प्रधानमंत्री मोदी और सड़कों पर आवारा कुत्तों को लेकर विरोध करते लोग (फोटो साभार : Aajtak)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल में एक वीडियो वायरल हुई जिसमें वे पशु प्रेम के नाम पर पाखंड करने वाले लोगों पर तंज कसते दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो में वे कहते हैं कि कुछ दिन पहले उनकी मुलाकात एनिमल लवर्स से हुई थी, उन एनिमल लवर्स की विशेषता यह थी कि वह गाय को एनिमल ही नहीं मानते…।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह बयान 12 सितंबर 2025 को विज्ञान भवन में दिया था। अब ये वीडियो जगह-जगह चर्चा में है। लोग एक बार फिर ‘एनिमल लवर्स’ पर सवाल उठा रहे हैं, जिन्हें आवारा कुत्तों की चिंता सताती है, लेकिन गाय को वो ‘माता’ तो दूर की बात है, उन्हें पशु भी नहीं मानते।
VIDEO | Delhi: Prime Minister Narendra Modi (@narendramodi) addressed the International Conference on Gyan Bharatam. He said, “Recently, I met some animal lovers… Our country has many animal lovers, and most of them do not consider the cow as an animal.”
— Press Trust of India (@PTI_News) September 12, 2025
(Full video available… pic.twitter.com/Qyy9xgDhFT
बीफ में फ्लेवर- कुत्तें के लवर
इस बात को आसान भाषा में समझने के लिए तथाकथित कॉमेडियन वीर दास के 2 ट्वीट देखिए। एक ट्वीट उस समय का है जब कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स को लेकर फैसला दिया था और दूसरा आज से 10 साल पहले का है। पुराने ट्वीट में वो मैगी को बीफ फ्लेवर लॉन्च करने की सलाह दे रहे हैं।
दुखद बात ये है कि वीर दास अकेला ऐसा नाम नहीं है। पिछले दिनों ऐसे कई दोगले एनिमल लवर आपको स्ट्रे डॉग्स के लिए चिंता जताते हुए दिखे होंगे। जो आम दिनों में गाय खाने को अपना अधिकार मानते हैं, उसके लिए बहस करते हैं। उन्हें चिंता इस बात की होती है कि लोग क्यों रेबीज जैसे मुद्दे को उजागर कर रहे हैं, दूसरी तरफ ये खुशी होती है कि डिनर में वह मटन-चिकन खाएँगे।
Dogs are sacred but cows are not. All animal love melts away with the smell and sight of beef. Hypocrite https://t.co/0TpjJwZXoK pic.twitter.com/Fxc74kBIM2
— Monica Verma (@TrulyMonica) August 13, 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ये मुद्दा इसीलिए उठाया गया ताकि समाज का एक वर्ग ये समझ सके कि ‘एनिमल लवर’ कहलाना तब उपलब्धि है जब हर पशु के प्रति एक प्रकार का स्नेह हो। न कि खुद को पशु प्रेमी बताकर पशुओं के प्रति ही भेदभाव करना।
गाय माता से पीएम मोदी का रिश्ता
प्रधानमंत्री मोदी अक्सर गायों के साथ देखे जाते हैं, उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होती रही हैं, जहाँ वे गायों को खाना खिलाते और दुलारते दिखते हैं। हिंदू धर्म में गाय को पवित्र माना जाता है और ‘गौ माता‘ के रूप में पूजा जाता है।
मोदी सरकार ने 2014 से गायों की सुरक्षा के लिए कई योजनाएँ भी शुरू की हैं। 2019 में ‘राष्ट्रीय कामधेनु आयोग’ (RKA) की स्थापना की गई थी। यह आयोग मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के तहत काम करता है। इसका मुख्य उद्देश्य गायों और उनकी नस्लों का संरक्षण, सुरक्षा और विकास करना है।
प्रधानमंत्री का यह बयान दिखाता है कि वे पशु प्रेम को लेकर कुछ लोगों के दोहरे रवैये पर कटाक्ष कर रहे थे। एक तरफ लोग कुत्तों के लिए आवाज उठाते हैं, लेकिन दूसरी तरफ वे अन्य जानवरों को उतनी अहमियत नहीं देते।
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश और विवाद
इस आदेश का पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और कई मशहूर हस्तियों ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने इस आदेश को ‘अवैज्ञानिक’ बताया और कहा कि यह पशु जन्म नियंत्रण नियमों के खिलाफ है। इस विरोध को देखते हुए, चीफ जस्टिस ने मामले को तीन-न्यायाधीशों की पीठ के पास भेज दिया।
नई पीठ ने पुराने आदेश में बदलाव किया और निर्देश दिया कि कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी जगह वापस छोड़ा जाए, जहाँ से उन्हें पकड़ा गया था। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि इसके लिए नगर निगमों को विशेष ‘फीडिंग ज़ोन’ बनाने होंगे।
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