केरल ; काउंसलिंग के दौरान जज ने महिला पर कीं अश्लील टिप्पणियाँ, यौन दुर्व्यवहार का भी लगा आरोप: तूल पकड़ने के बाद हाईकोर्ट ने किया ट्रांसफर, जाँच का आदेश जारी


जब कभी कोर्ट में महिला उत्पीड़न का कोई 
भी केस होता है तो महिला से दूसरे पक्ष का वकील ऐसे-ऐसे सवाल करता है कि महिला के परिवारजन प्रश्न सुनते ही शर्म से सिर झुका उस पीड़िता पर ही शंका करते देखे गए हैं। कोई विवाद नहीं होता लेकिन केरल हाई कोर्ट जज द्वारा कुछ पूछे जाने पर विवाद शायद पहली बार सुनने को मिल रहा है। 

जिस न्यायालय को लोकतंत्र में न्याय की आखिरी उम्मीद माना जाता है, वहीं अगर जजों पर अश्लीलता के आरोप लगने लगें तो जनता का विश्वास हिलना स्वाभाविक है। केरल से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न्यायपालिका की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

केरल हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के जज उदयकुमार वी. का तबादला कर दिया है। उदयकुमार वी. पर महिलाओं के साथ काउंसलिंग के दौरान यौन दुर्व्यवहार और अश्लील टिप्पणियाँ करने का आरोप है।

क्या है पूरा मामला?

‘बार ऐंड बेंच’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक महिला ने कोल्लम के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को पत्र लिखकर जज उदयकुमार वी. के खिलाफ शिकायत दी थी। महिला ने अपने पत्र में दावा किया कि उदयकुमार ने काउंसलिंग के दौरान यौन दुर्व्यवहार किया और उनको लेकर अश्लील टिप्पणियाँ कीं।

यह मामला सामने आने के बाद न्यायपालिका में हड़कंप मच गया। इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने चवरा फैमिली कोर्ट के जज उदयकुमार वी को कोल्लम मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल में ट्रांसफर कर दिया गया। इसके अलावा हाईकोर्ट ने कोल्लम में मोटर ऐक्सिडेंट क्लेम्स ट्राइब्यूनल के जज प्रसन्ना गोपालन का ट्रांसफर फैमिली कोर्ट में कर दिया है। जिला न्यायालय के रजिस्ट्रार ने दोनों जजों के म्यूचुअल ट्रांसफर का आदेश जारी कर दिया है।

जज उदयकुमार के खिलाफ जाँच का आदेश जारी

इस मामले की गंभीरता को देखता हुए हाईकोर्ट ने जज के खिलाफ उदयकुमार वी. के खिलाफ जाँच के आदेश जारी किए हैं। केरल हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति ने रजिस्ट्रार (जिला न्यायपालिका) को मामले की जाँच का आदेश दिया है। रजिस्ट्रार द्वारा की गई इस जाँच की रिपोर्ट समिति को सौंपी जाएगी और समिति आने वाले सप्ताह में इस रिपोर्ट पर विचार करेगी।

फैमिली कोर्ट्स में परिवारिक समस्याओं को निपटारा किया जाता है। न्यायालयों पर बोझ और सुनवाई में देरी को देखते हुए ये कोर्ट बनाए गए थे लेकिन परिवार से जुड़े कोर्ट में ही महिलाओं के साथ इस तरह दुर्व्यवहार किया जाए तो इससे न्यायापालिका की साख पर बट्टा लगता है।

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