दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद Gen-Z ने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में लहराया भगवा; राहुल परेशान; पटना और पंजाब में भी GenZ दे रहा राहुल गाँधी को जवाब


भारत में राहुल गाँधी समेत पूरे विपक्ष को Gen-Z ने जवाब दे दिया है। पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी में भगवा लहराया। अब हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एबीवीपी ने सभी 7 सीटों पर जीत हासिल कर Gen-Z पीएम मोदी के साथ है, ये साबित कर दिया है।

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एबीवीपी की जीत

हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में बीजेपी के छात्र विंग यानी एबीवीपी (ABVP) ने शानदार प्रदर्शन किया है। संगठन ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, संयुक्त सचिव, महासचिव, कल्चरल सचिव और खेल सचिव समेत सभी 7 अहम पदों पर कब्जा कर लिया है। छात्र नेताओं ने इस जीत को राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता और मेहनत को दिया है। संगठन लगातार राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों पर काम कर रही है। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ- साथ नैतिकता की बात भी की जा रही है। यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं को एबीवीपी की प्रतिबद्धता पसंद आ रही है। एबीवीपी को ये मार्गदर्शन पीएम मोदी की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार से मिल रही है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी का प्रदर्शन

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव 2025 में एबीवीपी ने केंद्रीय पैनल की 4 में से 3 सीटों पर कब्जा कर लिया, जबकि एनएसयूआई को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा है। एबीवीपी के आर्यन मान अध्यक्ष बने। दीपिका झा संयुक्त सचिव बनीं और कुणाल चौधरी को सचिव पद मिला। इस चुनाव में एनएसयूआई को एकमात्र उपाध्यक्ष पद मिला। सबसे गौर करने वाली बात ये हैं कि इस चुनाव में अध्यक्ष आर्यन मान ने एनएसयूआई के उम्मीदवार को 16000 से अधिक वोटों से हराया। इससे साबित होता है कि देश की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में एक दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों के दिलों में पीएम मोदी बसते हैं।

जेएनयू में शानदार प्रदर्शन

वामपंथियों का गढ़ कहलाने वाले जेएनयू में भी अप्रैल 2025 में हुए छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी ने शानदार उपलब्धि हासिल की। एबीवीपी ने संयुक्त सचिव का पद जीतने के साथ- साथ काउंसिल की 42 में से 23 सीटों पर विजय हासिल की। ये कैंपस में आ रहे बदलाव को दर्शाता है। यहाँ तक कि स्कूल ऑफ सोशल साइंस जिसमें पहले एबीवीपी का कोई अस्तिव नहीं था, वहाँ भी 2 सीटें हासिल की। इसे खास तौर पर जेएनयू का वामपंथी सेंटर माना जाता है।

पंजाब यूनिवर्सिटी में झंड़ा बुलंद किया

पंजाब विश्वविद्यालय परिसर छात्र परिषद (PUCSC) चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने पाँच दशकों में पहली बार अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर इतिहास रच दिया। 1977 में प्रत्यक्ष मतदान व्यवस्था लागू होने के बाद पहली बार ABVP का अध्यक्ष बना है। साल 2024 में ABVP के उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे थे, जबकि 2023 में जसविंदर राणा ने संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की थी।

पटना यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन

पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी की मैथिली मृणालिनी ने अध्यक्ष पद जीता। यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार एक छात्रा अध्यक्ष बनीं। मार्च 2025 में हुए चुनाव में यहाँ भी एबीवीपी का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। काउंसिल सदस्यों में सबसे ज्यादा सीट एबीवीपी के पास है।

गुवाहाटी यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन

पूर्वोत्तर का सबसे पहला और बड़े यूनिवर्सिटी गुवाहाटी विश्वविद्यालय में भी पहली बार अध्यक्ष पद पर एबीवीपी ने जीत दर्ज की। सितंबर 2024 में हुए गुवाहाटी विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में एबीवीपी ने दबदबा बनाते हुए अध्यक्ष समेत 3 महत्वपूर्ण पदों पर जीत दर्ज की। ये पूर्वोत्तर में मोदी सरकार के कामकाज पर जेन जी के समर्थन का प्रमाण है।

उत्तराखंड के कई विश्वविद्यालयों में जीत

उत्तराखंड के कई विश्वविद्यालयों में एबीवीपी का प्रदर्शन शानदार रहा। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में एबीवीपी ने अध्यक्ष समेत सभी 6 अहम पद जीत लिए हैं। वहीं एचएनबी गढ़वाल केन्द्रीय विश्विविद्यालय में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए।

राहुल गाँधी को Gen Z का जवाब

कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने हाल ही में जेन-जी से संविधान बचाने और कथित ‘वोट चोरी’ रोकने की अपील की थी। ऐसे में देश के अलग अलग राज्यों में एबीवीपी की शानदार जीत ने उन्हें करारा तमाचा मारा है। Gen-Z को देश के लोकतंत्र और संविधान पर पूरा भरोसा है। इन लोगों ने वोट देकर एबीवीपी को जिताया है और वोट चोरी के आरोपों की धज्जियाँ उड़ा दी है।

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एबीवीपी का जीतना कई मायनों में अहम है। मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में राहुल गाँधी चारो खाने चित्त नजर आ रहे हैं। ये वही तेलंगाना है, जहाँ कांग्रेस की सरकार है। 2024 के छात्रसंघ चुनाव में यूनिवर्सिटी में वामपंथी और कांग्रेस के छात्र संगठनों ने जबरदस्त जीत दर्ज की थी। एक साल बाद उनकी ये हालत राहुल गाँधी के ‘वोट चोरी’ की हवा निकाल दी है। साथ ही छात्रों के मन में मोदी सरकार के प्रति समर्थन और सम्मान को भी ये रिजल्ट दर्शाता है।

भारत में नेपाल और बांग्लादेश की तरह Gen-Z के तख्तापलट का मंसूबा पाले विपक्ष को गहरा धक्का लगा है। हैदराबाद यूनिवर्सिटी में 81 फीसदी वोटिंग हुई है। ये भी साबित करता है कि छात्र-छात्राओं ने बढ़चढ़ कर वोटिंग में हिस्सा लिया और पीएम मोदी के नेतृत्व को समर्थन दिया।

भारत का GenZ 2014 में ही राष्ट्रवादी राजनीति की नींव रख चुका है। GenZ ने अब राहुल गाँधी की अराजक टूलकिट को भी फेल साबित कर दिया है।

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