पाकिस्तान की बोली बोलने वाले राहुल वाजपेयी और शरद पवार से कुछ सीखो या नेता विपक्ष पद छोड़ दो; पाक मीडिया में फिर छाए राहुल: दुश्मन देश का हौसला क्यों बढ़ा रहे हैं नेता विपक्ष; राहुल देश को बताओ चीन के साथ क्या MoU किया है?

                                                                                                                      साभार: सोशल मीडिया  
आतंकवाद को पालने पोसने वाले पाकिस्तान और कांग्रेस में कोई फर्क नहीं, दोनों सिक्के के एक ही पहलू हैं। यूपीए कार्यकाल में जितने आतंकी हमले हुए क्या कांग्रेस ने कोई कदम उठाया? नहीं, क्योकि कार्यवाही करने से कांग्रेस और इसके समर्थक दलों का वोटबैंक यानि मुस्लिम वोट बैंक का नाराज होना। जिस दिन ये वोटबैंक नाराज हो गया कांग्रेस कभी 10 सीट भी नहीं जीत पायेगी। यही वजह है कि नेता विपक्ष राहुल पाकिस्तान की बोली बोल भारत की जनता ही नहीं विशेषकर मुसलमानों को पागल बना रहे हैं। 
नेता विपक्ष राहुल गाँधी को अपनी खानदानी अकड़ छोड़ अटल बिहारी वाजपेयी से कुछ सीखना था, चलो वाजपेयी से नहीं सीख पाए तो अपने INDI गठबंधन के सहयोगी शरद पवार से सीखना चाहिए या नेता विपक्ष पद छोड़ देना चाहिए। INDI गठबंधन के सहयोगी दलों को राहुल को समझाना चाहिए या फिर कांग्रेस को अलग कर देना चाहिए अपने इस तरह से बयानों से कांग्रेस को डूबेगी ही तुम सबको भी ले डूबेगी। राहुल से पूछो कि चीन के साथ क्या MoU किया है?      
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी एक बार फिर पाकिस्तानी मीडिया में सुर्खियों में हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर पर सवाल उठाए हैं। एक तरह से कह सकते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते ने ऑपरेशन सिंदूर पर सबूत मांगे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का यह पोस्ट पाकिस्तानी मीडिया में बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के पोस्ट को पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया चैनलों और अखबारों ने हाथों-हाथ लिया है। कई टीवी डिबेट्स में इस पर चर्चा हो रही है। राहुल गांधी ने पोस्ट किया कि ‘विदेश मंत्री की चुप्पी केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि यह निंदनीय है। मैं फिर से सवाल पूछता हूं: हमने कितने भारतीय विमान खोए क्योंकि पाकिस्तान को पहले से जानकारी थी? यह चूक नहीं थी, यह एक अपराध था। और देश को सच्चाई जानने का हक है।”

सोशल मीडिया पर लोग राहुल गांधी पर देश विरोधी ताकतों को “ऑक्सीजन” देने का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी के बयान भले ही चुनावी राजनीति के लिए हों, लेकिन वो भारत की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि राहुल गांधी की चतुराई महज संयोग नहीं है, बल्कि भयावह है। उन्होंने राहुल पर पाकिस्तान की भाषा बोलने का आरोप लगाते हुए लिखा है कि भारत के फायदे और नेता विपक्ष के नीयत का भंडाफोड़ करने के लिए मैं डीजीएमओ लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई का 11 मई का बयान फिर से पोस्ट कर रहा हूं।

दुनिया जानती है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला ले लिया। लेकिन कांग्रेस नेता पहलगाम हमले के बाद से ही लगातार देश विरोधी बयान दे रहे हैं। मुस्लिम तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति के कारण कांग्रेसी नेता पाक की भाषा बोल रहे हैं। सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा ने कहा कि मुसलमान कमजोर महसूस कर रहे हैं, यही कारण है कि आतंकियों ने धर्म पूछकर लोगों को मारा। कर्नाटक के कांग्रेसी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोई जरूरत नहीं है। कर्नाटक के ही कांग्रेस मंत्री आरबी तिम्मापुर ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि आतंकियों ने लोगों पर गोली चलाने से पहले धर्म पूछा होगा। हिमाचल प्रदेश के कांग्रेसी मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि पानी और बिजली रोककर किसी से बदला थोड़ी लिया जाता है। पार्टी के सीनियर लीडर मणिशंकर अय्यर ने सिंधु जल संधि निलंबित करने के फैसले पर कहा कि आप ऐसे कैसे पानी रोक सकते हो। इतना ही नहीं महाराष्ट्र से कांग्रेसी विधायक विजय वडेट्टीवार ने अपने बयानों से पाकिस्तान का पक्ष लेते हुए कहा कि आखिर आतंकियों के पास इतना समय ही कहां होता है कि वे किसी के कान में जाकर पूछें कि तुम्हारा धर्म क्या है।

 ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ दिखावा: राहुल के एक और करीबी विधायक ने मांगे सबूत

राहुल गांधी के करीबी कर्नाटक कांग्रेस विधायक कोथुर मंजुनाथ ने ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी पर सवाल उठाते हुए इसे सिर्फ दिखावा करार दिया। उन्होंने इसकी सफलता को लेकर सरकार और सेना से सबूत भी मांगे हैं। मंजुनाथ ने कहा कि यह सिर्फ दिखावा था, इससे न तो न्याय मिला और न ही पहलगाम हमले के पीड़ितों को सच्ची सांत्वना मिली। इस कांग्रेस नेता ने साफ कहा कि कुछ हुआ ही नहीं। बस दिखावे के लिए तीन-चार विमान ऊपर से भेजे और वापस बुला लिए ग। क्या इससे पहलगाम में मारे गए 26-28 लोगों को इंसाफ मिलेगा? इसके साथ ही उन्होंने ये भी पूछा कि क्या पक्के तौर पर पता है कि 100 आतंकवादी मारे गए? उनकी पहचान क्या है? क्या वे वही आतंकी थे जिन्होंने 22 अप्रैल को हमला किया था?’
भावनात्मक लाभ के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ – पृथ्वीराज चव्हाण
कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि मोदी सरकार ने भावनात्मक लाभ के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम चुना है। उन्होंने कहा कि युद्ध बम, बंदूक और विमानों से लड़ा जाता है, न कि प्रतीकात्मकता या दिखावटी कार्यों से। अभियान के नाम से युद्ध नहीं जीता जा सकता। अभियान का नाम ठीक है, भारत सरकार ने सोचा होगा कि अभियान को यह नाम देने से उन्हें कुछ भावनात्मक लाभ मिल सकता है।

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