अब तक मुसलमानों को हिंदुओं की शोभा यात्राओं में बजने वाले संगीत और घंटियों की आवाज़ से समस्या होती थी लेकिन अब मंदिर में दीपक जलाने से भी आपत्ति होने लगी और उन्हें खुश करने के लिए कानून को ताक पर रख कर, न्यायालय के आदेशों को ना मानकर हिंदुओं का दमन कर रहे हैं सेकुलर दल।
मुरुगन मंदिर में दीपक जलाने पर रोक लगाने वालो, एक बात याद रखना कि भगवान कार्तिकेय देवताओं के सेनापति है जिनके हाथों तुम लोगों का विनाश निश्चित है और एक दिन तुम्हारे घरों के दीपक बुझ जाएंगे। इस चेतावनी को हलके में मत लेना।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
जयललिता ने तो भगवान के भक्त को पीड़ा दी थी लेकिन स्टालिन और विपक्ष तो सीधा भगवान कार्तिकेय से टकरा रहे हैं, तो समझ लें इनका क्या हाल होगा।
एक दिसंबर को हाई कोर्ट के जस्टिस स्वामीनाथन मंदिर में दीपक जलाने का आदेश देते है लेकिन स्टालिन सरकार उस आदेश को नहीं मानती और खंडपीठ के सामने अपील करती है जो 4 -5 दिसंबर को खारिज कर देती है और 5 दिसंबर को स्टालिन सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करती है और उसके बाद इंडी ठगबंधन लोकसभा में 9 दिसंबर को जस्टिस स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाता है क्योंकि मुसलमानों को खुश करना है जो दीपक जलाने पर आपत्ति कर रहे हैं।
यह सब कुछ अब चीफ जस्टिस और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जजों को धमकी देने और उन्हें डराने के लिए किया जा रहा है कि अगर मुसलमानों के खिलाफ और हिंदुओं के पक्ष में निर्णय किए तो आप लोगों पर भी महाभियोग चलाया जा सकता है।
कोर्ट अपना निष्कर्ष अपनी समझ से संविधान के अनुसार करता है। और जब तक वह निर्णय ऊपरी अदालत से रोक नहीं दिया जाता या ख़ारिज नहीं कर दिया जाता, वह सभी पक्षों पर बाध्य होता है। उस आदेश को न मानना ही संविधान को ठोकर मारना है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पिछले दिनों कहा था कि मंदिर का धन मंदिर के देवता का है और इसे ध्यान में रख कर विपक्ष उन्हें महाभियोग से डराने की कोशिश कर रहा है जैसे कह रहा है कि स्वामीनाथन के निर्णय को खारिज कर दो। विपक्ष को सूर्यकांत के रोहिंग्याओं पर दिए गए बयान से भी आपत्ति है जो अर्बन नक्सल गिरोह के वकीलों और पूर्व जजों को उनके पीछे लगा दिया।
जस्टिस स्वामीनाथन के समर्थन में 56 पूर्व जज खड़े हो गए हैं और उन्होंने विपक्ष के महाभियोग की निंदा की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को सोचना चाहिए कि विपक्ष न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सीधी चुनौती दे रहा है और कांग्रेस को अभी भी अपने प्रति Committed Judiciary चाहती है जो उसकी मर्जी के अनुसार ही निर्णय करे। मोदी अगर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार के विरुद्ध दिए गए निर्णयों पर जजों के खिलाफ महाभियोग शुरू कर दे तो क्या होगा?
सभी संवैधानिक संस्थाएं विपक्ष के अनुसार काम करें तो ही ठीक है क्योंकि तब ही वो “सेकुलर” होंगी।
भारत में सेकुलरिज्म अपने आप में एक खतरनाक धर्म बन चुका है जो वास्तव में चरम पर पंहुचा हुआ कोढ़ का रोग है जो केवल हिंदुओं का दमन करता है। इस अति का अंत भी होगा।

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