जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने फिल्म “उदयपुर फाइल्स” पर रोक लगाने के लिए दिल्ली, मुंबई और गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की हुई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल ने फिल्म निर्माताओं को बैन की मांग करने वालों को फिल्म दिखाने को कहा, जब उन्हें बताया गया कि कुछ कथित आपत्तिजनक सीन हटा दिए गए है। मुकदमा लड़ रहा है मुस्लिमो का दलाल कपिल सिब्बल।
मुस्लिमों के दलाल उर्फ़ हिन्दुओं के दुश्मन वकील कपिल सिब्बल का DNA टेस्ट करवाना चाहिए। कोई हिन्दू पक्ष ले लो दलाल कपिल मुसलमानों का वकील बन खड़ा हो जाता है। माफ़ करना, कपिल जैसे वकीलों के इस चाल-चलन पर 70 के दशक में निर्माता-निर्देशक राम दयाल की फिल्म "प्रभात" का एक बहुचर्चित संवाद याद गया, जब नायिका सरिता(ज़ाहिरा) एक अबला को कुछ रुपयों के लालच में कोठे पर पहुँचाने पर नायक रमेश(रुपेश कुमार) को कहती है कि "गनीमत है तेरी माँ मर गयी वरना तू उसकी भी कमीशन खा जाता", शायद सटीक बैठता है।
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लेखक चर्चित YouTuber |
जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी को फिल्म से कुछ ज्यादा ही मिर्ची लगी हैं। मदनी ने कहा है -
-फिल्म समाज के “भाईचारे” के खिलाफ है;
-देश की अमन-शांति और आवाम के बीच सांप्रदायिक सौहार्द को आग लगाने के लिए बनाई गई है;
-अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरूपयोग करते हुए फिल्म में ऐसे सीन दिखाए गए हैं, जिनका इस्लाम, मुसलमानों और देवबंद से कोई लेना देना नहीं है और फिल्म मुस्लिम विरोधी भावनाओं से प्रेरित है;
-घ्रणित फिल्म का मकसद एक विशेष धार्मिक समुदाय को नकारात्मक और पक्षपाती रूप में पेश करना है, जो उस समुदाय के लोगों के सम्मान से जीने के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
इस फिल्म में नूपुर शर्मा का वह कथित बयान भी शामिल है, जिसकी वजह से कथित तौर पर देश में साम्रदायिक तनाव बढ़ा था और “ज्ञानवापी मस्जिद” के मामले का भी उल्लेख है जो अभी जिला अदालत और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे हैं।
मियां अरशद मदनी आप इतना बताएं कि टेलर कन्हैया लाल का “सर तन से जुदा” करने के पीछे कौन सा “भाईचारा” था? नूपुर शर्मा की बात तो आप करते हैं लेकिन तस्लीम रहमानी की बात नहीं करते जिसने भगवान शंकर का टीवी चैनल पर अपमान किया जिसके जवाब नूपुर शर्मा ने दिया। आपके समाज के लोग “ज्ञानवापी मस्जिद” में भगवान शंकर के शिवलिंग पर सदियों से थूकते और वजू करते रहे और आज उसका जिक्र भी फिल्म में आपको गंवारा नहीं है।
अरशद मदनी जनाब, ये फालतू के “भाईचारे” का ढोल पीटना बंद कीजिए। कश्मीर के हिंदुओं का कत्लेआम किस “भाईचारे” में किया गया था, लेकिन आपको The Kashmir Files” से “भाईचारे” को नुकसान नज़र आया। कौन से “भाईचारे” में आपके सम्मान से जीने का अधिकार की हक़दार कौम हिंदू त्योहारों की हर शोभायात्रा पर पथरबाजी करती है? अभी मोहर्रम आपका था ताजिये आपके निकाले गए तो किस “भाईचारे” में हिंदू मंदिरों पर हमले किए गए?
आपकी समुदाय को सम्मान से जीने का अगर मौलिक अधिकार है तो यह अधिकार हिंदुओं को भी है, फिर आप हिंदुओं का धर्मांतरण क्यों कराते है? आप अपने मजहब में ख़ुशी से रहो और हिंदुओ को हिंदू धर्म का पालन करने दो।
मिया अरशद मदनी आप बताएं कि पहलगाम में हिंदुओं के नाम पूछ कर हत्या करना कौन सा “भाईचारा” था, आपने उसकी निंदा नहीं की क्योंकि आपका असली “भाईचारा” तो पाकिस्तान से है। बांग्लादेश में हिंदुओं पर बर्बरता कौन से “भाईचारे” में की गई जिसकी आपने निंदा नहीं की।
आप यह बताएं कि छांगुर बाबा किस “भाईचारे” के लिए हिंदू लड़कियों के धर्मान्तरण की रेट लिस्ट बना कर धंधा कर रहा था। हाकिम सलाउदीन उर्फ़ “लाला” किस “भाईचारे” के लिए हथियारों की फैक्ट्री खोल कर बैठा था जिसके ठिकाने से 300 Firearms और 5000 Cartridges बरामद हुए।
इसलिए “उदयपुर फाइल्स” जैसी फिल्मों पर ताव खाने की जरूरत नहीं है।
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