराने के लिए तो सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दी है

अली खान को दिखाई नहीं देता किस तरह मुस्लिम हिंदू बच्चियों बेटियों और महिलाओं का रेप करने में सबसे आगे हैं एक जवान लड़की के 35 टुकड़े कर सूटकेस में बंद कर फ़ेंक देना 35 मॉब लिंचिंग से भी 4 गुना अपराध है अली खान अपने समेत अन्य मुस्लिमों को देख लो जो भी पढ़े लिखे हैं उनकी सोच जेहादी ही मिलेगी उसे पता होना चाहिए अब तब पाक की जासूसी करने वाले 18 लोग पकड़े गए हैं जिनमे 14 मुस्लिम हैं

मुझे समझ नहीं आता सिब्बल कैसे उसके बयान को देशभक्ति का बयान बता रहे हैं और कैसे सुप्रीम कोर्ट कर्नल सोफिया और विंग कमांडर सिंह की ब्रीफिंग को “पाखंड” बताने को कैसे अभिव्यक्ति की आज़ादी की श्रेणी में शामिल करेगा? पहले तो उसे हाई कोर्ट भेजना चाहिए

दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और FIR दर्ज करने के आदेश दिए जब वो सुप्रीम कोर्ट गए तो वहां उन्हें फटकार दिया गया जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन के सिंह की बेंच ने प्रदेश सरकार को राज्य के बाहर की एक महिला समेत 3 IPS की SIT गठित करने के आदेश दे दिए। मतलब राज्य के ऊपर कोई भरोसा नहीं है जैसे विजय शाह ने गंभीर अपराध किया है जबकि उसने माफ़ी भी Reject कर दी 

विजय शाह ने सेना की भर भर के तारीफ की थी और भावावेश में यह कह दिया कि जिन लोगों ने हमारी बेटियों के सुहाग उजाड़े हैं, उन्हें जवाब देने मोदी जी ने उनकी ही बहन (सोफिया) को भेज दिया 

हो सकता है विजय शाह की शब्दावली ठीक न रही हो लेकिन मंशा गलत नहीं थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट भी तो विपक्ष को खाद पानी देने का रोल अदा करेगा

क्या सुप्रीम कोर्ट में रामगोपाल यादव के बयान के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेने की जरूरत समझी या यादव को उनके बयान के लिए कोई मैडल देना है। रामगोपाल यादव ने कहा था -

“विंग कमांडर व्योमिका सिंह हरियाणा की चमार हैं और एयर मार्शल AK भारती पूर्णिया के यादव हैं” मीलॉर्ड अगर यही आपत्तिजनक शब्द किसी अन्य पब्लिक ने बोल दी होती अब तक न जाने उसके खिलाफ कितनी FIR हो गयी होती, लेकिन ये शब्द समाजवादी पार्टी जिसका मूल उद्देश्य PDA यानि Parivar Development Authority हो सब चुप हैं। 

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