मना लो GST बचत उत्सव: रिकॉर्ड 1.14 लाख रूपए पर पहुँची 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत, 5 साल में आया 112% का उछाल; देश को मिला नवरात्रि का बड़ा तोहफा

बीजेपी से लेकर मीडिया GST कम होने पर कीमतें कम होने का ढोल पीट रहे हैं, लेकिन स्थिति एकदम विपरीत है। आज(24 सितम्बर) भी अमूल और DMS दूध की 500 ग्राम की थैली 29 रूपए में ही बिक रही है। अमूल एक प्राइवेट कंपनी का दूध है लेकिन DMS तो सरकारी है। सरकार और मीडिया को मालूम होना चाहिए कि कीमत बढ़ाई गयी होती वह तुरंत लागू हो जाती है लेकिन कीमतें कभी एकदम कम नहीं होती। दूध ही नहीं अनेक वस्तुएं पुरानी कीमत पर ही बिक रही है। कोई दुकानदार/व्यापारी किसी भी कीमत पर नुकसान नहीं उठाता।      

23 सितंबर 2025 को सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गईं है। 24 कैरेट सोने की कीमत 1,14,480 रूपए प्रति 10 ग्राम बिक रहा है जबकि 22 कैरेट सोने की कीमत 1,04,950 रूपए प्रति 10 ग्राम है। 18 कैरेट सोने की कीमत 85,900 रूपए प्रति 10 ग्राम हो गई है।

भारत में सोने की कीमतों में 2024 की शुरुआत से ही उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये विश्व में चल रहे तमाम युद्धों, आर्थिक अनिश्चितताओं, ट्रम्प के टैरिफ और अमेरिकी डॉलर के अवमूल्यन सहित कई वजहों से बढ़ी है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के बाद विश्वस्तर पर सोने की कीमतों में भारी उछाल देखा गया।

 5 साल पहले की तुलना करे, तो 2020 से सोने की कीमतों में 112% की वृद्धि दर्ज की गई। 19 सितंबर, 2020 में, मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) के मुताबिक सोने (24 कैरेट) की कीमत 51,619 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। यह कीमत अब 1,09,388 रूपए तक पहुँच गई है। एक साल पहले यानी 2024 में यह कीमत 72,874 रूपए थी। पिछले पाँच वर्षों में, COVID-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका के लगाए गए टैरिफ और दूसरी राजनीतिक-आर्थिक अनिश्चितताओं जैसे कारकों ने वैश्विक स्तर पर और भारत में सोने की कीमतों को प्रभावित किया है। बढ़ती कीमतों के बावजूद इसकी माँग में कोई कमी नहीं आई है।

पिछले 20 वर्षों की बात करें, तो सोने की कीमतें 1200% बढ़ी हैं। 2005 में 7,638 रूपए से बढ़कर 2025 (जून तक) में 1,00,000 रूपए से अधिक हो गई हैं, जिससे यह पीली धातु 2025 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली संपत्ति और एक विश्वसनीय धरोहर बन गई है।

निवेशकों को फायदा, खुदरा विक्रेताओं को नुकसान

सोने की कीमत में 2020 से विश्वस्तर पर 17% और भारत में 20% की वृद्धि दर्ज की गई है। इन 5 सालों में निवेशकों को सोने की बढ़ती कीमतों से लाभ हुआ है। लेकिन खुदरा विक्रेताओं का कारोबार धीमा चल रहा है, क्योंकि गैर-जरूरी खरीदारी और आभूषणों की बिक्री में गिरावट आई है। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव खुदरा विक्रेताओं के लिए इन्वेंट्री प्लानिंग को मुश्किल बना देता है। कई निवेशक यह सोच रहे हैं कि उन्हें अपना सोना रखना चाहिए या बेच देना चाहिए।

भारत में सोने से भावनात्मक रिश्ता

हमारे देश में सोने को एक निवेश की तरह नहीं लिया जाता, बल्कि इसका गहरा सांस्कृतिक और भावनात्मक महत्व भी है। यह कीमती धातु प्राचीन काल से ही महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा का स्रोत रही है। यह शादियों और दूसरे शुभअवसर का एक अनिवार्य हिस्सा है। विश्व स्वर्ण परिषद की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल सोने की माँग में भारतीय परिवारों की हिस्सेदारी एक-चौथाई है।

भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है। हालाँकि, पिछले साल भारत में सोने की खपत 802.8 टन तक पहुँच गई, जो चीन के 511.4 टन की खपत से अधिक थी। दोनों देशों में आभूषण के रूप में सोने की सबसे अधिक खपत होती है। भारतीय परिवारों के पास लगभग 24,000 टन सोना होने का अनुमान है, जो वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कुल सोने के भंडार से भी अधिक बताया जाता है। भारत में सोने की लगभग एक-तिहाई बिक्री शादियों और दशहरा व दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान होती है।

हालाँकि, सोने की बढ़ती कीमतों ने घरेलू स्तर पर इसकी माँग को प्रभावित किया है। 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की माँग 395 टन दर्ज की गई, और 2025 की दूसरी तिमाही में यह घटकर 341 टन रह गई। हालाँकि, आगामी त्योहारों और शादियों के मौसम के साथ, सोने की माँग बढ़ने की संभावना है। सोने की बढ़ी हुई कीमतों को ध्यान में रखते हुए ग्राहक बहुमूल्य और अर्ध-कीमती पत्थरों से जड़े 18 कैरेट और 14 कैरेट के सोने के आभूषण खरीदने पर विचार कर रहे हैं।

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